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Friday, 12 September 2025

वेदों में श्राद्ध

वसोर्या धारा मधुना प्रपीना घृतेन मिश्रा अमृतस्य नाभयः। सर्वास्ता अव रुन्धे स्वर्गः षष्ट्यां शरत्सु निधिपा अभी च्छात् ॥ 
(अथर्ववेद १२/३/४१)

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