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Sunday, 26 April 2026

क्या स्वामी दयानंद " स्वराज " का जय घोष करने वाले प्रथम व्यक्ति थे ?

आर्यसमाजी कहते हैं कि - "स्वामी दयानंद ने स्वराज का जयघोष, पहली बार किया था। वास्तव में स्वराज्य शब्द का प्रयोग करने वाले वे पहले व्यक्ति थे।"

आर्यसमाजी दशकों से इस झूठ को फैला रहे हैं। वे यह बताते हैं कि पहली बार स्वामी दयानन्द ने ही इस शब्द को कहा एवं अन्य क्रांतिकारियों ने स्वामी दयानन्द से ही इस शब्द को सुना व प्रयोग किया। इस झूठ को सत्य दिखाने के लिए ये अनेक क्रांतिकारियों के नाम से झूठे उद्धरण भी देते हैं। जैसे कि देखो - फलाने क्रांतिकारी ने कहा था कि - "स्वामी दयानन्द ही स्वराज्य के प्रथम मंत्रदाता थे"। किन्तु ऐसा उस क्रांतिकारी ने कभी नहीं कहा होता।

स्वराज्य शब्द का प्रयोग दादाभाई नैरोजी ने किया था, उन्होंने कहीं पर भी नहीं कहा कि मैंने यह शब्द सत्यार्थ प्रकाश से सीखा। बाल गंगाधर तिलक ने इस शब्द को प्रसिद्ध कर दिया था, उन्होंने भी कहीं पर नहीं कहा कि यह शब्द मैंने सत्यार्थ प्रकाश से सीखा। किन्तु आर्यसमाजी फिर भी इस झूठ को बोलते हैं। अपने पंथ और अपने पंथ-प्रवर्तक को सर्वोच्च दिखाने के लिए पंथ के अंधे अनुयायी ही इस प्रकार झूठ बोला करते हैं।

अगर ये कहते हैं कि दादाभाई तथा तिलक से पूर्व दयानंद की पुस्तक में यह शब्द मिलता है, तो इस अनुमान से यह माना जाए कि इन्होंने वहीं से यह शब्द लिया है, तो इस पर हम आर्यसमाजियों से पूछना चाहते हैं कि - "छत्रपति शिवाजी महाराज को जानते हो? वे दयानन्द से पूर्व थे या नहीं?"

शिवाजी महाराज द्वारा किया गया उद्घोष - 'हिंदवी स्वराज्य' सुना है या नहीं?

शिवाजी महाराज द्वारा स्वराज्य का प्रयोग प्रामाणिक रूप से उनके पत्रों और तत्कालीन मराठी साहित्य में, समकालीन अभिलेखों में मिलता है - “हे राज्य स्वराज्य आहे…”, “स्वराज्याच्या कार्यासाठी…” आदि। शिवाजी महाराज को तो स्वराज्य-संस्थापक ही तत्कालीन दस्तावेजों में कहा गया है।

क्या आपने किसी आर्यसमाजी को कहते सुना है कि - स्वराज्य का प्रयोग सर्वप्रथम करने वाले शिवाजी महाराज थे? अगर स्वामी दयानन्द शिवाजी महाराज से पहले हुये होते तो निश्चित ही आर्यसमाजी यह कहते कि - "इनको लड़ने की प्रेरणा स्वामी दयानन्द से मिली थी, और स्वराज्य शब्द इन्हौने सत्यार्थ प्रकाश के लिया था।

दुनिया भर के झूठ बोलकर दयानन्द को सबसे ऊपर दिखाना ही इनका प्रमुख धर्म है। यह कहना पूर्णतः असत्य है कि स्वामी दयानन्द ने इस शब्द को बनाया, या इस शब्द का प्रयोग करने वाले पहले व्यक्ति थे, या कि अन्य सबने इनसे ही यह शब्द सीखा था। शिवाजी महाराज को यह शब्द कहाँ से मिला था?

यह शब्द धर्मग्रंथो में भी आता है - “अहि॒मर्च॒न्ननु॑ स्व॒राज्य॑म्”, “तत्स्व॒राज्य॑मियाय॒” आदि।

प्रतिमानाटकम् जैसी महाकवि भास की रचनाओं तथा दयानन्द से पूर्व के संस्कृत साहित्य में अनेक स्थानों पर यह शब्द व भाव प्रकट होता है। ये सब दयानन्द स्वामी से काफी समय पूर्व के हैं।

तो नैरोजी, गंगाधर तिलक आदि ने जो स्वराज्य का प्रयोग किया, वह स्वामी दयानन्द से नहीं, बल्कि शिवाजी महाराज से प्रेरित होकर किया था, ऐसा क्यों न माना जाए?

इस स्वराज्य को प्रसिद्ध करने वाले बाल गंगाधर तिलक तथा दादाभाई नैरोजी, ये दोनों ही महाराष्ट्र राज्य के थे। क्या उन्होंने शिवाजी महाराज को न पढ़ा होगा?

तत्कालीन क्रांतिकारियों द्वारा लिखित पुस्तकों व संस्मरणों में यह उल्लेख मिलता है कि उस समय, स्वतंत्रता के लिए प्रेरित करने हेतु शिवाजी महाराज के ये "स्वराज्य" संबंधी कथन पत्रों व पर्चों पर छापे जाते थे। केसरी आदि पत्रों में शिवाजी महाराज की उक्तियाँ छपा करती थीं, जिनमें स्वराज्य की बात होती थी। केसरी पत्र तिलक का था, जिसमें वे महाराज शिवाजी का महिमा-मंडन करते थे, जिससे क्रांतिकारियों को प्रेरणा मिले।
तब आर्यसमाजियों ने यह क्यों न कहा कि स्वराज्य की प्रेरणा इन क्रांतिकारियों को शिवाजी महाराज से मिली थी?

आप विचार करें कि ये आर्यसमाजी अपने पंथ-प्रवर्तक दयानन्द स्वामी को सर्वोच्च दिखाने के लिए किस प्रकार वास्तविक तथ्यों की अवहेलना करके झूठा प्रचार करते हैं।
साभार - ✍️शचींद्र शर्मा 
संदर्भ - https://www.facebook.com/share/18pEXjCutL/

वयं राष्ट्रे जागृयाम 

भला एक राजा रंक के अंतिम संस्कार में क्यों आएगा ? - अमिताभ बच्चन

जब इंदिरा गांधी को बताया गया कि उनका प्रिय बेटा कैंब्रिज में एक रेस्टोरेंट कम बार में वेटर का काम कर रही एंटोनियो माइनो के प्यार के चक्कर में है

 तब इंदिरा गांधी ने कई लोगों को राजीव गांधी को समझाने के काम में लगाया 

उसमें उस वक्त कैंब्रिज में प्रोफेसर सुब्रमण्यम स्वामी भी थे और उस वक्त कैंब्रिज में पढ़ रही बेनजीर भुट्टो भी थी

 बेनजीर भुट्टो और इंदिरा गांधी में एक मां और पुत्री जैसा रिश्ता था क्योंकि इंदिरा गांधी की जीवनी पर लिखी किताब जो उनकी सहेली पुपुल जयकर ने लिखा है उसमें उन्होंने लिखा है कि इंदिरा गांधी बेनजीर भुट्टो को बहुत मानती थी

 सबने राजीव गांधी को ऊंच-नीच प्रतिष्ठा इत्यादि समझाया

 फिर जब इंदिरा गांधी को यह भी पता चला इस एंटोनियो माइनो का बाप इटली का एक अपराधी है जो कभी मुसोलिनी की फासीवादी संगठन में रह चुका है और एक दो बार नहीं बल्कि 26 बार जेल जा चुका है और यह लड़की अपने घर बार-बार आ रहे पुलिस से तंग आकर ही एक शरणार्थी के रूप में कैंब्रिज में आई है और एक रेस्टोरेंट कम बार में वेटर की नौकरी करके अपना गुजारा कर रही है तब इंदिरा गांधी और भी ज्यादा परेशान हो गई और उस लड़की की शिक्षा मात्र नाइंथ क्लास ही थी

 राजीव गांधी नहीं माने और कहते हैं कि बच्चों की जिद के आगे बड़े बड़े लोग हार जाते हैं

 उसके बाद एंटोनियो माइनो को भारत बुलाया गया और इंदिरा गांधी ने कुछ दिनों तक हिंदी और भारतीय तौर तरीके सीखने के लिए उसे अमिताभ बच्चन के घर ठहराया

 जहां अमिताभ बच्चन की मां स्वर्गीय तेजी बच्चन और अमिताभ बच्चन के पिता तथा अजीताभ बच्चन अमिताभ बच्चन दोनों भाई सब लोग जो भारतीय संस्कृति के तौर तरीके सिखाने लगे

 फिर राजीव गांधी और एंटोनियो माइनो उर्फ सोनिया गांधी की सगाई वही अमिताभ बच्चन के बंगले में हुई थी जिसमें सोनिया गांधी के मां का पूरा रस्म अमिताभ बच्चन की मां श्रीमती तेजी बच्चन ने निभाया था

 खैर ये तो पहला पार्ट है अब दूसरा पार्ट जानिए जो बेहद ज्यादा खतरनाक है 

अमिताभ बच्चन परिवार दशकों तक कांग्रेस का वफादार रहा राजीव गांधी और अमिताभ बच्चन अच्छे दोस्त थे 

राजीव गांधी के कहने पर अपने फिल्मी कैरियर के पीक के दौरान अमिताभ बच्चन ने फिल्मी दुनिया छोड़कर राजनीति में कदम रखा इलाहाबाद से चुनाव लड़े और तब के बहुत बड़े नेता हेमवती नंदन बहुगुणा की जमानत जप्त करवा दी

 लेकिन राजनीति काली कोठरी में अमिताभ बच्चन अपने आप को बचा नहीं पाए और बोफोर्स में दलाली का दाग उनके ऊपर भी लगा और उन्होंने राजनीति से सन्यास लेकर वापस फिल्मी दुनिया में चले गए 

फिर अमिताभ बच्चन कर्ज के जाल में उलझ गए और तब समाजवादी पार्टी के नेता अमर सिंह सहारा ग्रुप के सुब्रत राय सहारा जैसे लोगों ने उन्हें मदद करके कर्जे के जाल से मुक्ति दिलाई

 अमिताभ बच्चन की पत्नी जया बच्चन समाजवादी पार्टी में शामिल हो गई

 फिर अमिताभ बच्चन और फर्जी गांधी परिवार के बीच में तल्खी और दूरियां बढ़ गई 

उसी दरम्यान अमिताभ बच्चन की मां श्रीमती तेजी बच्चन का निधन हुआ और आगे जो मैं बात बताने जा रहा हूं यह बात खुद अमिताभ बच्चन जी ने एक टीवी चैनल पर कहा था 

अमिताभ बच्चन ने यह बताया कि मुझे पूरा यकीन ही नहीं बल्कि विश्वास था कि मेरे मां के अंतिम संस्कार में गांधी परिवार जरूर आएगा क्योंकि मेरी मां ने सोनिया गांधी के मां की भूमिका निभाई थी मेरी मां की गोद में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी खेले हैं कूदे हैं और मैंने अंतिम संस्कार में 4 घंटे तक विलंब किया क्योंकि मैं गांधी परिवार के लोगों का इंतजार कर रहा था फिर अंत में तेजी बच्चन जी का अंतिम संस्कार कर दिया गया और गांधी परिवार से कोई भी व्यक्ति श्रीमती तेजी बच्चन के अंतिम संस्कार में नहीं गया 

और अमिताभ बच्चन ने एक यह भी लाइन जोड़ा था वह राजा है हम रंक हैं भला एक राजा रंक के अंतिम संस्कार में क्यों आएगा ? आखिर एक राजा एक रंक से रिश्ता क्यों रखेगा??

 अमिताभ बच्चन की यह लाइन फर्जी गांधीओं के गाल पर सबसे बड़ा तमाचा है 

सोचिए आज जो यह कांग्रेसी चमचे जगह-जगह एंटोनियो माइनो उर्फ सोनिया गांधी को मां बता रहे हैं भारतीय संस्कृति से ओतप्रोत बता रहे हैं इन कांग्रेसी चमचों को पता होना चाहिए की सनातन संस्कृति में जन्म देने वाली मां से भी बड़ा दर्जा कन्यादान देने वाली मां का होता है और सोनिया गांधी सिर्फ और सिर्फ घमंड अहंकार से ही अपनी कन्यादान करने वाली मां तेजी बच्चन के अंतिम संस्कार में नहीं गई 

और ऐसी नीच हरकत एक विदेशी संस्कृति में पली-बढ़ी और विदेशी संस्कृति को मानने वाली महिला ही कर सकती है कभी कोई भारतीय संस्कृति वाली महिला नहीं कर सकती

Saturday, 25 April 2026

श्रीकनकधारा स्तोत्र साधना

#श्रीकनकधारा स्तोत्र साधना - 
        कनकधारा यंत्र के समक्ष श्री कनकधारा स्तोत्र का नित्य बुधवार से सवेरे एक पाठ शुरू करें तो समस्त प्रकार का आर्थिक बाधा 3-4 महीने मे समाप्त होनी प्रारंभ हो जाती है। इतिहास साक्षी है कि रोडपति भी इस स्तोत्र साधना के नियमित पाठ से करोड़पति बने हैं।

विश्व के महायोगियों ने भी इस बात को स्वीकार किया है कि यदि भारतवर्ष से समस्त आध्यात्मिक ज्ञान का लोप हो जाए परंतु केवल कनकधारा साधना का ज्ञान रह जाए तो भी हम संसार मे अद्वितीय हैं,श्रेष्ठ हैं,धनी हैं क्योंकि चाहे पूरे जीवन में दरिद्रता और सिर्फ दुर्भाग्य लिखा हो,तब भी कनकधारा साधना द्वारा लक्ष्मी को अपने पूर्ण वैभव के साथ साधक के जीवन मे आना ही पड़ता है।इस साधना के द्वारा ही पुरातन काल मे हमारी पावन भारत भूमि सोने की चिड़िया कहलाती थी। इस साधना से चिरकाल तक लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।सिद्ध कनकधारा यंत्र में लक्ष्मी को खींचने की क्षमता हमेशा मौजूद रहती है।

श्री कनकधारा स्तोत्र :
    इस साधना को किसी भी बुधवार सुबह 10 बजे के भीतर प्रारम्भ करें । दिशा पूर्व हो, आसन/वस्त्र सफेद हों... कनकधारा यंत्र को बाजोट पर सफेद वस्त्र बिछाकर स्थापित करें । तत्पश्चात पाठ प्रारंभ करें...

ॐ अंगहरे पुलकभूषण माश्रयन्ती भृगांगनैव मुकुलाभरणं तमालम ।
अंगीकृताखिल विभूतिरपांगलीला मांगल्यदास्तु मम मंगलदेवताया:।।1।।

मुग्ध्या मुहुर्विदधती वदनै मुरारै: प्रेमत्रपाप्रणिहितानि गतागतानि।
माला दृशोर्मधुकर विमहोत्पले या सा मै श्रियं दिशतु सागर सम्भवाया:।।2।।

विश्वामरेन्द्रपदविभ्रमदानदक्षमानन्द हेतु रधिकं मधुविद्विषोपि। ईषन्निषीदतु मयि क्षणमीक्षणार्द्धमिन्दोवरोदर सहोदरमिन्दिराय:।।3।।

आमीलिताक्षमधिगम्य मुदा मुकुन्दमानन्दकन्दम निमेषमनंगतन्त्रम्। आकेकर स्थित कनी निकपक्ष्म नेत्रं भूत्यै भवेन्मम भुजंगरायांगनाया:।।4।।

बाह्यन्तरे मधुजित: श्रितकौस्तुभै या हारावलीव हरिनीलमयी विभाति। कामप्रदा भगवतो पि कटाक्षमाला कल्याण भावहतु मे कमलालयाया:।।5।।

कालाम्बुदालिललितोरसि कैटभारेर्धाराधरे स्फुरति या तडिदंगनेव्। मातु: समस्त जगतां महनीय मूर्तिभद्राणि मे दिशतु भार्गवनन्दनाया:।।6।।

प्राप्तं पदं प्रथमत: किल यत्प्रभावान्मांगल्य भाजि: मधुमायनि मन्मथेन। मध्यापतेत दिह मन्थर मीक्षणार्द्ध मन्दालसं च मकरालयकन्यकाया:।।7।।

दद्याद दयानुपवनो द्रविणाम्बुधाराम स्मिभकिंचन विहंग शिशौ विषण्ण। दुष्कर्मधर्ममपनीय चिराय दूरं नारायण प्रणयिनी नयनाम्बुवाह:।।8।।

इष्टा विशिष्टमतयो पि यथा ययार्द्रदृष्टया त्रिविष्टपपदं सुलभं लभंते। दृष्टि: प्रहूष्टकमलोदर दीप्ति रिष्टां पुष्टि कृषीष्ट मम पुष्कर विष्टराया:।।9।।

गीर्देवतैति गरुड़ध्वज भामिनीति शाकम्भरीति शशिशेखर वल्लभेति। सृष्टि स्थिति प्रलय केलिषु संस्थितायै तस्यै ‍नमस्त्रि भुवनैक गुरोस्तरूण्यै ।।10।।

श्रुत्यै नमोस्तु शुभकर्मफल प्रसूत्यै रत्यै नमोस्तु रमणीय गुणार्णवायै। शक्तयै नमोस्तु शतपात्र निकेतानायै पुष्टयै नमोस्तु पुरूषोत्तम वल्लभायै।।11।।

नमोस्तु नालीक निभाननायै नमोस्तु दुग्धौदधि जन्म भूत्यै । नमोस्तु सोमामृत सोदरायै नमोस्तु नारायण वल्लभायै।।12।।

सम्पतकराणि सकलेन्द्रिय नन्दानि साम्राज्यदान विभवानि सरोरूहाक्षि। त्व द्वंदनानि दुरिता हरणाद्यतानि मामेव मातर निशं कलयन्तु नान्यम्।।13।।

यत्कटाक्षसमुपासना विधि: सेवकस्य कलार्थ सम्पद:। संतनोति वचनांगमानसंसत्वां मुरारिहृदयेश्वरीं भजे।।14।।

सरसिजनिलये सरोज हस्ते धवलमांशुकगन्धमाल्यशोभे। भगवति हरिवल्लभे मनोज्ञे त्रिभुवनभूतिकरि प्रसीद मह्यम्।।15।।

दग्धिस्तिमि: कनकुंभमुखा व सृष्टिस्वर्वाहिनी विमलचारू जल प्लुतांगीम। प्रातर्नमामि जगतां जननीमशेष लोकाधिनाथ गृहिणी ममृताब्धिपुत्रीम्।।16।।

कमले कमलाक्षवल्लभे त्वं करुणापूरतरां गतैरपाड़ंगै:। अवलोकय माम किंचनानां प्रथमं पात्रमकृत्रिमं दयाया : ।।17।।

स्तुवन्ति ये स्तुतिभिर भूमिरन्वहं त्रयीमयीं त्रिभुवनमातरं रमाम्। गुणाधिका गुरुतरभाग्यभागिनो भवन्ति ते बुधभाविताया : 
।।18।।

सफलता प्राप्ति तक आप यह साधना लगातार करते रहें।

-🙏जय सदगुरुदेव 🌹🌹
✍️.. भगवान दास वशिष्ठ 

वयं राष्ट्रे जागृयाम