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Friday, 1 May 2026

दैहिक लक्षण बताते हैं कि आप क्या बनेंगे।

दैहिक लक्षण बताते हैं कि आप क्या बनेंगे
• डॉ. श्रीकृष्ण "जुगनू"
ज्ञान और अनुभव के बीज लोक और जनजातीय स्मृतियों में मिलते हैं। वे ही संवाद में आकर जब रचनाकारों के हत्थे चढ़ते हैं तो रचनाबद्ध हो जाते हैं और अंत में शास्त्र बनते हैं। शास्त्र बनने की जानकारी लोक को प्राय: नहीं होती। लोकधारा में अनुभव सदा चक्रीयमान रहते हैं। शास्त्र के प्रमाण शास्त्रीय जन ही देखते और देते हैं जबकि लोक में संवाद में सहज प्रकट होते हैं। 

हमारे बीच कितनी गाथाएं और कथाएं हैं जिनमें नायिका को इकतीस और नायक को बत्तीस लक्षणों वाला बताया जाता है। वैदिक ध्यान में लक्षणों की व्यंजना मिलती है। लक्षण का मतलब चिह्न, पहचान, अमिट लांछन। मां और धाय जानती है कि शिशु कितने लक्षण पूर्व जन्म के लेकर जन्मा है! हाथ - पांव की रेखाएं ही नहीं, भुजा, हंसली, कंधा और जंघा आदि के तिल, उरद, कपोल कर्णपाली के अर्बुद, पिटक, मशक, सिर की भ्रमरी, केश का आवर्तन आदि के बारे में भी जाना और परस्पर बताया जाता है।

हम कितना जानते हैं? 
दुनियाभर की बातें करते हैं और जानने का दावा करते हैं लेकिन अपने लक्षणों के बारे में? वह सब मां जानती हैं और लाखीणा कह देती हैं। 

• वैदिक वाङ्मय में स्वरूप को भव, वैभव, धार्यता, धारणा और प्रदेय के रूप में कहा गया है। ( शतरुद्रिय, शतपथ., जैमिनीय. आदि)
• श्रीराम के शारीरिक लक्षण कौशल्या से जानकर नारद ने उजागर किए। ( वाल्मीकि रामायण)
• जनजातियों में लक्ष्मण को 32 लक्षणों वाला ( जोगी, तापस, तपी) मानकर रावण के वध के लिए योग्य बताया गया है। ( जनजातियों में रामकथा)
• मां ने ही लक्षण जानकर आंख से आंसू क्या गिराया, भरथरी को वैराग्य हो गया। ( राजा भरथरी)
• मां ने ही गोरक्ष के लक्षण प्रकट किए तो वह कभी घर नहीं लौटे, न समाधि ली! ( गांव गांव गोरख, नगर नगर नाथ)
• मुनि गर्ग ने जिन 32 लक्षणों को कहा, उन सबको सबने स्वीकार किया। ( राजमार्तंड : राजा भोज)
• पराशर ने 32 लक्षणों को सर्वांग मानकर कहा कि ऐसे लक्षणों से राज्य, मित्र, धन, पुत्र आदि मिलते हैं। (लक्षण प्रकाश)
• बृहस्पति ने दैहिक लक्षणों को दैव कहा और स्फूर्ध्वज, मीनराज, कल्याण वर्मा ने निरापद जीवन का परिचायक बताया। ( जातकी, बृहद्यवन जातक, यवन जातक, सारावली)

ये लक्षण क्या हैं? बत्तीस ही क्यों हैं? इनके आधार पर जीवन चर्या ( केरियर) को चुना जा सकता है। ये ही लक्षण बताते हैं कि पद पाकर भी दायित्व से विमुख होकर रुचि को अपनाया जा सकता है।
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(आचार्य समुद्र ने इन लक्षणों पर ऐसा शास्त्र लिखा जिसको ग्रीक, मिस्र, यूनान, चीन तक ने महत्व दिया। इसका एक अज्ञात लेकिन प्रमाणिक पाठ मिला है... बस उसी पर काम करते करते कुछ याद आ गया! सामुद्रिक विंशति प्रकाशनाधीन )

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चित्र : 
भगवान बुद्ध के जन्म पर शारीरिक लक्षण के आधार पर भविष्य बताने की कथा में अनेक युगों की धारणाओं के बीज निहित है।
सृजन मित्रवर श्री ओमप्रकाश सोनी
✍️ श्री श्री कृष्ण जूगनू