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Tuesday, 10 February 2026

सार (क्षार), सत्व, घनसार और घनसत्व


क्षार- किसी भी वनौषधि के पंचांग को जलाकर राख को पानी में भिगोकर ऊपर का साफ पानी निथार कर उस पानी को जलाकर नीचे बर्तन में जो बच जाता है खुरच कर निकल कर रखे ।
 सत्व - किसी औषधि जैसे गिलोय आंवला आदि को कुचल कर रस निकाल कर रख देने से जो नीचे बैठ जाये सत्व कहलाता है ।

घनसार और घनसत्व - औषधि पंचांग का काढ़ा बनाकर फिर काढ़े को शहद जैसा गाढ़ा होने पर घनसार और सुखाने पर घनसत्व कहलाता है ।

साभार -  वैद्य सुधीर आर्य  

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