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Tuesday, 11 August 2026

हरियाली अमावस्या की हार्दिक शुभकामनाएं !!

भारतीय सिनेमा की कुछ सुंदर कलाकृतियों में से एक फिल्मी गीतों ने भारतीय जनमानस पर बहुत गहन प्रभाव डाला है ।यद्यपि एजेंडा , नरेटिव और अवचेतन मस्तिष्क को लक्षित करके भावास्त्र चलाना भी सदैव से निदेशकों का प्रिय शगल रहा है तथापि बुद्धिमान श्रोताओं ने उसमें से नीर क्षीर विवेक का उपयोग करके अपना अभीष्ट पा ही लिया है । 

   बहरहाल स्तर , उद्देश्य और गुणवत्तापूर्ण मनोरंजन की कसौटी पर इस विधा में भी भयंकर गिरावट लगातार आती जा रही है तथापि उसके स्वर्ण काल में संपादित कुछ विशिष्ट कृतियों पर लिखने का लोभ सँवरण नहीं हो पाता कभी कभी ! 
   तो सावन कृष्ण चतुर्दशी के दिन जबकि कल हमारे नगर में हरियाली अमावस्या का मेला भरता है तब मेलों से जुड़े एक सुन्दर गीत पर लिखना तो बनता ही है ।

      "आज का अर्जुन" फिल्म का "गोरी है कलाइयां" 
गीत !! 
   सावन का ओज ,मेले की मौज , 
लता मंगेशकर की ध्वनि और जयाप्रदा की कामाग्नि ।।
   क्या ही सम्मांग,सरस और स्वादिष्ट मिश्रण !! 
  
    भारत में नायक द्वारा घुटने पर बैठकर अंगूठी प्रस्तुत कर प्रणय निवेदन की परम्परा नहीं रहीं है कभी , 
वरन भारत में तो ढेरों प्रकार से प्रणय निवेदन किया जाता रहा है ,नायिका द्वारा भी और नायक द्वारा भी !!
     
       यहां नायिका जयाप्रदा अपने नायक से प्रणय निवेदन करते हुए कहती है ....
     "गोरी है कलाइयां ,तू लादे मुझे हरी हरी चूड़ियां ,
      अपना बना ले मुझे बालमा ......... ......" 
     अर्थात मेरी गोरी गोरी कलाइयों के लिए हरी हरी चूड़ियां लाकर पहना दीजिए और मुझे अपना बना लीजिए प्रिय !!

         वही अपनी बहन,खेती और अन्य दायित्वों से बद्ध नायक भीमा हास्यात्मक रूप से इस निवेदन को ठुकराते हुए कह देता है शब्बीर कुमार की गुरुत्व भरी वाणी में कि 

    "गोरी हो कलाई, चाहे काली हो कलाई
जो भी चूड़ी पहनाए फस जाए।
हरी हरी चूड़ियों की देखे हरियाली
तो ये भीमा की ना खेती सूख जाए ।।
   
अर्थात बिल्कुल नहीं ! ना ! क्षमा कीजिए मुझे तो !! 

   किन्तु प्रेम निवेदन करने वाले कहां इतनी सरलता से पराजय स्वीकार कर लेते है भला !!
  नायिका भी अपने रूप यौवन और वातावरण को देखकर अगला अस्त्र चलाती है और नायक को समझाती है कि ....
" माना की चर्चे होंगे तेरे मेरे प्यार के
जीत ही लेंगे तुमको हम दिल हार के
माना की चर्चे होंगे तेरे मेरे प्यार के
जीत ही लेंगे तुमको हम दिल हार के
हमको पसंद है, तुमको पसंद है
हमको पसंद है, तुमको पसंद है
प्यार में तेरे दुश्वारियां
गोरी हैं कलाइया ........
 
     इस गाने की धुन , राग आदि में तकनीकी रूप से क्या जादू है यह तो मैं नहीं जानता ,संगीत के विशेषज्ञ ही प्रकाश डालें तो ज्ञात हो किन्तु इतना अवश्य कह सकता हूं एक श्रोता के रूप में कि इस गीत के संगीत के साथ शब्द हृदय में उतरते ,कम्पायमान होते ,जप के समान परत प्रति परत जमते चले जाते है । संगीत कहीं मस्तिष्क से लेकर हृदय तक नाचता गाता रहता है निमिष के सहस्त्रांश में सौ बार !!
      
      सम्प्रति !! भीमा अभी भी नहीं मानता !
उल्टे अन्य विकल्पों पर ध्यान देने का अनावश्यक परामर्श देकर छींजा अवश्य देता है नायिका को ।
  साथ ही साथ गले पड़ने वाली / रास्ता काटने वाली जैसे असभ्य उलाहने भी दे देता है ।बताइए इतनी सुन्दर नायिका द्वारा, रम्भा-शुक प्रणय निवेदन के समान विनती करते देख भी भीमा पिघलता नहीं है,
  और तो और एक पुलिया पर सहायिकाओं द्वारा घेर लिए जाने पर क्रोध से भरकर एक थप्पड़ भी जड़ देता है नायिका के सुकोमल गालों पर और भाग जाता है किसी गुमनाम छत पर !!
    बताइए कौन मूर्ख ऐसा करता है ??
क्या भीमा अगर अमिताभ बच्चन है तो कुछ भी करेगा ??
आज की नारीवादी नेत्रियों की माताएं ऐसे दृश्य देखकर ही तो प्रण ली थी कि ऐसी संताने जनेगी जो कभी पुरुष को हाथ उठाने की क्षमता ही न दे !! 😄

    बहरहाल यह नायिका तो बहुत कठोर चर्म की निकली ,पहुंच गई वहां भी , प्यार किया तो डरना क्या !!थोड़ी हताशा का स्वांग करते हुए नायिका अपना ब्रह्मास्त्र भावनात्मक जाल फेंकने पर विवश हो जाती है !! 
कहती है ....
    अपना बना के मुझे छोड़ ना जाना
प्यार भरा दिल ये मेरा तोड़ ना जाना
अपना बना के मुझे छोड़ ना जाना
प्यार भरा दिल ये मेरा तोड़ ना जाना

  और लगभग रोते हुए कहती है ...
दिल मेरा कुर्बान, मेरी जान भी कुर्बान
दिल मेरा कुर्बान, मेरी जान भी कुर्बान
कुर्बान तुझ पर ये जवानियां
कुर्बान तुझ पर ये जवानियां  

   तभी परीक्षा पूर्ण हो जाती है !
प्रेमी अंततः इस निवेदन को स्वीकार कर ही लेता है ।
तप के सिद्ध होने पर प्रेम का वर देने को उद्यत हो जाता है ! 
    कह पड़ता है उसी राग ,सुर में ,
     गोरी है कलाइयां ....
मैं ला दू तुझे हरी-हरी चूड़ियाँ
गोरी हैं कलाइया
मैं ला दू तुझे हरी-हरी चूड़ियाँ
अपना बना लु तुझे बालमा
अपना बना लु तुझे बालमा

फिर दोनों साथ गाते है एक दूसरे का हो जाने के संकल्प को संगीतबद्ध करके !!
अपना बना ले मुझे बालमा
अपना बना लु तुझे बालमा

अपना बना ले मुझे बालमा
अपना बना लु तुझे बालमा

   कीचक को मारने के लिए द्रौपदी जब भीम से अनुरोध करने विराट नगर की पाकशाला में जाकर सोते हुए महाकाय भीम से लिपट जाती है तब कवि कहते है कि जैसे कोई सुकोमल वल्लरि (लता /बेल) किसी सुदृढ़ वृक्ष पर लिपट जाती है वैसे पांचाली ,याज्ञसेनी द्रौपदी भीम की देह से लिपट जाती है और अपना मनोरथ कह देती है जिस महाबली भीम पूर्ण करके ही दम लेते है ।
     ठीक वैसे ही यहां भी नायिका भीमा के सुदृढ़ न सही लंबी ही सही देह पर वल्लरी की भांति लिपट जाती है चक्षु पटाक्षेप कर प्रेम के अमूल्य क्षणों को अनुभव करती हुई !!
         गौर वर्ण पर हरी चूड़ियां हो या हरित साड़ी या कोई अन्य परिधान ,सदैव अद्भुत प्रतीत होते है ।
यह प्रकृति के सबसे घातक सम्मिश्रणों में से एक है ,
अमोघ ,अचूक और हाहाकारी !!
      मेरा मानना है कि भगवती पार्वती भी संभवतः हरितिमा युक्त परिधान धारण करके ही परमपुरुष शिव को मनाने गई होंगी । शिव के मानने में भी निश्चित रूप से यह तत्व भी रहा ही होगा लौकिक लीला स्वरूप !
  भगवती पार्वती अपने प्रकृति रूप में हरित परिधान से भूषित होकर ही तो गई होंगी ,प्रकृति का प्रिय वर्ण धरके।
   
    तो भाई भक्तों आज सावन की हरियाली के बीच इस 
गोरी कलाई और हरी हरी चूड़ियों वाले गीत को सुनकर 
प्रकृति की हरितिमा को अपने प्रेम जीवन में स्थापित करें!
     
    हरियाली अमावस्या की हार्दिक शुभकामनाएं !!

#पुरोहितजी_कहिन 

(सलंग्न चित्र अपनी क्लचर वाली, अंग्रेजी की मैडम जी का ही है ,जिन्होंने कल ये चित्र प्रकाशित कर लिखने के लिए आंदोलित कर दिया !)
टिप्पणियां और प्रतिक्रिया अवश्य देवें वह भी शुद्ध क्यूंकि एथेनॉल युक्त टिप्पणियां जुकरु स्वीकार नहीं करता आजकल !!😂😂

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