एक कथानक और सारांश ! "
श्रीकृष्ण के प्राण बचाने के लिए उसी दिन जन्मी हुई जिस बालिका को उनसे बदला गया था, उसे कोई स्मरण नहीं करता। बालक की जान का मोल था, लेकिन उस बच्ची का जन्म ही अपने प्राणों का बलिदान करने के लिए हुआ था। आज का दिन न केवल श्रीकृष्ण का जन्मदिन है, बल्कि उस योगमाया का भी जन्मदिन है।
कहा जाता है कि योगमाया कंस की पकड़ से छूटकर स्वर्ग चली गई थी और उन्होंने कंस से कहा था कि तुम्हारा काल (तुम्हें मारने वाला) पैदा हो चुका है। धर्मग्रंथों में साफ तौर पर यह नहीं बताया गया है कि श्रीकृष्ण के दूसरे भाई-बहनों की तरह उसकी भी हत्या कर दी गई थी ? हालाँकि, जो लोग इस प्रकरण या कथानक के बारे में ज्यादा जानते हैं, उनसे मेरा अनुरोध है कि वे इस पर प्रकाश डालें। क्योंकि ये योगमाया वाला प्रकरण और जेल के भारी भरकम लोहे के दरवाजों और बेड़ियों आदि का अपने आप खुल जाना एक काल्पनिक बात के साथ अंधश्रद्धा रूपी तत्व को बढ़ावा देना अवश्य लगता है। तथापि कोई तो घटना है इस योगमाया के संदर्भ में ?
योगमाया भी शक्ति का ही एक अवतार थी, जो भगवान विष्णु के अवतार के साथ एक पुराना वचन पूरा करने के लिए पैदा हुई थी। जब कंस ने उस योगमाया को पैरों से पकड़कर जमीन पर पटका, तो वे यह कहते हुए आकाश की ओर उड़ गईं कि "कंस, तेरा वध करने वाला तो पहले ही जन्म ले चुका है। मैं भी तुझे मार सकती थी, लेकिन चूँकि तूने मुझे मेरे पैरों से पकड़ा, इसलिए मैं इसे तेरी विनम्रता मानती हूँ और तुझे क्षमा करती हूँ।"
[ये सब कुछ पृथक व्याख्या मांगता है]
कृष्ण का जन्म मध्य रात्रि के अंधेरे में, जेल की बंद कोठरी में हुआ था। लेकिन, उनके जन्म के समय सभी पहरेदार सो गए, बेड़ियाँ टूट गईं और सलाखों वाले दरवाजे धीरे से खुल गए। ठीक वैसे ही, जैसे ही हमारे दिलों में कृष्ण (चेतना) का जन्म होता है, सारा अंधेरा (नकारात्मकता) मिट जाता है। सारी बेड़ियाँ (अहंकार, 'मैं' की भावना) टूट जाती है। और वे सभी जेल के दरवाजे जिनमें हम स्वयं को कैद रखते हैं (जाति, धर्म, पेशा, रिश्ते आदि), वे खुल जाते हैं।
यही जन्माष्टमी का असली संदेश और सार है।
पहली गाली पर सर काटने की शक्ति होने बाद भी यदि 99 और गाली सुनने का 'सामर्थ्य' है, तो वो श्रीकृष्ण हैं।
'सुदर्शन' जैसा शस्त्र होने के बाद भी यदि हाथ में हमेशा 'मुरली' है, तो वो श्रीकृष्ण हैं।
'द्वारिका' का वैभव होने के बाद भी यदि 'सुदामा' मित्र है, तो वो कृष्ण हैं।
'मृत्यु' रुपी नाग के फन पर उपस्थित होने पर भी यदि 'नृत्य' है, तो वो श्रीकृष्ण हैं।
'सर्व-सामर्थ्य' होने पर भी यदि 'सारथी' बने थे, तो वो श्रीकृष्ण हैं।
आप सभी को सपरिवार सुदर्शन चक्रधारी, योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण चन्द्र के आज जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ..!!!!
साभार - श्री सुधीर बंसल, फरीदाबाद
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🙏 सादर 🙏
*_❀ वयं राष्ट्रे जागृयाम ❀_*
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