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Friday, 19 September 2025

डच नौसेना को धूल चटाने वाले प्रतापी हिन्दू राजा मार्तण्ड वर्मा। ( भारत के ऐसे गौरवशाली इतिहास के अनेक पात्रों को योजनाबद्ध रुप से छिपाया गया )

ऐसा इतिहास जो आप से साजिश के तहत छिपाया गया है। 

#डच_नौसेना_को_धुल_चटाने_वाले_प्रतापी_हिन्दू_राजा_मार्तण्ड_वर्मा।

✍जिस प्रकार आज चीन को वैश्विक शक्ति होने का दभ हैं, 17 वीं सदी में #डच_कम्पनी को भी अपनी आर्थिक तथा सैनिक शक्ति का अहंकार था ।

✍केरल के एक छोटे राज्य के राजा मार्तण्ड वर्मा ने अपने साहस, रणनीतिक कौशल तथा स्थानीय मछुआरों के सहयोग से उन्हें निर्णायक रूप से परास्त किया था।

✍#मार्तण्ड_वर्मा_त्रावनकोर_साम्राज्य के निर्माता माने जाते हैं, जिन्होंने सन 1729 से मृत्यु पर्यन्त सन् 1758 तक #ट्रावनकोर साम्राज्य पर शासन किया। 
उन्होंने 1741 में #कोलाचेल के युद्ध में उस समय की सबसे शक्तिशाली नौसेनाओं में से एक डच कम्पनी की नौसेना को परास्त करने का पराक्रम किया। संभवतया विश्व इतिहास में आधुनिक यूरोपीय नौसेना की
एशिया क्षेत्र में पराजय की यह पहली घटना है। इससे न केवल मार्तण्ड वर्मा की कीर्ति देशभर में फैली बल्कि डचों (नीदरलैण्ड/हालैण्ड वासियों) के भारत में व्यापार तथा विस्तार पर पूर्ण विराम भी लगा।

✍#राजा_मार्तण्ड_वर्मा_का_बचपन-

अभिझम तिरुनल मार्तण्ड वर्मा का जन्म 1706में अट्टिन्गल की रानी कार्तिक तिरुनल तथा राघव वर्मा के
#वेनाड राज परिवार में हुआ ।

✍वे बचपन से ही निडर और समझदार थे। उस समय वेनाड छोटा तथा कमजोर राज्य था, जिसमें नायर जमींदारों जागीरदारों के अलावा #पद्मनाभस्वामी_मंदिर के प्रतिनिधियों का हस्तक्षेप रहता था । 

✍उन्होंने शासन परपकड़ मजबूत करने तथा राज्य का विस्तार करने की नीति अपनाई जिससे राज्य का व्यापार, वाणिज्य तथा अर्थव्यवस्था मजबूत हो तथा लोग खुशहाल हों। 
उन दिनों केरल छोटी-छोटी रियासतों में बंटा हुआ था। #मार्तण्ड_वर्मा स्वयं भी छोटी रियासत के राजा थे। इसलिए दूरदर्शी राजा ने सोचा कि यदि मालाबार (केरल) को विदेशी शक्ति से बचाना है तो सबसे पहले केरल का एकीकरण करना होगा।

✍#मार्तण्ड_वर्मा_का_विजय_अभियान-

 मात्र 25 वर्ष की आयु में 1731 में उन्होंने #कोल्लम (व्विलोन) राज्य पर चढ़ाई की। उसके बाद उन्होंने रुकने का नाम नहीं लिया। उन्होंने अपनी सेना बनाई और षड़यंत्रकारी नायरों को सत्ता से उखाड फेंका। 

✍अपनी बुद्धि और निडरता से उन्होंने बड़े कम समय में ही #कोल्लम, #कयमकुलम, #कोटाराकारा रियासतों पर विजय का परचम फहराया। साथ ही अन्य छोटी-छोटी रियासतों को मिलाकर उन्होंने अपना साम्राज्य बनाया, जो त्रावणकोर साम्राज्य कहलाया।

इन विजयों से न केवल उनके शासन क्षेत्र का विस्तार वाणिज्यिक फसलों विशेष रूप से काली मिर्च उत्पादक क्षेत्र उनके नियंत्रण में आ गए। उन दिनों काली मिर्च के व्यापार में बड़ी कमाई थी, इसलिए यूरोपीय कंपनियां अपनी सामरिक तथा नौसैनिक शक्ति के बल पर केरल की रियासतों 
(विशेष रूप से काली मिर्च उत्पादक क्षेत्र) के शासकों पर प्रभाव जमाती थी।

✍#डच_ईस्ट_इंडिया_कम्पनी- 17 वीं शताब्दी के आसपास भारत में व्यापार के लिए #पुर्तगालियों, अंग्रेजों की तरह डच
(नीदरलैण्डवासी) भी आए। 
डच लोगों ने 1605 में #डच_ईस्ट_इंडिया कम्पनी बनाई तथा धीरे-धीरे के रल के मालाबार तट तक आ पहुँचे तथा क्विलोन और कोच्चि पर कब्जा कर लिया।

✍ ये लोग मुख्य रूप से कालीमिर्च, चीनी तथा मसालों का व्यापार करते थे।समय के साथ इन्होंने पूरे एशिया में अपने पांव पसारना शुरु कर दिया और धीरे-धीरे श्रीलंका, केरल, बंगाल, बर्मा (म्यानमार) आर सूरत तक अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया। इनके साम्राज्य का मुख्य गढ़ श्रीलका तथा मालाबार थे।
#डच_ईस्ट_इंडिया कम्पनी ने कोचि बंदरगाह से मसालों विशेषकर कालीमिर्च के निर्यात पर लगभग एकाधिकार किया हुआ था।

✍#कोलाचेल_युद्ध- मार्तण्ड वर्मा से परास्त कई राजा और मुखिया डच कम्पनी के पास सहायता के लिए गए। 

डच कम्पनी पूर्व में उनकी न केवल मित्र बल्कि सहायक भी रही थी। इसी क्रम में कयमकुलम का राजा कम्पनी की शरण में पहुँचा तो डचो ने मार्तण्ड वर्मा को चेतावनी दी कि या तो वह जीती हुई रियासतों को वापस कर दे अन्यथा युद्ध के लिए तैयार हो जाए।

✍सीलोन (श्रीलंका) के गवर्नर #गुस्ताफ_विलेम को लगा कि वह युद्ध की धमकी से उन्हें डरा देंगे। किंतु राजा मार्तण्ड ने बिना डरे, बड़े साहस के साथ उल्टा उन्हें चेता दिया। 

✍उन्होंने कहा हम किसी से नहीं डरते। अगर डच सेना हम पर हमला करती है तो वह अपनी हार के लिए तैयार रहे।
उन्होंने यह भी कहलवाया कि बाहरी लोगों को हमारे निजी मामलों में दखल देने का कोई हक नहीं है। अगर वे ऐसा करते हैं तो हम भी युद्घ की स्थिति में हॉलैण्ड पर अपने मछुआरों की मदद से हमला करवा सकते हैं।

✍डच सेना को विश्वास था कि वे आसानी से राजा मार्तण्ड को हरा देंगे। 
अतः उन्होंने मार्तण्ड को ललकारने के राजकुमारी #इलायादथु स्वरूप को कोट्टाराकारा का शासक नियुक्त कर दिया तथा कोट्टाराकारा और डच सेना ने मिलकर राजा मार्तण्ड वर्मा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। 

✍इस युद्ध में डच सेना ने कमांडर #डी_लेननोय के नेतृत्व में कोलाचेल 
(आज की कन्याकुमारी ) को अपना ठिकाना बनाया, जो कि त्रावणकोर की राजधानी। 
पद्मनाभपुरम से मात्र 13 किमी दूर था। डच सेना में सीलोन तथा अन्य स्थानों से लाए गए 400 समुद्री जहाज, तोपे तथा आधुनिक हथियारों से लैस लगभग 50000 सैनिक थे। 
लेकिन मार्तण्ड वर्मा ने अपने 10,000 सैनिकों के साथ डच सेना पर जबर्दस्त हमला करके उनके हथियारों के गोदाम को उड़ा दिया। इसके बाद यूरोप की सबसे ताकतवर कम्पनी की सेना ने भारत के एक छोटे राज्य के सामने घुटने टेक दिए। दोनों की संयुक्त सेना को #त्रावणकोर सेना से बहुत बुरी तरह से मुँह की खानी पड़ी।

✍इस युद्ध में लगभग 11000 डच सैनिक बंदी बनाए गए जिसमें कमांडर तथा उप कमांडर भी शामिल थे। इसके अलावा डच सेना को कोचीन तक खदेड़ दिया गया और डचों के कब्जे वाले सारे किलों तथा इलाकों को अपने अधीन कर लिया।

✍#कोलाचेल में उनकी विजय का एक बड़ा कारण था, वहाँ के स्थानीय मछुआरों ने इस लड़ाई में डचों के प्रलोभनों को ठुकरा, अपने राजा के साथ कंधे से कंधा मिलाकर युद्ध किया।

✍राजा ने कोलाचल में विजय स्तम्भ लगवाया, जहां बाद में भारत सरकार ने भी शिला-पट्ट लगवाया। केरल और तमिलनाडू के बचे खुचे डचों को पकड़कर राजा मार्तण्ड वर्मा ने 1753 में उनको एक और सन्धि करने पर विवश किया जिसे "#मवेलिक्कारा_की_संधि" कहा जाता है। 

✍इस संधि के अनुसार डचों को इंडोनेशिया से शक्कर लाने और काली मिर्च का व्यवसाय करने की इजाजत दी गई और बदले में डच लोग राजा को यूरोप से उन्नत किस्म के हथियार और गोला-बारूद लाकर देंगे।

✍1753 में इस संधि के बाद मार्तण्डवर्मा ने अम्बालपुझा, कोट्टायम, मीनचिल तथा चंगनसेरी के राजाओं को हरा त्रावणकोर साम्राज्य में मिला लिया। इसी वर्ष कोची राज्य की जागीरदारी रियासतों करपुक्कम तथा अलंगड तथा 1755 में कोझीकोड को परास्त कर अपने साम्राज्य में मिलाया।

✍#सैन्य_सुधार- राजा मार्तण्ड वर्मा ने इतनी बड़ी जीत के बाद भी डच कमांडर दी #लेननोय तथा उप कमांडर #डोरदी की
हत्या नहीं की। बल्कि उनको त्रावणकोर

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(जो विशेष बात है उसके बाद निरंतर पढे)
#विशेष_बात- 1757 में अपनी मृत्यु से पूर्व दूरदर्शी राजा ने अपने पुत्र #राजकुमार_राम वर्मा को लिखा था-" जो मैंने डचों के साथ किया वही बंगाल के नवाब को अंग्रेजों के साथ करना चाहिए। उनको बंगाल की खाड़ी में युद्ध करके पराजित करें, अन्यथा एक दिन बंगाल और फिर पूरे हिन्दुस्थान पर अंग्रेजों का कब्जा हो जाएगा।

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की सेना को प्रशिक्षण दे आधुनिक बनाने की जिम्मेदारी दी। इस तरह नायर सेना आधुनिक युद्ध कला में निपुण हुई।

✍तत्कालीन शासन के शक्ति केन्द्र बने नायर जमींदारों-लड़ाकों के स्थान पर 50,000 सैनिकों वाली मजबूत सेना तथा नौसेना का गठन किया गया । सेना को आधुनिक हथियार बन्दूक-तोपें दी गई तथा सैनिकों के प्रशिक्षण के लिए यूरोपीय
विशेषज्ञों की सहायता ली गई। सेना में अश्वरोही सेना की ट्रकड़ियाँ भी थी । अरब सागर की ओर मुँह किए हुए पूरे सागर तट पुरक्कड़ (#कोजीकोड) से कन्याकुमारी तक बनाकर तोपें स्थापित की।

✍#प्रशासनिक_सुधार- 

मार्तण्ड वर्मा ने वित्त, व्यापार तथा सेना के लिए अलग-अलग प्रमुखों की नियुक्ति की तथा उनके नीचे व्यवस्थित प्रशासन का ढाचा बनाया। उन्होंने मालाबार तट से होने वाले समुद्री व्यापार पर अपनी पकड़ मजबूत बनाई। काली मिर्च के व्यापार पर नियंत्रण के लिए इसे शासन के अधीन बना, व्यापार के लिए लाइसेंस प्रणाली बनाई गई।

✍#कृषि_सुधार- कृषि विकास के लिए जल संचयन तथा सिंचाई परियोजनाएं बनाई गई। सरकारी कर व्यवस्था में सुधार कर नई कृषि भूमि तथा नए पेड़ लगाने पर कर माफी का प्रावधान किया गया। इससे न केवल खाद्यान्न उत्पादन बल्कि वाणिज्यिक फसलों (मुख्य रूप से मसाले कालीमिर्च)
के उत्पादन में वृद्धि हुई।

✍#धर्म_कला_एवं_संस्कृति- 
मार्तण्ड वर्मा के शासन विस्तार होने के साथ ही राज्य की राजधानी शिक्षा, कला,संस्कृति तथा धार्मिक गतिविधियों का केन्द्र बना ।

✍अन्य राज्यों/रियासतों के कला साधक (नृत्य, गायन इत्यादि) त्रावणकोर
साम्राज्य की शोभा बढ़ाने लगे तथा शासन के प्रोत्साहन तथा संरक्षण में फले फूले। उन्होंने #पद्मनाभस्वामी_मंदिर की दान भूमि से आय के उचित प्रबंध किए, ट्रस्टियों के
प्रभाव को कम करके मंदिर की व्यवस्थाओं में सुधार किया।

✍#तिरूअनन्तपुरम का प्रसिद्ध पद्मनाभस्वामी मंदिर राजा मार्तण्ड वर्मा ने बनवाया और अपनी सारी सम्पत्ति मंदिर
को दान करके स्वयं भगवान विष्णु के दास बन शासन किया। इस मंदिर के 5 तहखाने कुछ वर्ष पूर्व खोले गए थे, जिनमें बेशुमार सम्पत्ति (लाखों करोड़ का अनुमान) मिली। इससे पता लगता है कि उस काल में त्रावणकोर साम्राज्य कितना सम्पन्न था।

✍अपनी दूरदर्शिता से उन्होंने मृत्यु पर्यन्त पूरे 29 वर्ष तक शासन किया और 7 जुलाई 1758 को अपने उत्तराधिकारी को एक सुरक्षित शासन सौंपकर गए।

✍यह दूख की बात है कि महान राजा मार्तण्ड वर्मा और कोलाचेल के युद्ध को राज्य या #एनसीईआरटी की इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में कोई जगह नहीं मिली, जिससे नई पीढ़ी भारत के गौरवशाली इतिहास से आज भी अनभिज्ञ है।

आप से भी विशेष प्रार्थना है की इसे जरुर शेयर करे।

✍आज बड़ी #विडंबना है कि भारत को लूटने वाले #अंग्रेजों का व इनको तोडने वाले मुगलो का #इतिहास #पढ़ाया जाता है पर देश का असली इतिहास कही दुष्टो शक्तियो की वज़ह से दबा पडा है।
साभार - 
#We_support_hindutava_unity

वयं राष्ट्रे जागृयाम 

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