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Friday, 17 January 2025

पतंगोत्सव २०२५ पर संदर्भित नाम पतंग संबंधी वेद मंत्र

                पतङ्ग / पतंग उड़ाने का मन्त्र 

                                  (1) 
         सबसे पहले पौराणिक मन्तर :--
 ॐ पतङ्गाय विद्महे, तन्तु धाराय धीमहि, तन्नो पतङ्ग प्रचोदयात् ॥
                                    🌸
यदि आप इस 👆मन्तर का जाप 14 जनवरी पतंगोत्सव के दिन सबेरे-सबेरे करेंगे तो आपकी पतंग उड़ती रहेगी । 
लेकिन
ध्यान रहे, मन्तर पढ़कर अन्त में भूल से भी यदि आपने "इदं न मम" कहा तो पतंग कट जायेगी इसलिए सावधान रहें । 
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                                    (2)
                   अब पतंग का वैदिक मन्त्र :--

त्रि॒ꣳश॒द्धाम॒ विरा॑जति॒ वाक् *प॑त॒ङ्गाय॑* धीयते। प्रति॒ वस्तो॒रह॒ द्युभिः॑॥                       (यजुर्वेद ३/८)

       (यजुर्वेद का तृतीय अध्याय मन्त्र संख्या 8 )

👆इस मन्त्र का जाप, पाठ व हवन करने से पतंग अच्छी उड़ेगी, मजा आयेगा, 108 बार आहुति दें लेकिन सावधानी वही ऊपर वाली रखनी है । 
                                 🌸
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       ऊपर दिये दो में से एक पौराणिक मन्तर है और उसका रचनाकार/मन्तर-द्रष्टा मैं स्वयं हूँ । पौराणिकों ने ऐसे अनेक मन्तर कल्पना से बना लिए हैं जिसके कारण लोग भ्रम में रहते हैं, उनकी उलझन उन्हें किसी पण्डत से लुटने तक भी ले जाती है । अतः कृपया किसी भी प्रकार के मनुष्य के द्वारा बनाये मन्तर पर भरोसा न करें, सदा वेद मन्त्र ही पढ़ें, स्वाध्याय करें । 
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दूसरा मन्त्र है यजुर्वेद का परन्तु ध्यान रहे :- वेद में कर्मकाण्ड नहीं है अतः इस मन्त्र के जाप-पाठ से हवन करने पर भी सिद्धि नहीं मिलनी । यजुर्वेद कर्म का वेद है, ज्ञान पा कर कर्म करने से सिद्धि मिलती है । धार्मिक विद्वानों का संग, शिल्पक्रिया सहित विद्याओं की सिद्धि, श्रेष्ठ विद्या-गुण का दान आदि का नाम यजुर्वेद है ।
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तो अब प्रश्न है कि वेद मन्त्र में आये पतंग पद का अर्थ क्या है ??
उत्तर :-
महर्षि दयानन्द जी ने इस पतङ्गाय पद का अर्थ किया है "पतति गच्छतीति पतङ्गस्तस्मा अग्नये (धीयते) धार्यताम्" अर्थात् चलने चलाने आदि गुणों से प्रकाशयुक्त अग्नि के लिए / पतन-पातन आदि गुणों से प्रकाशित एवं गतिशील अग्नि के लिए |  
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मनुस्मृति के श्लोक (1/21) के अनुसार 
“ संसार की सारी वस्तुओं के नाम, कर्मों के नाम का मूल-आदि-स्रोत वेद हैं। " वेद में से ले लेकर सारे पदार्थों वस्तुओं स्थानों का नामकरण हुआ क्योंकि उस-उसमें वह समान गुण था/है ।
वर्त्तमान में जो पतंग दिखती या उड़ती हैं उनका नाम इसलिए है क्यों की उसमें निम्न गुण हैं :-
१) चलने चलाने का गुण / पतन-पातन आदि गुण
२) गतिशील 
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तो आइये ! एक बार फिर मन्त्र पाठ करें 
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त्रि॒ꣳश॒द्धाम॒ विरा॑जति॒ वाक् प॑त॒ङ्गाय॑ धीयते। प्रति॒ वस्तो॒रह॒ द्युभिः॑॥ ( यजुर्वेद ३/८)
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कृपया जब भी आप "पतंग" देखें या उड़ायें तो इस मन्त्र का स्मरण अवश्य कीजियेगा | अन्यों को बताइयेगा भी की ये जो पतंग आप उड़ा रहे हैं यह पतंग शब्द वैदिक है ....इस प्रकार छोटी छोटी बातों में भी आप वेद प्रचार कर सकते हैं, आवश्यक नहीं की आप व्याख्यान ही दें |
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       मुझे प्रसन्नता है कि मैंने आपको इस पोस्ट के माध्यम से एक वेद मन्त्र पढ़वाया ।
सादर धन्यवाद🙏
                      साभार ✍️ विश्वप्रिय वेदानुरागी
                              वयं राष्ट्रे जागृयाम

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