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Friday, 7 August 2026

----- अजमेर शरीफ दरगाह और हिन्दू ------

----- अजमेर शरीफ दरगाह और हिन्दू ------ 
बात उस समय की है जब भारत के शूरवीर योद्धा पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गौरी के बीच हरियाणा के तराइन क्षेत्र में युद्ध चल रहा था।‌ पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गौरी के बीच तबतक 15 -16 युद्ध हो चुके थे। 
पहले के युद्ध में सेना का मनोबल बढ़ाने के लिए हिन्दूओं में कवि होते थे जो अपनी वीर रस की कविता से थके-हारे सैनिकों में उत्साह भरते थे।‌  हिंदू युद्ध के बनाए नियमों का पालन अपने मानवीय कर्तव्यों के आधार पर करते थे, जो आज भी हमारी सेना में कायम है। ठीक इसी प्रकार मुसलमान आक्रांताओं में भी था जो आज भी मौलाना मौलवी कहते हैं कि काफिरों को मारोगे तो जन्नत नसीब होगा? 72 हूरें मिलेंगी? 
मोहम्मद गौरी के लश्कर में भी इसी तरह का मौलाना था - मोइनुद्दीन चिश्ती ! वह भी मोहम्मद गौरी की सेना में जन्नत का ख्वाब दिखाकर इस्लाम की दुहाई देकर लड़ने के लिए प्रेरित करता था। जिसे बाद में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के नाम से फिर ख्वाजा गरीब नवाज के नाम से नवाजा गया। मोइनुद्दीन चिश्ती मूलतः फारस, वर्तमान ईरान के सिजिस्तान क्षेत्र का रहने वाला था।‌ जिसे भारत के शिक्षामंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद ने सूफी संत का खिताब देकर हमारे किताबों में छापा और हम-सब वही पढ़ते आए ! अब आइए मोइनुद्दीन चिश्ती और अजमेर शरीफ दरगाह पर! 
बता चुका हूं कि कैसे मध्य रात्रि में सोते हुए पृथ्वीराज चौहान के शिविर पर हमला कर पृथ्वीराज को बंदी बनाया गया? 
मोहम्मद गौरी के शिविर में जश्न का माहौल था। तभी चर्चा का विषय बना कि पृथ्वीराज चौहान की पत्नी संयोगिता को एवं उनकी दोनों पुत्रियां - १ बेला और २ पृथा को मोहम्मद गौरी के हरम में शामिल किया जाए?  मतलब आप समझ ही गए होंगे कि मोहम्मद गौरी इन स्त्रियों के साथ कौन सा व्यवहार करना चाहता था? बता दूं कि पृथ्वीराज चौहान की दोनों पुत्रियों का विवाह हो चुका था। बड़ी बेटी बेला का विवाह महोबा के राजकुमार ब्रह्मदत्त से और छोटी पुत्री पृथा का विवाह मेवाड़ के राजकुमार रावल समर सिंह जी से हुआ था। सेनापति कुतुबुद्दीन ऐबक सेना की टुकड़ी लेकर चलने लगा तो मोइनुद्दीन चिश्ती के भी अंदर का  शैतान जाग उठा? वह भी टुकड़ी में शामिल हो गया। यहां बता देना जरूरी है पृथ्वीराज की दोनों पुत्रियां शस्त्र कला में निपुण एवं परम साहसी थी। आखिर बेटी भी थी तो क्षत्रिय शिरोमणि पृथ्वीराज चौहान की? 
रानी संयोगिता को मालूम चला कि कुतुबुद्दीन ऐबक अपनी सेना लेकर किले में प्रवेश कर लिया है तो रानी ने दासियों सहित जौहर कर लिया । महल का मुख्य द्वार खुलने के बाद कुतुबुद्दीन ऐबक महारानी के शरीर को छूना तो दूर, देख भी नहीं सका! अब आइए मोइनुद्दीन चिश्ती पर। मोइनुद्दीन चिश्ती को मालूम चला कि पृथ्वीराज की दोनों पुत्रियां शिव-पार्वती मंदिर में विशेष पूजा  * गणगौर * पूजने गई है तो कुछ सैनिकों को साथ में लेकर मोइनुद्दीन चिश्ती चल दिया पहाड़ी पर बने मंदिर के तरफ। जानकारी मिलने पर दोनों शेरनियां सतर्क हो गई और मोइनुद्दीन चिश्ती को सैनिकों सहित मार गिराई। सेना की दूसरी टुकड़ी आने से पूर्व ही दोनों बहनों ने स्वयं को नष्ट कर दिया। कुतुबुद्दीन ऐबक ने अपने मोइनुद्दीन चिश्ती को देखकर आग बबूला हो गया। उसने मंदिर के मूर्तियों को खण्डित किया और मोइनुद्दीन चिश्ती को वहीं दफ़न करने का फैसला किया।‌ यह घटना 1192 की है। भारत के इस्लामिक इतिहासकारों ने, कांग्रेसी हुकुमत ने इसे ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह, तो उससे भी जी नहीं भरा तो अब गरीब नवाज शरीफ दरगाह कहकर हिन्दुओं को मूर्ख बनाते आ रहे हैं।‌ कहते हैं कि दरगाह पर चादर और चढ़ावा चढ़ाने से मन्नतें पूरी होती हैं? अरे मूर्ख हिन्दूओं ? कब्र पर चादर चढ़ाने से कहां पर मन्नतें पूरी होती हैं? यह सब तो इसलिए किया गया है ताकि हिन्दुओं को असलियत का पता नहीं चले कि मोइनुद्दीन चिश्ती कितना बड़ा पापी था जो चला था हिन्दु की बेटी का बलात्कार करने? 
जब अपने खुद के चाचा के पार्थिव शरीर को छूकर आते हो तो पहले स्नान करते हो? अपने बाप का दाह संस्कार कर पहले गंगा स्नान कर शुद्ध करते हो शरीर को फिर घर में प्रवेश करते हो? वह जेहादी की लाश कब से पवित्र हो गया जहां चादर चढ़ाने पर तुम गर्व करने लग गए? वह तो तुम्हारे अपने पूर्वजों का हत्यारा है तो वह कैसे पवित्र हो गया? 
सीधी सी बात है कि हमसे हमारा इतिहास चुराया गया है।‌ हमारा सोना चोरी हुआ है तो रिकवरी में यदि कोई दरोगा तुम्हें पीतल वापस करे तो क्या मान लोगे? जरा सोचिए। 70 वर्षों में  हमारा सोना चुरा कर हमें पीतल वापस किया है? अब तो अपने पूर्वजों को जानो और जो अंदर से फैसला हो वही करें।
विचार अवश्य कीजिएगा।

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