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Tuesday, 3 February 2026

व्यास - जो दीर्घतम वा बृहत्तम हैं।

शुचि शुचिपदं हंसं तत्पदं परमेष्ठिनम् युक्त्वा सर्वात्मनाऽऽमानं तं प्रपद्ये प्रजापतिम्।।

सहस्र रश्मि सूर्य, सहल वाक् शिव, सहस्र फण शेष, सहस्रनेत्र इन्द्र, सहस्र कर्ण पृथु सहस्रपात् विष्णु, सहस्र पाश वरुण, सहस्र पक्ष गरुण, सहस्र रूप राम, सहस्र काय कृष्ण का ध्यान करते हुए मैं श्री पं. जी को प्रणाम करता हूँ।

            वेदों पर सर्वप्रथम भाष्य लिखा, व्यास ने यह भाष्य १८ खण्डों में लिखा गया। इन खण्डों को पुराण कहते हैं। वेदों को जीवित रखने का श्रेय व्यास को जाता है। वेद गूढ है। पुराण गूढ़तर हैं किन्तु रोचक हैं। वेद, पुराणों के रूप में जन-जन तक पहुंचे हुए हैं। व्यास की शैली को समझना कठिन है। इस शैली को न जानने के कारण पुराण अबोधगम्य हैं। सत्य की कृपा से यह शैली समझ में आती है। इसको जानने के लिये व्यास को जानना आवश्यक है। व्यास मन इस समीकरण की सिद्धि पर मैं अपना ध्यान केन्द्रित करता हूँ। 'व्यास' का मूल अस् वा आस् धातु है। 

    वि + अस् + घञ् = व्यास।
    व्यस्ति व्यस्यति व्यसति ते व्यासते वियोजन करना विभाजन करना विश्लेषण करना पृथक्-पृथक् करना फाड़ना टुकड़े करना अतिक्रमण करना फेंकना उछालना विखेरना प्रकट करना मन का गुण धर्म है। इस लिये यह व्यास है।

अस् अदादि परस्मै अस्ति 
अस् दिवादि परस्मै अस्यति 
अस् भ्वादि उभय असति-ते 
आस् अदादि आत्मने आस्ते
 वि+ आसू आत्मने व्यासते 
"विण्यास वेदान्यस्मात् तम्माद् व्यास इतिस्मृतः ।'

व्यास का एक विशिष्ट अर्थ है। विश्व को दो समान टुकड़ों में बाँटना। भूगोल खगोल वा ब्रह्माण्ड के केन्द्र से होकर विश्व वा ज्ञान के ओर छोर को स्पर्श करने वाला व्यास होता है। जो दीर्घतम वा बृहत्तम है वह व्यास है।
    मान लिया के केन्द्र वाला कोई है। क केन्द्र से हो कर जाने वाली वृत्त रेखा, जो परिधि को अ और इ बिन्दुओं पर काटती है, व्यास कही जाती है। यदि यह रेखा केन्द्र से हो कर नहीं जाती तो व्यास नहीं होती। तब इसे जीवा कहते हैं। आ ई रेखा केन्द्र क से होकर नहीं जाती, इस लिये जीवा है। आ ई  रेखा केन्द्र क से होकर जाती है, इस लिये व्यास है। जीवा, व्यास से सदैव छोटी होती है। जीवा, जब व्यास के बराबर होती है अर्थात् जब केन्द्र से हो कर जाती है तो जीवा नहीं होती। अपितु व्यास होती है। जीवा, जीव है। व्यास, ईश्वर है। जीव का ईश्वर से तादात्म्य होने पर जीव जीव नहीं रहता- ईश्वर हो जाता है। जीवा, व्यास से सदा छोटी होती है। जीव, ईश्वर से छोटा होता है। जीवाएँ अनेक होती हैं, ईश्वर एक होता है। राम चरित मानस की यह पंक्ति है...

 "परबस जीव, स्वबस भगवन्ता ।
जीव अनेक, एक श्री कन्ता ॥
 -(तुलसीदास) 

 जो ब्रह्मण्ड के केन्द्र से हो कर जाता है, ब्रह्माण्ड को आर-पार करता है, वह व्यास है। महत्व है केन्द्र से हो कर जाने गा । ब्रह्मण्ड के ओर-छोर का पता अनेकों को होता है। केन्द्र को न जानने के कारण वे जीव हैं। इस केन्द्र को जानने के कारण वही जीव व्यास कहलाता है। ब्रह्माण्ड का केन्द्र है- आत्मा। इस ब्रह्माण्ड की परिधि है-माया। जो आत्मा और प्रकृति दोनों को जानता है, वह व्यास है। जो क्षेत्र और क्षेत्री दोनों का ज्ञान रखता है, वह व्यास है। व्यास का एक सिरा अस्ति है, दूसरा सिरा नारित है। व्यास का एक छोर अंधकार है, दूसरा छोर प्रकाश है। व्यास का आदि बिन्दु जन्म है, अन्तिम बिन्दु मृत्यु है। जो द्वैतज्ञ है, वह व्यास है। जो दो आँखों से देखता है, वह व्यास है। जो आत्मा को स्त्री-पुरुष के रूप में देखता है, वह व्यास है। इस संबंध में एक कथा है। व्यास जी अपने पुत्र शुक देव के पीछे-पीछे जा रहे थे। एक सरोवर में स्त्रियाँ नग्न स्नान कर रही थीं। शुकदेव १६ वर्ष के थे। शुक देव को देख कर उन्हें लज्जा नहीं आयी। वे नग्न खड़ी रह कर उन्हें देखती रहीं। जब व्यास जी को उन स्त्रियों ने देखा तो अपने शरीर को ढकने लगीं। व्यास ने इसका कारण उन से पूछा तो उन युवतियों ने कहा- आप का बेटा शुकदेव स्त्री-पुरुष भेद नहीं करता, आप भेद करते हैं। तात्पर्य यह हुआ कि शुकदेव के पास अद्वैत दृष्टि थी, व्यास के पास द्वैत दृष्टि । शुकदेव समदर्शी थे, व्यास विषमदर्शी । समदर्शी के पास एक आँख होती है, विषमदर्शी के पास दो । यद्यपि एक आँख विषम हैं, दो आँख सम है। व्यास ने एक तत्व को दो भागों में बाँट कर देखा है, शुकदेव ने इन दोनों को एक कर के देखा है। व्यास विश्लेषक मन का नाम है, शुक संश्लेषक मन का नाम है। शुक् धातु भ्वादि गण परस्मैपदी शोकति-जाना हिलना डुलना अर्थ वाली है। शुक् + क = शुक । जो हिलता डुलता है, इधर-उधर जाता रहता है वह शुक है। यही तो मन है। मन चंचल है, शुक्र चंचल है। शुक देव की उत्पत्ति घृताची अप्सरा के रज और व्यास के वीर्य से हुई है। घृत + आ + चि= घृताची। अप इव सरति सा अप्सरा (स्त्री)। जिस मन में घृत की स्नेहन शीलता है, एकत्रीकरण (आचिनोति) की क्षमता है तथा जल की तरह प्रवाह है-वह घृताची अप्सरा है। विश्लेषक मन व्यास है। क्यों कि यह पराशरज है। महर्षि पराशर ब्रह्मा के मानसपुत्र हैं। पर + आ + श् + अच् पराशर परान् आशृणाति पराशरः । जो छिन्न-भिन्न करता है, टुकड़े टुकड़े करता है, खण्डन करता है नष्ट करता है-वह पराशर है। पराशर ने काल का खण्डन किया है। विपल पल घटी मुहूर्त होरा लग्न दिन पक्ष मास अयन अब्द संवत्मर युग मन्वन्तर- ये १४ खण्ड काल के हैं। पराशर ने होराशास्त्र की रचना की। १४ भुवन पर्यन्त इस शास्त्र का सम्मान है। यह पराशर मन ही तो ही एक कथा है- पराशर ने मत्स्यगन्धा के गर्भ से व्यास को उत्पन्न किया। अतिगोप्य सूत्र है, यह शुक्र मीन राशि में उच्च का माना जाता है, इसलिये बलवान होता है। काम का पर्याय है, मीन केतन। इसका भी वही अर्थ है। शुक्र और काम में अनन्यत्व है। गन्ध पृथ्वी तत्व का तन्मात्र है। शुक्र में गन्ध है। मत्स्य चंचल है, शर गतिमान है। यह युवान मन है। यह मन, व्यास है। व्यास + अंबिका धृतराष्ट्र व्यास + अंबालिका → पाण्डु । व्यास + दासी विदुर व्यास शुकी घृताची शुक। ये सब मन को विभिन्न अवस्थाएँ हैं और सब मन हैं। धृतराष्ट्र अन्धामन है। पाण्डु अबुध मन है। विदुर ज्ञानी मन है। व्यास विशाल मन है। शुक निर्गुण मन है। नमोऽस्तु ते व्यास विशाल बुद्धे।'
व्यास व्यष्टि नहीं है, समष्टि है। व्यास वाक्य आप्त वाक्य है। व्यास ने ब्रह्मसूत्र रचा। ब्रह्म = विभु। सूत्र अणु। जिसे विभु और अणु का ज्ञान है, वह व्यास है। जिस का इहलोक और पर लोक दोनों पर समान अधिकार है, वह व्यास है जो भौतिक विश्व एवं आत्मिक विश्व-दोनों का ज्ञान देता है, वह व्यास है। जो इन दोनों को जान कर इन से परे हो जाता है, वह शुक है। भागवत कथा शुक वा व्यास के मुख का प्रसाद है। इस प्रसाद के स्वाद का वर्णन नहीं किया जा सकता। पुण्य पुष्यवानों को यह प्रसाद मिलता है। उन पुण्यवानों को मैं प्रणाम करता हूँ।

प्राकृतिक वृक्षों की टहनी ( नीम, बबूल, आम खैर आदि ) से दातून करना भूल चुके हो... तो वापसी कीजिये, तुरंत..... डायबिटीज और हाईपरटेंशन आदि से छुटकारा

डायबिटीज और हाइपरटेंशन है,,,,? यानी दातून करना भूल चुके हो... तो वापसी कीजिये, तुरंत.....

सन 1990 से पहले कितने लोगों को डायबिटीज़ होता था.....?

कितने लोग हाइपरटेंशन से त्रस्त थे......? नब्बे के दशक के साथ हर घर में एक डायबिटीज़ और हाई ब्लड प्रेशर का रोगी आ गया, क्यों? बहुत सारी वजहें होंगी, जिनमें हमारे खानपान में बदलाव को सबसे खास माना जा सकता है। बदलाव के उस दौर में एक चीज बहुत ख़ास थो जो खो गयी, पता है ना क्या है वो...? 

दातून... गाँव देहात में आज भी लोग दातून इस्तमाल करते दिख जाएंगे लेकिन शहरों में दातून पिछड़ेपन का संकेत बन चुका है। गाँव देहात में डायबिटीज़ और हाइपरटेंशन के रोगी यदा कदा ही दिखेंगे या ना के बराबर ही होंगे। वजह साफ है, ज्यादातर लोग आज भी दातून करते हैं। तो भई, डायबिटीज़ और हाइ ब्लड प्रेशर के साथ दातून का क्या संबंध, यही सोच रहे हो ना....?... तो आज आपका दिमाग हिल जाएगा... और फिर सोचिएगा, हमने क्या खोया, क्या पाया?

ये जो बाज़ार में टूथपेस्ट और माउथवॉश आ रहे हैं ना, 99.9% सूक्ष्मजीवों का नाश करने का दावा करने वाले, उन्हीं ने सारा बंटाधार कर दिया है। ये माउथवॉश और टूथपेस्ट बेहद स्ट्राँग एंटीमाइक्रोबियल होते हैं और हमारे मुंह के 99% से ज्यदा सूक्ष्मजीवों को वाकई मार गिराते हैं। इनकी मारक क्षमता इतनी जबर्दस्त होती है कि ये मुंह के उन बैक्टिरिया का भी खात्मा कर देते हैं, जो हमारी लार (सलाइवा) में होते हैं और ये वही बैक्टिरिया हैं जो हमारे शरीर के नाइट्रेट (NO3-)
को नाइट्राइट (NO2-) और बाद में नाइट्रिक ऑक्साइड (NO) में बदलने में मदद करते हैं। जैसे ही हमारे शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड की कमी होती है, ब्लड प्रेशर बढ़ता है। ये मैं नहीं कह रहा, दुनियाभर की रिसर्च स्ट्डीज़ बताती हैं कि नाइट्रिक ऑक्साइड का कम होना ब्लड प्रेशर को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार है। जर्नल ऑफ क्लिनिकल हायपरेटेंस (2004) में 'नाइट्रिक ऑक्साइड इन हाइपरटेंशन' टाइटल के साथ छपे एक रिव्यु आर्टिकल में सारी जानकारी विस्तार से छपी है। और, नाइट्रिक ऑक्साइड की यही कमी इंसुलिन रेसिस्टेंस के लिए भी जिम्मेदार है। समझ आया खेल? नाइट्रिक ऑक्साइड कैसे बढ़ेगा जब इसे बनाने वाले बैक्टिरिया का ही काम तमाम कर दिया जा रहा है? ब्रिटिश डेंटल जर्नल में 2018 में तो बाकायदा एक स्टडी छपी थी जिसका टाइटल ही ’माउथवॉश यूज़ और रिस्क ऑफ डायबिटीज़’ था। इस स्टडी में बाकायदा तीन साल तक उन लोगों पर अध्धयन किया गया जो दिन में कम से कम 2 बार माउथवॉश का इस्तमाल करते थे और पाया गया कि 50% से ज्यादा लोगों को प्री-डायबिटिक या डायबिटीज़ की कंडिशन का सामना करना पड़ा।

अब बताओ करना क्या है? कितना माउथवॉश यूज़ करेंगे? कितने टूथपेस्ट लाएंगे सूक्ष्मजीवों को मार गिराने वाले? दांतों की फिक्र करने के चक्कर में आपके पूरे शरीर की बैंड बज रही है सरकार... गाँव देहातों में तो दातून का भरपूर इस्तेमाल हो रहा है, और ये दातून मुंह की दुर्गंध भी दूर कर देते हैं और सारे बैक्टिरिया का खात्मा भी नहीं करते। मेरे पातालकोट में तो आदिवासी टूथपेस्ट, टूथब्रश क्या होते हैं, जानते तक नहीं। अब आप सोचेंगे कि मैंने टूथपेस्ट और माउथवॉश को लेकर इतनी पंचायत कर ली तो दातून के प्रभाव को लेकर किसी क्लिनिकल स्टडी की बात क्यों नही की? तो भई, अब दातून से जुड़ी स्टडी की भी बात हो जाए। 

बबूल और नीम की दातून को लेकर एक क्लिनिकल स्टडी जर्नल ऑफ क्लिनिकल डायग्नोसिस एंड रिसर्च में छपी और बताया गया कि स्ट्रेप्टोकोकस म्यूटेंस की वृद्धि रोकने में ये दोनों जबर्दस्त तरीके से कारगर हैं। ये वही बैक्टिरिया है जो दांतों को सड़ाता है और कैविटी का कारण भी बनता है। वो सूक्ष्मजीव जो नाइट्रिक ऑक्साइड बनाते हैं जैसे एक्टिनोमायसिटीज़, निसेरिया, शालिया, वीलोनेला आदि दातून के शिकार नहीं होते क्योंकि इनमें वो हार्ड केमिकल कंपाउंड नहीं होते जो माउथवॉश और टूथपेस्ट में डाले जाते हैं। फटाफट इस जानकारी को शेयर करें, गंगा नहा लें।

चलते चलते एक बात और बता दूं, आदिवासी दांतों पर दातून घुमाने के बाद एकाध बार थूकते है, बाद में दांतों पर दातून की घिसाई तो करते हैं और लार को निगलते जाते हैं? लिंक समझ आया? लार में ही तो असल खेल है। ये हिंदुस्तान का ठेठ देसी ज्ञान है बाबू।

ज्यादा पंचायत नहीं करुंगा, मुद्दे की बात ये है कि वापसी करो, थोड़ा भटको और चले आओ दातून की तरफ... कसम से।

बासी पानी जे पिये, ते नित हर्रा खाय।
मोटी दतुअन जे करे, ते घर बैद्य न जाय।।

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ब्रश नहीं, दातून थी असली आयुर्वेदिक मेडिसिन!” 
अगर आप सुबह टूथपेस्ट से ब्रश करते हैं — तो ये थ्रेड आपकी पूरी सोच बदल देगा! 
क्योंकि आयुर्वेद कहता है — "रोगा मुखादारभ्यं",
शरीर के 90% रोग मुँह से शुरू होते हैं…
और उनका इलाज हमारे पेड़ों में छिपा है! 

1️⃣
 आयुर्वेद कहता है — "रोगा मुखादारभ्यं"
 यानी शरीर के 90% रोगों की जड़ है मुँह की गंदगी!

पर आधुनिक टूथपेस्ट ने भुला दिया दादी-नानी की दातून —
वो नीम, बबूल, खैर जो सिर्फ लकड़ी नहीं थे, औषधि थे 

 चलिए जानते हैं — कौन सी दातून आपके लिए सबसे उपयोगी है!
2️⃣
नीम की दातून — मुँह का डॉक्टर!
कड़वा स्वाद, गर्म तासीर 

✅ बदबू गायब
✅ मसूड़े मजबूत
✅ कीड़ा और पायरिया दूर
✅ सूजन और खून का इलाज
✅ इम्युनिटी बढ़ाए

 गर्मी और बरसात में सर्वोत्तम!

>“नीम — कड़वी ज़रूर, पर रोगों की दुश्मन।”

3️⃣
बबूल की दातून — दाँतों का बॉडीगार्ड!
कसैला स्वाद, ठंडी प्रकृति 

✅ दाँतों में चमक
✅ हिलते दाँत संभाले
✅ ब्लीडिंग मसूड़ों में आराम
✅ छालों से राहत

 हर मौसम में उपयोगी, ठंड में बेस्ट!

बबूल — वो प्रहरी, जो दाँतों की रक्षा करता है।”
4️⃣
 खैर की दातून — घाव भरने वाली जड़ी!
तीव्र कसैला, शीतल गुण

✅ मसूड़े बनें चट्टान जैसे
✅ खून तुरंत रुके
✅ बदबू खत्म
✅ टूथ प्रोटेक्शन नैचुरल

“जहाँ खैर है, वहाँ दर्द नहीं ठहरता।”
5️⃣
जामुन की दातून — डायबिटिक फ्रेंडली!
मीठा-कसैला स्वाद, ठंडी तासीर 

✅ शुगर वालों के लिए वरदान
✅ लार का संतुलन बनाए
✅ ताजगी और शक्ति दे

> “जामुन — स्वाद भी, स्वास्थ्य भी।”
 6️⃣
आम की दातून — फ्रेशनेस का राजा! 

✅ दाँतों में चमक
✅ मसूड़ों का खून रोके
✅ मुँह को सुगंधित रखे
✅ आत्मविश्वास बढ़ाए

> “आम की दातून से आती है मुस्कान में आत्मविश्वास की चमक।”
7️⃣
 करंज की दातून — मुँह के रोगों की दुश्मन!

कड़वा-तीखा स्वाद, गर्म तासीर 
✅ बैक्टीरिया साफ
✅ पुरानी बीमारियाँ खत्म
✅ मसूड़ों के घाव में आराम

> “करंज — कड़वाहट में छिपी चिकित्सा।”

8️⃣
दातून करने की सही विधि (आयुर्वेद अनुसार):

1️⃣ ताज़ी, पतली टहनी लें
2️⃣ एक सिरा चबाकर ब्रश जैसा बनाएं
3️⃣ हल्के हाथों से दाँत और मसूड़ों पर घिसें
4️⃣ जीभ पर हल्का मसाज करें
5️⃣ गुनगुने पानी से कुल्ला करें

सूखी या मोटी टहनी मत लो
 ज़्यादा रगड़ना नुकसानदेह
✅ हर दिन नई दातून उपयोग करें

9️⃣
चरक और सुश्रुत संहिता में लिखा है –

 “कटु, तिक्त, कषाय रसयुक्त द्रव्यों से दंतधावन किया जाए।”
👉 यानी जो चीजें तीखी, कड़वी और कसैली हों — वही मुँह की सफाई में श्रेष्ठ हैं।
👉 दातून सिर्फ सफाई नहीं, ये जीवनशैली का आयुर्वेदिक कवच है।
👉 ये न सिर्फ दाँतों को, बल्कि शरीर को भी रोगमुक्त रखता है।
👉 रोजाना दातून = कैमिकल-मुक्त, रोग-मुक्त जीवन!

प्राकृतिक रहो, आयुर्वेद अपनाओ, स्वस्थ जीवन पाओ!”
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#motivation 

बांस का पेड़ - "बेजुबान प्राणी-वृक्ष हमें अपने आचरण से बहुत कुछ सिखाते हैं।"

*🍃                         ॥ॐ॥*                       🍃 
                                कहानी 
                      *💐बाँस का पेड़💐*

एक संत अपने शिष्य के साथ जंगल में जा रहे थे। ढलान पर से गुजरते वक्त अचानक शिष्य का पैर फिसला और वह तेजी से नीचे की ओर लुढ़कने लगा। 

वह खाई में गिरने ही वाला था कि तभी उसके हाथ में बांस का एक पौधा आ गया। उसने बांस के पौधे को मजबूती से पकड़ लिया और वह खाई में गिरने से बच गया।
बांस धनुष की तरह तो मुड़ गया लेकिन न तो वह जमीन से उखड़ा और न ही टूटा, वह बांस को मजबूती से पकड़कर लटका रहा। थोड़ी देर बाद उसके गुरू वहीं पहुंच गए।

उन्होंने हाथ का सहारा देकर शिष्य को ऊपर खींच लिया। दोनों अपने रास्ते पर आगे बढ़ चले।

राह में संत ने शिष्य से कहा- "प्राण बचाने वाले बांस ने तुमसे कुछ कहा, तुमने सुना क्या?"

शिष्य ने कहा- "नहीं गुरुजी, शायद प्राण संकट में थे इसलिए मैंने ध्यान नहीं दिया और मुझे तो पेड-पौधों की भाषा भी नहीं आती, आप ही बता दीजिए उसका संदेश।"

गुरु मुस्कुराए- "खाई में गिरते समय तुमने जिस बांस को पकड़ लिया था, वह पूरी तरह तो मुड़ गया था। फिर भी उसने तुम्हें सहारा दिया और तुम्हारी जान बची ली।"

संत ने बात आगे बढ़ाई- "बांस ने तुम्हारे लिए जो संदेश दिया वह मैं तुम्हें दिखाता हूं।"

गुरू ने रास्ते में खड़े बांस के एक पौधे को खींचा और फिर छोड़ दिया। बांस लचककर अपनी जगह पर वापस लौट गया।

"हमें बांस की इसी लचीलेपन की खूबी को अपनाना चाहिए। तेज हवाएं बांसों के झुरमुट को झकझोर कर पूरी तरह से उखाड़ने की कोशिश तो करती हैं लेकिन वह आगे-पीछे डोलता तो है पर मजबूती से धरती में जमा रहता है।"

"बांस ने तुम्हारे लिए यही संदेश भेजा है कि जीवन में जब भी मुश्किल दौर आए तो थोड़ा झुककर विनम्र बन जाना लेकिन टूटना नहीं क्योंकि बुरा दौर निकलते ही पुन: अपनी स्थिति में दोबारा पहुंच सकते हो।"

शिष्य बड़े गौर से सुनता रहा। गुरु ने आगे कहा- "बांस न केवल हर तनाव को झेल जाता हैं बल्कि यह उस तनाव को अपनी शक्ति बना लेता है और दुगनी गति से ऊपर उठता है। बांस ने कहा कि तुम अपने जीवन में इसी तरह लचीले बने रहना।"

गुरू ने शिष्य को कहा-
*"पुत्र पेड़-पौधों की भाषा मुझे भी नहीं आती। बेजुबान प्राणी-वृक्ष हमें अपने आचरण से बहुत कुछ सिखाते हैं।"*

यह कहानी भक्ति, विश्वास, कर्म और ईश्वर की कृपा का सुंदर संगम है।
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               साभार - ✍️ ..._एक कहानी_ 
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Sunday, 1 February 2026

॥ सत्य :- संसार का सर्वोच्च मूल्य ॥

        ॥ सत्य :- संसार का सर्वोच्च मूल्य ॥
सत्य संसार का सबसे बड़ा और अमर मूल्य है। झूठी जीभ स्वभाव से झूठ ही बोलती है, किंतु दृढ़ संकल्प, संयम और साहस के साँचे में ढलकर वही जीभ सत्य की साधिका बन जाती है। झूठ मनुष्य को भीतर से कुंठित करता है और समाज में अनेक प्रकार के भ्रम फैलाता है। वहीं सत्यवादी का प्रत्येक संवाद न्याय की तुला पर सबसे बड़ा और विश्वसनीय उपहार होता है। पितामह भीष्म युधिष्ठिर को उपदेश देते हुए कहते हैं:-
सत्येन चाग्निर्दहति स्वर्ग: सत्ये प्रतिष्ठित:।
सत्यं यज्ञस्तपो वेदा: स्तोभा मन्त्रा: सरस्वती॥
( महाभारत, शांतिपर्व १९९/६८ )
अर्थात् - सत्य के कारण ही अग्नि जलती-प्रज्वलित होती है, स्वर्ग सत्य पर ही प्रतिष्ठित है। यज्ञ जैसी महान संस्था, समस्त तपस्याएँ, श्रेष्ठ स्तोत्र, महान मंत्र और वाग्देवी सरस्वती—ये सभी सत्य के साक्षात् स्वरूप हैं।

       प्राचीन काल में सत्य के इस मूल्य को इतना महत्व दिया जाता था कि राजा हरिश्चंद्र की कथा गाँव-गाँव में नाटकों के माध्यम से दिखाई जाती थी। प्रजा से लेकर शासक तक सभी से अपेक्षा की जाती थी कि वे सत्यवादी, सत्यप्रेमी, सत्यानुशील और सत्यमार्गी बनें। सत्य को देवता मानकर सत्यनारायण की कथा-पूजा भी की जाती थी। सत्य को जीवन का आधार, धर्म का मूल और मोक्ष का द्वार माना जाता था।किंतु आज स्थिति विपरीत है। भारतीय संस्कृति और आत्मिक मूल्यों में सबसे अधिक क्षरण यदि किसी का हुआ है, तो वह सत्य का ही हुआ है। झूठ को अब मूल्यवान, चतुराईपूर्ण और सफलता की सीढ़ी मान लिया गया है। राजनीति, व्यापार, सामाजिक संबंध, मीडिया—हर क्षेत्र में सत्य की जगह छल, कपट और माया ने ले ली है।फिर भी सत्य की ज्योति कभी पूरी तरह बुझ नहीं सकती। क्योंकि सत्य ही वह शक्ति है जो अग्नि को जलाती है, स्वर्ग को आधार देती है और सरस्वती को वाणी प्रदान करती है। आज के इस झूठ के युग में हमें पुनः सत्य की साधना करनी होगी—संकल्प से, संयम से और साहस से। क्योंकि सत्य ही वह एकमात्र मूल्य है जो मनुष्य को कुंठा से मुक्त करता है, न्याय की स्थापना करता है और अंततः अमरत्व प्रदान करता है। 
"सत्यमेव जयते"—सत्य की ही सदा विजय होती है।
                साभार - भगवतगीता समूह 
                    वयं राष्ट्रे जागृयाम 

Saturday, 31 January 2026

लहसुन से हो जायेगा कायाकल्प _ बिना पढ़े मत छोड़ना ।

लहसुन से हो जायेगा कायाकल्प _ बिना पढ़े मत छोड़ना 
लहसुन की उत्पत्ति मध्य एशिया से मानी जाती है। आज लहसुन भारत, चीन, फिलीपीन्स, ब्राजील, मैक्सिको आदि सभी देशों में बहुत बड़े पैमाने पर पैदा होता है,,,।

लहसुन में खनिज एवं विटामिनों की काफी अधिक मात्रा होती है। इसमें आयोडीन, गंधक, क्लोरीन, कैल्शियम, फाॅस्फोरस, लोहा, विटामिन ‘सी’ ‘बी’ काफी मात्रा में पाए जाते हैं।

रोग निवारक गुणों में लहसुन का प्रयोग दमा, बहरापन, कोढ़, छाती में बलगम, बुखार, पेट के कीड़े, यकृत के रोग, हृदय रोग, रक्त-विकार, वीर्य-विकार, क्षय आदि रोगों में लाभकारी है।

आयुर्वेद के आचार्यों का मानना है कि लहसुन के प्रयोग से कई प्रकार के रोगों से बचा जा सकता है। शारीरिक शक्ति और वीर्यवर्द्धन में लाभकारी है। यह पौष्टिक, वीर्यवर्द्धक, गर्म, पाचक, मल-निष्कासक तीक्ष्ण तथा मधुर है।

लहसुन के गुणों की आधुनिक खोज भी प्राचीन विचारों की पुष्टि करती है। लहसुन को हृदय रोगों में ‘अमृत’ की संज्ञा दी गई है।

विभिन्न रोगों में लहसुन का उपयोग
क्षय रोग
10, 12 तुर्रियों को पाव भर दूध में अच्छी तरह उबाल लें। तुर्रियों को खाकर दूध पीने से तपेदिक व क्षय रोग में आराम मिलता है।

फेफड़े के रोग
यदि फेफड़े के पर्दे पर अधिक तरल जमा होने से सांस लेने में कठिनाई हो और ज्वर हो तो लहसुन पीसकर आटे में इसकी पुलटिस बनाकर दर्द वाले स्थान पर बांधने से आराम मिलता है।

दमा रोग
लहसुन का रस गुन-गुने पानी में मिलाकर पीने से सांस का दर्द दूर होता है। लहसुन की दो तुर्रियों को देशी घी में भूनकर दिन में दो बार खाने से श्वांस के कष्ट दूर होते हैं। शहद में लहसुन का रस मिलाकर चाटने से भी रोगी को आराम मिलता है। दमे के दौरे में भी लहसुन का रस व शहद मिलाकर चाटने से दौरे का कष्ट दूर होता है।

लहसुन दूध में उबालकर रात को पीने से दमा में लाभ होता है।
लहसुन को सिरके में उबालकर ठंडा कर शहद मिलाकर पीने से दमे के रोगी को लाभ होता है।
लहसुन छाती के सभी रोगों में लाभदायक है, यह सांस व दमे पर नकेल डालता है।

पाचन तंत्र
पेट के रोग के लिए लहसुन बहुत लाभदायक है। यह गैस और अम्लता की शिकायत दूर करता है। लहसुन के प्रयोग से आंतों में पाचक रस उत्पन्न होते हैं तथा पेट के रोगों को समाप्त करने में सहायता मिलती है। इसका प्रभाव शरीर में विद्यमान विष को दूर करता है। आंतों और पेट में किसी भी प्रकार से संक्रमण से उत्पन्न सूजन समाप्त हो जाती है। लहसुन में पाया जाने वाला एन्टीसेप्टिक तत्व संक्रामक रोगों से रोकथाम करता है।

पेट का कैंसर
पेट में कैंसर होने की स्थिति में पानी में लहसुन को पीसकर कुछ समय रोगी को पिलाते रहने से पेट से कैंसर दूर हो जाता है।अमाशय का फोड़ा

अमाशय में यदि कोई फोड़ा हो जाए तो ऐसी स्थिति में भी लहसुन का प्रयोग करने से रोगी को लाभ होता है। ऐसे में लहसुन की दो तीन तुर्रियां चबाकर खानी चाहिए।

पेट के कीड़े
पेट दर्द, पेचिश, दस्तों में भी लहसुन का प्रयोग लाभदायक है। पेट के रोगों में लहसुन के कैप्सूल भी उलपब्ध हैं। लहसुन से आंतों के विषाणु नष्ट होते हैं।

हृदय रोग
हृदय रोग के लिए लहसुन को ‘अमृत’ की संज्ञा दी गई है। हृदय रोग का मुख्य कारण रक्त वाहिनियों, धमनियों का सिकुड़ जाना है और इनसे कोलेस्ट्राॅल जम जाता है जिसके कारण शरीर में रक्त-प्रवाह ठीक प्रकार से नहीं हो पाता। लहसुन के प्रयोग से सिकुड़ी हुई अथवा रुकी हुई धमनियां साफ हो जाती हैं और व्यक्ति हृदय रोग से मुक्ति पा लेता है।

लहसुन की दो तीन तुर्रियां चबा लेने से हार्ट फेल होने की नौबत नहीं आती, ऐसे में नियमित लहसुन दूध के साथ प्रयोग करना चाहिए। लहसुन के सेवन से हृदय पर पड़ने वाला गैस का दबाव कम होता है। यह कोलेस्ट्राॅल को समाप्त करता है तथा हृदय रोगी को नया जीवन देता है।

रक्त चाप
लहसुन का प्रयोग रक्त को पतला करता है इसलिए उच्च रक्तचाप से बचाता है। उच्च रक्तचाप का प्रमुख कारण भी धमनियों का संकुचित होना है। लहसुन के प्रयोग से धमनियों की सिकुड़न समाप्त हो जाती है। लहसुन, पुदीना, जीरा, धनिया, काली मिर्च, सेंधा नमक की चटनी खाने से रक्तचाप कम होता है।

जोड़ों के दर्द
लहसुन के प्रयोग से जोड़ों के दर्द मंे कमी आती है,इससे जोड़ों की सूजन कम होती है, दर्द व सूजन वाले स्थान पर लहसुन का रस लगाने से दर्द कम हो जाता है सूजन दूर होती है। जिन्हें लहसुन की गंध से परहेज है वे रात को लहसुन को घोलकर पानी में भिगोकर सुबह धोकर खाएं। आजकल लहसुन के कैप्सूल भी बाजार में उपलब्ध हैं, उनका प्रयोग किया जा सकता है।

कैंसर
लहसुन का रस कैंसर में लाभदायक होता है। पानी में लहसुन का रस मिलाकर पीने से कैंसर में फायदा होता है, कैंसर की रसौली भी लहसुन के रस के सेवन से नष्ट हो जाती है।

नपुंसकता
किसी भी तरह से प्रयोग किया गया लहसुन नपंुसकता दूर करता है। नपंुसक लोगों को 15-20 लहसुन की तुर्रियों को घी में तलकर खाना चाहिए।

लहसुन के रस को शहद के साथ सेवन करने से भी नपुंसकता दूर होती है।
नंपुसक व्यक्ति लहसुन की तुर्रियों को दूध से उबालकर भी सेवन कर लाभ उठा सकते हैं।
त्वचा विकार
लहसुन का प्रयोग त्वचा के विकारों को भी दूर करता है। लहसुन को चेहरे पर दिन में कई बार मलने से कील मुहांसे दूर होते हैं, आंखों के नीचे के काले धब्बे लहसुन रगड़ने से धीरे-धीरे दूर हो जाते हैं। किसी भी प्रकार के दाग-धब्बे दूर करने में लहसुन लाभदायक है। सौंदर्यवर्धक के रूप में लहसुन का प्रयोग ‘अमृत’ है।

घाव के सड़ने या कीड़े पड़ने पर
शरीर पर कहीं घाव होने पर लहसुन का रस लगाने पर घाव जल्दी ठीक हो जाता है, घाव में कीड़े नहीं पड़ते हैं।

गुम चोट
गुम चोट में भी लहसुन लाभकारी है। लहसुन की तुर्रियों को नमक के साथ पीसकर गुम चोट वाले स्थान पर बांधने से लाभ होता है।

नोट
तीन वर्ष से कम आयु के शिशु को लहसुन नहीं देना चाहिए, किसी भी रोग के लिए लहसुन का प्रयोग करने के लिए किसी चिकित्सा विशेषज्ञ की सलाह लेना हितकर होगा।

लहसुन के अन्य प्रयोग
जहरीले कीड़े के काटने पर भी लहसुन का रस लगाने से विष का प्रभाव दूर हो जाता है।
गले की ग्रंथियांे की सूजन में लहसुन चबाकर खाने से सूजन दूर हो जाती है।
कुकुर खांसी, काली खांसी, फेफड़ों से खून आने पर लहसुन की कलियां चूसने से लाभ होता है।
लहसुन खाने से निमोनिया में भी आराम होता है।
पीलिया में भी लहसुन का प्रयोग लाभकारी है।
लहसुन को तेल में पकाकर उस तेल को ठंडाकर मालिश करने से त्वचा की खुजली मिट जाती है और त्वचा ठीक हो जाती है।
मिर्गी की बेहोशी दूर करने के लिए लहसुन के रस को नाक में टपकाना चाहिए।
लहसुन का नियमित सेवन बुढ़ापे को दूर रखता है।
लहसुन मेधाशक्ति को बढ़ाता है और नेत्रों के लिए भी हितकर है।
लहसुन में विद्यमान एलाइसिन, ऐजोन तथा गंधक तत्व शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न करता है।..


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#satarday

"फेसबुक अकाउंट हैक हो जाए तो चरणबद्ध रिकवरी विधि"

"फेसबुक अकाउंट हैक हो जाए तो चरणबद्ध रिकवरी विधि" 

✓•चरण १ : स्थिति की पहचान (Damage Assessment):
सबसे पहले यह स्पष्ट करें कि हैक किस स्तर का है—

∆स्तर – क
•पासवर्ड बदला गया
•ई-मेल/मोबाइल वही है
➡️ आंशिक हैक

∆स्तर – ख
•ई-मेल + पासवर्ड बदल दिया
•आप लॉग-इन नहीं कर पा रहे
➡️ गंभीर हैक

∆स्तर – ग
•अकाउंट Disable
•पोस्ट/मैसेज का दुरुपयोग
➡️ उच्च जोखिम हैक

✓•चरण २ : तुरंत सुरक्षित डिवाइस से कार्य करें
❌ हैक हुए मोबाइल/कंप्यूटर से लॉग-इन न करें
✅ किसी विश्वसनीय, वायरस-मुक्त डिवाइस का प्रयोग करें
✅ सुरक्षित इंटरनेट (घर का Wi-Fi / मोबाइल डेटा)

✓•चरण ३ : Facebook “Hacked Account” प्रक्रिया शुरू करें:

∆आधिकारिक रिकवरी लिंक

https://www.facebook.com/hacked

∆यहाँ क्या करें

“Someone else accessed my account” चुनें
•अपनी ई-मेल / मोबाइल नंबर डालें
•निर्देशों का पालन करें

 ⚠️ यह प्रक्रिया केवल आधिकारिक Facebook पेज से ही करें।

✓•चरण ४ : पासवर्ड तत्काल बदलें (यदि संभव हो)
•यदि अभी भी लॉग-इन संभव है—
•नया मजबूत पासवर्ड सेट करें
•पुराने सभी पासवर्ड निरस्त हो जाते हैं
•“Log out of all devices” चुनें

✓•चरण ५ : Active Sessions समाप्त करें
•Security Settings →
Where you’re logged in →
➡️ Log out from all sessions

इससे हैकर का मौजूदा एक्सेस कट जाता है।

✓•चरण ६ : Email Account की सुरक्षा अनिवार्य

 ⚠️ यदि Email सुरक्षित नहीं → Facebook भी सुरक्षित नहीं

∆करें
•Email पासवर्ड बदलें
•Email पर भी 2FA चालू करें
•Unknown Recovery Email हटाएँ

✓•चरण ७ : Identity Verification (यदि अकाउंट लॉक हो)
∆यदि Facebook आपसे पहचान माँगे—
•स्वीकार्य दस्तावेज
•आधार कार्ड
•ड्राइविंग लाइसेंस
•पासपोर्ट
📌 फोटो स्पष्ट, बिना एडिट के अपलोड करें
📌 वही नाम होना चाहिए जो प्रोफ़ाइल पर है

✓•चरण ८ : Email / Mobile पुनः जोड़ना

∆यदि हैकर ने बदल दिया हो—
“I don’t have access to this email” विकल्प चुनें
•नया सुरक्षित Email जोड़ें
•Verification पूरा करें

✓•चरण ९ : थर्ड-पार्टी Apps हटाएँ
•Settings → Apps & Websites →
•सभी अनजान Apps Remove
•भविष्य में केवल आवश्यक Apps रखें

✓•चरण १० : Two-Factor Authentication (2FA) तुरंत चालू करें

∆अनुशंसित
•Authenticator App
•Backup Codes Offline सुरक्षित रखें
•2FA के बाद पासवर्ड लीक होने पर भी अकाउंट सुरक्षित रहता है।

✓•चरण ११ : Friends को चेतावनी दें
•पोस्ट/स्टोरी द्वारा सूचित करें
•“मेरे नाम से आए लिंक/मैसेज पर क्लिक न करें”
•यह reputational damage रोकता है।

✓•चरण १२ : यदि अकाउंट Disable हो गया हो
•Appeal Form भरें
•Identity Proof संलग्न करें
•धैर्य रखें (२४–७२ घंटे या अधिक)

❌ बार-बार Appeal न भेजें (नुकसान हो सकता है)

✓•चरण १३ : भविष्य हेतु सुरक्षा Check-List

✔️ मजबूत पासवर्ड
✔️ Email + Facebook दोनों पर 2FA
✔️ Login Alerts ON
✔️ Public Wi-Fi पर Login नहीं
✔️ Fake Blue Tick / Support से दूरी

∆महत्वपूर्ण चेतावनी (अति आवश्यक)

❌ कोई भी “Facebook Recovery Agent” असली नहीं
❌ कोई भी व्यक्ति/पेज पैसे लेकर अकाउंट ठीक नहीं कर सकता
❌ OTP / Recovery Code कभी किसी को न दें

✓•निष्कर्ष:
फेसबुक अकाउंट हैक होना अंत नहीं, बल्कि सुरक्षा-अनुशासन सीखने का संकेत है।
यदि उपरोक्त चरण क्रमबद्ध और धैर्यपूर्वक अपनाए जाएँ, तो—

∆ ९०% से अधिक मामलों में अकाउंट सफलतापूर्वक रिकवर हो जाता है।
#त्रिस्कन्धज्योतिर्विद्

हड़जोड़, जिसे आयुर्वेद में "अस्थि संहारक” कहा गया है। हजारों वर्षों से इसका उपयोग हड्डियों, जोड़ों और मांसपेशियों से जुड़ी समस्याओं के उपचार में किया जाता रहा है।

हमारी धरती पर ऐसी बहुत सी दुर्लभ औषधियाँ पायी जाती हैं, जो किसी वरदान से कम नहीं होतीं। उन्हीं में से एक है हड़जोड़, जिसे आयुर्वेद में "अस्थि संहारक” कहा गया है। हजारों वर्षों से इसका उपयोग हड्डियों, जोड़ों और मांसपेशियों से जुड़ी समस्याओं के उपचार में किया जाता रहा है। 

हड़जोड़ का वैज्ञानिक नाम Cissus quadrangularis है। यह एक बेलनुमा, चौकोर तने वाला पौधा होता है, जिसे भारत के कई हिस्सों में हड़जोड़, हड्डी जोड़, वज्रवल्ली जैसे नामों से जाना जाता है। इसकी जड़, तना और पत्तियाँ—तीनों ही औषधीय गुणों से भरपूर होती हैं।

🌿 🌿हड़जोड़ (अस्थि संहारक) के औषधीय उपयोग

✅️ हड्डी जोड़ने में लाभकारी :-
हड़जोड़ टूटी हुई हड्डियों को प्राकृतिक रूप से जोड़ने में मदद करता है। यह हड्डी बनाने वाली कोशिकाओं को सक्रिय करता है,जिससे फ्रैक्चर जल्दी भरता है और सूजन व दर्द में राहत मिलती है।

✅️ जोड़ों के दर्द और आर्थराइटिस में सहायक :-
इसमें मौजूद सूजनरोधी गुण जोड़ों की सूजन, जकड़न और दर्द को कम करते हैं। बुजुर्गों में होने वाली हड्डियों की कमजोरी और ऑस्टियोपोरोसिस में भी यह उपयोगी माना जाता है।

✅️ मांसपेशियों और चोटों की रिकवरी में सहायक :-
मोच, खिंचाव या खेलकूद से लगी चोटों में हड़जोड़ रिकवरी प्रक्रिया को तेज करता है। इसके पत्तों की हल्की गर्म सिकाई से दर्द में आराम मिलता है।

✅️ पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद :-
हड़जोड़ गैस, अपच, पेट फूलना और कब्ज जैसी समस्याओं में लाभ देता है। यह पाचन अग्नि को मजबूत करता है और भूख बढ़ाने में मदद करता है।

✅️ अस्थमा व श्वसन रोगों में उपयोगी :-
यह फेफड़ों को मजबूत करता है और सांस की समस्या में सहायक माना जाता है।

✅️ ब्लड शुगर व वजन नियंत्रण में सहायक :-
हड़जोड़ ब्लड शुगर को संतुलित रखने में मदद करता है और मेटाबॉलिज्म सुधारकर वजन नियंत्रण में भी सहायक हो सकता है।

✅️ महिलाओं के लिए लाभकारी :-
यह मासिक धर्म के दौरान होने वाले पेट दर्द और ऐंठन को कम करने में मदद करता है तथा हार्मोनल संतुलन को सपोर्ट करता है।
आयुर्वेद में इससे निर्मित औषधियों को उपयोग में लाया जाता है,जो सरलता से उपलब्ध है और सेवन करने में भी आसानी होती है।

🛑 ध्यान रखें 

हड़जोड़ एक शक्तिशाली आयुर्वेदिक औषधि है। इसका अधिक मात्रा में या गलत तरीके से सेवन नुकसानदायक हो सकता है। हृदय रोगियों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रोगों से पीड़ित व्यक्तियों को इसका सेवन आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह से ही करना चाहिए।
अनुराधा बंसल