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Monday, 9 March 2026

अंदर की गर्मी को शांत करने के लिए ठंडाई

*॥ॐ॥*

दो पान के पत्ते डांड और अगला भाग कैंची से काट लें + एक चम्मच गुलकंद+ एक चम्मच रात भर भीगी सोंफ + आधा कप ठंडा दूध+आधा कप ठंडा पानी 
मिक्सचर में डालकर घुमा लो
अब थोड़ा सा भीगा हुआ गोंद कतीरा और सब्जा के बीज ( दोनों लगभग एक एक चम्मच ) डालकर मिलाएं 

दिन में एक बार पीने से अंदर की गर्मी को शांत करेगा ही माथा भी तरोताजा रहेगा और पेट को भी साफ रखेगा।
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*_वयं राष्ट्रे जागृयाम_*

Sunday, 8 March 2026

मीरा चरित भाग -१



               💐ॐ श्री गणेशाय नमः💐
                   💐ॐ हरे कृष्ण..!!💐
             💐श्री राधाकृष्णाभ्यां नमः💐

यह कथा सौभाग्य कुँवरी राणावत जी की पुस्तक "मीरा चरित" से ली जा रही है जिनका संबंध मीराबाई के पीहर मेड़ता और ससुराल चित्तौड़ दोनों से था..अतः उनके द्वारा लिखित इस ग्रंथ को पढ़ने में अत्यंत ही आनंद आयेगा..!!

                *💐💐मीरा चरित भाग -१ 💐💐*

               *💐मेड़ता का राठौड़ राजवंश💐*

भारत का एक प्रांत है राजस्थान। इसी राजस्थान का एक क्षेत्र है मारवाड़ जो प्रसिद्ध है अपने वासियों की शुरता, उदारता, सरलता और भक्ति के लिए। राठौड़ राजपूतों का शासन रहा है इस भूभाग पर। मारवाड़ के राठौड़ों के मूल पुरुष राम "सिंहा" बड़े प्रतापी हुए। उन्होंने पाली में रहकर उपद्रवी "मेर" लोगों से ब्राह्मणों की रक्षा का भार अपने ऊपर ले लिया था। दूर-दूर तक उनकी प्रसिद्धि फैली और अंत में पाली के समीप वीडू नामक गांव में सोमवार 9 अक्टूबर 1273 ईस्वी को वह देवलोक सिधारे। उनके उत्तराधिकारी राव आस्थान थे इनके पुत्र धूहड़ ने राठौड़ों की कुलदेवी नागणेचा की मूर्ति को नागाणा गांव में स्थापित किया।

 उसके बाद क्रमशः राव रायपाल राव जालणसी राव छाड़ा राव तीडा राव कान्हड़ राव सलखा आदि राठौड़ वीर अपनी मातृभूमि के लिए मुसलमानों और विरोधियों से युद्ध करते खेत रहे।
 सलखा के पुत्र मल्लीनाथ सिद्ध वीर पुरुष हुए। इनके अनुज वीरमदेव के पुत्र चूंडा राठौर ने मंडोर राज्य अर्जित करके राठौड़ों की एक नवीन सत्ता का बीजारोपण किया। उनके पुत्र राव रणमल पराक्रमी पुरुष हुए। इनकी बहन हँसा बाई का विवाह मेडा के राणा लाखा से हुआ और हंसाबाई के गर्भ से महाराणा मोकल ने जन्म लिया यद्यपि मोकल अपने भाइयों में सबसे छोटे थे किंतु पूर्व प्रदत वचन के कारण मोकल ही उनके उत्तराधिकारी बने वह अधिक समय जीवित नहीं रहे और पासवान पुत्र चाचा तथा मेरा के द्वारा मारे गए। मोकल के पुत्र कुंभा मेवाड़ के राज सिंहासन पर आसीन हुए। महाराणा कुंभा अल्प वयस्क थे अतः रणमल और उनके पुत्र जोधा मेवाड़ में ही रहने लगे। इस प्रकार मेवाड़ में राठौड़ों का बोलबाला हो गया यह सिसोदिया वीर सह न सके और अंत में मोकल के बड़े भाई चूड़ा जी के हाथों रणमल मारे गए तथा जोधा ने भागकर अपने प्राणों की रक्षा की। मेवाड़ी सेनाओं ने मंडोर पर अधिकार कर लिया कई वर्षों बाद हंसाबाई के आग्रह से मेवाड़ी सेना पीछे हटी और जोधा ने घोर संघर्ष के बाद पैतृक राज्य पाया।

राव जोधा बड़े भाग्यशाली पुरुष थे। उन्होंने 1459 ईस्वी में दुर्ग जो आज मेहरानगढ़ के नाम से प्रसिद्ध है उसकी नींव रखी। अपने नाम से जोधपुर नगर और राज्य की स्थापना की। मेवाड़ और मारवाड़ की कटुता का यही अंत हो गया मेवाड़ के महाराणा कुंभा महान शासक, कुशल सेनापति, सुप्रसिद्ध कवि और विद्वान पुरुष थे। सन 1468 ईस्वी में कुंभलगढ़ दुर्ग में उनका देहांत हुआ फिर रायमल गद्दी पर आसीन हुए। राव जोधा ने अपनी पुत्री श्रंगार देवी जो राव दूदा की सौतेली बहन थी उसका विवाह महाराणा रायमल से कर दिया। राव दूदा और राव वरसिंह का जन्म राव जोधा की सोनगरी (चौहानों की एक शाखा) रानी चंपाबाई के गर्भ से हुआ था जो पाली के सोनगरा चौहान सीमा सलावत की पुत्री थी..!!

🛕क्रमशः🛕

जीवन में पैसे और परिवार में संतुलन ही सबसे बड़ी संपत्ति है। पैसा 'साधन' हैं 'साध्य' नहीं।

शाम के आठ बज रहे थे। 45 वर्षीय शेखर अपनी स्टडी में बैठा किसी विदेशी क्लाइंट पर चिल्ला रहा था। "मुझे बहाने नहीं चाहिए! डील कल तक फाइनल होनी चाहिए, चाहे जो कीमत लगे।"
दूसरे कमरे में उसकी पत्नी, माया, अपने हीरे के कंगन को आईने में निहार रही थी, लेकिन उसकी आँखों में वो चमक नहीं थी जो उन हीरो में थी। वो उदास थी क्योंकि आज उनकी शादी की बीसवीं सालगिरह थी, और शेखर को शायद याद भी नहीं था। याद होता भी तो क्या? वो कोई महंगा तोहफा भिजवा देता, जैसे पिछले साल भिजवाया था।
तभी दरवाजे की घंटी बजी। नौकर ने दरवाजा खोला। सामने शेखर की बूढ़ी माँ, कावेरी देवी खड़ी थीं। हाथ में एक पुराना सा झोला और चेहरे पर गाँव की वही पुरानी झुर्रियां, जिनमें सुकून और चिंता दोनों एक साथ रहती थीं।
"माँ जी, आप?" नौकर ने हैरानी से पूछा।
माया दौड़कर बाहर आई। "अरे माँ जी! आपने बताया नहीं? हम ड्राइवर भेज देते।"
कावेरी देवी ने मुस्कुराते हुए माया के सिर पर हाथ रखा। "अरे बेटा, सरप्राइज देने का मन था। सोचा सालगिरह है तुम दोनों की, तो अपने हाथ की बनी खीर खिला आऊं।"
शेखर भी शोर सुनकर बाहर आ गया। माँ को देख वो थोड़ा चौंका, फिर घड़ी देखते हुए बोला, "माँ, आप आ गईं, अच्छी बात है। पर आज घर में थोड़ी भीड़ रहेगी। मैंने कुछ बिजनेस एसोसिएट्स को डिनर पर बुलाया है। सालगिरह भी है, तो सेलिब्रेशन के साथ नेटवर्किंग भी हो जाएगी।"
कावेरी देवी का चेहरा थोड़ा उतर गया, लेकिन उन्होंने बेटे की खुशी के लिए हामी भर दी।
रात को पार्टी शुरू हुई। घर को फूलों और महंगें झाड़-फानूसों से सजाया गया था। शहर के बड़े-बड़े लोग आए थे। हर तरफ महंगी शराब और विदेशी खाने की खुशबू थी। शेखर और माया मेहमानों के बीच ऐसे मुस्कुरा रहे थे जैसे दुनिया का सबसे खुशहाल जोड़ा वही हो।
कावेरी देवी एक कोने में सोफे पर सिकुड़ कर बैठी थीं। उनकी साधारण सूती साड़ी और हवाई चप्पलें वहां मौजूद लोगों के डिज़ाइनर कपड़ों के बीच अलग ही दिख रही थीं।
तभी एक मेहमान ने खीर की कटोरी उठाई। यह वो खीर नहीं थी जो कावेरी देवी लाई थीं, बल्कि वो थी जो फाइव स्टार होटल से मंगवाई गई थी—केसर और पिस्ते से लदी हुई।
मेहमान ने एक चम्मच खाया और तारीफ की, "वाह शेखर! क्या स्वाद है। तुम्हारे पास तो दुनिया की हर लक्जरी है भाई। पैसा हो तो मनुष्य क्या नहीं खरीद सकता।"
शेखर ने गर्व से सीना चौड़ा किया। "बिल्कुल! मैंने यही तो सीखा है कि जीवन में सब कुछ पैसे से ही चलता है।"
पार्टी खत्म हुई। मेहमान चले गए। शेखर और माया थके हुए सोफे पर गिर पड़े। घर फिर से शांत हो गया। नौकर सफाई कर रहे थे।
कावेरी देवी उठीं और रसोई में गईं। उन्होंने अपने झोले से वो टिफिन निकाला जिसमें वो गाँव से खीर बनाकर लाई थीं। उन्होंने तीन कटोरियों में खीर निकाली और ड्राइंग रूम में ले आईं।
"शेखर, माया... थक गए होगे। लो, थोड़ा मुँह मीठा कर लो। मेरे हाथ की खीर है," कावेरी देवी ने प्यार से कहा।
शेखर ने चिड़चिड़ाते हुए कहा, "माँ, अभी तो इतना खाया। पेट भरा हुआ है। आप भी न, पुरानी आदतें नहीं छोड़तीं। अब हम वो गाँव वाले नहीं रहे जो हर छोटी बात पर खीर खाएं।"
कावेरी देवी ने कुछ नहीं कहा। बस कटोरी मेज पर रख दी। "एक चम्मच खा ले बेटा। शगुन होता है।"
मन रखने के लिए शेखर ने चम्मच उठाया और खीर मुंह में डाली। अगले ही पल उसने थूक दिया।
"छी! माँ यह क्या है? इसमें तो चीनी की जगह नमक है! और वो भी इतना ज़्यादा? क्या हो गया है आपको? उम्र के साथ स्वाद भी भूल गई हैं क्या?" शेखर चिल्लाया।
माया ने भी चखा और चेहरा बिगाड़ लिया। "हाँ माँ जी, यह तो बहुत खारा है। कोई खीर में नमक डालता है क्या?"
कावेरी देवी शांत रहीं। उनकी आँखों में एक अजीब सी गंभीरता थी। उन्होंने धीरे से कहा, "अरे! गलती हो गई शायद। चीनी के डिब्बे की जगह नमक का डिब्बा उठा लिया होगा। पर बेटा, फेंक मत। इसमें काजू-बादाम डाले हैं, दूध भी गाढ़ा है। महंगा है सब। खा ले न थोड़ा।"
"क्या बात कर रही हैं आप?" शेखर का पारा चढ़ गया। "महंगा है तो क्या ज़हर खा लें? स्वाद ही बिगड़ गया तो काजू-बादाम किस काम के? यह तो कचरा है अब।"
कावेरी देवी ने शेखर की आँखों में सीधे देखा और वो बात कही जिसने शेखर के पैरों तले ज़मीन खिसका दी।
"यही तो मैं तुझे समझाना चाहती हूँ शेखर। देख बेटा, पैसा जीवन में नमक की तरह होता है। जरूरी है, बहुत जरूरी है। उसके बिना जिंदगी फीकी लगती है। लेकिन तूने... तूने अपनी जिंदगी की खीर में पैसा रूपी नमक इतना ज्यादा डाल दिया है कि अब रिश्तों की मिठास, सुकून का स्वाद और अपनों का प्यार... सब कड़वा हो गया है।"
कमरे में सन्नाटा छा गया। शेखर अवाक रह गया।
कावेरी देवी ने आगे कहा, "मैं कोने में बैठी देख रही थी। तू माया के साथ खड़ा था, पर तेरा ध्यान उसके चेहरे पर नहीं, तेरे क्लाइंट की बातों पर था। माया ने नया हार पहना था, पर तूने एक बार भी उसकी तारीफ नहीं की। तेरे 12 साल के बेटे रोहन ने तुझे अपनी ड्राइंग दिखानी चाही, तो तूने उसे 2000 रुपये देकर कहा—'जाओ कुछ खरीद लो'। बेटा, तूने घर को सोने का पिंजरा बना दिया है। सब कुछ है यहाँ—महंगे सोफे, एसी, गाड़ियाँ... पर 'स्वाद' नहीं है। ठीक इस खीर की तरह। इसमें भी दूध है, मेवे हैं, सब महंगा है... पर नमक ज्यादा होने से यह किसी काम की नहीं रही।"
शेखर की नजरें झुक गईं। उसे अचानक अपने बचपन की याद आ गई। जब उनके पास छोटा सा घर था, पैसे कम थे, लेकिन हर शाम वो सब साथ बैठकर चाय पीते थे। तब ठहाके असली होते थे। आज उसके पास करोड़ों थे, पर वह अपनी पत्नी के साथ दो मिनट सुकून से बात करने को तरसता था।
माया की आँखों से आंसू बह निकले। "माँ जी सही कह रही हैं शेखर। हमारे पास सब कुछ है, पर हम खुश नहीं हैं। हम बस भाग रहे हैं... और पैसा जमा कर रहे हैं। पर किसके लिए?"
शेखर ने कांपते हाथों से माँ का हाथ थाम लिया। "माँ... मैं... मैं भटक गया था। मुझे लगा पैसा ही सब कुछ ठीक कर देगा।"
कावेरी देवी ने मुस्कुराते हुए दूसरी डिब्बी खोली। "घबरा मत। माँ हूँ न, मुझे पता था मेरे बेटे को कड़वी दवा की ज़रूरत है। असली खीर यह रही।"
उन्होंने एक और टिफिन खोला। उसमें से इलायची और गुड़ की भीनी-भीनी खुशबू आ रही थी।
"यह ले। इसमें सब नपा-तुला है। मिठास भी और स्वाद भी।"
शेखर ने उस खीर का एक चम्मच खाया। वही पुराना स्वाद! वही बचपन का सुकून! उसकी आँखों से आंसू टपक कर खीर में गिर गए। उसने माया को भी खिलाया। उस रात उस आलीशान पेंटहाउस में पहली बार 'अमीरी' नहीं, बल्कि 'तृप्ति' महसूस हुई।
अगले दिन सुबह, शेखर ने अपनी महत्वपूर्ण मीटिंग कैंसिल कर दी।
"कहाँ जा रहे हैं सर?" सेक्रेटरी ने फोन पर घबराते हुए पूछा। "करोड़ों का नुकसान हो जाएगा।"
शेखर ने मुस्कुराते हुए अपनी माँ और पत्नी की तरफ देखा, जो बालकनी में बैठकर धूप सेक रही थीं। "नुकसान तो तब होता जब मैं आज भी मीटिंग में जाता। आज मैं अपनी 'जिंदगी का स्वाद' वापस लाने जा रहा हूँ। आज हम सब पिकनिक पर जा रहे हैं।"
उस दिन शेखर को समझ आ गया कि नमक सिर्फ चुटकी भर ही अच्छा लगता है। मुट्ठी भर नमक से समंदर तो बन सकता है, पर उसे पिया नहीं जा सकता। प्यास बुझाने के लिए तो मीठे पानी के झरने की ही जरूरत होती है—और वह झरना है 'परिवार'।

क्या इस कहानी ने आपके दिल को छुआ?
अक्सर हम पैसे कमाने की दौड़ में यह भूल जाते हैं कि पैसा 'साधन' है, 'साध्य' नहीं। अगर आपके पास दुनिया भर की दौलत है लेकिन उसे बांटने के लिए परिवार और सुकून नहीं, तो वह दौलत उस खारी खीर की तरह है जिसे निगला नहीं जा सकता।
याद रखिये, जीवन में संतुलन ही सबसे बड़ी संपत्ति है।
अगर इस कहानी ने आपकी आँखों में नमी ला दी, तो लाइक का बटन दबाएं और कमेंट में 'परिवार' लिखकर अपनी राय ज़रूर दें। इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करें, शायद कोई 'शेखर' इसे पढ़कर वापस अपने 'परिवार' के पास लौट आए।
✍️आरती सिंह  
धन्यवाद
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जौ: एक ऐसा सुपरफूड जो आज हर घर में होना चाहिए ।

Superfood Barley - जौ: एक ऐसा सुपरफूड जो आज हर घर में होना चाहिए - आज की लाइफस्टाइल में ज्यादातर बीमारियां हमारी गलत खान-पान की आदतों और बैठे-बैठे रहने की वजह से बढ़ रही हैं। 

ऐसे में कुछ पारंपरिक अनाज ऐसे हैं जिन्हें अगर हम अपनी डाइट में शामिल कर लें, तो कई समस्याओं से बचा जा सकता है। ऐसा ही एक अनाज है जौ।

जौ को आयुर्वेद में बहुत खास माना गया है। यह सिर्फ एक साधारण अनाज नहीं, बल्कि कई लाइफस्टाइल बीमारियों में उपयोगी माना गया है। पाचन से जुड़ी समस्याएं हों, मोटापा हो, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, फैटी लिवर, हृदय रोग या शरीर में ब्लॉकेज जैसी समस्याएं—इन सब में जौ को लाभकारी बताया गया है।

संस्कृत में जौ को “यव” कहा जाता है। आयुर्वेद के कई प्राचीन ग्रंथों जैसे अष्टांग हृदय, सुश्रुत संहिता और भावप्रकाश निघंटु में इसके गुणों का विस्तार से वर्णन मिलता है।

आयुर्वेद के अनुसार जौ के गुण
आयुर्वेद में किसी भी खाद्य पदार्थ को समझने के लिए उसके गुणों को जानना जरूरी होता है। जौ के बारे में आचार्य वाग्भट्ट बताते हैं कि इसके कुछ मुख्य गुण इस प्रकार हैं।

जौ स्वभाव से थोड़ा रूखा होता है, यानी इसमें ड्राइनेस का गुण होता है। इसकी तासीर ठंडी मानी जाती है और यह थोड़ा भारी भी होता है, यानी इसे पचने में समय लग सकता है। इसके स्वाद में हल्की कसैलापन और मिठास दोनों होते हैं।

दोषों की बात करें तो जौ पित्त और कफ को शांत करने वाला माना जाता है। यानी जिन बीमारियों का संबंध पित्त और कफ से होता है, उनमें यह काफी उपयोगी हो सकता है। हालांकि यह वात को थोड़ा बढ़ा सकता है, इसलिए वात प्रकृति वाले लोगों को इसे सही तरीके से खाना चाहिए।

जौ के सेवन के सात बड़े फायदे
1. वजन और पेट की चर्बी कम करने में मदद
आजकल मोटापा और पेट की चर्बी बहुत आम समस्या बन चुकी है। आयुर्वेद के अनुसार जौ में एक खास गुण होता है जिसे लेखन गुण कहा जाता है। इसका मतलब है कि यह शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी को धीरे-धीरे कम करने में मदद करता है।

जो लोग मोटापे के साथ-साथ पित्त से जुड़ी समस्याओं जैसे शरीर में ज्यादा गर्मी, जलन, एसिडिटी या ज्यादा पसीना आने से परेशान रहते हैं, उनके लिए जौ बहुत फायदेमंद माना जाता है।

आधुनिक रिसर्च में भी यह पाया गया है कि जौ का सेवन कोलेस्ट्रॉल कम करने, डायबिटीज को कंट्रोल करने, ब्लड प्रेशर संतुलित रखने और हृदय स्वास्थ्य बेहतर करने में मदद कर सकता है।

जौ का पानी कैसे बनाएं
मोटापा या मेटाबॉलिज्म सुधारने के लिए जौ का पानी काफी लोकप्रिय उपाय है।

इसके लिए 2 से 3 चम्मच पर्ल जौ लें। इसे दो-तीन बार अच्छे से धो लें। फिर इसे लगभग चार कप पानी में डाल दें और बेहतर होगा कि इसे रात भर भिगोकर रखें।

अगले दिन इसी पानी को उबालें और तब तक उबालें जब तक चार कप पानी घटकर लगभग दो कप न रह जाए। इसके बाद इसे छान लें।
इस पानी को दिन में दो से तीन बार थोड़ा-थोड़ा करके पिया जा सकता है। चाहें तो इसमें थोड़ा सा सेंधा नमक और नींबू का रस भी मिला सकते हैं।

शरीर को मजबूती और ऊर्जा देता है
आयुर्वेद में जौ को ऐसा अनाज बताया गया है जो शरीर को स्थिरता और ताकत देता है। इसका नियमित सेवन करने से शरीर में स्टैमिना और ताकत बनी रहती है।

इसके अलावा यह मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढ़ाने, त्वचा की रंगत सुधारने और रक्त को शुद्ध रखने में भी सहायक माना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार यह आवाज को भी बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।

एक हेल्दी पारंपरिक रेसिपी
जौ को कई तरीकों से खाया जा सकता है। एक आसान और हेल्दी तरीका है जौ की खिचड़ी।

इसके लिए जौ को पहले रात भर भिगो दें। अगले दिन इसे एक पैन में पकाएं। दूसरी तरफ एक कड़ाही में थोड़ा घी गर्म करें। उसमें जीरा डालें। चाहें तो हरी मिर्च और थोड़ा प्याज भी डाल सकते हैं।

इसके बाद घर में उपलब्ध सब्जियां जैसे गाजर, खीरा या टमाटर डालें और हल्का पकाएं। अब इसमें हल्दी, धनिया पाउडर, जीरा पाउडर और स्वादानुसार मसाले डालें।

अंत में पका हुआ जौ इसमें मिलाएं, थोड़ा सेंधा नमक डालें और ऊपर से हरा धनिया डाल दें। इस तरह आपकी पौष्टिक जौ खिचड़ी तैयार हो जाती है।

2. कब्ज में राहत
जौ में प्राकृतिक रूप से ऐसे तत्व होते हैं जो मल त्याग को आसान बनाते हैं। यह मल की मात्रा बढ़ाने में भी मदद करता है।

जिन लोगों को कब्ज की समस्या रहती है या जिन्हें ठीक से पेट साफ नहीं होता, उनके लिए जौ का सेवन फायदेमंद हो सकता है। इसके लिए जौ की रोटी, दलिया या खिचड़ी को डाइट में शामिल किया जा सकता है।

हालांकि जिन लोगों की प्रकृति वात प्रधान है, उन्हें जौ खाते समय थोड़ा घी जरूर लेना चाहिए, ताकि इसकी रूखाई संतुलित हो सके।

3. पेट फूलना और गैस में राहत
अगर किसी को बार-बार पेट फूलने या गैस बनने की समस्या रहती है, तो जौ का पानी मदद कर सकता है।
ऐसे में दिन में दो-तीन बार लगभग 50 से 80 मिली जौ का पानी पीना लाभकारी हो सकता है। इससे पेट की असहजता कम हो सकती है।

4. घाव और अल्सर में लाभ
आयुर्वेद में बताया गया है कि शरीर में कहीं भी घाव हो—चाहे वह मुंह के छाले हों, पेट के अल्सर हों या जलन की समस्या हो—ऐसे मामलों में जौ का सेवन लाभकारी माना जाता है।

यह पित्त को कम करता है, जिससे जलन कम होती है और घाव भरने की प्रक्रिया में मदद मिलती है। डायबिटीज के मरीजों में जहां घाव जल्दी नहीं भरते, वहां भी जौ सहायक हो सकता है।

5. डायबिटीज में सहायक
आयुर्वेद में कहा गया है कि डायबिटीज यानी प्रमेह के रोगियों के लिए जौ बहुत उपयोगी है। जौ का सत्तू बनाकर भी इसका सेवन किया जा सकता है।

इसके लिए दो से तीन चम्मच जौ सत्तू लें, उसमें पानी मिलाएं और थोड़ा सेंधा नमक तथा भुना जीरा पाउडर मिलाकर पी सकते हैं। इसे सुबह खाली पेट या दोपहर में लिया जा सकता है।

6. किडनी और मूत्र संबंधी समस्याओं में लाभ
जिन लोगों को पेशाब में जलन, बार-बार पेशाब आना, यूटीआई या किडनी से जुड़ी समस्याएं होती हैं, उनके लिए जौ का पानी उपयोगी माना जाता है।

ऐसे मामलों में दिन में तीन-चार बार लगभग 50 से 60 मिली जौ का पानी थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लिया जा सकता है।

7. कफ से जुड़ी बीमारियों में फायदा
जौ शरीर में कफ दोष को कम करने में मदद करता है। इसलिए जिन लोगों को सर्दी-जुकाम, एलर्जिक राइनाइटिस, खांसी, बलगम या अस्थमा की समस्या रहती है, उनके लिए जौ का सेवन फायदेमंद हो सकता है।

ऐसे लोगों को जौ का पानी पीने के बजाय जौ की रोटी या दलिया खाना ज्यादा बेहतर माना जाता है।

Conclusion
जौ एक ऐसा पारंपरिक अनाज है जो हमारे स्वास्थ्य के लिए कई तरह से लाभकारी हो सकता है। यह पाचन सुधारने, वजन संतुलित रखने, डायबिटीज और कफ से जुड़ी समस्याओं में मदद करने के साथ-साथ शरीर को ताकत भी देता है।

अगर इसे सही तरीके से और नियमित रूप से अपनी डाइट में शामिल किया जाए, तो यह कई लाइफस्टाइल बीमारियों से बचाव में मदद कर सकता है।

क्या आपके घर में जौ इस्तेमाल होता है?