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Thursday, 19 February 2026

कपूर और नींबू से दबी अकड़ी नसों को मुक्त करें ‌

➡️कपूर और नींबु कितने उपयोगी है🙏
➡️दिन में सिर्फ़ एक बार यह साधारण सा उपाय करके देखिए, सिर से पैर की उंगली तक सारी दबी या अकड़ी नसें मुक्त होने का आपको स्पष्ट अनुभव होगा कि सिर से पैर तक एक तरह से करंट का अनुभव होगा, आपके शरीर की नसें मुक्त होने का स्पष्ट अनुभव होगा। हाथ–पैर में होने वाली झंझनाहट (खाली चढ़ना) तुरंत बंद हो जाती हैं।

➡️पुराना घुटनों का दर्द और कमर, गर्दन या रीड की हड्डी (मणके) में कोई नस दबी या अकड़ गई है तो वह पूरी तरह से ठीक हो जाएगी, पुराना एड़ी का दर्द भी ठीक हो जाएगा।

➡️इस उपाये से बहुत से लोगों के लाखों रुपए बच सकते हैं। पैर में फटी एड़ियां और डैड स्किन रिमूव हो जाती है और पैर कोमल हो जाते हैं और इसके पीछे जो विज्ञान और आयुर्वेद है.

➡️यह उपाय करने के लिए हमें घर में ही उपलब्ध कपूर और नींबू, ये दो चीजें चाहियें। इस उपाय को करने के लिए डेढ़ से दो लीटर गुनगुना पानी लें, जिसका तापमान पैर को सहन होने जितना गरम हो, उसमे आधे नींबू का रस निचोड़े और फिर नींबू को भी उस पानी में डाल दें

➡️फिर दूसरी चीज कपूर है–कोई भी कपूर हो। कपूर की तीन गोलिय् बारीक पीस कर उसका पाउडर बना लें, यह भी उस पानी में मिला लें, फिर पांच से दस मिनट तक पैरों को इस पानी में डाल कर रखें।

➡️जैसे ही आप पैरों को पानी में डालेंगे, तो आपको इससे सिर से पैर तक एक तरह से करंट का अनुभव होगा। आपके सिर के बालों से पैर तक की सारी नसें मुक्त होने का स्पष्ट रूप से अनुभव होगा। इसका कारण यह है कि हमारे पैरों में 172 प्रकार के प्रेशर पॉइंट होते हैं, जो हमारे शरीर की सभी नसों के साथ जुडे होते हैं।

➡️यह नींबू और कपूर वाला गुनगुना पानी इन 172 प्रकार के प्रेशर पॉइंट्स को मुक्त कर देता है और इससे शरीर की सारी नसें एकदम से रीएक्टिवेट हो जाती हैं और पूरी तरह से मुक्त हो जाती हैं, ऐसा अनुभव होता है।

➡️इस उपाय में सिर्फ पांच से दस मिनट तक इस पानी में पैर डाल कर रखने है और यह दिन में कभी भी सुबह या शाम को कर सकते हैं।

➡️इससे हाथ, पैर में होने वाली झनझनाहट (खाली चढ़ना) बंद हो जाती हैं और कोई नस दबी या अकड़ गई हो, तो वह खुल जाएगी और सिरदर्द भी इस उपाय से बंद हो जाता है।

➡️जिन लोगों को माइग्रेन की तकलीफ हो वह भी, पानी में पैर रखने के साथ ही बन्द हो जायेगी। अगर स्नायु अकड़ गये हों या शरीर दर्द कर रहा हो तो यह उपाय करके देखिए।

➡️इसका कोई साइड इफैक्ट नहीं है और यह उपाय सरल रूप से किया जा सकता है।

➡️यह उपाय पांच दिन करना है। यह उपाय दिखने में तो सरल लगता है मगर इस का रिज़ल्ट बहुत ही अच्छा और असरदार होता है आपको इससे नुकसान कुछ नहीं होगा फायदा ही होगा

➡️नोट 👉 आयुर्वेदिक औषधि का उपयोग करने से पहले किसी अपने आसपास के आयुर्वेदिक डॉक्टर या वैध के मार्गदर्शन में ले ।

जानकारी अच्छी लगे तो शेयर जरुर करें 🙏
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अमोघ व्यापार वृद्धि मंत्र

जय गुरु गोरखनाथ 🙏 अलख निरंजन!🙏🙏🙏

❓ नाथ परंपरा का अमोघ व्यापार वृद्धि मंत्र☘️

नाथ परंपरा – वो परंपरा जिसके सिद्ध योगियों ने अपनी तपस्या से ब्रह्मांड की शक्तियों को वश में किया। इसी महान परंपरा के शिरोमणि हैं महायोगी गुरु गोरखनाथ जी! आज हम आपके लिए लेकर आए हैं गुरु गोरखनाथ जी का एक ऐसा अत्यंत प्रभावशाली सिद्ध शाबर मंत्र, जो आपके व्यापार में चमत्कारिक वृद्धि कर सकता है। यह कोई सामान्य मंत्र नहीं, बल्कि नाथ सम्प्रदाय का सिद्ध किया हुआ शाबर मंत्र है, जिसकी शक्ति अपार है। चाहे आपकी दुकान हो, शोरूम हो, ऑनलाइन बिजनेस हो या कोई भी व्यापार, यह मंत्र आपके धन-लाभ के सभी मार्ग खोल देगा।

🔍 शाबर मंत्र की महिमा

गुरु गोरखनाथ जी ने अपनी साधना से अनेक शाबर मंत्रों को सिद्ध किया। शाबर मंत्र की विशेषता यह है कि ये लोक भाषा में होते हैं, इनमें संस्कृत की जटिलता नहीं होती, लेकिन इनकी शक्ति किसी भी वैदिक मंत्र से कम नहीं होती। शाबर मंत्र सीधे सिद्ध योगियों की वाणी से निकले हुए मंत्र हैं, जो तुरंत प्रभाव दिखाने की क्षमता रखते हैं। व्यापार वृद्धि के लिए यह मंत्र इसलिए विशेष है क्योंकि इसमें गुरु गोरखनाथ जी की आज्ञा शक्ति, नवनाथों का आशीर्वाद और कुबेर देवता की कृपा – तीनों का संयोग है।

📜 व्यापार वृद्धि का सिद्ध शाबर मंत्र

मन्त्र ||
ओम विष्णु प्रिया लक्ष्मी, शिव प्रिया सती से प्रकट हुई।
कामाक्षा भगवती आदि शक्ति, युगल मुर्ति महिमा अपार,
दोंनो की प्रीती अमर, जानें संसार।
दुहाई कामाक्षा की। आय बढ़ा, व्वय घटा। दया कर माई।
ओम नमः विष्णु प्रियाय। ओम नमः शिव प्रियाय।
ओम नमः कामाक्षाय। ह्रीं ह्रीं श्रीं श्रीं फट् स्वाहा॥

⚡ पूरी साधना विधि (21 दिवसीय प्रयोग)

शुभ मुहूर्त – गुरुवार या रविवार के दिन साधना शुरू करें। गुरु पुष्य नक्षत्र का योग मिल जाए तो अत्यंत शुभ।

साधना का समय – प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में (सुबह 4 से 6 बजे) या संध्या काल में सूर्यास्त के समय।

साधना स्थान – व्यापार स्थल पर या घर के पूजा स्थान पर पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें।

आवश्यक सामग्री

➤ पीला कपड़ा, गुरु गोरखनाथ जी का चित्र या मूर्ति

➤ घी का दीपक, धूप-अगरबत्ती

➤ एक लोटा जल, पीले फूल, अक्षत (चावल)

➤ केसर का तिलक, एक नारियल, गुड़ या मिश्री

➤ रुद्राक्ष की माला

साधना की विधि

➤ स्नान करके स्वच्छ पीले या सफेद वस्त्र धारण करें।

➤ पूजा स्थान पर बैठकर गुरु गोरखनाथ जी का ध्यान करें, केसर का तिलक लगाएं, पीले फूल अर्पित करें।

➤ तीन बार "ॐ नमो आदेश गुरु गोरखनाथ को" बोलकर गुरु वंदना करें।

➤ रुद्राक्ष की माला पर इस मंत्र का जप प्रारंभ करें।

➤ प्रतिदिन 3 माला (324 बार) मंत्र का जप करें।

➤ लगातार 21 दिनों तक बिना नागा साधना करें।

➤ जप के बाद गुरु गोरखनाथ जी को गुड़ या मिश्री का भोग लगाएं।

➤ भोग प्रसाद स्वयं ग्रहण करें या किसी जरूरतमंद को दें।

➤ 21 दिन पूर्ण होने पर अंतिम दिन नारियल चढ़ाकर विशेष पूजा करें।

⚠️ महत्वपूर्ण नियम और सावधानियाँ

➤ साधना काल में ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य है।

➤ 21 दिन तक सात्विक भोजन करें। मांस, मदिरा, लहसुन-प्याज वर्जित है।

➤ साधना काल में किसी से इस मंत्र के बारे में चर्चा न करें, मौन रहें।

➤ मंत्र जप के समय व्यापार वृद्धि का स्पष्ट चित्र मन में बनाएं, संकल्प शक्ति मजबूत रखें।

➤ साधना बीच में न छोड़ें। एक दिन भी छूटने पर पूरी साधना दोबारा शुरू करनी होगी।

✅ साधना के परिणाम

➤ व्यापार स्थल पर ग्राहकों की संख्या में वृद्धि

➤ अटके हुए सौदे बनने लगेंगे

➤ प्रतिस्पर्धियों से आगे निकलने की शक्ति

➤ धन का प्रवाह निरंतर बना रहेगा

➤ व्यापार की बाधाएं स्वतः दूर होंगी

➤ नए व्यापारिक अवसर सामने आएंगे

🔊 वैकल्पिक उपाय

अगर आप स्वयं मंत्र का जप नहीं कर सकते, तो इस मंत्र को प्रतिदिन अपने व्यापार स्थल पर सुन सकते हैं। सुनने से भी समस्त लाभों की प्राप्ति होगी।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न 1: क्या यह मंत्र हर तरह के व्यापार के लिए प्रभावी है?
उत्तर: हां, यह मंत्र हर प्रकार के व्यापार-व्यवसाय के लिए समान रूप से प्रभावी है। चाहे आप दुकान चलाते हों, शोरूम हो, ऑनलाइन बिजनेस करते हों, फैक्ट्री हो या ऑफिस – इस मंत्र की शक्ति सभी के लिए एक समान काम करती है।

प्रश्न 2: क्या महिलाएं यह साधना कर सकती हैं?
उत्तर: हां, सच्ची श्रद्धा और विश्वास रखने वाली कोई भी महिला इस साधना को कर सकती है। हां, मासिक धर्म के दौरान साधना न करें, उन दिनों में सिर्फ मंत्र का मानसिक जाप करें।

प्रश्न 3: क्या माला का होना अनिवार्य है?
उत्तर: माला से जप करने से मंत्र की ऊर्जा एकाग्र होती है और अधिक प्रभाव मिलता है। रुद्राक्ष की माला सर्वोत्तम मानी गई है। अगर माला न हो तो अंगुलियों से गिनती करके भी जप कर सकते हैं।

प्रश्न 4: अगर एक दिन साधना छूट जाए तो क्या करें?
उत्तर: यदि एक दिन भी साधना छूट जाए तो पूरी 21 दिन की साधना दोबारा शुरू करनी होगी। इसलिए नियमितता बनाए रखना बहुत जरूरी है। साधना शुरू करने से पहले अपनी दिनचर्या देख लें।

प्रश्न 5: क्या सिर्फ मंत्र सुनने से भी लाभ होगा?
उत्तर: हां, यदि स्वयं जप करना संभव न हो तो नियमित रूप से इस मंत्र को सुनने से भी लाभ प्राप्त होता है। मंत्र की तरंगें वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा फैलाती हैं और व्यापार में वृद्धि होती है।

प्रश्न 6: क्या यह मंत्र कर्ज से मुक्ति दिला सकता है?
उत्तर: यह मंत्र सीधे व्यापार वृद्धि के लिए है। व्यापार बढ़ने से आय बढ़ेगी, जिससे कर्ज चुकाने की क्षमता बनेगी। नियमित साधना से आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होती है और कर्ज का बोझ अपने आप कम होने लगता है।

प्रश्न 7: साधना के दौरान क्या खाने-पीने की कोई पाबंदी है?
उत्तर: हां, साधना काल में सात्विक भोजन करना चाहिए। मांस-मदिरा, लहसुन-प्याज, तामसी भोजन से दूर रहें। हल्का और पौष्टिक भोजन लें। इससे मन शुद्ध रहता है और मंत्र का प्रभाव बढ़ता है।

प्रश्न 8: क्या यह मंत्र प्रतिस्पर्धियों को नुकसान पहुंचाने के लिए है?
उत्तर: बिल्कुल नहीं। यह मंत्र आपके अपने व्यापार की वृद्धि के लिए है, किसी को हानि पहुंचाने के लिए नहीं। किसी के प्रति द्वेष भाव रखकर यह साधना न करें। सकारात्मक संकल्प के साथ ही साधना करें।

प्रश्न 9: क्या इस मंत्र का जप किसी भी समय किया जा सकता है?
उत्तर: सबसे अच्छा समय ब्रह्ममुहूर्त (सुबह 4-6 बजे) है। यदि यह संभव न हो तो संध्या काल में सूर्यास्त के समय भी कर सकते हैं। दिन के अन्य समय में भी कर सकते हैं, लेकिन प्रातः और संध्या का समय विशेष प्रभावी है।

प्रश्न 10: क्या यह साधना परिवार के दूसरे सदस्य भी कर सकते हैं?
उत्तर: हां, परिवार का कोई भी सदस्य इस साधना को कर सकता है। सभी मिलकर भी कर सकते हैं। इससे व्यापार में और अधिक वृद्धि होती है।
📚 विशेष -  पुस्तक "सिद्ध शाबर मंत्र कोष" में गुरु गोरखनाथ सहित नाथ परंपरा के 101 सिद्ध शाबर मंत्रों का संग्रह होगा।

संदर्भ - https://www.facebook.com/share/1TP2hL7nw7/

॥ गुरु गोरखनाथ जी की जय ॥
॥ अलख निरंजन ॥

#गुरुगोरखनाथ #नाथपरंपरा #शाबरमंत्र #व्यापारवृद्धि  #लक्ष्मीमंत्र

लहसुन का सेवन लाभकारी

लहसुन का सेवन करने वाले व्यक्तियों के बाल,दांत ,नाखून, वर्ण एवं बल (ताकत) सहसा कम नही होते।लहसुन का सेवन करने वाले स्त्रियों के स्तन कभी ढीले होकर नीचे नही लटकते ।स्त्रियों का चेहरा,संतान,बल एवं आयु क्षीण नही होता ।उनका यौवन मजबूत् रहता है।स्त्रियां लहसुन का अधिक सेवन करके भी शुद्ध रहती है तथा उन्हें सेक्स से उत्पन्न होने वाले रोग नही होते । लहसुन का सेवन करने से स्त्रियों के कमर,श्रोणि तथा अन्य अंगों के रोगों के वशीवर्ती नहीं होती है अर्थात उन्हें कमर, श्रोणि एवं अन्य अंगों के रोग नहीं होते हैं। स्त्रियां कभी बांझ नही होती।

लहसुन के सेवन से पुरुष भी मजबूत ,मेधावी दीर्घायु एवं सुंदर संतान युक्त होता है ,मैथुन (सेक्स) में जल्दी थकता नहीं तथा इसके प्रयोग से शुक्र की भी वृद्धि होती है। जितनी भी स्त्रियों से वह संभोग करता है सबको गर्भस्थति हो जाती है तथा गर्भ भी नीलकमल की सुगंधी वाला तथा पद के वर्ण का होता है। इसके सेवन से शरीर मृदु एवं कंठ (गला) मधुर(सुरीला) हो जाता है ।ग्रहणी के दोषों की शांति होती है तथा जठरग्नि बढ़ती है।

किन रोगों (बिमारियों)में लहसुन का प्रयोग करना चाहिए-

अस्थिच्युत(dislocation),हड्डी टूटने में एवं अन्य हड्डी के रोगों में,सम्पूर्ण वात रोग में,आर्तव सबंधी रोग,वीर्य संबधी रोग,खांसी,कुष्ठ(त्वचा) रोग,गुल्म,सफेद दाग,खूजली,विस्फोटक,चेहरा का प्रकृतिक रंग बदल गया हो,तिमिर(नेत्र रोग),श्वास ,night blindness, कम भोजन करने वाला,पुराना बुखार में,स्त्रोतों का बंद हो जाना,पथरी,मूत्रकृच्छ(uti),भगंदर, प्रदर,प्लीहारोग,राजयक्षमा(tb),पंगुता(चलने में कठिनाई),ह्रदय रोग में (chlostrol बढ़ने पर),वातरक्त(gout) रोगों प्रयोग करना चाहिए ।इसके अलावा memory power ,अग्नि एवं ताकत बढ़ाने के लिए एक लहसुन का प्रयोग करना चाहिए।लहसुन रसायन भी है।इस(लहसुन) से उपरोक्त रोगों से जल्दी ही रोगमुक्त हो जाता है तथा उसके बाद शरीर की वृद्धि होती है।

किन रोगों में लहसुन का प्रयोग नहीं करना चाहिए-

कफज एवं पित्तज रोग, अतिवर्द्धवस्था,अग्निमांद्य, गर्भिणी(गर्भवती महिला),नवजात शिशु,नया बुखार, अतिसार, कामला(jaundice),अर्श(piles),कब्ज़, गले एवं मुख का रोग(मुंह में छाले ,घाव आदि),जिसने अभी उल्टी किया हो ,जिसको अभी लूज मोशन हुआ हो,जिसने शिरोविरेचन लिया है,जिसको प्यास बहुत लगती हो,जिसको उल्टी की बीमारी हो,जिसको हिचकी और श्वास का रोग अधिक हो,जिसे अनुवाशन और निरुहबस्ती दिया गया हो ऐसे अवस्था मे लहसुन का सेवन करना नही करना चाहिये।

नोट:-उपरोक्त रोगों को छोड़कर जिनकी पाचन शक्ति एवं बल(ताकत) जिसकी क्षीण नही है उन सबको लहसुन का प्रयोग किया जा सकता है।हेमंत और शिशिर (ठंडियो के मौसम में) लहसुन का प्रयोग करना चाहिए ।लहसुन छिलके रहित प्रयोग करना चाहिए।

लहसुन के पूर्ण रूप से पके हुए कंद को लेकर अच्छे से छील ले और फाड़कर उनमें से अंकुरो (जो हर -से होते हैं )उनको निकाल दे तथा लहसुन की बदबू कम करने के लिए रात को छाछ में डाल कर रख दीजिये और सुबह निकल ले तथा धोकर सिलबट्टे पर पीसकर चटनी बना ले तत्पश्चात उसमें निम्नलिखित वस्तुओं का पांचवा भाग चुर्ण मिला लीजिये काला नमक, अजवाइन ,घी में भुनी हींग, सेंधा नमक ,सौठ, काली मिर्च,पिपली तथा जीरा (इन्हें भी घी में भून लें लेना चाहिए)को समान भाग में लेकर चुर्ण तथा लहसुन की चटनी को एक में मिलाकर रख लीजिये।तत्पश्चात इसको 10 से 15 ग्राम की मात्रा में सुबह खाली पेट खानी चाहिए अथवा रोगी की पाचन शक्ति ,शारीरिक बल, ठंडी- गर्मी तथा वात -पित्त -कफ का विचार करके मात्रा को घटाया या बढ़ाया भी जा सकता है ।इसे खाकर पीछे से अरंड की जड़ का काढ़ा पीना चाहिए इसी प्रकार प्रतिदिन(रोज) सेवन करने से सर्वांगवात,एकांग्वात(लकवा का एक प्रकार),अर्धांगवात (मुंह का लकवा),हिस्टीरिया, अपस्मार(मिर्गी), उन्माद (पागलपन),उरुस्तम्भ,गृहसी(सायटिका),और छाती, पीठ, कमर ,पसली तथा पेट का दर्द तथा कृमि रोग को नष्ट करता है।इस दवा का सेवन के समय मनुष्य को अजीर्ण ना होने दे, धूप, क्रोध, अधिक जल, तथा दूध तथा गुड़ का अवश्य त्याग देवे। खट्टे पदार्थ, मूँग दाल ,मसूर दाल आदि और हल्का व सुपाच्य भोजन इच्छा अनुसार खाया जा सकता है।
साभार - प्रेमानंद महाराज 
संदर्भ - https://www.facebook.com/share/p/17vD8eDHkf/
वयं राष्ट्रे जागृयाम 

रजस्वला का विज्ञान

रजस्वला का विज्ञान या रजस्वला स्त्री को क्यों विधि निषेध है :-
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काफी लोगों ने मुझसे इस विषय पर लिखने को कहा !! पर ऐसे विषयों पर लिखने से बचता हूँ लेकिन social मीडिया पर जो हाहाकार मचा हुआ है , उसे देखकर लिखना पड़ा !! 

कुछ सिद्धांत एवं विज्ञान के formulaes समझ लीजिए : 

प्रत्येक वस्तु, पदार्थ, अणु, परमाणु से लेकर वह छोटी से छोटी इकाई जो अभी तक ज्ञात नहीं है , सब एक विशेष प्रकार की ऊर्जा या तरंगें निकालती रहती हैं। यह प्रक्रिया निरंतर चलती है । 
हर पदार्थ या वस्तु या तत्व की ऊर्जा भिन्न भिन्न होती है । प्रत्येक के ऊर्जा की frequency, wavelength, intensity अलग अलग प्रकार की होती है जो उस पदार्थ या तत्व की संरचना पर निर्भर करती है । 

ऐसा नहीं है कि मात्र radioactive elements या substance ही किरण या विकिरण या ऊर्जा निकालते हैं। ये तो विज्ञान जहाँ तक पहुँचा है वहीं तक बता रहा है । लेकिन विज्ञान से अनंत गुणा अनंत तरह की बातें हैं जहाँ विज्ञान को पहुँचने में युग युग व्यतीत हो जाएगा । 

तो प्रत्येक कण atom, molecule, god particle etc. सभी निरंतर एक विशेष प्रकार की energy निकालते रहते हैं। यह प्रक्रिया सतत चिरंतन है । 
इसी ऊर्जा को प्रतिक्षण निकालते रहने के कारण प्रत्येक वस्तु का क्षरण होता है जिसे degradation या फिर मृत्यु कहते हैं।  

यह भी ध्यान रखिये - " Energy can neither be created nor be destroyed, it can only be transformed into one form to another." 

अब दूसरा सिद्धांत सुनिए - जिस वस्तु को बनने में जितनी मात्रा की ऊर्जा लगी है , उस वस्तु को बिगड़ने या विध्वंस होने पर उतनी ही मात्रा की ऊर्जा निकलेगी !! 

दूसरी तरह समझिए दर्शन सिद्धांत के अनुसार :- जिस व्यक्ति या वस्तु से अनुकूल होने पर जितनी मात्रा का प्रेम है , उसी व्यक्ति या वस्तु के प्रतिकूल होने पर उतनी ही मात्रा का द्वेष होता है । 

तीसरी तरह समझिए - जिस व्यक्ति या वस्तु से जितनी मात्रा का सुख मिलता है , उसके विपरीत होने पर या उसके अभाव से या उसके खो जाने पर उसी व्यक्ति या वस्तु से उतनी ही मात्रा का दुःख मिलेगा । न एक प्रतिशत कम न एक प्रतिशत ज्यादा । 

मुझे पता है आप लोग bore हो रहे हैं , लेकिन रजस्वला या mensturation को समझने के लिए थोड़ा तो मेहनत करनी पड़ेगी । वरना आप गालियाँ ही देते रहेंगे और सब बकवास कहते रहेंगे । 

अब आते हैं कि ये Mensturation या रजस्वला या periods होता क्या है ??? 
स्त्री को शक्ति का प्रतीक कहा जाता है । ध्यान दीजिए , बहुत ही normal level पर आकर समझा रहा हूँ । 
शक्ति का प्रतीक क्यों कहा जाता है ?? इसको समझाने बैठूंगा तो पुस्तक बन जाएगी , बस थोड़ा सा समझ लीजिए कि जो पुरुष का sperm या वीर्य है वह एकमात्र चेतनता प्रदान करता है , चैतन्य शक्ति है वह , लेकिन जो स्त्रियों में रज है अर्थात ovum है वह sperm को या वीर्य को कार्य करने की क्षमता प्रदान करता है । वह उसको शक्तिमान बनाता है । 

अगर वीर्य आत्मा है तो रज उसका मन, बुद्धि, चित्त एवं अहंकार का निर्माण करता है । उसे शक्तिमान बनाता है ।। 
बड़े साधारण रूप से समझिए कि यह वीर्य को आगे की प्रक्रिया के लिए ( अर्थात वीर्य से बच्चा बनने की प्रक्रिया ) प्रेरित करता है या शक्ति देता है । 

आप ऐसे समझ लीजिए कि जैसे कोई व्यक्ति comma में है । वह जीवित तो है लेकिन जीवित न होकर भी मृतप्राय है। वह अशक्त है चैतन्य होते हुए भी । 
अब रज का कार्य उस चैतन्यता को शक्ति प्रदान करना है । 
वीर्य जब बच्चे में convert होगा तो स्त्री का रज या ovum ही इस प्रक्रिया को संचालित करेगा । 
Ovum is a fuel to Sperm. 
कितनी भी मंहगी गाड़ी हो लेकिन बिना fuel के या पेट्रोल के वह नहीं चलेगी । यही fuel है Ovum. 

यह वीर्य या रज कोई साधारण तत्व नहीं है । यही ध्यान देने योग्य है , यही आप समझ लेंगे तो सब समझ में आ जायेगा । 
वीर्य और रज दो महाशक्ति हैं । इन दोनों महाशक्तियों का मिलन कोई साधारण घटना नहीं है । इन्हीं के संयोग और मिलन से एक नया जीव उत्पन्न होता है और यह पूरा संसार चलायमान है । 

अब mensturation क्या है ?? स्त्रियों में प्राकृतिक तौर पर रज या ovum बनने की प्रक्रिया शुरू होती है जैसे पुरुषों में वीर्य बनने की प्रक्रिया । 
यह Ovum या egg पूर्ण विकसित होकर किसी वीर्य या sperm के द्वारा fertilization या मिलन होने की प्रतीक्षा करता है । 
जब इसे 7 दिन के भीतर कोई वीर्य या sperm नहीं मिलता है तो यह स्वतः ही क्षरण प्रक्रिया या degeneration प्रक्रिया में आ जाता है । इस ovum को धारण करने के लिए या जहाँ यह egg या ovum या रज बना होता है , उस specific area या ovary में cells की मोटी layer बन जाती है जो ovum के degeneration के साथ ही वह lining भी degenerate होने लगती है । इस पूरी प्रक्रिया में 3 से 4 या 5 दिन लगते हैं जिसमें रक्त ( ध्यान रखिये कि यह सामान्य रक्त नहीं है ) , तरह तरह के cells, elements, minerals, electrolytes इत्यादि का मिश्रण बाहर निकलता है । 

इस बनने बिगड़ने की प्रक्रिया को पूरे 28 दिन लगते हैं । 14 14 दिन के अंतराल पर जैसे चन्द्रमा बनता बिगड़ता है ( शुक्ल पक्ष एवं कृष्ण पक्ष ) , ठीक उसी तरह । 

चूँकि रज ही मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार का निर्माण करता है इसीलिए चन्द्रमा को मन का कारक माना जाता है । 
ज्योतिष विज्ञान में इसीलिए जिसका चन्द्रमा ...

खैर छोड़िए हम फालतू चीजों पर न जाकर मुद्दे पर focus करते हैं ! 

अब ऊपर वाले सिद्धांत पर आईये । मैंने ऊपर बताया है कि जिस तत्व को बनने में जितनी ऊर्जा लगती है उसके क्षरण या नष्ट होने पर उतनी ही ऊर्जा , तरंग , इत्यादि निकलती है।  

यह रज कोई सामान्य तत्व नहीं है। शक्ति का प्रतीक है । ऐसे समझिए जैसे nuclear energy ( आणविक शक्ति ) । अब इसके नष्ट होने पर उतनी ही मात्रा की energy या तरंग या विकिरण पैदा होगी या निकलेगी । 

जैसे atom bomb को बनाने में जितनी शक्ति या ऊर्जा लगती है उतनी ही शक्ति उसे नष्ट होने में लगेगी । और वह nuclear bomb पूरी तरह radioactive होता है । उसके प्रभाव या संपर्क में आने वाले का नुकसान होना ही है । 

आपको ज्ञात होगा कि radium के आविष्कारक pierre currie और madam currie दोनों ही रेडियोधर्मिता का शिकार होकर खत्म हो गए थे । 

तो यह रज इसी प्रकार की ऊर्जा है । यह विज्ञान के पैरामीटर या मापनी पर प्रदर्शित नहीं होगा । 
हर विषय सभी के वश का नहीं है । कान का कार्य केवल सुनना है , वह देख नहीं सकती चाहे कितनी भी गुह्यतम machine या technology fit कर लीजिए । इसी तरह आंख, कान , नाक , जीभ, त्वचा आदि का कार्य उन्हीं के अनुरूप है । कोई लाख कोशिश के बावज़ूद एक दूसरे का कार्य नहीं कर सकता । 

विज्ञान का ज्ञान भौतिक वस्तुओं और तत्वों तक सीमित है । उसका धार्मिक एवं आध्यात्मिक क्षेत्र में कैसे प्रवेश हो सकता है ??? 
धार्मिक विज्ञान और आध्यात्मिक विज्ञान परे से भी परे है । 
Microscope telescope का कार्य नहीं कर सकता । 

जब आप भौतिक विज्ञान पढ़ने के बाद धार्मिक और आध्यात्मिक विज्ञान की ओर जायेंगे तब आपको समझ में आएगा कि अरे जिसजे सामने तो भौतिक का विज्ञान दो कौड़ी का है।  
यह विज्ञान जितना खोज पाया है , वह इस ब्रह्मांड का मात्र 0.0000001% है । 
जितना आपको आंखों से दिख रहा है उससे कहीं ज्यादा अनंत गुना सूक्ष्म विज्ञान है जो मात्र आध्यात्मिक एवं धार्मिक विज्ञान से समझा जा सकता है।  

तो जब स्त्री रजस्वला होती है तो इसका अर्थ है रज जैसी शक्ति का क्षरण प्रारम्भ हो गया है । उस वक़्त स्त्री के शरीर में भी तरह तरह की problems आती हैं । आप स्वयं पायेंगे कि उस वक़्त स्त्री मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ्य नहीं महसूस करती , mood swings, irritation, शरीर में दूसरी तरह के enzymes और hormones बनना , किसी भी कार्य में मन न लगना इत्यादि है । यह किस कारण होता है ??? क्या रक्त बहने के कारण ??? 
नहीं उस प्रक्रिया में जो विकिरण हो रहा है , ऊर्जा निकल रही है यह सब उसी का side effect है । 
और यह भी ध्यान रखिये कि स्त्रियों का यह रज केवल वही मातृ शक्ति ही धारण कर सकती हैं और कोई नहीं। इसीलिए इन्हें शक्ति का प्रतीक बोला जाता है क्योंकि रज शक्ति धारण करने की क्षमता इन्हीं में है । ये अपना भी धारण करती हैं और पुरुषों के शक्ति वीर्य को भी धारण करने की क्षमता रखती हैं। 
प्रकृति या भगवान ने इनके गर्भाशय , fallopian tube, ovary इत्यादि को इसीलिए बनाया है ताकि ऐसी दो महाशक्तियों को ये धारण कर सकें।  
इसीलिए हमारे शास्त्रों में इनको शक्ति , नवरात्रि में इनकी पूजा , शास्त्रों में इनका निरूपण किया गया है।  

चलिए टॉपिक पर आते हैं वरना ऐसे समझाने लगा तो ......

तो इस दौरान स्त्रियों का शरीर एक विशेष प्रक्रिया से गुजरता है और पूर्ण विकिरण के प्रभाव में रहता है। इसे normal विज्ञान में detoxification भी कहते हैं। ये विकिरण इतना ताकतवर होता है कि तुलसी ( जिसे radiooactive radiations को रोकने की क्षमता प्राप्त है ) वह भी नहीं सहन कर पाती । कोई रजस्वला स्त्री अगर इस दौरान तुलसी के पौधे की सेवा कर दे तो वह मुरझा जाती है । यह कोई गप्प नहीं है practical बात बता रहा हूँ। 
सिर्फ यही नहीं हर देश के हर सम्प्रदाय में रजस्वला स्त्री के लिए नियम व निषेध बनाये गए हैं।  
पूरे विश्व में ग्यारह धर्म चल रहे हैं सभी में घुसिए और आप पायेंगी कि यह विधि निषेध हर धर्म में कम या ज्यादा के रूप में प्रचलित है । 
खाद्य पदार्थ पर इस विकिरण या energy का प्रभाव सबसे ज्यादा होता है और इसी अन्न से ही प्रत्येक जीव का मन, बुद्धि, चित्त, वीर्य आदि का निर्माण होता है। इसीलिए इस दौरान स्त्रियों को खाना बनाने की मनाही होती है । यह विकिरण ऐसे नहीं दिखता , यह दिखता है विचारों के रूप में, बुद्धि के रूप में , सात्विकता के नष्ट होने के रूप में । 
इस दौरान स्त्रियों को कर्मकांड निषेध है लेकिन भगवान का स्मरण , भाव भजन निषेध बिल्कुल नहीं है । 
क्योंकि जैसा मैंने ऊपर बताया है कि हर वस्तु हर पदार्थ की अपनी अपनी energy और तरंग या विकिरण है । 
देव मूर्ति , देव स्थान , धार्मिक पुस्तकों की अपनी अलग ऊर्जा एवम विकिरण है । यह तरंग जब रजस्वला स्त्री के तरंगों से टकराती हैं तो अलग ही प्रकार की तरंगों का प्रवाह होता है जो स्वयं स्त्री के लिए नुकसानदेय है । इसीलिए शास्त्रों ने तो इतना कहा है कि इस समय स्त्रियों को एकांत प्रवास करना चाहिए । किसी से संपर्क तक की मनाही है । 
इसीलिए कुछ विशेष नियम एवं निषेध बनाये गए हैं । 

पहले तो संयुक्त परिवार होता था तो कोई दिक्कत नहीं होती थी । लेकिन आज अर्थजगत में सम्बन्धों से ज्यादा पैसों की महत्ता ने एकल परिवार कर दिया जिससे यह विधि निषेध इनके लिए कोई मायने नहीं रख पाता । 
मायने नहीं रखता तो इसीलिए तो हर परिवार में हर व्यक्ति तरह तरह की शारीरिक और मानसिक व्याधियों से ग्रस्त हैं । 
फिर कहते हैं कि हमने तो कुछ नहीं किया फिर हमें यह विशेष रोग कैसे हो गया !!! अरे तुम ही यह जान जाते कि तुमने क्या किया तो इतने दुखों से थोड़ी न गुजर रहे होते !!!! 

अब सभी को समझाना बहुत मुश्किल होता है क्योंकि सभी की बुद्धि का स्तर एक समान नहीं होता इसीलिए शास्त्र प्रतीक के माध्यम से डर, प्रेम , भय के द्वारा समझाते हैं । 
जैसे कानून का ज्ञान सबको नहीं है लेकिन पोलिस और दंड का भय दिखाकर कानून का पालन करवाया जाता है । 

यह मूर्खता है कि स्त्री कुतिया बनेगी या नरक जाएगी या पुरुष बैल बनेगा !!! 😑 लोग अक्सर शास्त्रों की बातों में अपनी बात जोड़कर उटपटांग वक्तव्य देते हैं । 
जो कोई कुछ भी बनेगा एकमात्र अपने शुभ एवं अशुभ कर्मों द्वारा बनेगा । 
जब कम समझ वाले लोग शास्त्र या धर्म का व्याख्यान करते हैं तो ऐसी ही बकवास बातों का उद्गम होता है । 

जो स्त्रियाँ इस प्रक्रिया को साधारण समझती हैं वह अज्ञानी एवं मूर्ख हैं और कुछ नहीं । वह इसका विरोध कर यह जता देती हैं कि उनके अंदर बनने वाला रज बिल्कुल साधारण है और यह कोई शक्ति नहीं है । यह बेकार का खून है । 
मतलब वह स्वयं ही अपने आप को कमजोर बनाती हैं । 

क्या आवश्यक है कि हर बात में रोना गाना हो और स्त्री स्त्री चिल्लाया जाय ?? 
अरे यह तो अच्छा है कि 3 4 दिन आपको rest दिया जा रहा है तो भी उसमें आपको पुरुषवाद नज़र आ रहा है !! 
मतलब वह ठीक होता कि मरते मरते भी जबरदस्ती आपसे काम करवाया जाता । 
अरे किसी में तो महिलावाद और पुरुषवाद से ऊपर उठकर सोचा करिये । 
अगर इन 4 5 दिनों में आपको कुछ विधि निषेध हैं तो वह उसमें पुरुष को कहाँ लाभ मिल रहा है ???? 
उसमें तो लाभ आपको ही मिल रहा है और आपका स्वास्थ्य ठीक रहे और इन विकिरणों के side effect से आपकी रक्षा हो सके , इसीलिए बनाया गया है न । 

गलत क्यों लेना ??? 

कुछ स्त्रियों का तर्क मैंने देखा कि पुरुष इसी रक्त से ही तो हुआ है । 
अरे हद्द है !!!!  

 मल मूत्र भी तो खाना और पानी है तो क्या उसको पीया जा सकता है ???? 
उल्टी ( vomit ) आपका भोजन ही तो है । बहुत राजशाही व्यंजन की भी उल्टी होगी तब भी उसको कोई यह कहकर नहीं खा सकता कि यह तो भोजन ही तो है जिससे हमें ऊर्जा और शक्ति मिलती है । 

प्रारूप बदल गया । यही रज वीर्य के संसर्ग में एक नए जीव का निर्माण करता है लेकिन इसी रज का प्रारूप बदलने से इसमें दोष और विकिरण का प्रभाव बन जाता है । 

इसलिए रोना गाना छोड़कर कुछ शास्त्रों की बातों को मानना शुरू कीजिए । आपके पूर्वज गधे और मूर्ख नहीं थे जिन्होंने यह सब बनाया । आप उन मूर्खों की संतान नहीं हैं । आप ऐसे महापुरुषों की सन्तति हैं जिन्होंने विज्ञान से अनंत गुना खोज कर आपको सफल एवं सुंदर जीवन जीने का मार्ग निष्कंटक किया है । 
आपको गर्व होना चाहिए उन पर और उनके दिए हुए विरासतों पर । उसके सहेज कर रखिये और उसे अपनी आने वाली सन्तति में प्रत्यारोपण कीजिये । 

आप स्त्री हैं , शक्ति स्वरूप हैं। अपनी शक्तियों को स्त्री स्त्री का रोना रोकर बेकार मत कीजिये । 
स्वयं पर गर्व करना सीखिए लेकिन बिना पुरुष को गालियाँ दिए हुए और उनको बिना नीचा दिखाते हुए । न समझ आये शास्त्रों की बात तो समझने का प्रयत्न कीजिये उनसे जो विज्ञान और शास्त्र दोनों में समन्वय करके चलते हों । 
लेकिन विज्ञान का संसार अलग है और धर्म अध्यात्म का संसार बिल्कुल अलग । 
बस एकमात्र आध्यात्म के संसार में प्रवेश करिये धर्म और भौतिक विज्ञान स्वयमेव आपके समक्ष हाथ बाँधे खड़े हो जायेंगे । 
बहुत ही ऊपरी सतह पर समझाने की कोशिश किये जाने के बावज़ूद भी पोस्ट लंबा हो गया है । 
लेकिन इससे कम में भी समझाया नहीं जा सकता था । 

साभार - Shwetabh Pathak (श्वेताभ पाठक)

वयं राष्ट्रे जागृयाम 

आसमान में 15.8 हजार टन कचरा, हवाई उड़ानों पर बना बड़ा खतरा; 3 बार ट्रैफिक जाम, फ्लाइट डिले

आसमान में 15.8 हजार टन कचरा, हवाई उड़ानों पर बना बड़ा खतरा; 3 बार ट्रैफिक जाम, फ्लाइट डिले

अपडेट। अंतरिक्ष मिशनों (सैटेलाइट लॉन्चिंग) की बढ़ती संख्या और तकनीकी विकास ने आसमान में कचरे को बढ़ा दिया है, जिसने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है. दरअसल, सैटेलाइन लॉन्चिंग फेल होने या अपनी समय सीमा पूरी कर चुके सैटेलाइट के पार्ट्स आसमान में कचरा (Space Junk या Space Debris) बढ़ा रहे हैं. स्पेस डॉट कॉम की एक रिपोर्ट के अनुसार, आसमान में 15,800 टन कचरा छोटे-बड़े 14.12 करोड़ पिंडों के रूप में है.

यही कचरा एयर ट्रैफिक जाम कर रहा है. यानी विमानों की उड़ान पर ब्रेक लगा रहा है. इसके चलते दुनिया में कई बार एक-दो नहीं सैकड़ों फ्लाइट डिले की गईं, कुछ के रूट डायवर्ट किए गए. आने वाले सालों में ये स्थिति और भी खतरनाक हो जाएगी. क्योंकि, अनुमान है कि 2030 तक एक लाख से अधिक सैटेलाइनट अंतरिक्ष में छोड़े जाएंगे.

इसके अलावा दुनिया में हवाई यात्रियों की संख्या मौजूदा 9.8 अरब से बढ़कर 2030 में 12 अरब हो जाएगी. ऐसे में ये आसमानी कचरा एयर ट्रैफिक पर बड़ा असर डाल सकता है. आईए, जानते हैं कि ये अंतरिक्ष कचरा क्या है? इससे कैसे एयर ट्रैफिक डिस्टर्ब हो रहा है? और इससे कैसे निपटा जा सकता है.

आसमान में कैसे फैल रही गंदगी: आसमान में गंदगी अंतरिक्ष मलबा या अंतरिक्ष सामग्री से फैल रही है. निम्न-पृथ्वी कक्षा (Low-Earth orbit, LEO) मलबे से भरता जा रहा है, जिसमें निष्क्रिय सैटेलाइन, रॉकेट के पुराने हिस्से, सूक्ष्म उल्कापिंड शामिल हैं. इसमें कार्यशील अंतरिक्ष स्टेशनों से पेंट के छोटे-छोटे कणों से लेकर दशकों पुराने निष्क्रिय अंतरिक्ष यानों जितनी बड़ी वस्तुएं शामिल होती हैं.

कब-कब आसमान पर गिरी बड़ी मुसीबत: अंतरिक्ष मलबा यानी आसमानी कचरा 50 साल पहले कोई महत्वपूर्ण चिंता का विषय नहीं था. लेकिन, प्रौद्योगिकी में प्रगति और अंतरिक्ष मिशनों की बढ़ती संख्या ने इससे होने वाले खतरों को बढ़ा दिया है.

चीन का 2007 का मिसाइल परीक्षण: जनवरी 2007 में चीन की सरकार ने अपने निष्क्रिय मौसम उपग्रहों में से एक फेंग्युन-1सी पर उपग्रह-रोधी हथियार (एएसएटी) से हमला किया था, जिससे पृथ्वी की निचली कक्षा में 3,000 से अधिक मलबे के टुकड़े पैदा हुए. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 32,000 से अधिक छोटे टुकड़े ऐसे थे जिन्हें ट्रैक नहीं किया जा सकता. इस मिसाइल परीक्षण की अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने निंदा की, क्योंकि इसने अंतरिक्ष इतिहास में किसी भी घटना की तुलना में सबसे अधिक मलबा पैदा किया था.

2009 में इरिडियम-कॉस्मोस की टक्कर: फरवरी 2009 में एक निष्क्रिय रूसी टेलीकॉम सैटेलाइट कॉस्मोस 2251 अमेरिकी कंपनी इरिडियम के सैटेलाइट इरिडियम-33 से टकरा गया था. दोनों उपग्रह चकनाचूर हो गए, जिससे 2,000 से अधिक टुकड़े बन गए. कक्षा में दो उपग्रहों की यह पहली टक्कर थी.

2021 में रूसी मिसाइल परीक्षण: 2021 में एक रूसी मिसाइल परीक्षण से 1,500 से अधिक मलबे के टुकड़े उत्पन्न हुए. इस परीक्षण ने सोवियत संघ के पुराने जासूसी उपग्रह कॉस्मोस 1408 को नष्ट कर दिया और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में मौजूद यात्रियों को अलग किए जा सकने वाले लाइफबोट पॉड्स में शरण लेनी पड़ी.

अमेरिका ने अपना जासूसी सैटेलाइट गिराया: अमेरिकी नौ-सेना ने 20 फरवरी, 2008 को अपने निष्क्रिय जासूसी उपग्रह यूएसए-193 को गिरा दिया, जिससे मलबा बिखर गया. खगोलविदों ने उत्तर पश्चिमी संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा के ऊपर गिरते हुए देखा. हालांकि, रक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना था कि उन्हें फुटबॉल से बड़ा कोई मलबा नहीं मिला.

Space Junk ने फ्लाइट की डिले: आसमानी कचरे से एयर ट्रैफिक के प्रभावित होने की अब तक कुछ घटनाएं सामने आई हैं. दरअसल, विमान बहुत छोटे मलबे के टुकड़ों से प्रभावित हो सकते हैं. उदाहरण के लिए, ज्वालामुखी की राख से होकर गुजरने वाले विमानों के लिए छोटे कणों के कारण यह जोखिम भरा होता है. यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के अंतरिक्ष मलबे प्रणाली के इंजीनियर बेंजामिन वर्जिली बास्टिडा ने Space.com को बताया कि इसी तरह की स्थिति पृथ्वी के पुन: प्रवेश करने वाले मलबे के साथ भी हो सकती है.

वर्जिली बास्टिडा और उनके सहयोगियों ने हाल ही में जर्नल ऑफ स्पेस सेफ्टी इंजीनियरिंग में एक शोध पत्र प्रकाशित किया है, जिसमें गिरते अंतरिक्ष मलबे के लिए हवाई क्षेत्र को कब और कहां बंद करना है, इस बारे में निर्णय लेने की चुनौतियों का वर्णन किया गया है. 2020 के एक अध्ययन के अनुसार, 2030 तक, किसी भी उड़ान के अंतरिक्ष मलबे के टुकड़े से टकराने की संभावना लगभग 1,000 में 1 हो सकती है.

लेकिन, नए शोध के अनुसार अंतरिक्ष मलबा गिरते समय विमानों के लिए खतरा पैदा कर रहा है. साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित एक शोध पत्र के अनुसार, अंतरिक्ष मलबे के किसी विमान से टकराने की संभावना कम है, लेकिन विमानन उद्योग और अंतरिक्ष उड़ानों में वृद्धि के कारण यह जोखिम बढ़ रहा है. एक रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में स्पेन और फ्रांस ने अपने कुछ हवाई क्षेत्र को तब बंद कर दिया जब 20 टन का एक रॉकेट वायुमंडल में पुनः प्रवेश करने वाला था.

शोधकर्ताओं ने बताया कि रॉकेट का ढांचा प्रशांत महासागर में जा गिरा था. हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण 645 विमानों में लगभग 30 मिनट की देरी हुई और पहले से हवा में मौजूद कुछ विमानों का मार्ग बदल दिया गया था. विमानन उद्योग हवाई क्षेत्र को बंद करने के निर्णय लेते समय अंतरिक्ष मलबे को अधिक गंभीरता से ले रहा है.

यही नहीं, स्पेस-X रॉकेट को जनवरी 2025 में पुनः ऑरबिट में प्रवेश कराया गया था, जिसको लेकर मलबा गिरने की चेतावनी जारी की गई थी. इसके चलते क्वांटास एयरलाइंस ने ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच कई उड़ानों का समय बदला था. कई उड़ानें छह घंटे की देरी से टेकऑफ हुई थीं. चीनी रॉकेट झुके - 3 दिसंबर 2025 में लॉन्चिंग के समय दक्षिण प्रशांत महासागर गिर गया था, जिसके बाद ब्रिटेन में मलबा गिरने की आशंका को लेकर एयर ट्रैफिक कंट्रोल को रेड अलर्ट जारी किया गया था.

स्पेस जंक के कारण होने वाले एयर ट्रैफिक डिस्टर्बेंस को कैसे रोका जाए: यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) ने शून्य मलबा दृष्टिकोण (Zero Debris approach) अपनाया है, जिसे पहली बार एजेंडा 2025 में शामिल किया गया है. इसका उद्देश्य एजेंसी के सभी भावी मिशन और गतिविधियों के लिए 2030 तक पृथ्वी और चंद्रमा की कक्षाओं में मलबे के उत्पादन को काफी हद तक सीमित करना है. नवंबर 2023 में लागू अंतरिक्ष मलबा न्यूनीकरण दिशानिर्देश और अंतरिक्ष मलबा न्यूनीकरण नीति मलबे की मात्रा को काफी हद तक कम करेंगी.

सफल निपटान की गारंटी: ईएसए के मिशन को वायुमंडलीय पुनः प्रवेश या सुरक्षित ऊंचाई पर पुनः परिक्रमा के माध्यम से अंतरिक्ष वस्तुओं के सुरक्षित निपटान को 90% से अधिक सफलता की संभावना के साथ सुनिश्चित करना होगा. मिशन में ऐसे इंटरफेस भी शामिल होने चाहिए जो स्व-निपटान विफल होने की स्थिति में उन्हें कक्षा से हटाने में मदद करें.

कक्षीय स्वच्छता में सुधार: कोई वस्तु जितनी कम देर कक्षा में रहती है, उसके किसी अन्य वस्तु से टकराने और अतिरिक्त मलबा उत्पन्न करने की संभावना उतनी ही कम होती है. नए ईएसए मिशन के लिए कक्षाओं में व्यतीत अधिकतम समय 25 वर्षों से घटाकर 5 वर्ष कर दिया गया है.

दुनिया का एयर ट्रैफिक कितना: एयरपोर्ट्स काउंसिल इंटरनेशनल (एसीआई) और अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (आईसीएओ) की यात्री यातायात रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में कुल यात्री संख्या बढ़कर 9.4 अरब (9.4 billion) थी. जो 2025 में 9.8 अरब के करीब रही. 2030 तक वैश्विक यात्री यातायात 12 अरब से अधिक होने का अनुमान है. 2042 तक इसके 19.5 अरब तक पहुंचने का अनुमान है, जो 2024 में दर्ज स्तरों की तुलना में दोगुने से ज्यादा है. इसी तरह यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के अनुसार, 2030 तक लगभग एक लाख सैटेलाइट छोड़े जाने की उम्मीद है.

स्पेस जंक को साफ करने में कितना समय लगेगा: विशेषज्ञों का मानना है कि आसमानी कचरे के एक टुकड़े को हटाने की लागत उसके आकार, द्रव्यमान और कक्षीय स्थिति के आधार पर अलग-अलग हो सकती है. इस समस्या का कोई आसान या सस्ता समाधान नहीं है. इसे साफ करना बहुत महंगा होगा और इसमें कई साल लगेंगे. बड़े टुकड़े भारी होते हैं और इन्हें हटाना मुश्किल होता है. छोटे टुकड़ों को ट्रैक करना बहुत कठिन है.

स्पेस जंक को कैसे साफ कर सकते हैं, ये कितना खतरनाक: स्पेस जंक को हटाने के लिए, विशेष रूप से बड़े और अधिक खतरनाक वस्तुओं को, उनके करीब ले जाना होगा और प्रत्येक वस्तु के समान गति बनाए रखनी होगी. फिर, किसी तरह उनसे जुड़ना होगा और उन्हें निचली कक्षा में ले जाना होगा या सीधे समुद्र में गिराना होगा. इसमें विस्फोट का खतरा भी होता है. इसीलिए अंतरिक्ष यात्रियों को यह कार्य करने की अनुमति नहीं दी जाती.

इसके अलावा ये संपत्ति के अधिकारों का भी मुद्दा है. आप किसी अन्य देश के सैटेलाइट या रॉकेट को उनकी अनुमति के बिना नहीं ले सकते. उन छोटी-छोटी लेकिन खतरनाक वस्तुओं को नियंत्रित करने का कोई आसान तरीका नहीं है. दरअसल, उनमें गोलियों से भी अधिक गति की ऊर्जा होती है और वे दस गुना तेजी से चलते हैं. गोली को पकड़ना मुश्किल है.

स्पेस जंक को साफ करने में कितना खर्चा आएगा: नासा के विश्लेषण के अनुसार, मलबे के टुकड़ों को लेजर से हटाने की लागत 360 मिलियन डॉलर (करीब 3,024 करोड़ रुपए) से अधिक हो सकती है. इसके विपरीत, एक मलबे को हटाने के मिशन को डेवलप करने की लागत 100 मिलियन डॉलर (830-840 करोड़ रुपए) से अधिक हो सकती है. ये निवेश सैटेलाइट भेजने वाले देशों को नुकसान, परिचालन समय की हानि से बचा सकते हैं.

जिसने एक पाठ भी सीख लिया, उसने सब सीख लिया।

महाभारत में कथा है कि द्रोण ने सोचा था कि इन सारे पांडवों और कौरवों में युधिष्ठिर सबसे ज्यादा बुद्धिमान मालूम होता है। लेकिन थोड़े दिनों के अनुभव से लगा कि वह तो बिलकुल बुद्धू है।

दूसरे बच्चे तो आगे जाने लगे, नया-नया पाठ रोज सीखने लगे और युधिष्ठिर पहले पाठ पर ही रुका रहा। आखिर द्रोण की सीमा- क्षमता भी समाप्त हो गई। द्रोण ने पूछा, तुम आगे बढ़ोगे कि पहले ही पाठ पर रुके रहोगे?

लेकिन युधिष्ठिर ने कहा, जब तक पहला पाठ समझ में न आ जाए, तब तक दूसरे पाठ पर जाने में सार भी क्या है?

पहला पाठ था सत्य के संबंध में। दूसरे बच्चों ने याद कर लिया, पढ़ लिया, आगे बढ़ गए। लेकिन युधिष्ठिर ने कहा कि मैं जब तक सत्य बोलने ही न लगूं, तब तक दूसरे पाठ पर जाऊं कैसे?

और आप जल्दी मत करें। तब द्रोण को समझ में आया। खुद युधिष्ठिर की इस मनोदशा को देख कर द्रोण को पहली दफा समझ में आया कि सत्य के आगे और पाठ हो भी क्या सकता है!

तब उन्होंने कहा, तू जल्दी मत कर। तू पहला पाठ ही पूरा कर ले तो सब पाठ पूरे हो गए। फिर दूसरा पाठ और है कहां? अगर सत्य बोलना ही आ गया, सत्य होना आ गया, तो फिर और पाठ की कोई जरूरत नहीं है।

लेकिन पाठ अगर सिर्फ पढ़ने हों, तब एक बात है; पाठ अगर जीने हों, तो बिलकुल दूसरी बात है।

अंत में महाभारत में कथा है कि जब सारे भाई स्वर्गारोहण के लिए गए, तो एक-एक गिरने लगे, पिघलने लगे, गलने लगे; स्वर्ग के मार्ग पर धीरे-धीरे एक-एक कर गिरने लगे, द्वार तक सिर्फ युधिष्ठिर पहुंचे

और उनका कुत्ता पहुंचा। सत्य पहुंचा; और सत्य का जिसने गहरा सत्संग किया था, वह पहुंचा। वह कुत्ता था उनका, वह सदा उनके साथ रहा था। उसकी निष्ठा अपार थी। भाइयों की भी निष्ठा इतनी अपार न थी।

भाई भी रास्ते में गल गए, कुत्ता न गला। उसकी श्रद्धा अनन्य थी। उसने कभी संदेह किया ही न था। उसने युधिष्ठिर के इशारे को ही अपना जीवन समझा था।

युधिष्ठिर भी चकित हुए कि भाइयों का भी साथ छूट गया, वे भी गिर गए मार्ग पर, स्वर्ग के द्वार तक न आ सके, आ सका एक कुत्ता!

स्वर्ग का द्वार खुला, युधिष्ठिर का स्वागत हुआ, लेकिन द्वारपाल ने कहा, कृपया आप ही भीतर आ सकते हैं, कुत्ता न आ सकेगा। कुत्ता कभी इसके पहले स्वर्ग में प्रवेश भी नहीं पाया। आदमी ही मुश्किल से पाते हैं।

तो युधिष्ठिर ने कहा, फिर मैं भीतर न आ सकूंगा; जिस कुत्ते ने मेरा इतने दूर तक साथ दिया, जहां मेरे भाई भी मेरे साथी न हो सके, संगी न हो सके; जिसकी श्रद्धा ऐसी अनन्य है; जो मेरे साथ इतने दूर आया,

उसका साथ मैं न छोड़ सकूंगा; अन्यथा मैं कुत्ते से भी गया-बीता हुआ। जिसने मेरा साथ दिया, उसका साथ मैं दूंगा, द्वार तुम बंद कर लो।

तब सारा स्वर्ग हंसने लगा; भीड़ इकट्ठी हो गई देवताओं की और उन्होंने कहा, आप भीतर आएं। और तब गौर से देखा युधिष्ठिर ने, तो कुत्ता न था, स्वयं विष्णु थे! वह परीक्षा थी। वह परीक्षा थी,

अगर युधिष्ठिर उस समय कुत्ते को भूल जाते और भीतर प्रवेश कर देते तो स्वर्ग चूक जाता। वह परीक्षा थी--प्रेम की, श्रद्धा की, अनन्य भाव की।

एक ही पाठ युधिष्ठिर ने सीखा, सत्य। उतना काफी हुआ; उतना स्वर्ग तक ले जा सका। अर्जुन को सीखने में बड़ी देर लगी। पूरी गीता कृष्ण ने कही, तो भी संदेह उठते चले गए। युधिष्ठिर ने सिर्फ एक पाठ सीखा जीवन में, वह छोटा सा पाठ था सत्य का।
गुरु तक को शक हुआ कि यह थोड़ा मंद बुद्धि मालूम होता है, पहले ही पाठ पर अटका है। लेकिन फिर समझ में आया कि पहले पाठ के आगे और पाठ कहां हैं!

जिसने एक पाठ भी सीख लिया, उसने सब सीख लिया। तुम सीखने की ज्यादा दौड़ में मत पड़ना, उसमें तुम वंचित हो जाओगे। किंचित भी बोध परमात्मा का आ गया, परमात्मा का गीत थोड़ा सा भी सुनाई पड़ गया, एक कड़ी भी कान में पड़ गई,

एक शब्द भी हृदय तक उतर गया, तो वही बीज बन जाएगा, वृक्ष बनेगा, तुम अनंत सुगंध से भर जाओगे। एक बीज में सब कुछ छिपा है।

हम कोरे के कोरे रह जाते हैं, गीता कंठस्थ हो जाती है, गीत सुनाई नहीं पड़ता; शब्दों से मस्तिष्क भर जाता है, हृदय भीगता नहीं; दोहरा सकते हैं गीता को, आंख में एक आंसू नहीं उतरता;

प्राण में कोई स्वर नहीं बजता; पैर में कोई थिरक नहीं आती; पत्थर की तरह, मुर्दे की भांति, यंत्र की भांति दोहरा देते हैं; भीतर सब अछूता ही रह जाता है; रेखा भी नहीं पड़ती, सत्य की छाया भी नहीं पड़ती।

             🙏ॐ श्री परमात्मने नमः 🙏
                     वयं राष्ट्रे जागृयाम 

नामत्रय अस्त्रमंत्र - वंदे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्

किसी भी रोग - बीमारी को नष्ट करने में असरकारक है यह नाम त्रय अस्त्र मंत्र!  

विष्णु भगवान के तीन नामों को महारोगनाशक अस्त्र कहा गया है। अर्थात् इस तीन नाम के जप से कैंसर, किडनी, पैरालाइसिस आदि जैसी बड़ी से बड़ी बीमारी का संकट भी टल जाता है। 

जो पूरे विष्णु सहस्रनाम को पढ़ने में असमर्थ हैं और किसी भयंकर व्याधि से पीड़ित हैं तो साधना में बैठकर भगवान विष्णु जी के इन तीन नामों का कम से कम 108 बार जाप प्रतिदिन सुबह अथवा शाम में करें। 

जप नहीं कर सकते तो कॉपी या डायरी लेकर इस मंत्र को प्रतिदिन 108 बार लिखें। लिखने के बाद कॉपी को इधर-उधर रखने की जगह अपने पूजा कक्ष में रखें।

कोई बहुत बीमार है, और वो जाप नहीं कर सकता, लिख नहीं सकता, तो उनके परिवार का कोई सदस्य उनके सिरहाने बैठकर कम से कम 108 बार मंत्र जाप करे ताकि उनके कानों में मंत्र जाए।

इस मंत्र के उदय की कथा:- 

मां ललिता त्रिपुरा महासुन्दरी और भंडासुर के मध्य जब युद्ध हुआ उस समय व्याधिनाशक इस महाअस्त्र मंत्र का उदय हुआ था। 

युद्ध में पराजय जानकर भंडासुर ने महारोगास्त्र का प्रयोग किया, जिसे मां त्रिपुरा सुंदरी ने इस नामत्रय अस्त्र मंत्र का निर्माण कर उस महारोगास्त्र को नष्ट कर दिया। उसके बाद से ही किसी भी बीमारी को नष्ट करने में इस मंत्र का उपयोग सनातन धर्म में होता आ रहा है। 
यह नामत्रय मंत्र है:-
ॐ अच्युताय नमः
ॐ अनंताय नमः
ॐ गोविंदाय नमः 

इन तीन नामों की महिमा गाते हुए महर्षि वेदव्यास जी कहते हैं:- 

अच्युतानन्तगोविन्द नामोच्चारण भेषजात्।
नश्यन्ति सकला रोगा: सत्यं सत्यं वदाम्यहम्।

हां, यह मंत्र काम तभी करेगा जब आपको भगवान विष्णु में संपूर्ण आस्था हो, उनके समक्ष आपका संपूर्ण समर्पण हो। 

वंदे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम् 🙏
साभार - Sanatan Dharm 
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जय श्रीहरि: 
वयं राष्ट्रे जागृयाम