Pages

Monday, 18 May 2026

कहीं भी काम करें - काम के प्रति समर्पण और प्रतिबद्धता को सबसे ऊपर रखें ।

कहीं भी काम करें, काम के प्रति समर्पण और प्रतिबद्धता को सबसे ऊपर रखें क्योंकि इससे आपको पैसा मिलता है या प्रशंसा और ज्यादातर मामलों में तो दोनों

इसी साल की बात है। एक व्यक्ति एटीएम से पैसे निकाल रहा था, तभी दूसरा व्यक्ति अंदर गया और उससे पांच हजार रुपए छीनकर भाग गया। पीड़ित ने उसका पीछा किया। 74 वर्षीय अनुराधा कुलकर्णी वहीं ट्रैफिक संभाल रही थीं और उन्होंने यह सब देखा। उन्होंने तुरंत अपनी बाइक स्टार्ट की, पीड़ित को लिफ्ट दी और चोर का पीछा करते हुए देखा कि वह टाटा कॉलोनी नामक एक रिहायशी इलाके में घुस रहा है। उनके तेज दिमाग को पता था कि कॉलोनी का केवल एक ही एग्जिट पॉइंट है, इसलिए उन्होंने पुलिस को सूचित कर गेट पर पीड़ित के साथ इंतजार किया। एक घंटे बाद, आरोपी भागने की कोशिश कर रहा था, तभी पुलिस ने उसे पकड़ लिया और पैसे बरामद कर लिए।
दो महीने पहले एक व्यक्ति सड़क पार करते समय ट्रक से कुचलकर मारा गया। सड़क के बीचों-बीच खड़ी हुई अनुराधा ने देखा कि पीड़ित की चप्पल डिवाइडर में फंस गई थी, जिससे वह चलते ट्रक के सामने गिर गया था। गुस्साए स्थानीय लोग ट्रक ड्राइवर पर हमला करने लगे। अनुराधा ने तुरंत एक्शन लिया और गवाही दी कि यह ड्राइवर की गलती नहीं थी। वह इस चल रहे मामले में मुख्य गवाह हैं। लगभग छह महीने पहले एक सोसाइटी के चौकीदार का मोबाइल फोन चोरी हो गया था। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर स्थानीय पुलिस ने अनुराधा से आरोपी की पहचान करने में मदद मांगी। उन्होंने तीन दिनों में मोबाइल चुराने वाले सफाईकर्मी की पहचान की, जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया और मोबाइल फोन बरामद कर लिया।
आप सोच रहे होंगे कि यह 74 वर्षीय महिला हमेशा सड़क के बीच में क्या करती रहती हैं? हर दिन वह बाइक पर घूमती हैं, जहां भी ट्रैफिक नजर आता है, वहां उतरकर ट्रैफिक संभालती हैं, एंबुलेंस को तेजी से जाने में मदद करती हैं और स्कूली बच्चों को सड़क पार कराती हैं। लगभग 30 साल पहले की बात है, एक बार उन्होंने देखा कि मुंबई में सांताक्रूज में एक स्कूल के पास लोग गलत लेन में आ रहे थे, तभी उन्होंने अकेले ही लोगों को वहां से आने से रोक दिया था। एक पुलिस अधिकारी ने उन्हें ऐसा करते देखा और उन्हें ट्रैफिक वार्डन के रूप में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने मुंबई के बायकला में ट्रैफिक ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में अपनी ट्रेनिंग के बाद लिखित और मौखिक परीक्षा पास की। तब से, वह मुंबई के पश्चिमी उपनगरीय इलाके जुहू-विले पार्ले-सांताक्रूज में स्वेच्छा से यह काम कर रही हैं। उनके एक फोन कॉल पर पुलिस तुरंत कार्रवाई में जुट जाती है क्योंकि वह केवल तभी कॉल करती हैं जब वह स्थिति को संभाल नहीं पातीं, चाहे वह ट्रैफिक की समस्या हो या कोई असामाजिक गतिविधि।
साल 2014 में बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर ने उनके उत्कृष्ट काम के लिए उन्हें सम्मानित किया था और उन्होंने कोविड के दौरान कोरोना पॉजिटिव लोगों को भोजन पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वह इन उपनगरों में सबसे लोकप्रिय चेहरा हैं क्योंकि ट्रैफिक जाम होने पर किसी को उन्हें बुलाने की जरूरत नहीं पड़ती। वह खुद पहुंच जाती हैं और ट्रैफिक वार्डन का काम करती हैं। ट्रैफिक सुचारू होने के बाद, वह अपनी बाइक लेती हैं और अगले स्थान पर चली जाती हैं, जहां उनकी जरूरत होती है। ठेले वाले से लेकर दुकानदार तक, वहां के सभी लोकल लोग इस शहर को ट्रैफिक जाम से मुक्त रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की सराहना करता है। बैंक में काम करने वाले उनके पति का बहुत पहले निधन हो चुका है और उनकी सास ने उन्हें एक घर दिया है, जिसके किराए से और समय-समय पर रिश्तेदारों की मदद से उनकी जरूरतें पूरी होती रहती हैं। इसलिए वह मुंबई ट्रैफिक पुलिस के लिए फ्री में काम करते हुए अपना सारा समय बिताती हैं।

फंडा यह है कि जो लोग किसी भी काम के प्रति प्रतिबद्ध होते हैं, फिर चाहे वह स्वप्रेरणा से हो या उसके एवज में कोई पैसा मिले, एेसे लोगों को हमेशा पहचान और सराहना मिलती है। इसलिए कहीं भी काम करें, काम के प्रति समर्पण और प्रतिबद्धता को सबसे ऊपर रखें क्योंकि इससे आपको पैसा मिलता है या प्रशंसा और ज्यादातर मामलों में तो दोनों।
✍️Management Funda of Raghuraman 

इतिहास में जब भी किसी सरकार के पास रोजगार, महंगाई और आय पर जवाब कम होते हैं, वह जनता को भावनात्मक युद्ध में डाल देती है।

बीजेपी का 2014 के बाद में पहला खेल था “दुश्मन बनाओ और अर्थव्यवस्था छुपाओ”। इतिहास में जब भी किसी सरकार के पास रोजगार, महंगाई और आय पर जवाब कम होते हैं, वह जनता को भावनात्मक युद्ध में डाल देती है। 

रोमन साम्राज्य में इसे “ब्रेड एंड सर्कस” कहा जाता था। जनता को मनोरंजन और दुश्मन दो, वह टैक्स भूल जाएगी। भारत में इसका देसी संस्करण निकला “मंदिर और मीडिया”। 

बेरोजगारी बढ़ रही है, लेकिन टीवी पर बहस होगी किसने किसको क्या कहा। पेट्रोल 100 पार कर गया, लेकिन जनता का ध्यान कहीं और मोड़ दो। क्योंकि अगर जनता 6 महीने लगातार सिर्फ रोजगार और महंगाई पर सोचने लगे, तो आधी राजनीति ICU में पहुंच जाएगी। 

तुम्हें गुस्सा अर्थव्यवस्था पर नहीं, पड़ोसी की थाली पर दिलाया गया।

फिर सरकार ने सीधे टैक्स कम और “छुपे टैक्स” ज्यादा लगाए। गरीब आदमी Income Tax नहीं देता, लेकिन पेट्रोल पर टैक्स देता है, गैस पर टैक्स देता है, दूध, साबुन, टूथपेस्ट, मोबाइल रिचार्ज, हर चीज पर GST देता है। मतलब रिक्शा वाला और अरबपति दोनों टूथपेस्ट पर लगभग समान टैक्स देते हैं। 

इसे कहते हैं “Indirect Tax Trap”। सरकार ने अमीरों पर सीधा टैक्स बढ़ाने की बजाय आम आदमी की रोजमर्रा की सांसों पर टैक्स लगा दिया। और कमाल यह कि आदमी को लगा “मैं टैक्स नहीं देता”। अरे भाई, तुम तो चाय की प्याली से टैक्स दे रहे हो। 

फर्क इतना है कि पहले जेब काटते समय आवाज आती थी, अब डिजिटल मशीन से कटती है इसलिए दर्द कम महसूस होता है।

फिर तीसरा काम तुम्हें “नागरिक” से “समर्थक” बनाया गया। नागरिक सवाल पूछता है। समर्थक बचाव करता है। पहले जनता सरकार से पूछती थी “रोजगार कहां है?” अब जनता खुद दूसरे लोगों से लड़ती है “देश खतरे में है सवाल मत पूछो।” यह लोकतंत्र का सबसे बड़ा सॉफ्टवेयर अपडेट था। 

जनता को ऐसा भावनात्मक सैनिक बना दो कि वह अपनी ही तकलीफ को राष्ट्रभक्ति समझने लगे। गैस महंगी? देशहित। पेट्रोल महंगा? देशहित। नौकरी नहीं? आत्मनिर्भर बनो। अस्पताल महंगे? योग करो। मतलब हर समस्या का समाधान जनता खुद बने। सरकार सिर्फ इवेंट मैनेजमेंट करे।

चुनाव से पहले सड़कें चमकेंगी, योजनाएं बरसेंगी, विज्ञापन ऐसे चलेंगे जैसे देश दुबई को खरीदने वाला हो। लेकिन चुनाव खत्म होते ही टैक्स, दाम, कटौती। क्यों? क्योंकि चुनाव आज विचारधारा से नहीं, “Narrative Investment” से लड़े जाते हैं। 

हजारों करोड़ विज्ञापन, प्रचार, सोशल मीडिया, रैलियां, आईटी सेल, डेटा मैनेजमेंट में जाते हैं। फिर वह पैसा कहीं से निकलेगा। और सबसे आसान एटीएम कौन है? जनता। इसलिए चुनाव के बाद अक्सर महंगाई का इंजेक्शन लगता है। 

जनता भूल जाती है कि चुनावी मुफ्तखोरी का बिल आखिर भर कौन रहा है। वही आदमी जो लाइन में सिलेंडर खरीद रहा है।

बीजेपी की सबसे बड़ी ताकत उसकी राजनीति नहीं, “ध्यान नियंत्रित करने की कला” है। अगर देश में बेरोजगारी बढ़े और जनता रोज उसी पर चर्चा करे, तो सरकार मुश्किल में पड़ जाएगी। लेकिन अगर जनता दिनभर धर्म, पाकिस्तान, इतिहास, फिल्म, कपड़े, खानपान, यूट्यूबर और बहिष्कार में उलझी रहे, तो अर्थव्यवस्था बैकग्राउंड में चली जाती है।

यह बिल्कुल वैसा है जैसे जेबकतरा पहले सड़क पर तमाशा करवाता है, फिर जेब काटता है। जनता तमाशा देखती रहती है। जेब बाद में टटोलती है।

अगर देश सच में इतना मजबूत और आत्मनिर्भर हो गया है, तो फिर हर कुछ महीने में जनता से “त्याग” क्यों मांगा जाता है? कभी पेट्रोल कम जलाओ। कभी बिजली बचाओ। कभी खर्च कम करो। कभी घर पर रहो। कभी कम खरीदो। 

अरे भाई, 12 साल से लगातार सत्ता में बैठी सरकार अगर आज भी जनता से कह रही है कि “कठिन समय है”, तो फिर वह सुनहरे दिन गए कहां? टीवी पर? ड्रोन शो में? विज्ञापनों में?

नेहरू के समय देश सचमुच गरीब था, टूटा हुआ था, भूखा था। फिर भी सरकार कहती थी “हम फैक्ट्री बनाएंगे, IIT बनाएंगे, बांध बनाएंगे, वैज्ञानिक संस्थाएं बनाएंगे।” आज देश खुद को दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बताता है, लेकिन जनता से कहा जाता है “कम खर्च करो, त्याग करो, सहन करो।” 

यही सबसे बड़ा विरोधाभास है। गरीब देश उम्मीद दे रहा था। अमीर बनने का दावा करने वाला देश डर बेच रहा है।

तुम्हें यह यकीन दिला दिया गया कि सरकार की आलोचना करना देश की आलोचना है। बस यहीं लोकतंत्र आधा मर जाता है।

क्योंकि जिस दिन जनता सवाल पूछने से डरने लगे, उस दिन नेता राजा बन जाता है और नागरिक भक्त। फिर महंगाई भी प्रसाद लगती है और बेरोजगारी भी राष्ट्रसेवा।

साभार 
https://www.facebook.com/share/p/18gLG782P6/

साभार - Pankaj Kumar Jat ( फेसबुक  पोस्ट )
वयं राष्ट्रे जागृयाम 
18/5/2026

Sunday, 17 May 2026

रुद्राक्ष साबर मंत्र

रुद्राक्ष शाबर मंत्र का उपयोग रुद्राक्ष की माला को धारण करने से पहले उसकी ऊर्जा को जागृत करने, उसे शुद्ध करने और सिद्ध करने के लिए किया जाता है। 
रुद्राक्ष उत्पत्ति एवं जागृति शाबर मंत्रयह एक अत्यंत प्रभावशाली और पारंपरिक शाबर मंत्र है:-
शुद्ध और स्पष्ट मंत्र
"सत नमो आदेश, गुरुजी को आदेश। ओम गुरुजी, मुख में ब्रह्मा, मध्य में विष्णु, लिंग नाम महेश्वर, सर्वदेव नमस्कारम्, रुद्राक्षाय नमो नमः।गगनमंडल में धुंधुकारा, पापरहित निरंजन निराकार। निराकार में चरण-पादुका, चरण-पादुका में पिंडी, पिंडी में वासुकि, वासुकि में कासुकि, कासुकि में कूर्म, कूर्म में मारी, मारी में नागफनी। अलख पुरुष ने बैल के सींग पर राई ठहराई। धीरज-धर्म की धुनी जमाई। वहाँ पर रुद्राक्ष सुमेरु पर्वत पर जमाया, उसमें से फूटीं छह डालियाँ।एक गया पूर्व, एक गया दक्षिण, एक गया पश्चिम, एक गया उत्तर, एक गया आकाश, एक गया पाताल।उसमें लगा एक-मुखी रुद्राक्ष, श्री रुद्र पर चढ़ाइए श्री ओंकार आदिनाथ जी को।दो-मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइए चंद्र-सूर्य को।तीन-मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइए त्रिलोकी को।चार-मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइए चारों वेदों को।पंच-मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइए पंच पांडवों को।छह-मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइए षट् (छह) दर्शन को।सात-मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइए सप्त समुद्रों को।आठ-मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइए अष्ट कुली नागों को।नव-मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइए नवग्रहों को।दस-मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइए दसों दिशाओं को।ग्यारह-मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइए ग्यारह रुद्रों को।द्वादश (बारह) मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइए बारह पंथों (सूर्य) को।तेरह-मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइए तैंतीस कोटि देवताओं को।चौदह-मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइए चौदह भुवनों (चौदह रत्नों) को।पंद्रह-मुखी रुद्राक्ष सोहे (शोभा दे) श्रृंगार को।सोलह-मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइए सोलह कलाओं को।सत्रह-मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइए श्री सीता माता को।अठारह-मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइए अठारह भार वनस्पतियों को।उन्नीस-मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइए अलख पुरुष को।बीस-मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइए विष्णु भगवान को।इक्कीस-मुखी रुद्राक्ष चंद्रकाय शिव को।रुद्राक्ष मंत्र संपूर्ण भया। श्री नाथ जी के चरण कमल में आदेश, आदेश!"
मंत्र का सरल अर्थ (यह मंत्र क्या कहता है?)यह नाथ संप्रदाय का एक पारंपरिक रुद्राक्ष महिमा शाबर मंत्र है। इसमें बताया गया है कि:-
शुरुआत में:- गुरु, ब्रह्मा, विष्णु और शिव (महेश्वर) को प्रणाम किया गया है।सृष्टि की उत्पत्ति: जब संसार में कुछ नहीं था (धुंधुकारा था), तब निराकार भगवान से लेकर सुमेरु पर्वत तक की रचना हुई। उस सुमेरु पर्वत पर रुद्राक्ष का वृक्ष उगा, जिसकी छह डालियाँ छह दिशाओं (पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, आकाश, पाताल) में फैल गईं।रुद्राक्ष का महत्व: इसके बाद १ मुखी से लेकर २१ मुखी तक के रुद्राक्षों का महत्व बताते हुए उन्हें अलग-अलग देवी-देवताओं, वेदों, ग्रहों और शक्तियों को समर्पित (अर्पित) किया गया है।
यहाँ इस रुद्राक्ष शाबर मंत्र की सरल साधना विधि, नियम और इससे मिलने वाले विशेष लाभ दिए गए हैं:-
 मंत्र जाप की सरल विधि शुभ दिन:-
 इस मंत्र की साधना किसी भी सोमवार, प्रदोष व्रत, शिवरात्रि या सावन के सोमवार से शुरू करना सबसे उत्तम होता है।
समय: सुबह सूर्योदय के समय या शाम को पूजा के समय।
आसन और कपड़े: साफ-सुथरे या पीले/सफेद रंग के कपड़े पहनें। कुशा (घास) या ऊन के आसन पर बैठें।
दिशा: मंत्र पढ़ते समय आपका मुख उत्तर या पूर्व दिशा की तरफ होना चाहिए।
पूजन सामग्री: भगवान शिव (या नवनाथ जी) की मूर्ति/तस्वीर के सामने शुद्ध घी का दीपक और अगरबत्ती जलाएं। एक तांबे के पात्र में साफ जल रखें।
जाप संख्या: इस मंत्र का प्रतिदिन १, ५ या ११ बार श्रद्धापूर्वक पाठ करें। यदि आपके पास कोई रुद्राक्ष है, तो उसे हाथ में रखकर यह पाठ करना और भी लाभकारी होता है।
साधना के जरूरी नियम पवित्रता:-
 शाबर मंत्रों में शुद्धता का बहुत महत्व है। तन और मन दोनों से पवित्र रहें।खान-पान: साधना के दिनों में तामसिक भोजन (प्याज़, लहसुन, मांस, मदिरा) का पूरी तरह त्याग करें।
रुद्राक्ष का सम्मान: यदि आप रुद्राक्ष धारण करते हैं, तो उसे कभी भी अशुद्ध हाथों से न छुएं और सोते समय या श्मशान भूमि में जाते समय उतार दें।
विश्वास: शाबर मंत्र सीधे और सरल होते हैं, इसलिए इन पर पूर्ण विश्वास (श्रद्धा) रखना जरूरी है।
 इस मंत्र के चमत्कारी लाभ रुद्राक्ष की शुद्धि:-
 यदि आप नया रुद्राक्ष पहनने जा रहे हैं, तो इस मंत्र को पढ़ते हुए उस पर गंगाजल छिड़कने से वह सिद्ध और जागृत हो जाता है।
नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा:- इसके नियमित पाठ से घर की नकारात्मक शक्तियां, नजर दोष और तंत्र-मंत्र का असर खत्म होता है।
ग्रह दोष शांत होना:- इस मंत्र में १ से २१ मुखी रुद्राक्ष का नाम लेकर सभी देवताओं और नवग्रहों को याद किया गया है। इसलिए इसका पाठ करने से कुंडली के सभी ग्रह दोष शांत होते हैं।
मानसिक शांति और एकाग्रता:-
 भगवान शिव और गुरु गोरखनाथ की कृपा से मन का तनाव दूर होता है और एकाग्रता बढ़ती है।

Saturday, 16 May 2026

Electronics चीजें अब 'टिकाऊ' नहीं, सिर्फ 'बिकाऊ' हैं! ब्रांड्स की इस Secret Strategy को समझिए!

Electronics चीजें अब 'टिकाऊ' नहीं, सिर्फ 'बिकाऊ' हैं! ब्रांड्स की इस Secret Strategy को समझिए! 

याद कीजिए 90s का वो दौर, जब हमारे घरों में पहला फ्रिज या डिब्बे वाला टीवी आता था। वो सिर्फ बाज़ार से खरीदी गई कोई मशीन नहीं होती थी, बल्कि उसे शुभ मुहूर्त देखकर, पूरे परिवार के साथ एक उत्सव की तरह घर लाया जाता था। वो घर का एक सदस्य बन जाता था! 15 साल, 20 साल... पीढ़ियाँ बदल जाती थीं, लेकिन उन गैजेट्स की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता था। हमें याद ही नहीं कि कभी फ्रिज की बांस आने, कम कूलिंग होने, गैस उड़ने या टीवी की स्क्रीन काली होने जैसी कोई समस्या भी होती थी।

उन दिनों चीजें कभी 'खराब' होकर कबाड़ में नहीं जाती थीं। होता यह था कि वक्त के साथ परिवार बड़ा हो जाता था, जरूरतें बढ़ जाती थीं, और वह सामान घर के लिए छोटा पड़ने लग जाता था। लेकिन तब भी उसे फेंकने या कौड़ियों के भाव बेचने की हमारी संस्कृति नहीं थी। हम बड़े आदर और प्रेम के साथ उस चालू फ्रिज या टीवी को अपने घर के वफादार काम वाले भाई-बहनों, किसी जरूरतमंद रिश्तेदार या गांव के किसी परिवार को सौंप देते थे। वहाँ भी वह सामान अगले 10 साल शान से चलता था! यानी एक सिंगल इन्वेस्टमेंट समाज के तीन अलग-अलग स्तरों पर 30 साल तक अपनी Value डिलिवर करता था। इसे कहते थे भारतीय मिजाज।

और आज? आज आप डेढ़ लाख का OLED TV या चमचमाता Smart AC खरीदिए, वारंटी का पीरियड खत्म होते ही उसकी सांसें फूलने लगती हैं। 5 साल पार करना तो आज के गैजेट्स के लिए 'पुनर्जन्म' जैसा है। कॉर्पोरेट की भाषा में इस गंदे और सोचे-समझे खेल को कहते हैं— Planned Obsolescence (सोची-समझी एक्सपायरी डेट)!

हाँ भाई साहब! आज की कंपनियाँ चीज़ें जानबूझकर ऐसी बनाती हैं जो वक्त पर खुद-ब-खुद दम तोड़ दें। क्योंकि अगर आपका AC और TV पहले की तरह 20 साल चल गया, तो इन बड़े ब्रांड्स के शोरूम पर ताले नहीं लग जाएँगे? उनकी अगली Sales कैसे होगी? उनका Profit Margin कैसे बढ़ेगा? उनका पूरा बिजनेस मॉडल ही इस बात पर टिका है कि आप हर 4 साल में नया सामान खरीदें।

कंपनियों का खतरनाक 'वारंटी ट्रैप' (Warranty Trap)

इस खेल को और मजबूत बनाने के लिए कंपनियों ने एक नया चक्रव्यूह बुना है, जिसे मैं Warranty Trap कहता हूँ। जब तक आपका सामान Under Warranty है, आप बंधक बन जाते हैं। आपको छोटी से छोटी दिक्कत के लिए भी उनके ऑथराइज्ड शोरूम या सर्विस सेंटर ही भागना पड़ता है।

लेकिन असली खेल इसके बाद शुरू होता है! अगर वारंटी के दौरान या उसके तुरंत बाद भी आपने अपनी मर्जी से किसी लोकल मैकेनिक से उस सामान को छू भी दिया, तो कंपनी सीधे ब्लैकमेलिंग पर उतर आती है—"सर, आपने बाहर से गैजेट ओपन करवा लिया? अब हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं, आपकी वारंटी खत्म!" यानी आपके खुद के खरीदे हुए सामान पर आपका कोई हक नहीं रहता। वे आपको डराते हैं ताकि आप मजबूरन उनके महंगे पार्ट्स खरीदें और उनके सर्विस सेंटर को मोटी फीस दें। यह कंपनियों का बनाया हुआ एक बहुत बड़ा 'प्रिज़्न' (जेल) है, जिसमें हर ग्राहक फंसा हुआ है।

AC की गैस और TV का 'पैनल': जेब काटने का नया औजार!

आजकल के 80% AC मालिकों की गर्मियों की शुरुआत ठंडी हवा से नहीं, बल्कि मैकेनिक को "भाईसाहब, कूलिंग नहीं हो रही, शायद गैस लीक हो गई है" का रोना रोने से होती है। कॉपर कॉइल के नाम पर कंपनियां ऐसी घटिया और पतली क्वालिटी की पन्नियां दे रही हैं कि कुछ ही महीनों में उनमें बारीक छेद हो जाते हैं। मैकेनिक आता है, हाथ खड़े करता है और कहता है—"साहब, कॉइल बदलनी पड़ेगी।"

महंगे LED TV का हाल तो और भी बदतर है। उसकी स्क्रीन (पैनल) बहुत नाज़ुक होती है। ज़रा सा वोल्टेज का झटका लगा या स्क्रीन में खराबी आई नहीं कि कंपनी का ऑथराइज्ड सर्विस सेंटर आपको सीधे 15 से 20 हजार का Estimate हाथ में थमा देता है। मध्यमवर्गीय आदमी मन मसोसकर सोचता है—"यार, 20 हजार मरम्मत पर लगाने से अच्छा है कि 5 हजार और मिलाकर नया ही ले आता हूँ!" और यहीं पर आप कॉर्पोरेट के बुने हुए उस चक्रव्यूह में फंस जाते हैं, जिसकी स्क्रिप्ट बोर्ड रूम में बैठकर लिखी गई थी।

कहाँ गए हमारी कॉलोनी के 'टीवी वाले अंकल' और वो मोची?
जरा ठहरकर सोचिए, हमारी आत्मनिर्भरता को हमसे किसने छीना? पहले हमारी कॉलोनी के नुक्कड़ पर एक 'टीवी वाले अंकल' बैठते थे, जिनकी दुकान पर रेडियो, टेप रिकॉर्डर और टीवी का मेला लगा रहता था। चाहे खराबी कोई भी हो, वे आईसी (IC) बदलकर या एक छोटा सा टांका लगाकर अधिकतम ₹250 में टीवी को फिर से जिंदा कर देते थे। हमारे जूते-चप्पल भी तब तक मोची के पास जाकर सिलते रहते थे, जब तक वे पूरी तरह 'शहीद' न हो जाएँ।

आज कंपनियों ने इस Warranty और स्पेयर पार्ट्स को ब्लॉक करने के नियम से उन 'टीवी वाले अंकल' और लोकल मैकेनिकों को धीरे-धीरे बिजनेस से बाहर कर दिया। हमने अपनी मरम्मत की शानदार संस्कृति को खुद अपने हाथों से दफन कर दिया। आज हम पश्चिमी देशों की उस घातक 'Use and Throw' वाली बीमारी के पूरी तरह शिकार हो चुके हैं।

नतीजा देखना है तो हमारे महानगरों और शहरों के बाहर जाकर देखिए, जहाँ E-Waste (Electronic Waste) के ज़हरीले पहाड़ खड़े हो रहे हैं। ये पहाड़ सिर्फ पर्यावरण को ही नष्ट नहीं कर रहे, बल्कि आपकी जेब को भी खोखला कर रहे हैं। हम भारतीय, जिनकी रग-रग में Sustainable Life (टिकाऊ जीवन) और रीसाइक्लिंग का विज्ञान बसा था, आज दिखावे की अंधी दौड़ में सबसे आगे दौड़ रहे हैं।

 'बैलेंस शीट' और 'मासिक बजट' की सलाह:
एक Chartered Accountant होने के नाते जब मैं व्यापारियों और नौकरीपेशा लोगों की Personal Balance Sheet का ऑडिट करता हूँ, तो मुझे एक बहुत ही चौंकाने वाला सच दिखाई देता है। लोग अपनी मेहनत की कमाई (Hard-earned Money) का एक बहुत बड़ा हिस्सा हर साल जाने-अनजाने में सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स पर फूंक रहे हैं। कभी मोबाइल बदल रहे हैं, कभी नया टीवी ला रहे हैं, तो कभी लैपटॉप अपग्रेड कर रहे हैं।

लोग इसे 'वन-टाइम इन्वेस्टमेंट' समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं, लेकिन हकीकत में यह आपकी सेविंग्स को दीमक की तरह चाट रहा है। मेरी सलाह है कि गैजेट्स पर होने वाले इस भारी-भरकम खर्चे को 'Asset' समझना बंद कीजिए। इसे अपने Monthly Expense (मासिक खर्च) के कॉलम में लेकर आइए!

जब आप सालभर में बदले गए मोबाइल, टीवी, एसी की मरम्मत और गैजेट्स के पूरे खर्च को 12 महीनों से डिवाइड (भाग) करके देखेंगे, तब आपको इसका Actual और डरावना गणित समझ में आएगा। आपको पता चलेगा कि आपकी कमाई का कितना बड़ा हिस्सा सिर्फ इन डब्बों को मेंटेन करने में जा रहा है। इसलिए, अगली बार कोई भी गैजेट खरीदने से पहले उसे अपने मंथली बजट में शामिल करके उसका वास्तविक बोझ ज़रूर नापें!

इस कॉर्पोरेट ट्रैप से बाहर निकलने के 3 अचूक रास्ते:

'Right to Repair' का समर्थन करें: भारत सरकार अब 'राइट टू रिपेयर' कानून लेकर आई है [Right to Repair India]। उपभोक्ता के तौर पर हमारा हक है कि हम कंपनियों के इस Warranty Blackmail के खिलाफ आवाज उठाएं। कंपनियों को मजबूर होना पड़ेगा कि वे स्पेयर पार्ट्स खुले बाज़ार में दें।

रिपेयर संस्कृति को जिंदा कीजिए: अगली बार घर का कोई गैजेट नखरे दिखाए, तो तुरंत Amazon या Flipkart खोलकर 'Buy Now' पर उंगली दबाने के बजाय, अपने लोकल मैकेनिक भाई की दुकान पर जाइए। उसे रोजगार भी मिलेगा और आपकी जेब भी बचेगी।

सामान की उम्र लंबी कीजिए: चीज की लाइफ बढ़ाना, उसे सहेजकर रखना और छोटी पड़ने पर किसी जरूरतमंद को चालू हालत में देना हमारी संस्कृति की खूबसूरती है। इसे ई-वेस्ट का हिस्सा मत बनने दीजिए।

असली समझदारी और टशन हर साल नया मॉडल बदलने में या दिखावे का शिकार होने में नहीं है। असली समझदारी कॉर्पोरेट की इस चालाकी को समझकर अपनी मेहनत की कमाई को सही जगह इन्वेस्ट करने और अपनी जड़ों की ओर लौटने में है!

पंकज 'चांडक' की कलम से...✍️
(एक सीए जो आपकी बैलेंस शीट भी देखता है और समाज का बदलता मिजाज भी)

#PlannedObsolescence #FinancialLiteracy #CAPankajChandak #RightToRepair #SustainableLiving #CorporateSecrets #EWaste #BalanceSheet #VocalForLocal #NokhaWriter #WarrantyTrap #MonthlyExpenses

Friday, 15 May 2026

बिना योग्य गुरु के मार्गदर्शन और दीक्षा के इस मंत्र की 'सिद्धि' का प्रयास करना मानसिक संतुलन बिगाड़ सकता है या भारी नुकसान पहुंचा सकता है।


                  मां भगवती काली साधना 
                " ॐ क्रीं कालिकायै हूं फट् "
एक उग्र और सुरक्षात्मक तांत्रिक अस्त्र मंत्र है। इसकी साधना तीव्र फलदायी होती है, लेकिन इसके नियम अत्यंत कड़े हैं। बिना योग्य गुरु के मार्गदर्शन और दीक्षा के इस मंत्र की 'सिद्धि' का प्रयास करना मानसिक संतुलन बिगाड़ सकता है या भारी नुकसान पहुंचा सकता है।

तंत्र ग्रंथों के अनुसार इस मंत्र की प्रामाणिक पुरश्चरण (सिद्धि) विधि नीचे दी गई है:-

साधना की प्राथमिक तैयारी 

अनुकूल समय:- इस साधना की शुरुआत किसी कृष्ण पक्ष की अष्टमी, चतुर्दशी, अमावस्या या नवरात्रि की रातों में की जाती है। 

साधना का समय हमेशा रात्रि काल (रात 10 बजे से 2 बजे के बीच) होता है।

दिशा और आसन:- साधना के लिए दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें। बैठने के लिए लाल रंग के ऊनी आसन का उपयोग करें।

वस्त्र और पूजन सामग्री:- साधक को लाल या काले रंग के बिना सिले वस्त्र धारण करने चाहिए। पूजा में मां काली का चित्र या महाकाली यंत्र, सरसों के तेल का दीपक और लाल फूल (विशेषकर गुड़हल) रखें।

माला: इस मंत्र के जाप के लिए केवल काली हकीक की माला या रुद्राक्ष की माला का ही उपयोग किया जाता है।

सिद्धि का मुख्य विधान (पुरश्चरण नियम)

संकल्प:- साधना के पहले दिन हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर संकल्प लें कि आप किस उद्देश्य (आत्मरक्षा या शत्रु बाधा निवारण) के लिए यह साधना कर रहे हैं।

गुरु और भैरव पूजन:- महाकाली की साधना से पहले भगवान शिव (महाकाल) या बटुक भैरव और अपने गुरु का पूजन अनिवार्य है। उनकी आज्ञा के बिना ऊर्जा को संभालना असंभव होता है।

जप संख्या: इस मंत्र को सिद्ध करने के लिए 1,25,000 (सवा लाख) मंत्र जाप का पुरश्चरण करना होता है। इसे आप अपनी क्षमता के अनुसार 11, 21 या 41 दिनों में बांटकर रोज निश्चित संख्या में (जैसे प्रतिदिन 31 या 51 माला) जपें।

मंत्र प्रयोग तकनीक:- जब साधना पूरी हो जाए और आप किसी कार्य के लिए इसका प्रयोग करें, तो मंत्र के अंत में जहां "फट्" आता है, वहां दायें हाथ की पहली दो उंगलियों से बायें हाथ की हथेली पर ताली बजाई जाती है। यह नकारात्मक ऊर्जा को छिन्न-भिन्न करने की तांत्रिक मुद्रा है।

दशांश हवन और तर्पण: सवा लाख जप पूरा होने के बाद कुल जप संख्या का 10% (12,500 बार) मंत्र पढ़ते हुए हवन करना होता है। हवन में काली मिर्च, सरसों के दाने, गूगल और घी की आहुति दी जाती है।

कड़े अनिवार्य नियम (परहेज)साधना के दिनों में पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य है।भोजन में लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा का पूरी तरह त्याग करना होगा।
साधना की बात को पूरी तरह गुप्त रखना होता है, किसी बाहरी व्यक्ति को इसकी जानकारी न दें।

सलाह: यदि आप गृहस्थ हैं और आपके पास गुरु नहीं हैं, तो इस उग्र मंत्र को सिद्ध करने के बजाय मां काली के परम सौम्य और सुरक्षित मंत्र ॐ क्रीं कालिकायै नमः का सामान्य रूप से रोज 1 या 11 माला जाप करें। इससे बिना किसी नुकसान के मां काली की पूर्ण कृपा और सुरक्षा प्राप्त होती है।

बगलामुखी_रोगमुक्तिप्रयोग

#बगलामुखी_रोगमुक्तिप्रयोग*
प्रयोग सामग्री :-
एक मिट्टी का छोटा सा कुल्हड़ (मटका) ,
सरसों का तेल ,काला तिल,
 सिंदूर एवं काला कपड़ा 

       प्रयोग विधि :-शनिवार के दिन शाम को ,4:30 बजे स्नान करके साधना में प्रयुक्त हो जाये.मिट्टी कि कुल्हड़ में सरसों का तेल भर दीजिये।उसी तेल मे 8काले तिल डाल दीजिये.और काले कपडे़ से कुल्हड़ का मुह को बंद कर दीजिये।.
अब 36 अक्षरीय बगलामुखी 
  👉 मंत्र:-ॐ ह्लींम (hleem) बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंम्भय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लींम (Hleem) ॐ स्वाहा ॥
               का एक माला जप कीजिये। 

और कुल्हड़ के उपर थोड़ा सा सिंदूर डाल दीजिये।और माँ बगलामुखी से भी रोग बाधा मुक्ति कि प्रार्थना कीजिये। 

और एक माला निम्न मंत्र का जप करेंगे 

 ॐ ह्लीम् श्रीम् ह्लीम् मम(अमुक) रोगबाधा नाशय नाशय फट्। 
Om hleem shreem hleem mam (amuk) 
Rog badha nashay nashay phat. 

मंत्र जप समाप्ति के बाद कुल्हड़ को जमींन में गाड़ दीजिये। जमीन में गड्ढा प्रयोग से पहिले ही खोद लें।यह प्रयोग स्वंय के लिए हो तो मन्त्र में मम शब्द का उच्चारण करें और किसी अन्य के लिए कर रहे है तो मन्त्र में मम अमुक की जगह व्यक्ति का नाम बोले और उस बीमार व्यक्ति से कुल्हड़ को स्पर्श करवाते हुये कुल्हड़ को जमींन मे गाढ़ दीजिये और स्वंय या बीमार व्यक्ति के स्वस्थ्य होने की प्रार्थना करेंगे।कुछ परिस्थितियों मे एक शनिवार में अनुभूतियाँ कम हो तो यह प्रयोग आगे भी किसी अन्य शनिवार को कर सकते हैं।
                 ~~~~```~~~```~~~~
भगवान दास वशिष्ठ 

उत्तराखंड की चारधाम यात्रा के सड़क मार्ग का एक विस्तृत मानचित्र ।

यह चित्र उत्तराखंड की चारधाम यात्रा के सड़क मार्ग का एक विस्तृत मानचित्र है। हिंदू धर्म में इस यात्रा का विशेष आध्यात्मिक महत्व है और इसे पारंपरिक रूप से पश्चिम से पूर्व के क्रम में किया जाता है। 
यात्रा का मुख्य मार्ग और क्रम (West to East)
परंपरा के अनुसार यात्रा का सही क्रम इस प्रकार है: 
यमुनोत्री (पहला धाम): यात्रा की शुरुआत दिल्ली या हरिद्वार/ऋषिकेश से होकर बड़कोट के रास्ते यमुनोत्री से होती है।
गंगोत्री (दूसरा धाम): यमुनोत्री के बाद श्रद्धालु उत्तरकाशी पहुँचते हैं और वहां से गंगोत्री धाम के दर्शन करते हैं।
केदारनाथ (तीसरा धाम): अगला पड़ाव गुप्तकाशी होते हुए केदारनाथ धाम है। यहाँ पहुँचने के लिए सोनप्रयाग/गौरीकुंड से लगभग 16-18 किमी की पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है।
बद्रीनाथ (चौथा धाम): अंतिम पड़ाव जोशीमठ के रास्ते बद्रीनाथ धाम है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है।


#devbhoomi #SpiritualIndia #HinduPilgrimage