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Friday, 3 April 2026

काशी में पिता महेश्वर मंदिर में भूमीगत शिवलिंग के दर्शन मात्र से पितृदोष मुक्ति होती हैं।

॥ॐ॥
काशी के पिता महेश्वर शिव लिंग के दर्शन मात्र से पितृदोष दूर हो जाता हैं। संदर्भित रील में बताया है कि " गया जाकर श्राद्ध करना आवश्यक नहीं , इनके दर्शन मात्र से २० पीढ़ी पितृदोष मुक्त हो जाती हैं।
संदर्भ - https://www.facebook.com/share/v/1BftCFR1Bj/
वयं राष्ट्रे जागृयाम

भारत की यह शौर्य गाथा (जिसे पाठ्यक्रम का हिस्सा होना चाहिए था) देश कि भावी पीढ़ी को बताना था, मगर नहीं बताया गया....

मित्रों, गुस्सा क़ाबू में रखना, क्योंकि पढ़ने के बाद ज़बरदस्त गुस्सा फूट पड़ेगा आपके अंदर से...

क्या आपको पता है 1967 में भारत ने चीन के 300 सैनिक मार दिए थे लेकिन मक्कार कांग्रेसी इस सफलता का श्रेय किस मजबूरी की वज़ह से नहीं ले पा रहे हैं ⁉️

तो सुनिए हुआ क्या था... 
वास्तव में 1967 में भारत के जांबाज सैनिकों ने चीनियों के दांत खट्टे कर दिए थे, मगर इसमें कांग्रेस सरकार का कोई रोल ही नहीं था‼️

पूरी कहानी यह है, कि 1965 की लड़ाई में पाकिस्तान पस्त हो रहा था. अयूब खान भागा-भागा चीन गया और चीन से आग्रह किया कि वह भी एक मोर्चा खोल दे, ताकि भारत जंग हार जाए ⁉️

चीन ने पाकिस्तान की मदद करने के लिए भारत को तुरंत चेतावनी दी कि, "भारतीय सेना अपनी दो पोस्ट खाली कर दे !" 
इनमें से एक चौकी थी "जेलेप" और दूसरी थी प्रसिद्ध "नाथू ला"‼️

देश का दुर्भाग्य है कि डरपोक कांग्रेस ने सीधे तौर पर चीन के इस आदेश को मान लिया और सेना को आदेश दिया कि, "जेलेप और नाथू-ला चौकी को खाली कर के भारतीय फ़ौज पीछे आ जाए... ⁉️"

यह ठीक वही समय था जब भारत के लाल "श्री लाल बहादुर शास्त्री जी" का रहस्यमय निधन ताशकंद में हो गया था ! और, इंदिरा गांधी भारत की प्रधानमंत्री बन चुकी थी‼️

तो स्वाभाविक रूप से आदेश का पालन हुआ और जेलेप चौकी को आदेशानुसार खाली कर दिया गया। भारतीय सेनाओं के पीछे हटते ही उस पर बाकायदा चीनियों ने कब्ज़ा भी कर लिया बिना एक बूँद रक्त बहाए... ‼️

दूसरी चौकी नाथु-ला पर तैनात थे जनरल संगत सिंह‼️
उन्हें कोर मुख्यालय प्रमुख "जनरल बेवूर" ने आदेश दिया नाथू ला खाली करने का, मगर जनरल संगत सिंह ने उस आदेश को मानने से खुले तौर पर इंक़ार कर दिया‼️

...जनरल संगत सिंह अपनी टुकड़ी के साथ आदेश न होने के बावजूद डटे रहे! भयंकर झड़प हुई! भारत के 65 सैनिक शहीद हो गए! लेकिन हमारे जवान अपने हौसलों के साथ खुले में खड़े रहे! जबकि चीन अपेक्षाकृत बेहतर हालात में हमारे जवानों को मार रहा था‼️

जानते हैं, ऐसा क्यों था⁉️
...यह इसलिए था क्योंकि भारतीय सेना के पास वहां तोप भी थी लेकिन उसे चलाने का आदेश देने का हक़ भारतीय सेनाध्यक्ष को भी नहीं था (जी हाँ अपने सही पढ़ा, फ़िर से पढ़ लीजिये... "तोप चलाने का आदेश देने का हक़ भारतीय सेनाध्यक्ष को भी नहीं था")‼️

यहां सैनिक वीर गति को प्राप्त हो रहे थे और पी एम मैडम (तथाकथित आयरन लेडी) किसी भी तरह इसे इस्तेमाल करने के मूड में नहीं थी❓

स्थिति को भाँप कर और किसी भी बात की परवाह किये बिना, जनरल संगत सिंह ने सीधे अपने सैनिकों को तोप इस्तेमाल करने को कहा‼️ जनरल के इस आदेश के बाद वहाँ का सीन बदल गया‼️ भारतीय सेना ने चीनियों पर ऐसा कहर बरपाया, कि देखते ही देखते चीन के 300 जवान वहां इकतरफा तौर पर ख़त्म कर दिए गए‼️

स्थिति सामान्य होते ही जनरल संगत को सज़ा दी गई⁉️ उन्हें वहां से तबादला कर कहीं और भेज दिया गया, लेकिन नाथु ला दर्रा उसी महापुरुष के कारण सुरक्षित हुआ ‼️

कितनी शर्म की बात है कि ...भारत की यह शौर्य गाथा (जिसे पाठ्यक्रम का हिस्सा होना चाहिए था) देश कि भावी पीढ़ी को बताना था, मगर नहीं बताया गया.... क्योंकि अगर यह बताया जाता तो भारत की यह शौर्य गाथा कांग्रेस की शर्म गाथा बन कर सामने आती...⁉️

...इसलिए इतनी बड़ी जीत को देश से छिपा लिया गया⁉️

एक धमकी पर दो चौकी खाली कर देने का आदेश देने वाले..., और तोप चलाने की इजाज़त किसी क़ीमत पर भी नहीं देने वाले... ये वही कांग्रेस के लोग हैं, जिन्होंने बाद में सामान्य गोली चलाने तक का अधिकार भी समझौता कर भारतीय सेना से वहां छीन लिया और उसी खांग्रेस का राजकुमार Doklam विवाद के समय टी वी पर प्रकट हो कर पूछता है, कि जवानों को खाली हाथ क्यों भेजा ❓❓❓❓❓
EveryOne
साभार : डे जी सिंग
चित्र - कथित स्वाधीनता के बाद भारतीय संस्कृति और गौरवपूर्ण इतिहास को पाठ्यक्रम से मिटाने वाले कांग्रेसी नेता जवाहरलाल नेहरु और इंदिरा गांधी ।