नाम शहर स्थान को बिल्कुल मत पूछिए लेकिन जिस परिवार ने यह भयंकर गलती की है ऐसी ही भयंकर गलती और परिवार वाले भी पूरे भारत भर में कहीं न कहीं कर रहे होंगे जोकि ऑलरेडी सनातनी है !!उन्हीं के विचारार्थ ये सच्चा किस्सा बयान कर रहा हूं!!
मेरा यह पोस्ट शायद उस परिवार वालों के भी पढ़ने में आ सकता है जिनको अपनी प्रत्यक्ष आंखों से मैंने यह खतरनाक उपक्रम करते हुए देखा है!!लेकिन ये सब कुछ उसी परिवार के जिम्मेदार बेटे की सहमति से लिखा जा रहा है!!
हुआ यूं की करीब 20 वर्ष पहले एक सनातनी परिवार की सुंदर और गृह कार्यों में कुशल गृहणी का 35 वर्ष की आयु में देहांत हो गया!! वह लोग इस घटना को 2005 मैं घटित हुआ बताते हैं!! उनकी पर्सनल पहचान ना बताने की शर्त पर उनसे यह तय हुआ कि मैं उनके इस खतरनाक अनुभव को फेसबुक पर दूसरे लोगों को सबक देने के लिए जरूर शेयर करूंगा!!
तो मित्रों उनकी मृत्यु के पश्चात उनके 13वीं संपन्न हुई क्योंकि उनके छोटे-छोटे तीन बच्चे थे जो आज काफी वयस्क हो चले हैं और इतने समझदार हैं कि अपने पिता की गलती को बड़े होकर उन्होंने सुधारने के क्रम के फल स्वरुप मुझे अपने घर पर आमंत्रित किया!!
होता यह था कि घर के गृह स्वामी अपनी पत्नी के वियोग में उनकी मृत्यु के पश्चात इतने पागल हो गए कि उन्होंने अपनी पत्नी के इसी दुनिया में रहने का एहसास कर लिया और यह मान लिया कि वह अभी भी उनके आसपास हैं!! रोज रात को वह उनके नाम से बिस्तर लगाते और उस बिस्तर पर उनकी मनपसंद भोजन सामग्री के रूप में लिट्टी चोखा रखने लगे!! सुबह उठते ही उनके बिस्तर बड़े करीने से समेट दिया जाता और रखे हुए लिट्टी चोखे को पशु पक्षियों में तकसीम कर दिया जाता था!!
तो मित्रों कुछ दिन तो सब कुछ ठीक चला लेकिन ठीक 15 महीने के बाद उनके घर में वह मर चुकी गृह लक्ष्मी अपनी खून जमा देने वाली उपस्थिति दर्ज कराने लगी!! पतिदेव का तो कुछ नहीं हुआ क्योंकि वह एक खतरनाक मानसिकता में जी रहे थे लेकिन घर का बड़ा बेटा जो उस वक्त लगभग 14 वर्ष का था उसका मानसिक संतुलन बिगड़ने लगा और वह गुमसुम रहने लगा दो-तीन साल बाद बीच वाला बेटा और सबसे छोटी बेटी भी अपने आप में सिमटी हुई रहने लगी!! गृह स्वामी पर उसका कोई असर नहीं था हालांकि उन्होंने दूसरी शादी नहीं की लेकिन वह यह मानने वाले उस घर में अकेले इंसान थे कि उनकी पत्नी अभी भी स्थूल शरीर में उनके साथ है!! कुछ अतरंग बातें मैं इस पोस्ट में जानबूझकर स्किप कर रहा हूं क्योंकि मेरी एक सभ्य ऑडियंस है लेकिन वास्तव में होता क्या रहा था वह आप खूब समझ रहे होंगे!!
एक वर्ष पहले मेरे पास फोन आया तो मैंने रिसीव किया!! उधर से एक युवक की आवाज आ रही थी जिसने पूछा,"क्या आप बाल्मीकि अंकल हैं?".... मेरे हां करने पर वह लगभग सुबकने की हालत में आ गया और रोते रोते अपने घर का डरावना हाल मुझे बताया!! सुनकर मैं भी सिहर गया और मैने उस घर जाकर बच्चों की मदद का निश्चय कर डाला!!
मित्रों करीब 13 घंटे की यात्रा के पश्चात में उस शहर में पहुंचा और स्टेशन पर थोड़ा फ्रेश होकर उस परिवार में एंट्री किया तो बड़ा बेटा जो लगभग 34-35 वर्ष का हो चला था उसने मेरा स्वागत किया उसके पीछे लगभग 27 वर्ष की युवती खड़ी थी और 30 वर्ष का उनका भाई अपने जॉब पर था जो 2 घंटे के भीतर मेरे आने की खबर सुनकर घर पर आ गया!!
उसके आने तक मैं उसे घर के हालात देख चुका था और बहुत सारी समस्याओं से परिचित हो चुका था!!
तो मित्रों अब तक वह ग्रहणी उस घर में एक जीवित आत्मा की भांति अपनी रहस्यमय उपस्थित स्वरूप ना केवल गृहस्वामी से वार्ता करती थीं बल्कि बच्चों को भी अपने दिशा निर्देश प्रदान करती रहती थीं!!घर में जो भी भोजन बनता था दोनों वक्त बाकायदा नियम स्वरूप उनको उसी बिस्तर पर अर्पित किया जाता था!!सच्ची कहानी है कोई उपन्यास नहीं सो ज्यादा लंबा ना खींचूंगा सो इतना समझ लीजिए उस घर में अगर भूल से भी लिट्टी चोखा घर तो छोड़िये बाहर भी जाकर खा लिया और गृह स्वामिनी को अर्पित ना किया तो फिर भयंकर तबियत खराब होना निश्चित समझिए संबंधित व्यक्ति की!!जब बड़े बेटे का विवाह हुआ तो मंढा उत्सव में खास व्यंजन लिट्टी चोखा बनवाया गया!!नाते रिश्तेदारों में जब ये खबर फैली तो उस घर से सबने किनारा करना शुरू कर दिया!!एक बार फिर कहता हूं कि अनेकों डराने वाले किस्से जानबूझकर स्किप कर रहा हूं कि मेरा इरादा डर के माहौल को फैलाना नहीं है बल्कि सबको एक शिक्षाप्रद तस्वीर दिखे वही बातें बता रहा हूं!!
अगर कोई मेहमान घर के कुछ नियमों की अवहेलना कर दे तो उसको ऐसी मार पड़ती कि पूछो मत भाई लोग!!
गृह स्वामी लगभग खुश थे अपनी स्थिति थे लेकिन अब तक बच्चों ने विद्रोह का मन बना लिया था हालांकि इसमें भी उन्होंने देर कर दी थी!!क्योंकि रिश्तेदारी में उनकी खूब जगहंसाई होती थी तो एक दिन विस्फोट होना निश्चित था!!तीनों बच्चों ने बाल्मीकि अंकल को बुला तो लिया लेकिन गृहस्वामी के स्वाभिमान पर ये लात के जैसा था!!बस उन्होंने तो मुझे धर लिया भाले की नोंक पे और नानी दादी की अति प्राचीन कहावते मुझे सुना डालीं!!इससे पहले कि वे मुझे पीट डालते पूरा भयभीत मुहल्ला,बड़े बेटे के ससुराल वाले और अड़ोसी पड़ोसी सबने उन भाई साब को सूअर की मानिंद धून डाला!!मुझे याद है जब मैं उन अदृश्य गृहस्वामिनी से वार्ता कर रहा था तो 150 के ऊपर लोग हैरत से मुझे देख रहे थे!!
वो गृह स्वामिनी एक भली औरत निकली और मेरे इसरार पर उन्होंने अपना पुनः विधिवत अंतिम संस्कार किया जाना मान लिया!!उन्होंने भी पुष्टि की उनके पति ने उनकी आत्मा को अति कष्ट पहुंचाया था और बिना किसी उकसावे के मृत आत्मा का आवाहन करके जबरन इस दुनिया में लौटने पर विवश कर दिया था और ममता की मारी वह माता अपने परिवार और बच्चों के मोह में वापस लौट आईं थीं!!
भीड़ के एक कोने में डरे सहमे एक पुरोहित जी खड़े थे जो मुझे देखकर मेरे पास आए,"भगत जी अब क्या किया जाए??सबसे पहले मैने लोगों द्वारा हाथपैर जकड़ कर एक और डाले गए गृह स्वामी को बंधनमुक्त किया!!गृह स्वामिनी की मर्जी पूछी और पति तथा दोनों बेटों को लेकर एक बड़े वाहन से हम उसी वक्त श्री गया जी रवाना हो गए!!तीन घंटे पश्चात वहां हमने गृह स्वामिनी की शादी की लाल ड्रेस,उनके नाक कान के आभूषण,उनका संपूर्ण बिस्तर और हां एक प्लेट लिट्टी चोखा इस वायदे के साथ +वैदिक मंत्रोपचार के साथ नदी को समर्पित कर दिया और वायदा लिया कि अब वे इस स्थूल दुनिया में कभी वापस नहीं आएंगी और अपने पति और बच्चों को कभी डिस्टर्ब नहीं करेंगी!!और हुआ भी यही!अब वह घर पूर्णरूपेण शांत है और घर में खुशी की किलकारियां गूंजती हैं!!
आज मैं इस फैमिली का प्यारा बाल्मीकि अंकल हूं और वो मासूम बिटिया 6 माह पूर्व एक धार्मिक लड़के से ब्याह दी गई है और ससुराल में सुखी है!!बड़े बेटे को मैने तीन दिन पहले फोन किया और हालचाल पूछे तो उसने कहा,"अंकल,हमारी पहचान गुप्त रखकर अपने शब्दों में आप हमारी कहानी को दुनिया के लिए नजीर के रूप में पेश करो ताकि ऐसी ही खतरनाक गलती कर रहा कोई अंजान परिवार हमारी तरह दुख न भोगे!!सो मित्रों मैने ये सब आपके समक्ष लिखा!!
ये तो रही एक सच्ची घटना मित्रों!!अब बस एक प्रश्न अपने प्रिय सनातन के लोगों से हैं कि कहीं आप भी तो इससे मिलती जुलती कोई त्रुटि अपने संसार में नहीं कर रहे हैं?? इफ yes तो जल्द से जल्द ऐसा कर्म अवॉइड करें वरना आपको भी इस कर्म से कष्ट पहुँच सकता है जो मैं कदापि नहीं चाहूंगा!!धन्यवाद!!
किशोर बाल्मीकि
8077748527
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