* कर्म के प्रकार *
कर्म रहस्य में हमने कर्म की परिभाषा जानी , एवं अकर्म का परिचय भी जाना ! अकर्म उच्च अवस्था में पहुंचे स्वरुप में स्थित महापुरुष के क्षैत्र की बात है| क्यों की वे स्वयं फल के लिए नहीं करते लोक शिक्षण व परोपकार के निमित्त करते है |
सामान्य मनुष्य कर्म ही करते है जिनका फल मिलना निश्चित है | अतः यहां कर्म की चर्चा करेगे, कर्म तीन प्रकार के होते है :-
क्रियमाण, संचित और प्रारब्ध |
अभी वर्तमान में जो कर्म किये जाते है, वे ' क्रियमाण ' कर्म कहलाते है | वर्तमान से पहले इस जन्म में या पूर्व के अनेक मनुष्यजन्मों में किये हुए कर्म जो संगृहित है, वे ' संचित ' कर्म कहलाते है |
संचित कर्मों में जो कर्म फल देने के लिए प्रस्तुत (उन्मुख) हो गये है अर्थात जन्म, आयु,अनुकूल और प्रतिकूल परिस्थिति के रुप में परिणाम देने के लिए समक्ष आ गये है, वे ' प्रारब्ध ' कर्म कहलाते है |
मित्रों कर्म रहस्य लम्बा ओर जटिल विषय है अतः उक्त कर्मों का एक एक करके हम अगले पत्रों (पोस्टो )में विवेचन करेंगे |
आप सबके सहयोग की आशा है !
सभी विद्वान मित्रों एवं अन्य पाठकों के उचित एवं विषय अनुकूल सुझावो का सदैव हार्दिक स्वागत है!
वयं राष्ट्रे जागृयाम _चंशे-
!! जय श्री राम !!

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