क्या तुलसी दल शिवलिंग पर अर्पित कर सकते है ?
बहुत दिन पहले, करीब 35/36 वर्ष पहले, एक विद्वान पण्डित शिव पूजा कराते समय मुझसे कहे कि एक तुलसी मंजरी चढ़ाएं। मैं हतप्रभ हुआ तो उन्होंने जोर देखर कहे - चढ़ाइए ना!
फिर मै उसका शास्त्रीय आधार खोजने पर पता चला यह शास्त्र प्रमाणित है।
सामान्यतः लोक में यही प्रसिद्ध है कि शिवलिंग पर तुलसी नहीं चढ़ती। इसके पीछे शिवपुराण - युद्ध खण्ड की वृंदा / जालंधर कथा है - जालंधर का वध शिव जी ने किया, वृंदा ने शिव पूजा का त्याग कर दिया था। इसी से तुलसी दल शिव पूजा में वर्जित माना गया।
फिर मंजरी चढ़ाने के पीछे शास्त्रीय बात -
शास्त्र में तुलसी दल (पत्ता) और तुलसी मंजरी (बीज-मंजरी) में भेद किया गया है।
क) शिव पुराण, रुद्र संहिता, सृष्टि खण्ड, में कहा गया है:
"भुक्तिमुक्तिफलं तस्य तुलस्याः पूजयेद्यदि।"
जो मनुष्य तुलसी से शिव जी की पूजा करता है उसे भोग और मोक्ष दोनों मिलते हैं।
इसी खण्ड के दूसरे प्रसंग में पूजा विधि में स्पष्ट लिखा है:
"द्रोणपुष्प, तुलसीदल तथा बिल्वपत्र के द्वारा पराभक्ति के साथ भक्तवत्सल भगवान् शंकर की विशेष पूजा करे।"
तो शिवपुराण स्वयं तुलसीदल से शिवपूजा को निषिद्ध नहीं, बल्कि फलदायी बताता है।
ख) मंजरी विशेष के लिए लोक-शास्त्र सम्मत आचार -
पद्मपुराण और शिवपुराण के माहात्म्य प्रसंग में कहा गया है कि तुलसी की जड़ में ब्रह्मा, मध्य में विष्णु और अंकुर (मंजरी) में रुद्र निवास करते हैं, इसलिए वह पवित्र है।
इसी कारण कई पंचांग और धर्मग्रन्थ टीकाकार कहते हैं:
"भगवान शिव और गणेश जी को तुलसी की पत्ती अर्पित करना वर्जित माना गया है, लेकिन आप भगवान शिव को मंजरी अर्पित कर सकते हैं।"
और विशेषकर विवाह बाधा के लिए:
"दूध में तुलसी की मंजरी मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाएं... सभी बाधा और कलह से छुटकारा मिलता है।"
विशेष कर सावन में तुलसी मंजरी को दूध में डालकर शिवलिंग पर चढ़ाना के रूप में बहुत प्रसिद्ध टोटका/उपाय के रूप में भी शास्त्र-सम्मत माना जाता है।
इस तरह -
1. तुलसी का पत्ता (दल) - शिव जी पर सामान्यतः नहीं चढ़ाते, यह लोकाचार है, पर शिवपुराण में इसका निषेध पूर्ण नहीं है बल्कि फलदायी बताया है।
2. तुलसी की मंजरी - बीज रूप होने से उसे निर्माल्य नहीं माना जाता और शिव जी को अर्पित की जा सकती है। यह विष्णु-प्रिया होते हुए भी रुद्र-अंश वाली है, इसलिए शिव को प्रिय है।
3. पण्डित जी का बताया उपाय शास्त्र विरुद्ध नहीं है - वह शिवपुराण के उसी उदार वचन पर आधारित है।
मिथिला शाक्त पूजा - पाठ एवं दशमहाविद्या साधना परिचर्चा
Madan Choudhary
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