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Tuesday, 9 September 2025

पितृगण तर्पण अर्थात जलांजलि से शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

पितृगण तर्पण अर्थात जलांजलि से शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
नियम के अनुसार तर्पण करना चाहिए जिसमें 21 पीढ़ी तक का तर्पण हो करके गुरु इष्ट मित्र तथा आत्मीय संबंधित जनों का तर्पण भी हो जाता है। ऐसी दिव्यतम व्यवस्था केवल मेरे सनातन धर्म में ही अन्य किसी धर्म में नहीं।
तर्पण में मुख्यतः चांदी के पात्र हो तो बहुत ही अच्छी उत्तम है अभाव में पीतल अथवा ताम्रपत्र भी ले सकते हैं कुशा कच्चा दूध काले तिल सफेद पुष्प पितरों की प्रसन्नता के लिए अनिवार्य है इसके साथ ही उन्हें नैवेद्य में मधु तथा द्राक्षा (दाख) भी प्रिय है।
आज की आपाधापी में नित्य तर्पण कई लोग नहीं कर पाते हैं उनके लिए लघु तर्पण देने का प्रयास कर रहा हूं लेकिन यह केवल मानसिक संतोष ही प्रदान करेगा कि हमने तर्पण कर लिया है हालांकि इसका फल भी मिलता है लेकिन पूर्णरूपेण नहीं।
 #तर्पण_में_सभी_का_अधिकार_है।
जिनका यज्ञोपवीत संस्कार हुआ है, वे देव तर्पण में दाहिनी ओर ऋषि तर्पण में कंठी अर्थात माला की तरह और पितृ तर्पण में बांयी ओर जनेऊ करके तर्पण करें।
जिनका जनेऊ नहीं हुआ है वे अंगोछा या गमछे को इसी तरह रख कर के तर्पण करें।
तर्पण से पहले दक्षिण में तिल का आसन देकर तिल के तेल का दीपक पितरों के निमित्त प्रज्वलित करें शालिग्राम को विराजमान करके चन्दन का तिलक करके जौ व तुलसी दल अर्पण करें।

देवता के 
तर्पण में पूर्व की ओर मुख करके दोनों हाथों में जल भरकर पात्र में पूर्वाभिमुख होकर " इन मंत्रों से तर्पण करते हुए देवताओं को एक बार जलाअंजलि अर्पित करें"
#ॐ_भू:_देवान_तर्पयामि
#ॐ_भुवः_देवान_तर्पयामि
#ॐ_स्व:_देवान_तर्पयामि
#ॐ_भूर्भुवः_स्व:_देवान_तर्पयामि
इन चारों मंत्रों को बोलते हुए एक-एक अंजली जल देवताओं के प्रति सामने की ओर सीधे छोड़ना चाहिए।

#ऋषितर्पण
ऋषि तर्पण उत्तर की ओर मुख करके अंजलि के बीच में से दो दो बार मंत्र बोलते हुए जल अर्पण करें।
 
#ॐ_भू:_ऋषिन_तर्पयामि
#ॐ_भुवः=ऋषिन_तर्पयामि
#ॐ_स्व:=ऋषिन_तर्पयामि
#ॐ_भूर्भुवःस्व:_ऋषिनतर्पयामि
यह मंत्र बोलते हुए ऋषि तर्पण संपूर्ण करें उसके बाद #पितरों के तर्पण के लिए दक्षिण की ओर मुंह करके पितृ तीर्थ अर्थात दाहिने हाथ के अंगूठे से जल की धारा गिराए एक एक मंत्र को तीन बार बोलते हुए तीनों बार जल अर्पित करें।

 #ॐ भू: पितृन तर्पयामि
#ॐ भुवः पितृन तर्पयामि
#ॐ स्व: पितृन तर्पयामि
#ॐ भूर्भुवः स्व:पितृन तर्पयामि

#ॐ भू: पितामहेभ्य: तर्पयामि
#ॐ भुवः पितामहेभ्य तर्पयामि
#ॐ स्व: पितामहेभ्य तर्पयामि
#ॐ भूर्भुवः स्व: पितामहेभ्य तर्पयामि

#ॐ भू: प्रपितामहेभ्य तर्पयामि
#ॐ भुवः प्रपितामहेभ्य तर्पयामि
#ॐ स्व: प्रपितामहेभ्य तर्पयामि

#ॐ भू: मातृभ्यः तर्पयामि
#ॐ भुवः मातृभ्यः तर्पयामि
#ॐ स्व: मातृभ्यः तर्पयामि
#ॐ भूर्भुवः स्व: मातृभ्यः तर्पयामि

#ॐ भू: मातामहेभ्य तर्पयामि
#ॐ भुवः मातामहेभ्य तर्पयामि
#ॐ स्व: मातामहेभ्य तर्पयामि
#ॐ भूर्भुवः स्व: मातामहेभ्य तर्पयामि

#ॐ भू: प्रमातामहेभ्य तर्पयामि
#ॐ भुवः प्रमातामहेभ्य तर्पयामि
#ॐ स्व: प्रमातामहेभ्य तर्पयामि
#ॐ भूर्भुवः स्व: प्रमातामहेभ्य तर्पयामि।।

इतना तर्पण करने के बाद गाय स्वान अर्थात कुत्ता चींटी कौवा और अतिथि इनके लिए भोजन निकालें तथा ब्राह्मण भोजन करवाएं।
नियम से तर्पण योग्य ब्राह्मण के सानिध्य में होना चाहिए जलाशय पर होना चाहिए लेकिन महानगरों में तथा सेवारत व्यक्तियों के लिए यह सब संभव नहीं है इसलिए यह लघु प्रयोग दिया गया है लेकिन प्रयास कीजिए कि जहां तक संभव हो सके संपूर्ण तर्पण ही हो।
चित्र -साभार गूगल

Sunday, 7 September 2025

पूर्वोत्तर भारत के परमवीर योद्धा " लचित बोरफुकन " के नाम का गोल्ड मेडल NDA में बेस्ट कैडिट को दिया जाता हैं।

आपको यह तो ज्ञात होगा कि NDA (National Defence Academy) में जो बेस्ट कैडेट होता है, उसको एक गोल्ड मैडल दिया जाता हैं | लेकिन क्या आपको यह ज्ञात हैं कि उस मैडल का नाम "लचित बोरफुकन" है ? कौन हैं ये "लचित बोरफुकन" ? पोस्ट को पूरा पढ़ने पर आपकों भी ज्ञात हो जाएगा कि क्यों वामपंथी और मुगल परस्त इतिहासकारों ने इस नाम को हम तक पहुचने नहीं दिया |
क्या आपने कभी सोचा है कि पूरे उत्तर भारत पर अत्याचार करने वाले मुस्लिम शासक और मुग़ल कभी बंगाल के आगे पूर्वोत्तर भारत पर कब्ज़ा क्यों नहीं कर सके ?

कारण था वो हिन्दू योद्धा जिसे वामपंथी और मुग़ल परस्त इतिहासकारों ने इतिहास के पन्नो से गायब कर दिया - असम के परमवीर योद्धा "लचित बोरफूकन।" अहोम राज्य (आज का आसाम या असम) के राजा थे चक्रध्वज सिंघा और दिल्ली में मुग़ल शासक था औरंगज़ेब। औरंगज़ेब का पूरे भारत पे राज करने का सपना अधूरा ही था बिना पूर्वी भारत पर कब्ज़ा जमाये।

इसी महत्वकांक्षा के चलते औरंगज़ेब ने अहोम राज से लड़ने के लिए एक विशाल सेना भेजी। इस सेना का नेतृत्व कर रहा था राजपूत राजा राजाराम सिंह। राजाराम सिंह औरंगज़ेब के साम्राज्य को विस्तार देने के लिए अपने साथ 4000 महाकौशल लड़ाके, 30000 पैदल सेना, 21 राजपूत सेनापतियों का दल, 18000 घुड़सवार सैनिक, 2000 धनुषधारी सैनिक और 40 पानी के जहाजों की विशाल सेना लेकर चल पड़ा अहोम (आसाम) पर आक्रमण करने।

अहोम राज के सेनापति का नाम था "लचित बोरफूकन।" कुछ समय पहले ही लचित बोरफूकन ने गौहाटी को दिल्ली के मुग़ल शासन से आज़ाद करा लिया था।
इससे बौखलाया औरंगज़ेब जल्द से जल्द पूरे पूर्वी भारत पर कब्ज़ा कर लेना चाहता था।

राजाराम सिंह ने जब गौहाटी पर आक्रमण किया तो विशाल मुग़ल सेना का सामना किया अहोम के वीर सेनापति "लचित बोरफूकन" ने। मुग़ल सेना का ब्रम्हपुत्र नदी के किनारे रास्ता रोक दिया गया। इस लड़ाई में अहोम राज्य के 10000 सैनिक मारे गए और "लचित बोरफूकन" बुरी तरह जख्मी होने के कारण बीमार पड़ गये। अहोम सेना का बुरी तरह नुकसान हुआ। राजाराम सिंह ने अहोम के राजा को आत्मसमर्पण ने लिए कहा। जिसको राजा चक्रध्वज ने "आखरी जीवित अहोमी भी मुग़ल सेना से लडेगा" कहकर प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया।

लचित बोरफुकन जैसे जांबाज सेनापति के घायल और बीमार होने से अहोम सेना मायूस हो गयी थी। अगले दिन ही लचित बोरफुकन ने राजा को कहा कि जब मेरा देश, मेरा राज्य आक्रांताओं द्वारा कब्ज़ा किये जाने के खतरे से जूझ रहा है, जब हमारी संस्कृति, मान और सम्मान खतरे में हैं तो मैं बीमार होकर भी आराम कैसे कर सकता हूँ ? मैं युद्ध भूमि से बीमार और लाचार होकर घर कैसे जा सकता हूँ ? हे राजा युद्ध की आज्ञा दें....

इसके बाद ब्रम्हपुत्र नदी के किनारे सरायघाट पर वो ऐतिहासिक युद्ध लड़ा गया, जिसमे "लचित बोरफुकन" ने सीमित संसाधनों के होते हुए भी मुग़ल सेना को रौंद डाला। अनेकों मुग़ल कमांडर मारे गए और मुग़ल सेना भाग खड़ी हुई। जिसका पीछा करके "लचित बोफुकन" की सेना ने मुग़ल सेना को अहोम राज के सीमाओं से काफी दूर खदेड़ दिया। इस युद्ध के बाद कभी मुग़ल सेना की पूर्वोत्तर पर आक्रमण करने की हिम्मत नहीं हुई। ये क्षेत्र कभी गुलाम नहीं बना।

ब्रम्हपुत्र नदी के किनारे सरायघाट पर मिली उस ऐतिहासिक विजय के करीब एक साल बाद ( उस युद्ध में अत्यधिक घायल होने और लगातार अस्वस्थ रहने के कारण ) माँ भारती का यह अदभुद लाड़ला सदैव के लिए माँ भारती के आँचल में सो गया |

माँ भारती के ऐसे अद्वितीय पुत्र को कोटि - कोटि नमन .
🙏🏻🙏🏻

आपको जानकारी अच्छी लगी हो तो अपने साथियों को जरूर प्रेषित करे, क्योंकि यदि ज्ञान आप तक सीमित रहता है तो उसका कोई फायदा नहीं है।

Thursday, 4 September 2025

रहस्यमय संख्या 6174

मराठी गणितज्ञ दत्तात्रेय रामचंद्र कापरेकर ने रहस्यमय संख्या 6174 से मिलवाया । 

       इस संख्या ने पूरी दुनिया के गणितज्ञों की नींद उड़ा दी है। वो एक या दो दिन नहीं, बल्कि यह संख्या 1949 से एक रहस्य बना हुआ है।
        कापरेकर के पास गणित विषय में आधिकारिक शिक्षा नहीं थी। लेकिन वे गणित से बहुत प्यार करते थे। आगे बढ़ते हुए उन्होंने मंदिर क्षेत्र के एक स्कूल में गणित की पढ़ाई शुरू की। बस इसी तरह वे बचपन से ही गणित के सबसे कठिन प्रश्नों को हल करना पसंद करते थे कई स्थिर, साथ ही कई संख्याएं उनके नाम से पहचाने जाते हैं। उन्होंने 'मनोरंजन गणित' को लोकप्रिय बना दिया।
        लेकिन यह सब तुरंत नहीं हुआ। सिस्टम उनसे हमेशा भेदभाव करता रहा क्योंकि उनके पास गणित में आधिकारिक शिक्षा नहीं थी और मिडिल स्कूल में शिक्षण नहीं था। कोई भी उनके अपने खोज निबंध नहीं छापता, वे अपने खर्च पर गणित सम्मेलन में जाते थे क्योंकि इनका गणित के लिए प्यार था। उन्होंने 1949 में एक समान गणित सम्मेलन में इस असाधारण संख्या के बारे में जानकारी दी थी। लेकिन दूसरे गणितज्ञों ने अपने अहंकार में उस समय उनका मजाक उड़ाया था। भले ही भारत इस अवधारणा का महत्व नहीं समझता था, लेकिन विदेशी गणितज्ञों ने इस भारतीय जीनियस का संज्ञान लिया। 1975 में एक प्रसिद्ध अमेरिकी लेखक मार्टिन गार्डर ने एक बड़ी विज्ञान पत्रिका में इस बारे में एक लेख लिखा था। उसके बाद, दुनिया उनकी देखभाल करने को मजबूर हो गई।
        यह कॉप्रेकर मुद्दा कैसे काम करता है यह देखने के लिए संख्या 1234 ले लें।
      बस एक बात का ख्याल रखना एक नंबर एक बार आना चाहिए
अब इसे एक अवरोही क्रम में लिखते हैं - 4321
चढ़ाई क्रम में इसे फिर से लिखें - 1234
अब बड़ी संख्या से छोटी संख्या घटायें - (4321-1234= 3087)
अब अंकों के घटते क्रम में लिखे ये नया नंबर - 8730
उस संख्या को फिर से बढ़ते क्रम में लिखो - 0378
अब बड़ी संख्या से छोटी संख्या को घटाएं - (8730 - 378 =8352)
अंकों के घटते क्रम में उत्तर लिखो - 8532
आइए अंक के बढ़ते क्रम में उत्तर लिखें - 2358
चलो बड़ी संख्या से छोटी संख्या को फिर से घटाएं - (8532-2358 = 6174).
ये 6174 जवाब है कैप्रेकरों का जादू जादुई संख्या का जवाब है।
        अब ऊपर दी गई प्रक्रिया के अनुसार इस जादुई संख्या को दोहराएँ, चाहे कुछ भी करें जवाब है 6174 कोई फर्क नहीं पड़ता कि यह प्रक्रिया कितनी बार बार बार हो, अगला जवाब 6174 है...
      आपकी पुष्टि के लिए दूसरा नंबर लेकर इस प्रक्रिया को आजमाएं। अब इस नंबर को 2005 लेते हैं, इसके साथ ऊपर की प्रक्रिया दोहराएँ
5200 - 0025 = 5175
7551 - 1557 = 5994
9954- 4599 = 5355
5553 - 3555 = 1998
9981 - 1899 = 8082
८८२० - ०२८८ = ८५३२
8532 - 2358 = 6174
7641 - 1467 = 6174
आवश्यक शर्त केवल एक बात का ध्यान रखे नंबर एक बार अवश्य आये इसे अपने लिए देखें। जवाब 6174 आएगा। गणितज्ञों के लिए आज भी पहेली है ये नंबर ।

                    साभार ✍️ शुभम वर्मा 
#भारतीयगणित

Tuesday, 2 September 2025

अपनी कार अपडेट रखें

🚗 अपनी कार को हमेशा फिट रखना है? तो इन बातों का रखें खास ध्यान! 🔧💧✅ इंजन ऑयल – हर एक वर्ष या 10,000 किमी जो पहले हो (टाटा की गाडियों में15 हजार किलो मीटर या एक वर्ष)पर चेक और बदलें। ऑयल हमेशा सही ग्रेड का ही यूज करे 🔧 खराब ऑयल = खराब इंजन = महंगा बिल!✅ रेडिएटर का कूलेंट – इंजन को ओवरहीटिंग से बचाता है। कूलेंट दो तरह का आता है। प्री मिक्सड और पोस्ट मिक्सड इस बात का हमेशा ध्यान रखे। दो तरह का कूलेंट मिक्सड न करे।🌡️ गर्मी हो या ठंडी, हमेशा सही लेवल में रखें।✅ ब्रेक फ्लूड – आपकी और कार की सुरक्षा इससे जुड़ी है।🛑 ब्रेक सॉफ्ट लग रहे हों तो फ्लूड जरूर चेक करवाएं। जरूरत हो तो सिस्टम से एयर जरूर निकाल ले।✅ वाइपर वॉशर फ्लूड – साफ विंडशील्ड = साफ ड्राइव।🌧️ बारिश में बहुत काम आता है, खाली न होने दें।⚙️⚙️ गियर ऑयल लाइफ टाइम होता है लेकिन हर सर्विस में गियर ऑयल का लेवल और कंडीशन चेक होना बेहद जरूरी है। जरूरत के हिसाब से टॉप अप या चेंज किया जाता है।🚙✅ डिफरेंशियल ऑयल हर चालीस हजार किलो मीटर या हर चार साल में चेंज किया जाता हैं।🚙✔️ बैटरी का पानी हर तीन महीने में चेक होना चाहिए। अगर कम है तो केवल डिस्टिल्ड वाटर ही डाले और गाड़ी स्टार्ट करने के बाद डाले।🚘 थोड़ा ध्यान रखिए, हजारों की बचत पाइए!कार की परफॉर्मेंस तभी दमदार होगी जब उसकी देखभाल शानदार होगी।
साभार - बल्लू मेकेनिक!#ballumechanic

अकरकरा को सिर दर्द, दांत दर्द, मुँह के बदबू, दांत संबंधी और नपुंसकता आदि समस्याएं दूर करता हैं ।

अकरकरा का परिचय ,,,,,,???

अकरकरा का नाम बहुत कम लोगों को पता होगा। आप ये जानकर आश्चर्य में पड़ जायेंगे कि अकरकरा के औषधीय और आयुर्वेदिक गुण अनगिनत हैं। आयुर्वेद में अकरकरा के पाउडर और चूर्ण का उपयोग दवा के रूप में किया जाता है। अकरकरा को सिर दर्द, दांत दर्द, मुँह के बदबू, दांत संबंधी समस्या, हिचकी जैसे बीमारियों के लिए जादू जैसा काम करता है। चलिये इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

अकरकरा का पौधा क्या होता है,,,,,? (What is Akarkara Plant in Hindi?)
आयुर्वेद में अकरकरा का प्रयोग लगभग 400 वर्षों से किया जा रहा है। यद्यपि चरक, सुश्रुत आदि प्राचीन ग्रन्थों में इसका उल्लेख प्राप्त नहीं होता है, तथापि यह नहीं माना जा सकता कि यह बूटी भारतवर्ष में पहले नहीं होती थी।

भारतवर्ष में पायी जाने वाली यह औषधि प्राय: तीन प्रकार की होती है,,

Anacyclus pyrethrum (L.) Lag. (आकारकरभ)
Spilanthes acmella var. oleracea C.B. Clarke, Syn-Acmellaoleracea (L.) R.K. Jansen (भारतीय अकरकरा)
Spilanthes acmella var. calva (DC.) C.B. Clarke, Syn– Acmellapaniculata (Wall. ex DC.) R.K. Jansen (दीर्घवृन्त अकरकरा)
मुख्यतया आयुर्वेदीय औषधि में Anacyclus pyrethrum (L.) Lagasca का प्रयोग किया जाता है परन्तु इसके अतिरिक्त अकरकरा की दो अन्य प्रजातियाँ प्राप्त होती हैं।

 

जिनका प्रयोग चिकित्सा के लिए किया जाता है, अकरकरा में उत्तेजक गुण प्रमाणित में होने से आयुर्वेद में इसे कामोत्तेजक औषधियों में प्रधानता दी गई है। इसे समान गुण वाली अन्य औषधियों के साथ मिलाकर प्रयोग करने से यह वीर्यवर्धक (सीमन बढ़ाने वाला), और सेक्स की इच्छा बढ़ाने में मदद करता है। कफ तथा शीत प्रकृति वाले व्यक्तियों को अकरकरा के प्रयोग से विशेष लाभ होता है।

आकारकरभ – यह शक्ति बढ़ाने वाला, कड़वा, लालास्रावजनक (Sialarrhea), नाड़ी को बल देने वाला, काम को उत्तेजित करने वाला, वेदना कम करने वाला तथा प्रतिश्याय (Coryza) और शोथ या सूजन को नष्ट करता है। इसकी जड़ हृदय को उत्तेजित करने में सहायक होती है। यह सूक्ष्मजीवाणुरोधी (Antimicrobial) कीटनाशक, दंतकृमि, दांत का दर्द, ग्रसनी का सूजन, तुण्डीकेरी शोथ (Tonsillitis), पक्षाघात या लकवा, अर्धांगघात, जीर्ण नेत्ररोग, सिरदर्द, अपस्मार या मिर्गी, विसूचिका (Cholera), आमवात तथा टाइफस (Typhus) बुखार को कम करने वाला होता है।

भारतीय अकरकरा-यह रस में कड़वा; गर्म; रूखा, वात पित्त को कम करने वाला, लालास्राववर्धक, उत्तेजक, कफ कम करने वाला, पाचक, पेट दर्द तथा ज्वरनाशक होती है। इसका फूल कड़वा, शरीर की गर्मी कम करने में सहायक और वेदना हरने वाला होता है।

अन्य भाषाओं में अकरकरा के नाम (Name of Akarkara Tree in Different Languages)
अकरकरा का वानास्पतिक नाम Anacyclus pyrethrum (L.) Lag. (ऐनासाइक्लस पाइरेथम) Syn-Anacyclus officinarum Hayne होता है। अकरकरा Asteraceae (ऐस्टरेसी) कुल का होता है। अकरकरा को अंग्रेजी में Pellitory Root (पेल्लीटोरी रूट) कहते हैं। लेकिन भारत के भिन्न भिन्न प्रांतों में अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है, जैसे-

Sanskrit-आकारकरभ, आकल्लक;
Hindi-अकरकरा;
Urdu-अकरकरहा (Aaqarqarha);
Kannada-अक्कलकारी (Akkalkari);
Gujrati-अकोरकरो (Akorkaro);
Tamil-अक्किराकरम (Akkirakaram), अकरकरम (Akarkaram);
Telegu-अकरकरमु (Akarakaramu);
Bengali-आकरकरा (Akarkara);
Nepali-अकराकरा (Akarakara);
Malayalam-अक्कलकारा (Akkalkara), अक्कीकारुका (Akkikkaruka)।
English-स्पैनिश पेल्लीटोरी (Spanish pellitory),
Arbi-अकरकरहा (Aqarqarha), आकरकरहा (Aqarqarha), अदुल-कराह (Audul-qarha);
Persian-बेहमपाबरी (Behampabri)। 

अकरकरा के फायदे (Akarkara Uses and Benefits in Hindi)
अकरकरा के पौधे के फायदों (akarkara benefits in hindi) के बारे में जितना कहेंगे कम ही होगा। अकरकरा के गुणों के कारण ये कई बीमारियों के लिए आयुर्वेद में प्रयोग किया जाता है।

सिरदर्द में फायदेमंद अकरकरा (Akarkara Benefits in Headache in Hindi)
अगर आपको काम के तनाव और भागदौड़ भरी जिंदगी के वजह से सिरदर्द की शिकायत रहती है तो अकरकरा का घरेलू उपाय बहुत लाभकारी (akarkara benefits in hindi) सिद्ध होगा।

अकरकरा की जड़ या फूल को पीसकर, हल्का गर्म करके ललाट (मस्तक) पर लेप करने से मस्तक का दर्द कम होता है। इसके अलावा इसके प्रयोग से मुख की दुर्गंध भी दूर हो जाती है, एक बार के प्रयोग के लिए एक फूल या थोड़ा कम पर्याप्त होता है।

सर्दी-खांसी में फायदे अकरकरा (Benefits of Akarkara to Get Relief from Common Cold and Cough in Hindi)
अकरकरा के फूल को चबाने से जुकाम के कारण होने वाला सिर-दर्द तथा मस़ूड़ों की सूजन तथा दांत का दर्द कम होता है।

दांत दर्द कम करने में सहायक अकरकरा (Benefits of Akarkara in Tooth Ache in Hindi)
अगर दांत दर्द से परेशान हैं तो अकरकरा का इस तरह से सेवन करने पर जल्दी आराम मिलता है। 10 ग्राम अकरकरा की जड़ या पुष्प में 2 ग्राम कपूर तथा 1 ग्राम सेंधानमक मिलाकर, पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण का मंजन करने से सब प्रकार के दंत दर्द से राहत मिलती है।

मुँह के बदबू को करे कम अकरकरा (Akarkara to Treat Bad Breath in Hindi)
अकरकरा, माजुफल, नागरमोथा, भुनी हुई फिटकरी, काली मिर्च तथा सेंधानमक सबको बराबर मिलाकर बारीक पीस लें। इस मिश्रण से प्रतिदिन मंजन करने से दांत और मसूड़ों के सभी रोग ठीक हो जाते हैं तथा मुख की दुर्गन्ध मिट जाती है। इसके अलावा अकरकरा का जड़ा या पुष्प, हल्दी तथा सेंधानमक को बराबर मिलाकर बारीक पीस लें। इस मिश्रण में थोड़ा सरसों का तेल मिलाकर दाँतों पर मलने से दांत का दर्द कम होता है; साथ ही मुख-दुर्गन्ध व मसूढ़ों की समस्या भी दूर होती है। यह एक चमत्कारिक प्रयोग है।

दांत के बीमारी को ठीक करने में करे मदद अकरकरा (Akarkara Benefits in Dental Problem in Hindi)
अकरकरा की मूल को चबाने से अथवा मूल का काढ़ा बनाकर कुल्ला करने से कवल एवं गण्डूष धारण करने से दंतकृमि (दांत में कीड़ा लगना), दांत दर्द आदि दंत रोगों वातजन्य मुख-रोगों तालु और गले के रोगों में बहुत लाभ होता है।

कंठ के स्वर को मधुर बनाये अकरकरा (Akarkara Beneficial in Vocal Sound in Hindi)
अकरकरा-चूर्ण (akarkara patanjali) को 250-500 मिग्रा की मात्रा में सेवन करने से बच्चों का कंठ स्वर सुरीला हो जाता है। अकरकरा मूल या अकरकरा-फूल को मुंह में रखकर चूस भी सकते हैं यह कण्ठ के लिए बहुत लाभकारी है।

हिचकी से दिलाये आराम (Akarkara to Treat Hiccup in Hindi)
हिचकी आने पर आधा से एक ग्राम अकरकरा-मूल-चूर्ण को शहद के साथ चटाएं। हिचकी पर यह चमत्कारिक असर दिखाता है।

सांस संबंधी समस्याओं से दिलाये आराम (Akarkara Powder Benefits in Breathing Problems in Hindi)
सांस संबंधी समस्याओं में अकरकरा का औषधीय गुण (akarkara benefits in hindi) काम आता है। अकरकरा के कपड़छन चूर्ण (कपड़े से छाना हुआ) को सूंघने से श्वास में लाभ होता है।

सूखी खांसी से दिलाये निजात (Benefit of Akarkara for Dry Cough in Hindi)
अगर मौसम के बदलाव के कारण सूखी खांसी से परेशान है और कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है तो अकरकरा से इसका इलाज किया जा सकता है। 2 ग्राम अकरकरा एवं 1 ग्राम सोंठ का काढ़ा बनाकर 10-20 मिली मात्रा में सुबह-शाम पीने से पुरानी खांसी मिटती है तथा अकरकरा चूर्ण को 1-2 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से कफज विकारों में लाभ होता है। इसके अलावा दो भाग अर्जुन की छाल और एक भाग अकरकरा-मूल-चूर्ण, दोनों को मिलाकर, पीसकर दिन में दो बार आधा-आधा चम्मच की मात्रा में खाने से घबराहट, पीड़ा, कम्पन और कमजोरी आदि हृद्-विकारों में लाभ होता है।

पेट दर्द करे कम अकरकरा (Akarkara to Treat Abdomical Diseases in Hindi)
अक्सर मसालेदार खाना खाने या असमय खाना खाने से पेट में गैस हो जाने पर पेट दर्द की समस्या होने लगती है। अकरकरा के जड़ का -चूर्ण (akarkara patanjali) और छोटी पिप्पली-चूर्ण को समान मात्रा में लेकर उसमें थोड़ी भुनी हुई सौंफ मिलाकर, आधा चम्मच सुबह शाम भोजनोपरांत (खाना खाने के बाद) खाने से पेट संबंधी समस्या में लाभ होता है

हृदय को रखें स्वस्थ अकरकरा (Akarkara Benefits in Healthy Heart in Hindi)
हृदय संबंधी बीमारियों के खतरे को कम करने के लिए हृदय का स्वस्थ होना भी जरूरी होता है। अकरकरा (akarkara benefits in hindi) का इस तरह से सेवन करने पर ह्रदय को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है।

–दो भाग अर्जुन की छाल और एक भाग अकरकरा की जड़ का चूर्ण, दोनों को मिलाकर, पीसकर दिन में दो बार आधा-आधा चम्मच की मात्रा में खाने से घबराहट, दर्द, कम्पन और कमजोरी आदि हृदय संबंधी रोगों में लाभ होता है।

-कुंजन, सोंठ और अकरकरा की 2-5 ग्राम मात्रा को 100 मिली पानी में उबालें, जब चतुर्थांश (1/4 भाग) काढ़ा शेष रह जाए तो इस काढ़े को नियमित रूप से पिलाने से घबराहट, नाड़ीक्षीणता, हृदय की कार्य शिथिलता आदि हृदय संबंधी रोगों में फायदेमंद होता है।

पेट की बीमारी से दिलाये निजात (Akarkara Beneficial in Abdomical Diseases in Hindi)
पेट संबंधी विभिन्न बीमारियों जैसे पेट दर्द,पेट फूलना,अपच, बदहजमी जैसे बीमारियों में अकरकरा का सेवन फायदेमंद होता है।अकरकरा मूल-चूर्ण (akarkara patanjali) और छोटी पिप्पली-चूर्ण को समान मात्रा में लेकर उसमें थोड़ी भुनी हुई सौंफ मिलाकर, आधा चम्मच सुबह शाम भोजनोपरांत (खाना खाने के बाद) खाने से उदररोगों या पेटदर्द में लाभ होता है।

बदहजमी करे दूर अकरकरा (Akarkara Beneficial in Indigestion in Hindi)
अगर आपके व्यस्त जीवनशैली के कारण बदहजमी की समस्या हो गई है तो शुंठी-चूर्ण और अकरकरा (akarkara patanjali) दोनों को 1-1 ग्राम की मात्रा में लेकर सेवन करने से मंदाग्नि (Indigestion) और अफारा (Flatulence) में मदद मिलती है।

मासिक धर्म के समस्याओं से दिलाये निजात अकरकरा (Akarkara for Periods in Hindi)
मासिक धर्म या पीरियड्स होने के दौरान बहुत तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जैसे- मासिक धर्म होने के दौरान दर्द होना, अनियमित मासिक धर्मचक्र, मासिक धर्म के दौरान रक्तस्राव या ब्लीडिंग कम होना या ज्यादा होना आदि। इन सब में अकरकरा का घरेलू उपाय बहुत ही लाभकारी होता है।

अकरकरा-मूल का काढ़ा बनायें। 10 मिली काढ़े में चुटकी भर हींग डालकर कुछ माह सुबह-शाम पीने से मासिकधर्म ठीक होता है। इससे मासिकधर्म के दिनों में होने वाली दर्द से भी छुटकारा मिलती है।

सेक्चुअल स्टैमिना बढ़ाये अकरकरा (Akarkara Beneficial in Sexual Stamina in Hindi)
20 ग्राम अकरकरा-मूल (akarkara patanjali) को लेकर उसका चतुर्थांश क्वाथ बना लें, अब इस क्वाथ के साथ 10 ग्राम अकरकरा मूल को पीसकर पुरुष जननेन्द्रिय (शिश्न) पर लेप करने से, इन्द्रिय शैथिल्यता का शमन होता है। लेप कुछ घण्टों तक लगा रहने दें, लेप लगाते समय शिश्न के ऊपरी भाग (मणी) को छोड़कर लगाएं।

साइटिका का दर्द करे कम अकरकरा (Akarkara to Treat Sciatica in Hindi)
अगर दिन भर बैठकर काम करने के कारण कमर दर्द से परेशान हैं तो अकरकरा (akarkara patanjali) के जड़ के चूर्ण को अखरोट के तेल में मिलाकर मालिश करने से गृध्रसी या साइटिका में लाभ होता है।

अर्थराइटिस से दिलाये राहत अकरकरा (Akarkara to Fight with Arthritis in Hindi)
आजकल अर्थराइटिस की समस्या उम्र देखकर नहीं होती है। दिन भर एसी में रहने के कारण या बैठकर ज्यादा काम करने के कारण किसी भी उम्र में इस बीमारी का शिकार होने लगे हैं। इससे राहत पाने के लिए अकरकरा (akarkara in hindi) का इस्तेमाल ऐसे कर सकते हैं।

अकरकरा की जड़ का पेस्ट या कल्क तथा काढ़े का लेप लगाने के बाद सिंकाई करने से या उससे धोने से आमवात (एक प्रकार का गठिया), लकवा तथा नसों की कमजोरी में लाभ होता है।

खुजली की परेशानी करे दूर अकरकरा (Akarkara to Treat Scabies in Hindi)
आजकल के प्रदूषण भरे वातावरण में त्वचा संबंधी रोग होने का खतरा बढ़ता ही जा रहा है। हर कोई किसी न किसी त्वचा संबंधी परेशानी से ग्रस्त हैं। खुजली ऐसे रोगों में एक है। अकरकरा खुजली के सब परेशानियों को कम करने में मदद करता है। भारतीय अकरकरा के 5 से 7 ग्राम पञ्चाङ्ग का काढ़ा बनाकर प्रभावित स्थान को धोने से खुजली तथा छाजन में लाभ होता है।

अल्सर का कष्ट करे कम अकरकरा (Benefit of Akarkara for Ulcer in Hindi)
अकरकरा के मूलार्क को घावों में या मूल को पाउडर कर घाव के ऊपर लगाने से घाव जल्दी भरता है व संक्रमण होने की सम्भावना भी नहीं रहती है। इसके अतिरिक्त अकरकरा के ताजे पत्ते व फूल को पीसकर लगाने से दाद, खाज तथा खुजली ठीक हो जाती है।

मिर्गी में फायदेमंद अकरकरा (Akarkara Beneficial in Epilepsy in Hindi)
अकरकरा के फूल या जड़ को सिरके में पीसकर मधु मिलाकर 5-10 मिली की मात्रा में चाटने से या ब्राह्मी के साथ अकरकरा की जड़ का काढ़ा बनाकर पिलाने से मिर्गी का वेग रुकता है।

हकलाना ठीक करे अकरकरा (Akarkara to Treat Stammering in Hindi)
2 भाग अकरकरा-मूल-चूर्ण, 1 भाग काली मिर्च व 3 भाग बहेड़ा छिलका लेकर पीसकर रखें, उसे 1-2 ग्राम की मात्रा में दिन में दो से तीन बार शहद के साथ बच्चों को चटाने से टॉन्सिल में लाभ होता है। जिह्वा पर मलने से जीभ का सूखापन और जड़ता दूर होकर हकलाना या तोतलापन कम होता है। 4-6 हफ्ते या कुछ माह तक प्रयोग करें।

लकवा के इलाज में फायदेमंद अकरकरा (Akarkara Beneficial in Paralysis in Hindi)
अकरकरा-मूल को बारीक पीसकर महुए के तेल या तिल के तैल में मिलाकर प्रतिदिन मालिश करने से अथवा अकरकरा की जड़ के चूर्ण (500 मिग्रा-1 ग्राम) को मधु के साथ सुबह शाम चटाने से पक्षाघात (लकवा) में लाभ होता है।

उशवे के साथ अकरकरा का 10-20 मिली काढ़ा बनाकर पिलाने से अर्दित (मुंह का लकवा) में लाभ होता है।

बुखार से राहत दिलाये अकरकरा (Akarkara to Treat Fever in Hindi)
अगर मौसम के बदलने के वजह से या किसी संक्रमण के कारण बुखार हुआ है तो उसके लक्षणों से राहत दिलाने में अकरकरा (akarkara in hindi) बहुत मदद करता है।

अकरकरा के 500 मिग्रा चूर्ण में 4-6 बूंद चिरायता अर्क मिलाकर सेवन करने से बुखार में अत्यन्त लाभ होता है।
1 ग्राम अकरकरा-मूल, 5 ग्राम गिलोय तथा 3-5 पत्र तुलसी को मिलाकर काढ़ा बनाकर दिन में 2-3 बार देने से जीर्ण ज्वर, बार-बार होने वाले बुखार व सर्दी लगकर आने वाले बुखार का शमन होता है।
और पढ़ें: बुखार की दवा है गिलोय

स्पर्म काउन्ट बढ़ाये अकरकरा (Benefit of Akarkara to Increase Sperm Count in Hindi)
आजकल की जीवनशैली और आहार का बुरा असर सेक्स लाइफ पर पड़ रहा है जिसके कारण सेक्स संबंधी समस्याएं होने लगी हैं। 1 ग्राम आकारकरभादि चूर्ण में मधु मिलाकर सेवन करने से स्पर्म का काउन्ट बढ़ता है।

अकरकरा का उपयोगी भाग (Useful Parts of Akarkara)
आयुर्वेद में अकरकरा के फूल, पञ्चाङ्ग एवं जड़ का प्रयोग औषधि के लिए किया जाता है।

अकरकरा का इस्तेमाल कैसे करना चाहिए ?(How to Use Akarkara in Hindi?)
बीमारी के लिए अकरकरा के सेवन और इस्तेमाल का तरीका पहले ही बताया गया है। अगर आप किसी ख़ास बीमारी के इलाज के लिए अकरकरा का उपयोग कर रहे हैं तो आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह ज़रूर लें।

चिकित्सक के परामर्श के अनुसार अकरकरा का 10-20 मिली रस , पुष्प 1-2 ग्राम ले सकते हैं।

अकरकरा का सेवन करने के दुष्परिणाम (Side Effects of Akarkara)
प्रशस्त अकरकरा भारी (वजनदार) और तोड़ने पर भीतर से सफेद होती है। यह स्वाद में अत्यन्त तीक्ष्ण होती है। इसको चबाने से मुख और जीभ में बहुत तेज और एक विचित्र ढंग की सनसनाहट होने लगती है तथा मुंह से लार निकलने लग जाती है। कुछ काल के बाद सनसनाहट बंद हो जाती है तथा मुंह का शोधन हो जाता है। जो अकरकरा वजन में हल्की, तोड़ने पर अन्दर कुछ पीला या भूरापन लिए होती है तथा इसकी झनझनाहट कम और थोड़ी-देर तक होती है, वह अकरकरा औषधि-कार्य हेतु अप्रशस्त होती है।

अकरकरा कहां पाया और उगाया जाता है,,,,,,,,,,,,,,,,?? 
(Where is Akarkara Found or Grown in Hindi?)
मूल-रूप से अरब का निवासी होने के कारण इसको मोरक्को अकरकरा भी कहते हैं। भारत के कुछ हिस्सों में इसकी खेती की जाती है। वर्षाऋतु की प्रथम फूहार पड़ते ही इसके छोटे-छोटे पौधे निकलने शुरू हो जाते हैं। इसकी जड़ का स्वाद चरपरा होता है तथा इसको चबाने से गर्मी महसूस होती है व जिह्वा जलने लगती है। आयुर्वेदीय गुण-कर्म एवं प्रभाव में अरब से आयातित औषधि अधिक वीर्यवान् मानी जाती है।
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