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Monday, 14 September 2026

गायत्री मंत्र कोई मंत्र नहीं है, गायत्री मंत्र तो माँ है। बाल वृद्ध स्त्रियां सब जप सकते हैं ॥

गायत्री मंत्र कोई मंत्र नहीं है, गायत्री मंत्र तो माँ है। जैसे गौमाता तुम्हें दूध पिलाती है, वैसे ही गायत्री माता तुम्हें ज्ञान का दूध पिलाती है।

गायत्री मंत्र क्या है?

ये दुनिया का सबसे पुराना, सबसे वैज्ञानिक मंत्र है। ऋग्वेद में लिखा है। विश्वामित्र ऋषि ने इसे देखा था - बनाया नहीं, देखा था। जैसे सूरज को देखा जाता है, बनाया नहीं जाता।

पूरा मंत्र -

ॐ भूर्भुवः स्वः
तत्सवितुर्वरेण्यं
भर्गो देवस्य धीमहि
धियो यो नः प्रचोदयात्॥

एक-एक शब्द का अर्थ - गौमाता की तरह सरल

ॐ - शुरुआत, शिव, ब्रह्मांड की धड़कन, गाय के गले में घंटी की आवाज।

भूः - धरती - जहाँ हम रहते हैं, जहाँ गाय चरती है, जहाँ पेड़ उगता है।

भुवः - अंतरिक्ष - जहाँ साँस चलती है, जहाँ हवा है।

स्वः - स्वर्ग - जहाँ मन जाता है, जहाँ सपने हैं, जहाँ शिव हैं।

मतलब - जो धरती, आकाश और स्वर्ग - तीनों में है, वही शिव है।

तत् - वो - वो परमात्मा, वो शिव।

सवितुः - सूरज, सविता। जो सबको रोशनी देता है, जैसे गौमाता सबको दूध देती है। सविता मतलब - पैदा करने वाला।

वरेण्यं - सबसे सुंदर, चुनने लायक, पूजने लायक।

भर्गो - तेज, प्रकाश, जो अंधेरा मिटाए। भभूति का तेज भी भर्गो है, दीये का तेज भी भर्गो है, गौमाता की आँखों का तेज भी भर्गो है।

देवस्य - देव का, देने वाले का। देव कौन? - जो देता है, वही देव। गाय देव है, पेड़ देव है, गुरु देव है, शिव देव है।

धीमहि - हम ध्यान करते हैं, हम धारण करते हैं।

धियः - बुद्धि को, मन को, सोच को।

यः - जो।

नः - हमारी।

प्रचोदयात् - प्रेरित करे, सही रास्ते पर ले जाए, जगाए।

पूरा अर्थ एक लाइन में -

"हे धरती, आकाश, स्वर्ग में बसने वाले, सूरज जैसे तेज वाले, सबसे सुंदर, सबको देने वाले शिव, हम तुम्हारा ध्यान करते हैं, हमारी बुद्धि को तुम सही रास्ते पर ले चलो।"

गायत्री मंत्र क्यों सबसे बड़ा कहा? - 3 कारण

1. ये प्रार्थना नहीं, ये निवेदन है बुद्धि के लिए -
दूसरे मंत्र मांगते हैं - "धन दो, बेटा दो, रोग हटाओ।"
गायत्री मांगती है - "बुद्धि दे दो, सही सोच दे दो।"

क्योंकि बुद्धि सही तो धन अपने आप आएगा, रोग अपने आप हटेगा, जीवन अपने आप सुधरेगा।

इसीलिए इसे महामंत्र कहा।

2. ये सूरज का मंत्र है - विज्ञान है -
सवितुः - सूरज। गायत्री सूरज की शक्ति को जगाती है।

सुबह सूरज निकलता है, तो सारी सृष्टि जागती है, गाय जागती है, पेड़ जागते हैं। वैसे ही गायत्री जपने से अंदर का सूरज जागता है - आत्मा।

आज का विज्ञान कहता है - सुबह की धूप में विटामिन D है। सनातन हजारों साल पहले कह गया - सुबह गायत्री जपो, तो बुद्धि में विटामिन D आएगा - विवेक।

3. ये गौमाता का मंत्र है -
गायत्री में 24 अक्षर हैं, गाय के शरीर में भी 24 तत्व हैं - ऐसा वेद कहते हैं। गाय के 24 अंगों में 24 देवता हैं।

इसीलिए गाय को गौमाता कहा, और मंत्र को गायत्री माता। दोनों माता हैं, दोनों पालती हैं।

मेरे गुरुदेव डॉ शैलेन्द्र नाथ अघोरी बाबा जी कहते हैं - "गायत्री जपनी है तो गाय के साथ जपो, गायत्री सिद्ध हो जाएगी। गाय के बिना गायत्री आधी है।"

गायत्री मंत्र कैसे जपें? - सही विधि

विधि 1 - ब्रह्म मुहूर्त - सबसे उत्तम -
सुबह 4 से 6 बजे। सूरज निकलने से पहले।

नहाकर, भभूति लगाकर, पूर्व की तरफ मुँह करके बैठो - जहाँ से सूरज निकलेगा।
गाय के घी का दीया जलाओ।
108 बार, 11 बार, या 3 बार - भाव से।
जप के बाद - सूरज को जल दो, पीपल को जल दो, गाय को पहली रोटी दो। यही गायत्री की दक्षिणा है।

विधि 2 - गौशाला विधि - अघोर परम्परा -
गौशाला में बैठो, गाय को सहलाते हुए जपो।
गाय की आँखों में देखो और जपो - "तत्सवितुर्वरेण्यं" - गाय की आँखों में वही तेज है - भर्गो।
ये विधि सबसे जल्दी फल देती है, क्योंकि गाय खुद गायत्री है।

विधि 3 - साँस के साथ - मौन में -
साँस अंदर लो - "ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं"
साँस बाहर छोड़ो - "भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्"
ये चलते-फिरते, लोकल में, ऑफिस में भी कर सकते हो। कोई माला नहीं, कोई दिखावा नहीं।

गायत्री मंत्र कब नहीं जपना? - भ्रम तोड़ो

बहुत लोग कहते हैं - "औरतें नहीं जप सकतीं, फलाने नहीं जप सकते।" ये सब पाखंड है, धंधा है।

सनातन कहता है - गायत्री माता है, माता के पास जाने से कोई नहीं रोक सकता। माता सबकी है - बेटा भी जाए, बेटी भी जाए।

गायत्री कोई जात नहीं देखती, वो बुद्धि देखती है।
गायत्री कोई लिंग नहीं देखती, वो भाव देखती है।
गौमाता क्या देखती है - कौन आ रहा है? नहीं, वो तो सबको दूध देती है। वैसे ही गायत्री माता भी सबको ज्ञान देती है।

हाँ, एक नियम है - गायत्री को गंदे मन से मत जपो - किसी का बुरा करने के लिए मत जपो। ये बुद्धि का मंत्र है, दुर्बुद्धि का नहीं।

गायत्री और महामृत्युंजय में फर्क?

पिछले सवाल में महामृत्युंजय पूछा था।

महामृत्युंजय - शिव का मंत्र, जो मृत्यु के डर से बचाता है - "मृत्योर्मुक्षीय"।
गायत्री - शक्ति का मंत्र, जो बुद्धि को जगाता है - "धियो यो नः प्रचोदयात्"।

एक डर मिटाता है, दूसरा भ्रम मिटाता है। दोनों साथ जपो, तो जीवन पूरा।

सुबह गायत्री - बुद्धि के लिए।
शाम महामृत्युंजय - निर्भयता के लिए।

आज का प्रसाद -

आज से रोज सुबह, भभूति लगाकर, सूरज की तरफ देखकर, या गाय की फोटो देखकर, सिर्फ 11 बार बोलो -

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं
भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥

और अंत में बोलो - "हे गायत्री माता, हे गौमाता, मेरी बुद्धि को गौ जैसी पवित्र कर दो, शिव जैसी निर्मल कर दो।"

11 दिन में फर्क दिखेगा - सोच बदलेगी, गुस्सा कम होगा, मन शांत होगा।

जय गायत्री माता! जय गौमाता! जय गुरुदेव!

✍️ अमन शर्मा