#गोरखमुंडी एक बहुत शखित, संगन्धित वार्षिक जड़ी बूटी वाला पौधा हैं, जिनके तनो मे पंखो जैसे संरचनाये होती हैं, यह अक्सर धान वाले खेतो मे धान कटने के बाद उगते हैं, इनके बैगानी रंग के फूल एक दम गोल मुंडी के सामान दिखयी देते हैं, लोग इनके बारे मे नहीं जानते इन्हे बस खरपतवार घास समझते हैं, पर यह तो बहुत सारे रोगों से हमें मुक्ति प्रदान करती हैं.
#उपलब्धता :-
यह पुरे भारत मे,बांग्लादेश, चीन ,म्यांमार, नेपाल, उत्तरी क्षेत्र, दक्षिण ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका, थाईलैंड, वियतनाम, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया आदि!
#वास :-
यह नम घास के मैदान, धान के खेत मे पाया जाता हैं!
#स्वभाव :-
यह वार्षिक जड़ी बूटी वाला पौधा हैं, यह थोड़ा सुगन्धित होता हैं!
#जड़ :-
इनके जड़ भूरे रंग की होती हैं!
#तने :-
तना सीधा होता हैं, तने मे पँख जैसी संरचना होती हैं यह पँख दाँतेदार होती हैं , तने बहुत शखित होती हैं!
#पत्तियाँ :-
इनकी पत्तियाँ लगभग 1-3 सेंटीमीटर लम्बे होते हैं यह हरे रंग की होती हैं!
#फूल :-
इनमे बैगनी रंग के फूल लगते हैं, यह गोल संरचना वाली होती हैं, यह 8-15 मिमी. जिसमे कई छोटे फूल लगे होते हैं,इसमें फूल बैगनी और पूंकेसर पीले बैगनी होते हैं!
#गोरखमुंडी_की_दवा:-
मधुमेह, गंठिया, बवासीर, गर्भधारण, योनि की खुजली, नपुंसकता, यौन शक्ति, चर्मरोग, प्रमेह, जलोदर, भगंदर, पेट के कीड़े, हृदय की कमजोरी, रक्तपित्त, मुंह की दुर्गंध, नेत्ररोग, सिरदर्द, सफ़ेद बाल, दीर्घायु, सूखी खुजली, उपदंश, घाव, ज्वरदाह, वातरक्त, पेट की वायु, खुनी दस्त, स्वरमाधुर्य, शरीर में कंपकपी आदि बिमारियों के इलाज में गोरखमुंडी उपयोगी हैं।
#औषधीय_उपयोग :-
🌿#दृष्टिवर्धक_शर्बत -
यह शर्बत नेत्र रोगों के लिए नितान्त लाभकारी है। गोरखमुण्डी बूटी के पाव भर फूल लेकर रात को दो सेर पानी में भिगो दें और प्रात आग पर पकावें । ३ पाव पानी रह जाने पर छान कर ३ पाव मिश्री मिलाकर शर्बत बनालें और नित्य प्रातः 10ml सेवन किया करें।
🌿आमवात (गंठिया) में गोरख मुंडी फल के साथ समभाग सोंठ चूर्णम उष्णोदक से दोनों समय 3 ग्राम सेवन करें तथा फलों को महीन पीसकर पीड़ा स्थान पर लेप करने से गंठिया की पीड़ा शांत होती है।
🌿अर्श (बवासीर) में गोरखमुंडी के पत्र का स्वरस और अरंड पत्र का स्वरस 25 ग्राम मिलाकर पिलाने से तथा गोरखमुंडी के पत्तों की लुग्दी मस्सों पर बाँधने से तथा पंचांग की धूनी मस्सों पर लेने से बवासीर में लाभ होता है।
🌿गर्भधारणार में जायफल के 1 ग्राम चूर्ण के साथ गोरखमुंडी का 2 ग्राम चूर्ण मिलाकर 3 ग्राम लगभग चूर्ण बकरी के दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करने से स्त्री गर्भधारण करती है।
🌿योनिशूल (योनि की खुजली) में गोरखमुंडी 10 ग्राम ताजे पंचांग न मिलने पर छाया शुष्क पंचांग को जल से पीसकर पिलाने से योनि की भंयकर खुजली नष्ट हो जाती है। प्रदर में कुछ दिन सेवन करने से लाभ होता है।
🌿नपुंसकता में गोरख मुंडी की ताज़ी जड़ों के पीसे हुए कल्क, कलई दार पीतल की कढ़ाई में रखकर चौगुना काले तिल का तेल और सोलह गुना पानी डालकर पकायें। तेल केवल शेष रहने पर छान लें। इस तेल की लिंग पर मालिश करने से तथा 10-20 बून्द तक पान में लगाकर दिन में 2-3 बार चाबने से नपुंसकता दूर होती है।
🌿यौवन में गोरखमुंडी के पौधे को छाया में सुखाकर, पीसकर बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर एक चम्मच सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करने से मनुष्य का यौवन स्थिर रहता है। तथा उसके बाल सफेद नहीं होते हैं। गोरखमुंडी के चूर्ण को घी के साथ चाटने से बल बढ़ता है। गोरखमुंडी के पौधे की छाया शुष्क चूर्ण में दोगुना मधु मिलाकर 40 दिन तक गर्म दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करने से शरीरिक शक्ति में वृद्धि होती है।
🌿चर्म रोग में पत्तों को जल में पीसकर लेप करने अथवा पत्र स्वरस लगाने से अनेक चर्मरोग, उपदंश के व्रण एवं पुराने घाव व पारदजन्य विकारों की शांति होती है।
🌿प्रमेह में गौदुग्ध के साथ गोरखमुंडी का चूर्ण सेवन करने से प्रमेह नष्ट हो जाता है।
🌿जलोदर में अरंड तेल 10 ग्राम के साथ गोरख मुंडी चूर्ण 3 ग्राम सुबह-शाम सेवन करने से जलोदर में लाभ होता है।
🌿भगंदर में गोरखमुंडी चूर्ण को बासी पानी के साथ सेवन करने से भंगदर नष्ट हो जाता है।
🌿कृमि (पेट के कीड़े) में गोरखमुंडी का चूर्ण 1 ग्राम जल के साथ सुबह-शाम सेवन करने से पेट के सभी प्रकार के कीड़े मर जाते हैं।
🌿हृदय की कमजोरी में गोरखमुंडी के फलों का अर्क, नेत्ररोग, दिल की धड़कन और हृदय की कमजोरी दूर करता है। गोरखमुंडी के लगातार सेवन से गीली और सुखी खुजली नष्ट हो जाती है। शुरू में गोरखमुंडी को 15 ग्राम की मात्रा में लेना चाहिए। पथ्य-खट्टी और गर्म चीजें, अधिक परिश्रम व मैथुन से बचना चाहिए।
🌿रक्त पित्त में गोरखमुंडी के पत्र रस के साथ अडूसा पत्र रस मिलाकर 1 चम्मच दिन में दो तीन बार सेवन करने से लाभ होता है।
🌿मुख दुर्गंध में गोरखमुंडी चूर्ण को कांजी में मिला थोड़ा-थोड़ा पिलायें या किसी दन्त मंजन में गोरखमुंडी के पुष्प चूर्ण को मिलाकर मंजन करने से मुख की दर्गन्ध नष्ट हो जाती है तथा दांत सफ़ेद हो जाते है।
🌿नेत्र रोग में गोरखमुंडी की 1 मुंडी प्रातः खाली पेट 1 सप्ताह तक साबुत निगल जाने से 1 वर्ष तक आँख में किसी भी प्रकार का रोग नहीं होता प्रतिवर्ष चैत्र मास में 4-5 मुंडी के ताजे फल थोड़े दांत से चबाकर पानी के घूंट के साथ हलक में उतार लें तो मनुष्य की आँख की तदुरुस्ती और रौशनी हमेशा कायम रहती है। मुंडी पंचाग के छाया शुष्क चूर्ण में समभाग मिलाकर गाय के दूध के साथ सुबह-शाम खाने से नेत्रों के बहुत से रोग मिटते हैं। तथा नेत्र ज्योति बनाये रखने के लिए अत्यंत लाभप्रद है। नेत्र ज्योति कम हो जाने पर, गोरखमुंडी के पुष्पों या पत्तियों का स्वरस नेत्रों में दिन में दो बार लगाते रहने से नेत्र में लाभ होता है।
🌿सिरदर्द या सूर्यावर्त, आधाशीशी आदि में गोरखमुंडी के 3 से 5 ग्राम स्वरस में मरिच चूर्ण 1/4 ग्राम मिलाकर सुबह-शाम पिलाने से सिरदर्द शीघ्र शांत हो जाता है।
🌿सफेद बाल में गोरखमुंडी की जड़ या पंचाग को पुष्पागमन से पूर्व काले भांगरे जो अब प्रायः अनुपलब्ध है, अथवा सामान्य भृंगराज को भी छाया शुष्क करके दोनों के समभाग चूर्ण को 2-8 ग्राम तक शहद व घी से 40-80 दिन तक सेवन करने से बालों के सभी प्रकार के रोग दूर होते हैं तथा सफेद बाल काले होने लगते है।
🌿दीर्घायु में गोरखमुंडी के बीजों को पीसकर उनमें समभाग चीनी मिलाकर एक हथेली भर प्रतिदिन लगातार सेवन करने से ताकत पैदा होती है और मनुष्य दीर्घायु हो जाता है।
🌿सूखी खुजली में गोरखमुंडी का लगातार सेवन से गीली और सुखी खुजली मिट जाती है। शुरू में गोरखमुंडी को 15 ग्राम की मात्रा में सेवन करना चाहिए। इसके बाद में प्रयोग बढ़ाते रहना चाहिए। परहेज-खट्टी और गर्म चीजें, अधिक परिश्रम व मैथुन से बचना चाहिए।
🌿उपदंश में गोरखमुंडी के पत्तों को जल में पीसकर लेप करने अथवा पत्र स्वरस लगाने से अनेक चर्मरोग, उपदंश के घाव आदि रोग नष्ट हो जाते है।
🌿घाव में गोरखमुंडी के पत्तों को जल में पीसकर लेप करने अथवा पत्र स्वरस का मालिश करने से सभी प्रकार के घाव, उपदंश, पुराने घाव शीघ्र भर जाते है।
🌿ज्वरदाह में गोरख मुंडी चूर्ण 2 ग्राम को काली मिर्च 1/4 ग्राम चूर्ण मधु या दूध के साथ सेवन करने से ज्वर और दाह मिटता है।
🌿वातरक्त में गोरखमुंडी 3 ग्राम और कुटकी 1 भाग चूर्ण को शहद के साथ नियमित प्रतिदिन 2-3 ग्राम मात्रा में सुबह-शाम तथा दोपहर चटाने से वातरक्त नष्ट होता है।
🌿पेट की वायु में बकरी या गाय के दूध के साथ गोरखमुंडी के 3 ग्राम चूर्ण की फंकी लेने से पेट की वायु नष्ट होती है और पेट को आराम मिलता है। इसके अलावा पेट के सभी प्रकार के रोग दूर हो जाते हैं।
🌿आम अतिसार (खुनी दस्त) में गोरखमुंडी की जड़ और सौंफ दोनों समभाग 10 ग्राम लगभग पीसकर, मिश्री-युक्त जल के साथ सुबह-शाम सेवन करने से खुनी दस्त में लाभ होता है!
🌿मधुर आवाज के लिए गोरखमुंडी फलों के 50 ग्राम चूर्ण में 10 ग्राम शुंठी मिलाकर मधु के साथ डेढ़ ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम तथा दोपहर चटाने से आवाज मधुर और मीठी हो जाती है।
🌿कम्पवात (शरीर की कंपकपी) में गोरखमुंडी के 50 ग्राम चूर्ण में 100 ग्राम लौंग मिलाकर 3 से 5 ग्राम की मात्र मे शहदमिलाकर सुबह शाम चाटने से शरीर की कनपकपी शांत हो जाती हैं!
🌿गोरखमुंडी की जड़ या पंचांग को फूल लगने से पहले थोडा सुखा लें। इतनी ही मात्रा में भृंगराज का चूर्ण मिला लें। इसे 2-3 ग्राम तक मधु व घी से 40-80 दिन तक सेवन करें। इससे बालों के सब रोग दूर होते हैं। इसस बाल काले होने लगते हैं।
🌿आँखों के रोग में:-हर साल चैत्र मास में 4-5 मुंडी के ताजे फल को दांत से चबाकर पानी के साथ खाने से आँख के रोगों में लाभ होता है।
🌿1-2 ग्राम गोरखमुुण्डी पंचांग के सूखे चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिला लें। इसे 200 मि.ली. गाय के दूध के साथ सुबह-शाम खाने से आँखों के बहुत से रोग ठीक होते हैं।
🌿आँखों की रोशनी कम हो जाने पर गोरखमुुण्डी के फूल या पत्तों के रस को दिन में दो बार आँखों में लगाते रहने से लाभ होता है।
🌿गोरखमुण्डी चूर्ण को कांजी में मिलाकर थोड़ा-थोड़ा पिलाएं। इसके अलावा आप किसी दन्तमंजन में इसके फूल का चूर्ण मिलाकर मंजन करें। इससे मुंह से दुर्गन्ध आना बंद होता हैं!
🌿गोरखमुंडी के पौधों को छाया में सुखा-पीस लें। बराबर मात्रा में मिश्री मिला लें। इसका 1 चम्मच सुबह और शाम दूध के साथ सेवन करने से शारीरिक कमजोरी दूर होती है
🌿1-2 ग्राम मुण्डी चूर्ण का सेवन करने से शरीर की दुर्गन्ध खत्म होती है।
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