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Sunday, 26 October 2025

लेख सरमातृभूमि बनाम शरण-भूमि

विस्मित करने वाली जानकारी,,,,।
अंग्रेजी अदालत में तार्किकता के साथ पक्ष रखने वाले महान क्रांतिकारी मदन लाल ढींगरा जी की विद्वता भी प्रातः स्मरणीय है। - मदन ठाकुर

    कमलकांत त्रिपाठी द्वारा प्रेषित उत्तम लेख 
            सरमातृभूमि बनाम शरण-भूमि  

ब्रिटिश संसद ने भले ही क़ानून बनाकर (दो राज्यों और तीन भूखंडों में खंडित) भारत को “शांतिपूर्वक” (?) आजादी दे दी हो, उसके लिए अपरिमित, अकल्पनीय बलिदान दिये गये थे। हमें बलिदानियों का इतिहास या तो मालूम नहीं, या हम उनकी क़द्र करना नहीं जानते। यह कद्र करना हमें सिखाने के बजाय उन्हें भुलाने का माहौल तैयार किया गया, कारण जो भी हो। 

जब फसल पककर तैयार होने लगी, कुछ लोग हिस्सा बँटाने और देश को खंडित करने जरूर आ पहुँचे थे। इसमें सफल हुए लोगों के वंशज पाकिस्तान में अपना इतिहास उस दिन से शुरू करते हैं जिस दिन उन लोगों ने अपने दाँव चलने शुरू किए थे। 

उन्हें असफाक उल्ला खाँ जैसे क्रांतिकारियों की याद क्यों आयेगी? 

इन क्रांतिकारियों ने क्या खंड-खंड-खंडित देश के लिए अपनी कुर्बानी दी थी? और भिन्न-भिन्न प्रांतों के ऐसे ज्ञात, अल्पज्ञात और अज्ञात बलिदानी क्रांतिकारियों और कालापानी की भयावह कैद में घुट-घुटकर सालों-साल जीने या वहीं मर जानेवाले क्रांतिकारियों की संख्या सैकड़ों में नहीं, हजार के ऊपर तो होगी ही।  

ऐसे ही एक क्रांतिकारी के उद्गार ओल्ड बैली सेशन कोर्ट, लंदन में--         

‘मैं अपने बचाव में कुछ नहीं कहना चाहता। मैं केवल अपने कृत्य के न्यायसंगत होने को सिद्ध करना चाहता हूँ। जहाँ तक मेरा सवाल है, किसी अंग्रेजी न्यायालय को मुझे गिरफ्तार करने, जेल में बंद रखने या फांसी देने का कोई अधिकार नहीं है। यही कारण है कि मैंने अपने बचाव में कोई वकील नहीं किया। मेरी मान्यता है कि यदि एक अंग्रेज के लिए यह देशभक्ति का न्यायपूर्ण काम होगा कि जर्मनी के इंग्लैंड पर कब्जा करने की स्थिति में वह जर्मनों से लड़े तो मेरे लिए अंग्रेजों से लड़ना उससे अधिक देशभक्ति और उससे अधिक न्यायपूर्ण काम है। मैं अंग्रेजों को पिछले 50 सालों में 8 करोड़ भारतीयों के कत्ल का जिम्मेदार मानता हूँ। वे हर साल भारत से 10 करोड़ पौंड छीनकर इस देश (इंग्लैंड) में ले आते हैं। जो अंग्रेज यहाँ से भारत जाकर 100 पौंड प्रति माह पाता है उसका सीधा मतलब है कि वह उन एक हजार गरीब भारतीयों को मृत्युदंड देता है जो 100 पौंड पर अपनी जिंदगी गुजर कर लेते, जिसका अधिकांश अंग्रेज अपने आमोद-प्रमोद और छिछोरेपन पर ख़र्च कर देता है। मैं उन्हें अपने देश के ऐसे देशभक्तों को फाँसी पर चढ़ाने और देशनिकाला देने का भी जिम्मेदार मानता हूँ जिन्होंने देशभक्ति का ठीक वही काम किया जिसे करने की सलाह अंग्रेज अपने देशवाशियों को देते हैं। जैसे जर्मनों का इस देश पर आधिपत्य स्थापित करने का कोई अधिकार नहीं, ठीक वैसे ही अंग्रेजों का भारत पर आधिपत्य बनाए रखने का कोई अधिकार नहीं है। अत: हमारे लिए यह पूर्णत: न्यायपूर्ण है कि हम उन अंग्रेजों की हत्या कर दें जो हमारी पवित्र भूमि को प्रदूषित कर रहे हैं। मुझे तो अंग्रेजों के क्रूर पाखंड, ढोंग और स्वाँग पर आश्चर्य होता है। वे अपने को दमित मानवता के—कांगो-वासियों और रूसियों के--उद्धारक के रूप में पेश करते हैं जब कि स्वयं भारत में क्रूर दमन और भयानक नृशंसता को अंजाम दे रहे हैं। अगर इस देश पर जर्मन  कब्जा कर लें और जर्मनों को लंदन की गलियों में विजेता की धृष्टता के साथ चलते हुए देखना बर्दाश्त न कर पाने से कोई अंग्रेज एक-दो जर्मनों को मार दे और वह इस देश की जनता द्वारा देशभक्त के रूप में देखा जाय, तो मैं निश्चय ही अपनी मातृभूमि के उद्धार के लिए किए गये इस काम को सही मानता हूँ। मै जो भी इस न्यायालय के सामने कहना चाहता हूँ वह उस कागज में है जो न्यायालय के सामने है (नहीं था, पुलिस ने गायब कर दिया था)। मैंने वह बयान इसलिए नहीं दिया है कि दया-याचना या उस तरह का कुछ करना चाहता हूँ। मैं चाहता हूँ कि अंग्रेज मुझे मौत की सजा दें क्योंकि उस स्थिति में मेरे देशवासियों में प्रतिशोध की भावना और तीक्ष्ण होगी। मैं अपना यह बयान अपने लक्ष्य की न्यायपूर्णता को बाहरी दुनिया, खासकर हमारे साथ सहानुभूति रखनेवाले अमेरिकी और जर्मन लोगों, के सम्मुख रखने के लिए दे रहा हूँ।“ ( जुलाई-अगस्त 1909) 

और जेल में फाँसी (17 अगस्त 1909) के ठीक पूर्व:  

‘मेरा विश्वास है कि विदेशी बंदूकों के सहारे नियंत्रण में रखा गया राष्ट्र एक सतत युद्ध की स्थिति में होता है। चूँकि एक निरस्त्रीकृत नस्ल के लिए खुला युद्ध असंभव है, मैंने अचानक हमला किया। चूँकि मेरे लिए बंदूक पर मनाही थी, मैंने पिस्तौल निकाली और फायर कर दिया। मेरी तरह धन और बुद्धि से वंचित एक पुत्र के लिए माँ को अर्पित करने को रक्त के सिवा कुछ नहीं होता। इसलिए मैंने उसकी वेदी पर वही चढ़ा दिया। इस समय भारत में एक ही पाठ सीखने को है—हम कैसे मरें। और उसे सिखाने का एक ही तरीका है—हम स्वयं मरें। ईश्वर से मेरी एक ही प्रार्थना है कि मैं पुन: उसी माँ की कोख से जन्म लूँ और उसी पवित्र लक्ष्य के लिए पुन: मरूँ... जब तक कि वह लक्ष्य पूरा न हो जाए। वंदे मातरम्‌।'

कौन था वह क्रांतिकारी? 

मदन लाल धींगरा (18.2.1883—17.8.1909, 26 वर्ष की आयु में फाँसी)। 

हम कितने मदन लाल धींगराओं का नाम तक जानते हैं? 

जो आजादी का मूल्य नहीं जानते, वे आजादी के खतरों से भी गाफिल रहते हैं। सांप्रदायिक गृहयुद्ध की बात ऐसे करते हैं, जैसे वर्ल्ड कप का क्रिकेट मैच हो।

संप्रदाय या मजहब तो विश्वास पर टिका है, भाई। ईश्वर जी से मिलकर और जन्नत या दोजख से लौटकर कोई बताने तो आया नहीं कि मरने के बाद क्या होता हैं ? और आप एक वैज्ञानिक युग में रहने का दावा करते हैं, समर्थ्यानुसार उससे प्राप्त तमाम सुख-सुविधाओं का उपभोग करते हैं। जाने-अनजाने। 

यह जो हाथ में लिये आप पढ़ रहे हैं, विज्ञान ने ही प्रकृति की शक्तियों को खोजकर, उनके उपयोग से इसे बनाकर दिया है, ईश्वर जी ने नहीं। 

(मार्क्सवादी कुछ भी कहें), अपना देश, अपनी मातृभूमि एक ठोस सच्चाई है। जिनको शरणार्थी बनकर दूसरे देशों में रहना पड़ा है या पड़ रहा है, मातृदेश का मतलब उनसे पूछिये।    
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_वयं राष्ट्रे जागृयाम_

वैदिक वास्तु शास्त्र में ज्योतिष दिशाओं और पंच तत्वों की भूमिका

                              ॥ॐ॥
         वैदिक वास्तु शास्त्र में ज्योतिष दिशाओं 
                  और पंच तत्वों की भूमिका

     वास्तु शास्त्र एक समग्र विज्ञान है जो आपको संपूर्ण ब्रह्मांड के साथ सामंजस्य बिठाने में मदद करता है। यह आपको सभी दिशाओं से ऊर्जा के प्रवाह को आकर्षित करने में मदद करता है। वास्तु शास्त्र पंच तत्वों के संतुलन पर ज़ोर देता है। जब आप वास्तु शास्त्र और ज्योतिष को मिलाते हैं, तो आप अपनी सफलता और विकास के लिए एक अधिक निजी स्थान बना सकते हैं।
वास्तु शास्त्र आपके घर के डिज़ाइन और निर्माण के लिए अनुकूल दिशाओं के बारे में बताता है। ज्योतिष शास्त्र में भी, हम ग्रहों, भावों, राशियों और उनकी अनुकूल दिशाओं के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इन दो प्राचीन दर्शनों के बीच संबंध हमें यह समझने में मदद करता है कि प्रत्येक दिशा का व्यक्ति पर क्या प्रभाव पड़ता है।
आइये वैदिक वास्तु शास्त्र में ज्योतिष की भूमिका के बारे में अधिक जानें।
(१) ज्योतिष क्या है?
ज्योतिष, ग्रहों की उनकी कक्षाओं की गणितीय गणना मात्र है। यह एक विश्वास प्रणाली है जो आकाशीय पिंडों और पृथ्वी पर होने वाली घटनाओं के बीच संबंध का सुझाव देती है। ज्योतिष, व्यक्तियों के व्यक्तित्व और भाग्य को परिभाषित करने में भी मदद करता है।
ज्योतिष शास्त्र का मूल सिद्धांत यह है कि सूर्य, चंद्रमा, ग्रहों आदि जैसे खगोलीय पिंडों की गति व्यक्ति के जीवन को प्रभावित कर सकती है। ज्योतिषी इन गतियों पर ध्यान देते हैं और व्यक्ति के स्वास्थ्य, रिश्तों, करियर आदि के बारे में भविष्यवाणियाँ करते हैं।
ज्योतिष विद्या प्राचीन काल से चली आ रही है। आज भी, ज्योतिष विद्या समाज में अत्यंत प्रभावशाली है।
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(२) वास्तु शास्त्र क्या है?
वास्तु शास्त्र एक प्राचीन भारतीय विज्ञान है जो आपको प्राकृतिक तत्वों का सर्वोत्तम लाभ प्राप्त करने के लिए भवन निर्माण की मूल बातें बताता है।
वास्तु शास्त्र में, पर्यावरण में पाँच तत्वों का प्रभुत्व होता है। इनमें वायु, जल, पृथ्वी, आकाश और अग्नि शामिल हैं। रहने की जगह में इन सभी तत्वों का अच्छा संतुलन परिवार के सभी सदस्यों के अच्छे स्वास्थ्य, आर्थिक समृद्धि और खुशहाली को बढ़ावा देता है।
वास्तु शास्त्र इन सभी तत्वों की दिशा को स्पष्ट रूप से रेखांकित करता है। यह आपके घर को इस तरह बनाने का मार्गदर्शन करता है कि आप अपने घर में सकारात्मक ऊर्जा का आनंद ले सकें। जब आपके घर में सभी ब्रह्मांडीय ऊर्जाएँ एक साथ आ जाती हैं, तो आप अपने घर में शांति और संतुष्टि का अनुभव करते हैं। व्यक्ति घर के लिए वास्तु सलाहकार की मदद से अपने रहने के वातावरण को ब्रह्मांड के साथ संरेखित करने के मनोवैज्ञानिक लाभों का भी पता लगा सकते हैं।

(३) ज्योतिष शास्त्र वास्तु शास्त्र में
वैदिक वास्तु शास्त्र में ज्योतिष शास्त्र की महत्वपूर्ण भूमिका है । दिशाओं के प्रभाव और ग्रहों की स्थिति के माध्यम से इसे वास्तु शास्त्र में एकीकृत किया जाता है। वास्तु शास्त्र में ज्योतिष तीन बुनियादी मानदंडों पर निर्भर करता है। इनमें व्यक्ति की कुंडली, वास्तु के सिद्धांत और सबसे शुभ 'समय', जिसे मुहूर्त भी कहा जाता है, शामिल हैं। 
वास्तु विशेषज्ञ अक्सर घर में विभिन्न गतिविधियों के लिए सबसे शुभ समय जानने के लिए ज्योतिष का सहारा लेते हैं। उदाहरण के लिए, आपने लोगों को अपने नए घर में प्रवेश करने या निर्माण कार्य शुरू करने के लिए उपयुक्त मुहूर्त का इंतज़ार करते देखा होगा। वैदिक विशेषज्ञों का मानना है कि इन गतिविधियों को एक साथ करके, आप सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर सकते हैं और अपने घर में एक समृद्ध वातावरण बना सकते हैं।
ज्योतिष और वास्तु में, अलग-अलग दिशाएँ अलग-अलग ग्रहों से संबंधित होती हैं और अलग-अलग तत्वों से जुड़ी होती हैं। यदि कोई व्यक्ति इन दिशाओं के प्रभाव से खुद को जोड़ ले, तो वह अपने जीवन में शांति और सद्भाव बढ़ा सकता है।

(४) ज्योतिष में नौ ग्रह और वास्तु शास्त्र में उनका महत्व
      वास्तु ज्योतिष में नौ ग्रह होते हैं। इन नौ ग्रहों में से प्रत्येक का भवन के डिज़ाइन और लेआउट पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। वास्तु शास्त्र में इन सभी ग्रहों का संबंध अलग-अलग दिशाओं से है। ऐसी मान्यता है कि किसी विशिष्ट दिशा में घर बनाकर इन सभी ग्रहों की ऊर्जा का लाभ उठाया जा सकता है।
आइए इन ग्रहों और वास्तु शास्त्र पर उनके प्रभाव के बारे में अधिक जानें।
1. सूर्य
वास्तु में सूर्य सबसे शक्तिशाली ग्रह है और इसका संबंध पूर्व दिशा से है। यह शक्ति, नेतृत्व और सकारात्मकता का प्रतिनिधित्व करता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, इमारतों की संरचना ऐसी होनी चाहिए कि उनमें अधिकतम सूर्य का प्रकाश प्रवेश कर सके।
जिस जगह पर सबसे ज़्यादा धूप आती है, वहाँ सकारात्मकता और जीवन शक्ति बढ़ती है। चूँकि सूर्य पूर्व दिशा से उगता है, इसलिए आपको पूर्व दिशा में उत्पादकता के क्षेत्र बनाने चाहिए।
2. चंद्रमा
चंद्रमा मन पर शांत प्रभाव डालता है। यह उत्तर-पश्चिम दिशा का स्वामी है। अपने स्थान को चंद्रमा की दिशा के अनुरूप रखने से आपके घर में भावनात्मक स्थिरता आती है। चंद्रमा की ऊर्जा का लाभ उठाने के लिए, आपको अपने घर के उत्तर-पश्चिम भाग को खुला और हवादार रखना चाहिए।
3. मंगल
मंगल ग्रह ऊर्जा और जीवन शक्ति का ग्रह है। इसका संबंध दक्षिण दिशा से है। यह दिशा ऊर्जावान गतिविधियों के लिए जगह बनाने के लिए सबसे उपयुक्त है। अपने घर की दक्षिण दिशा को बंद और भारी रखने से आपको अधिक साहस और ऊर्जा मिलेगी।
4. बुध
बुध बुद्धि और संचार का ग्रह है। यह उत्तर दिशा का स्वामी है। बौद्धिक गतिविधियों के लिए अध्ययन कक्ष या पुस्तकालय जैसे क्षेत्र बुध के प्रभाव में बनाना सर्वोत्तम विचार है। वास्तु और ज्योतिष के अनुसार, उत्तर दिशा में ऐसे कमरे होने से व्यक्ति में मानसिक स्पष्टता और रचनात्मकता बढ़ती है।
5. बृहस्पति
बृहस्पति समृद्धि, आध्यात्मिकता, ज्ञान और विस्तार का प्रतीक है। यह ग्रह उत्तर-पूर्व दिशा को प्रभावित करता है। इसलिए, उत्तर-पूर्व दिशा में स्थित कमरे बृहस्पति से संबंधित गतिविधियों के लिए सर्वोत्तम हैं। ध्यान या प्रार्थना कक्ष बनाने के लिए उत्तर-पूर्व दिशा सबसे उपयुक्त है। यह घर के कार्यालयों के लिए भी एक आदर्श दिशा है।
6. शुक्र
ज्योतिष में, शुक्र प्रेम और सद्भाव का ग्रह है, यह महिलाओं और रिश्तों का प्रतिनिधित्व करता है और स्त्री ऊर्जा से जुड़ा है। यह दक्षिण-पूर्व दिशा को प्रभावित करता है। शुक्र व्यक्ति में रचनात्मकता और संतुष्टि को भी बढ़ावा देता है।
इसलिए, घर में प्रेम, शांति, सद्भाव और रचनात्मकता को बढ़ावा देने वाली सभी गतिविधियाँ शुक्र के प्रभाव में होनी चाहिए। घर का दक्षिण-पूर्व कोना आपके रसोईघर या आर्ट स्टूडियो के निर्माण के लिए आदर्श है।
7. शनि
शनि व्यक्ति में अनुशासन, स्थिरता और ज़िम्मेदारी को बढ़ावा देता है। शनि की दिशा पश्चिम है। पश्चिममुखी कमरे अनुशासन और स्थिरता की आवश्यकता वाली गतिविधियों के लिए सबसे उपयुक्त माने जाते हैं। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर या इमारत का यह हिस्सा ठोस और अच्छी तरह से निर्मित होना चाहिए ताकि सफलता और स्थिरता को बढ़ावा मिले।
8. राहु
राहु दक्षिण-पश्चिम दिशा को प्रभावित करता है और व्यक्ति की भौतिक इच्छाओं का प्रतीक है। वैदिक ज्योतिष में इस ग्रह को अक्सर राक्षसी तत्व से जोड़ा जाता है। इस ग्रह के प्रभाव से व्यक्ति में चतुराईपूर्ण व्यवहार विकसित होता है, इसलिए घर का दक्षिण-पश्चिम भाग ठोस और भारी होना चाहिए ताकि परिवार में अधिक आर्थिक स्थिरता आए। इसलिए, मुख्य शयनकक्ष दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखना आदर्श माना जाता है।
9. केतु
केतु ग्रह आध्यात्मिकता और वैराग्य का प्रतीक है। यह ग्रह उत्तर-पूर्व दिशा से संबंधित है। इसलिए, उत्तर-पूर्व दिशा आपके ध्यान कक्ष बनाने के लिए सबसे आदर्श दिशा है जहाँ आप वैराग्य की कला का अभ्यास कर सकते हैं। आपके घर का यह हिस्सा किसी भी प्रकार की गंदगी या अव्यवस्था से मुक्त होना चाहिए और अच्छी तरह हवादार होना चाहिए।
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(५) ] राशियाँ और वास्तु
ज्योतिष में बारह राशियाँ होती हैं और इनमें से प्रत्येक राशि विशिष्ट तत्वों और दिशाओं से जुड़ी होती है। राशि के आधार पर, प्रत्येक व्यक्ति की एक विशिष्ट जन्म कुंडली होती है। वास्तु शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र, विशिष्ट जन्म कुंडली और तत्वों व दिशाओं के आधार पर व्यक्ति के लिए रहने की जगह बनाने पर केंद्रित होते हैं।
नीचे व्यक्ति की राशि के आधार पर घर का आदर्श प्रवेश द्वार बताया गया है।

सिंह, वृश्चिक और मीन : इन राशि वालों को पूर्व दिशा में स्थित संपत्ति का मालिक होना चाहिए। आदर्श रूप से इनके घर का प्रवेश द्वार इसी दिशा में होना चाहिए।
धनु, तुला और मिथुन : इन राशि वालों को पश्चिम दिशा की ओर मुख वाली संपत्ति का मालिक होना चाहिए।

मेष, वृषभ और कुंभ : इन राशियों के व्यक्तियों को उत्तर दिशा की ओर मुख वाली संपत्ति का मालिक होना चाहिए।

कर्क, कन्या और मकर : इन राशियों वाले लोगों को दक्षिण दिशा की ओर मुख वाली संपत्ति का स्वामित्व रखना चाहिए।

(६) वास्तु शास्त्र में चार दिशाएँ और पाँच तत्व
वास्तु शास्त्र में चार मूल दिशाओं का वर्णन किया गया है:

पूर्व (पूर्व) : विकास, समृद्धि और नेटवर्किंग से संबद्ध।
पश्चिम (पश्चिम): लाभ, प्राप्ति, स्थिरता और समर्थन का प्रतिनिधित्व करता है।
उत्तर (उत्तर) : धन और अवसरों का प्रतीक है।
दक्षिण (दक्षिण): प्रसिद्धि, विश्राम, शक्ति और सुरक्षा का प्रतीक है।
दिशाओं के अलावा, वास्तु के पाँच मूल तत्व भी हैं। आवासीय वास्तु शास्त्र सलाहकार, सकारात्मक रहने के माहौल को बढ़ावा देने के लिए इन पाँच तत्वों में संतुलन बनाए रखने की सलाह देते हैं। 
आइये इन तत्वों पर एक नज़र डालें।

पृथ्वी: स्थिरता और ग्राउंडिंग प्रदान करती है।
जल (जल): प्रवाह, शुद्धता और प्रचुरता का प्रतिनिधित्व करता है।
अग्नि: ऊर्जा, परिवर्तन और प्रकाश का प्रतीक है।
वायु: परिसंचरण, संचार और गति को बढ़ावा देता है।
अंतरिक्ष (आकाश): खुलेपन, विस्तार और कनेक्टिविटी का प्रतीक है।


निष्कर्ष
ज्योतिष का वास्तु शास्त्र से गहरा नाता है। इन दो प्राचीन दर्शनों की मदद से लोग अपने रहने की जगह को समृद्ध बना सकते हैं। ज्योतिष का उद्देश्य आपकी राशि के लिए सबसे उपयुक्त चीज़ों का पता लगाना है। यह आपकी विशेषताओं को जानने और आपके भविष्य के बारे में भविष्यवाणी करने में मदद करता है।

ज्योतिष और वास्तु शास्त्र का संयोजन आपको महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए सर्वोत्तम निर्णय लेने में मदद करता है। आप अपनी जन्म कुंडली के अनुसार घर बनाने की दिशा आसानी से निर्धारित कर सकते हैं। ज्योतिष के माध्यम से, आप आसानी से यह जान सकते हैं कि कौन सा ग्रह आपके लिए शुभ है ताकि आप अपने जीवन में सामंजस्य बनाए रखने के लिए वास्तु संबंधी दिशानिर्देशों का पालन करते हुए अपना घर बना सकें।
वास्तु शास्त्र और ज्योतिषीय दिशानिर्देशों का पालन करने से आपको अपने रहने की जगह को भविष्य में सफलता के लिए डिजाइन करने में मदद मिलेगी। वैदिक वास्तु शास्त्र और घर की वास्तुकला की योजना बनाने के बारे में अधिक जानकारी के लिए, आप भारत के सर्वश्रेष्ठ वास्तु शास्त्र सलाहकार से संपर्क कर सकते हैं।
                                  🙏
                      वयं राष्ट्रे जागृयाम