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Tuesday, 10 February 2026

21mmˈ की पथरी को भी बर्फ की तरह गला देगी ये 50 रुपए वाली सस्ती सी चीज मात्र 5 दिन में दर्द से दिला देगी ऐसा राहत भरा आराम।

➡️ 21mmˈ की पथरी को भी बर्फ की तरह गला देगी ये 50 रुपए वाली सस्ती सी चीज मात्र 5 दिन में दर्द से दिला देगी ऐसा राहत भरा आराम।
➡️‎आजकल की व्यस्त जीवनशैली और गलत खानपान के कारण गुर्दे की पथरी (Kidney Stone) और गाल ब्लैडर स्टोन की समस्या आम हो गई है। पथरी से होने वाला दर्द असहनीय होता है और यह कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकती है।
➡️‎इसके बढ़ते मामलों के बावजूद, आयुर्वेद में इसके लिए एक बेहद सरल, किफायती और प्रभावी उपाय मौजूद है-गुड़हल का पाउडर।
➡️‎आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. नीरज कौशिक के अनुसार, गुड़हल का पाउडर पथरी को जड़ से खत्म करने में मदद करता है। आइए जानते हैं इसका इस्तेमाल कैसे किया जाए और इससे जुड़ी जरूरी सावधानियां।
➡️‎गुड़हल का पाउडर: गुण और फायदे
‎पथरी को तोड़ने में सहायक:
‎गुड़हल के फूलों में प्राकृतिक अम्लीय गुण होते हैं, जो पथरी को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ने में मदद करते हैं।
➡️‎इस पीली तरल चीज की एक चम्मच भी गठिया के दर्द को कर देगी चुटकियों में खत्म…सांस फूलना, पुरानी खांसी आदि 80 रोगों का एक इलाज है ये उपाय?
➡️‎शरीर को डिक्स करता है और गुर्दों से विषैले पदारहर निकालने में सहायक है।
➡️‎पाचन में सुधार👉‎गुड़हल पाचन तंत्र को भी स्वस्थ रखता है और एसिडिटी को नियंत्रित करता है।
➡️‎गुणकारी तत्व👉‎इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन C, और प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो संक्रमण से भी बचाव करते हैं।
➡️‎गुड़हल पाउडर का सही उपयोग⬇️
➡️‎सामग्री👉👉‎1 चम्मच गुड़हल का पाउडर
👉‎1 गिलास गर्म पानी
➡️‎सेवन करने का तरीका ⬇️ 
👉‎रात के भोजन के एक घंटे बाद 1 चम्मच गुड़हल का पाउडर लें।
👉‎इसे गर्म पानी के साथ निगल लें।
👉‎इसके बाद कुछ और न खाएं या पीएं।
👉‎चाहे कितना भी सड़ गया हो लिवर इस एक देसी घरेलू 👉चीज को खाते ही रिफ्रेश हो जाएगा आपका लिवर, बस जान ले सेवन का सही तरीका!
➡️‎ध्यान रखने योग्य बातें⬇️
➡️‎इसका स्वाद थोड़ा कड़वा हो सकता है, लेकिन इसे पानी के साथ आसानी से लिया जा सकता है।
➡️‎नियमित रूप से इसे सेवन करने पर धीरे-धीरे पथरी ➡️टूटकर मूत्र मार्ग से बाहर आ जाएगी।

➡️‎परहेज और सावधानियां ⬇️ 
➡️‎गुड़हल के पाउडर के साथ निम्नलिखित चीजें न खाएं:
‎👉‎चुकंदर
👉‎पालक
👉‎भिंडी
👉‎टमाटर

➡️‎ परहेज रखना क्यों जरूरी है ⬇️ 
👉‎इन खाद्य पदार्थों में ऑक्सालेट की मात्रा अधिक होती है, जो पथरी को बढ़ा सकते हैं या नई पथरी बनने की संभावना बढ़ा सकते हैं।
➡️‎अगर आपका लिवर भी लगा है सड़ने, तो कर लें ये घरेलु उपाय, अस्पताल के लाखों के खर्चे से मिलेगी राहत!
➡️‎संभावित दुष्प्रभाव और उपाय⬇️
➡️‎पथरी टूटने पर दर्द👉‎अगर पथरी बड़ी है, तो उसके छोटे-छोटे टुकड़ों में टूटने से दर्द हो सकता है। इस स्थिति में अधिक पानी पीएं और डॉक्टर की सलाह लें।
➡️‎पानी का सेवन👉‎दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी (8-10 गिलास) पीना जरूरी है ताकि पथरी के टुकड़े मूत्र मार्ग से आसानी से बाहर निकल सकें।
➡️‎गुड़हल पाउडर कैसे बनाएं👉‎अगर आपके घर में गुड़हल का पौधा है, तो आप खुद भी इसका पाउडर बना सकते हैं।
➡️‎ताजे गुड़हल के फूलों को तोड़ें और धो लें।
➡️‎इन्हें छाया में सुखा लें।
➡️‎सूखने के बाद इन्हें पीसकर बारीक पाउडर बना लें।
➡️‎शरीर के अंदर सड़ चुके लिवर जवान बना देती है ये हरी चीज, पुराणों में भी लिखा है इसका नाम?
➡️‎गुड़हल का पाउडर एक प्राकृतिक, किफायती और प्रभावी उपाय है,
➡️ जो पथरी की समस्या को जड़ से खत्म करने में मदद करता है।
➡️ यदि सही तरीके और नियमितता से इसका सेवन किया जाए, तो न केवल पथरी से राहत मिलेगी बल्कि आपकी किडनी और गाल ब्लैडर लंबे समय तक स्वस्थ रहेंगे।
‎अगर पथरी से संबंधित समस्या गंभीर हो या दर्द असहनीय हो, तो डॉक्टर से परामर्श जरूर लें। आयुर्वेदिक उपाय के साथ चिकित्सा का सही संतुलन बनाना हमेशा बेहतर होता है।

आयुर्वेद अपनाओं रोग भगाओ 
‎#KidneyStone #KidneyStoneRelief
#GallBladderStone #AyurvedicRemedy
साभार - Dharmendra Vaidh ji

https://www.facebook.com/share/p/1D8Qh9RbHV/

Monday, 9 February 2026

मुख काला पड़ता जा रहा हैं या कील मुहांसे हो गये, या कही से शरीर की त्वचा जल गयी है... घरेलू उपाय

*॥ॐ॥*

एक पीतल की परात में ( ध्यान रखें परात पीतल की हो चाहे किसी से उधार लेकर आए ) निम्न सामग्री को बताई गई मात्रा के अनुसार (लगभग) डालें-
(1) २५० ग्राम फिटकरी का पावडर,
(2) ५० मिली नारीयल का तेल,
(3) २० मिली ऐलोवेरा जैल
 (4) २० मिली ग्लीसरीन
 (5) थोड़ी सी हल्दी 
        अब इस सामग्री के मिश्रण को बर्फ के टुकड़े से इस तरह घिसें कि- इस मिश्रण की क्रीम सी बन जाए।

*उपयोग* - मुख काला पड़ता जा रहा हैं या कील मुहांसे हो गये, या कही से शरीर की त्वचा जल गयी है... तो कुछ दिनों तक इस क्रीम को प्रतिदिन लगातार लगा कर देखो, इन रोगो का निवारण होगा।

साभार - _निशांत गुप्ता_ 
https://www.facebook.com/share/r/1KMk5Rut4R/

*_वयं राष्ट्रे जागृयाम_*

वज्रदंती

#वज्रदंती #पौधा (Vajradanti Plant) जिसे हिंदी में वज्रदंती, संस्कृत में वज्रदन्ती और अंग्रेज़ी में #Toothache #medicinal #Plant या Acmella भी कहते हैं।
यह एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक औषधीय पौधा है, खासकर दाँतों और मसूड़ों के रोगों में अत्यंत उपयोगी माना जाता है।

🌿 पहचान (Identification).......⭐⭐⭐⭐

✅स्वरूप👉🏻छोटा हर्बल पौधा
✅पत्तियाँ👉🏻हरी, चिकनी, हल्की दाँतेदार किनारी
✅फूल👉🏻पीले रंग के, छोटा गोल स्पंज जैसा
✅बीज👉🏻काले और छोटे आकार के
✅स्वाद👉🏻हल्का तीखा और सुन्न करने वाला
✅जब फूल को मुँह में रखा जाए तो हल्की झनझनाहट और सुन्नता महसूस होती है — यही इसका औषधीय प्रभाव है।
🌍 कहाँ पाया जाता है??????,,,✳️✳️✳️✳️
 ✅भारत, श्रीलंका, नेपाल और दक्षिण एशिया में मुख्य रूप से पाया जाता है।
 ✅ जंगलों, पहाड़ी क्षेत्रों और खेतों के किनारों पर स्वतः उगता है।
🍂 पारंपरिक मान्यता (Old Beliefs)..🍁🍁🍁🍁🍁
 👉 आयुर्वेद में इसे दाँतों और मसूड़ों का सबसे शक्तिशाली पौधा माना गया है।
 👉प्राचीन वैद्य इसका उपयोग दंतमंजन बनाने में करते थे।
 👉 माना जाता था कि यह दाँतों को वज्र (हीरे) जैसा मजबूत बनाता है – इसी से इसका नाम वज्रदंती पड़ा।

✨ औषधीय गुण (Medicinal Benefits)...✳️✳️✳️✳️

✔️ दाँत दर्द में तुरंत आराम
✔️ मसूड़ों की सूजन (Gingivitis) में लाभकारी
✔️ पायरिया और बदबूदार सांस दूर करता है
✔️ दाँतों को मजबूत बनाता है
✔️ बैक्टीरिया और संक्रमण को रोकता है
✔️ हड्डियों और दाँतों में कैल्शियम अवशोषण बढ़ाता है
✔️ फंगल और बैक्टीरियल इंफेक्शन में उपयोगी

🪥 उपयोग (How to Use)...😁😁😁😁

1️⃣ कच्चे फूल चबाना..🍁🍁🍁🍁🍁
 👉1–2 फूल चबाने से
👉मसूड़ों की सूजन कम
👉दर्द में तुरंत आराम

2️⃣ जड़ों का काढ़ा......🍃🍃🍃🍃🍃🍃
 👉आधा कप पानी में जड़ उबालकर कुल्ला करना → पायरिया और बदबू में लाभकारी।

3️⃣ दंतमंजन (Tooth Powder),,,,,🦷🦷🦷🦷

👉वज्रदंती पाउडर + लौंग पाउडर + सेंधा नमक मसूड़ों को मजबूत करता है।

4️⃣ आयुर्वेदिक तेल
 👉 वज्रदंती तेल मसूड़ों में लगाने से रक्तसंचार बढ़ता है और दाँत मजबूत होते हैं।


🌱 ✳️✳️खेती (Cultivation)✳️✳️✳️✳️✳️

✅मिट्टी👉🏻रेतीली या दोमट
,✅धूप👉🏻आंशिक धूप, पूरी छाया भी चलेगी
✅पानी👉🏻मध्यम
✅तापमान👉🏻18–35°C

कटिंग या बीज द्वारा बहुत आसानी से उगता है।
⚠️ सावधानी....🚫🚫🚫
 ✅अधिक मात्रा में सेवन से मुँह ज्यादा सुन्न हो सकता है।
 ✅गर्भवती महिलाएँ या छोटे बच्चों को सेवन कराने से पहले वैद्य की सलाह जरूरी।
 
🌼निष्कर्ष🌼
वज्रदंती पौधा प्रकृति द्वारा दिया गया शक्तिशाली हर्बल टूथ केयर प्लांट है।
यह दाँतों, मसूड़ों, बदबू, और पायरिया जैसी समस्याओं में अत्यंत लाभकारी है और आज भी कई आयुर्वेदिक टूथपेस्ट में इसका उपयोग होता है।


साभार - सोनी गोवर्धन 

संदर्भ -https://www.facebook.com/share/p/1CmknjcEtT/

वयं राष्ट्रे जागृयाम 

मौन ( चुप्पी ) का महत्व

🍃                           ॥ॐ॥                      🍃 

                         🦚 कहानी🦚
                    मौन (चुप्पी) का महत्व 

        एक मछलीमार कांटा डाले तालाब के किनारे बैठा था। काफी समय बाद भी कोई मछली कांटे में नहीं फँसी, ना ही कोई हलचल हुई तो वह सोचने लगा... कहीं ऐसा तो नहीं कि मैने कांटा गलत जगह डाला है, यहाँ कोई मछली ही न हो !

    उसने तालाब में झाँका तो देखा कि उसके कांटे के आसपास तो बहुत-सी मछलियाँ थीं। उसे बहुत आश्चर्य हुआ कि इतनी मछलियाँ होने के बाद भी कोई मछली फँसी क्यों नहीं !

    एक राहगीर ने जब यह दृश्य देखा तो उससे कहा- "लगता है भैया, यहाँ पर मछली मारने बहुत दिनों बाद आए हो ! अब इस तालाब की मछलियाँ कांटे में नहीं फँसती।"

    मछलीमार ने हैरत से पूछा- "क्यों, ऐसा क्या है यहाँ ?
    राहगीर बोला- "पिछले दिनों तालाब के किनारे एक बहुत बड़े संत ठहरे थे। उन्होने यहाँ मौन की महत्ता पर प्रवचन दिया था। उनकी वाणी में इतना तेज था कि जब वे प्रवचन देते तो सारी मछलियाँ भी बड़े ध्यान से सुनतीं। यह उनके प्रवचनों का ही असर है कि उसके बाद जब भी कोई इन्हें फँसाने के लिए कांटा डालकर बैठता है तो ये मौन धारण कर लेती हैं। जब मछली मुँह खोलेगी ही नहीं तो कांटे में फँसेगी कैसे ? इसलिए अच्छा यहीं होगा कि आप कहीं और जाकर कांटा डालो।"

    परमात्मा ने हर मानव को दो आँख, दो कान, दो नासिका, हर इन्द्रिय दो ही प्रदान किया है। पर जिह्वा एक ही दी.. क्या कारण रहा होगा ?

क्योंकि यह एक ही अनेकों भयंकर परिस्थितियाँ पैदा करने के लिये पर्याप्त है।

    संत ने कितनी सही बात कही कि जब मुँह खोलोगे ही नहीं तो फँसोगे कैसे ?

    अगर इन्द्रिय पर संयम करना चाहते हैं तो.. इस जिह्वा पर नियंत्रण कर लेवें बाकी सब इन्द्रियां स्वयं नियंत्रित रहेंगी। यह बात हमें भी अपने जीवन में उतार लेनी चाहिए-
                       " एक चुप सौ सुख "
              साभार - ✍️ एक कहानी सुंदर सी
                                   🙏    
            🌸॥卐॥❀ शुभम् स्वस्ति ❀॥卐॥🌸
                          _वंदे मातृसंस्कृतम_

एक पिता की जेब

🍃                          ॥ॐ॥                          🍃
                          🦚कहानी🦚
                        एक पिता की जेब

     घर के आँगन में दोपहर की धूप फैली थी। रसोई में माँ बर्तन माँज रही थी, तभी बेटा स्कूल बैग टाँगे आकर बोला,
“मम्मी, 50 रुपये चाहिए… कॉपी लेनी है।”
माँ ने बिना पीछे मुड़े मुस्कुराते हुए कहा, “जा बेटा, पापा की जेब से निकाल ले।”

यह सुनकर पास ही खड़ी पड़ोसन ठिठक गई। उसके चेहरे पर हैरानी साफ थी। उसने धीरे से पूछा,
“बहन, तुम्हारे पति को तो गुजरे पाँच साल हो गए… फिर बच्चों का पापा किसे बनाया है?”

माँ कुछ पल चुप रही। उसकी उँगलियाँ बर्तनों पर थम गईं। फिर वह बेटे का हाथ पकड़कर कमरे में ले गई। दीवार पर टँगी एक पुरानी खूँटी से एक कमीज उतारी—वही शर्ट जिसे उसके पति प्रतिदिन कार्यालय जाते समय पहनते था। कमीज की जेब में उसने हाथ डाला और कुछ सिक्कों के साथ एक मुड़ा हुआ नोट निकालकर बेटे को थमा दिया।

पड़ोसन अवाक् देखती रह गई।
माँ ने शांत स्वर में कहा, “मैं हर महीने थोड़े-थोड़े पैसे इस कमीज की जेब में रख देती हूँ। ताकि मेरे बच्चे कभी यह न भूलें कि उनके पापा अब भी उनके साथ हैं।”

उसकी आँखें नम थीं, पर आवाज में मजबूती थी।
“पापा इस दुनिया में नहीं हैं, तो क्या हुआ? वे हमारी स्मृतियों में, हमारे परिश्रम में, हमारी शक्ति में आज भी जीवित हैं। जब बच्चे कहते हैं—‘पापा की जेब से पैसे ले आए’—तो मुझे लगता है, वे आज भी घर चला रहे हैं।”

बेटा पैसे लेकर बाहर गया, जैसे कुछ खास हुआ ही न हो। माँ ने कमीज को फिर से खूँटी पर टाँग दिया। वह कमीज केवल मात्र वस्त्र नहीं थी—वह भरोसा थी, सहारा थी, एक अदृश्य हाथ जो कठिन समय में थाम लेता है।

पड़ोसन की आँखें भर आईं। उसे समझ आ गया कि पिता केवल शरीर से होते हैं, स्मृतियों से नहीं मरते। जिन घरों में प्रेम और सम्मान होता है, वहाँ खाली जेबें भी भरी रहती हैं।

उस शाम माँ ने दीये के सामने हाथ जोड़कर कहा,
“तुम जहाँ भी हो, बच्चों को हिम्मत देना। वे जब भी पापा की जेब में हाथ डालें, उन्हें भरोसा मिले कि उनके पापा कभी खाली नहीं जाते।”

और सच ही तो है—जो पिता अपने बच्चों के हृदयों में बस जाते हैं, उनकी जेबें कभी खाली नहीं होतीं।

                    ✍️ एक कहानी सुंदर सी
                           वयं राष्ट्रे जागृयाम

बीज मंत्र का सबसे बड़ा छिपा राज:

        बीज मंत्र का सबसे बड़ा छिपा राज: 
                      "क्रीं", "ह्रीं", "श्रीं"
      ये सिर्फ शब्द नहीं, ब्रह्मांड के कोड हैं! 🌑🖤💰

प्रिय साधक
कल्पना करो कि प्राचीन तंत्र ग्रंथों में छिपे ऐसे बीज अक्षर, जिन्हें जपते ही देवता की ऊर्जा सीधे तुम्हारे शरीर में उतर आती है। जैसे कोई हिडन स्विच दबा दिया हो – और अचानक जीवन बदल जाए! ⚡



ये तीनों शक्ति बीज हैं – महाकाली, महामाया और महालक्ष्मी की मूल ध्वनि। ज्यादातर लोग इन्हें सिर्फ सुनते हैं, लेकिन असली तांत्रिक जानते हैं: ये दैवीय कंपन हैं जो कुंडलिनी को जगाते हैं, माया को काटते हैं, और समृद्धि को बुलाते हैं।

1. क्रीं (Kreem) – महाकाली का प्रचंड बीज! 🌑🔥

उच्चारण का राज: "क्रीं" – "क" शिव की शुद्ध चेतना, "र" अग्नि का विस्फोट, "ई" माया की तीव्रता, और "ं" ब्रह्मांड की अनंत ऊर्जा को बांधता है।

गूढ़ रहस्य: ये समय (काल) को नियंत्रित करने वाला मंत्र है। जप से भय, शत्रु, पुरानी बुरी आदतें – सब जड़ से जल जाते हैं! तंत्र में इसे क्रिया योग का मूल माना जाता है – कुंडलिनी जागृत होती है, निचले चक्र जलते हैं, और सिद्धियां खुलती हैं (त्रिकाल ज्ञान, अलौकिक रक्षा)।

जरूरी सूचना: बिना तैयारी जप करो तो बैकफायर हो सकता है – मानसिक तूफान! लेकिन सही गुरु से दीक्षा लेकर जपो तो... जीवन का हर डर गायब! 😈

मंत्र पावर: शत्रु नाश, साहस, स्वास्थ्य, ट्रांसफॉर्मेशन। रोज 108 बार "ॐ क्रीं कालिकायै नमः" – और देखो चमत्कार!

2. ह्रीं (Hreem) – महामाया / भुवनेश्वरी का सोलर बीज! ☀️🖤

उच्चारण का राज: "ह्रीं" – "ह" शिव, "र" अग्नि, "ई" चेतना, "ं" अनंत शक्ति। ये सर्वशक्तिमान मंत्र है – सूर्य ऊर्जा का प्रतीक!

गूढ़ रहस्य: हृदय चक्र (अनाहत) से जुड़ा ये मंत्र माया (भ्रम) को काटता है। जप से आंतरिक शांति, दिव्य प्रेम, और आकर्षण की शक्ति जागती है। तंत्र में इसे महादेवी का प्रणव कहते हैं – ये सृजन, पालन, संहार तीनों को कंट्रोल करता है!

जरूरी सूचना: जैन धर्म में भी "ह्रीं" अनंतता और तीर्थंकरों की दिव्य ऊर्जा का प्रतीक है! कल्पना करो – जपते ही तुम्हारा हृदय सूरज की तरह चमकने लगे! 🌟

मंत्र पावर: नकारात्मकता से मुक्ति, सौंदर्य, आकर्षण, उच्च चेतना। "ॐ ह्रीं" अकेला जप – हृदय पर फोकस करो, और महसूस करो ऊर्जा!

3. श्रीं (Shreem) – महालक्ष्मी का abundance बीज! 💰🌸

उच्चारण का राज: "श्रीं" – "श" शांति, "र" अग्नि, "ई" माया, "ं" समृद्धि का बिंदु।

गूढ़ रहस्य: ये चंद्र ऊर्जा और प्रचुरता का मंत्र है। जप से धन, ऐश्वर्य, सफलता – सब आकर्षित होता है! तंत्र में इसे धन-काम का मूल कहा जाता है – गरीबी और कमी को जड़ से मिटाता है।

जरूरी सूचना: लक्ष्मी चंचल हैं, लेकिन "श्रीं" जप से वो स्थिर हो जाती हैं! शुक्रवार को जपो तो डबल फल – बिजनेस, करियर, वैवाहिक सुख सब ब्लेस!

मंत्र पावर: धन प्राप्ति, बिजनेस ग्रोथ, सौंदर्य, खुशहाली। "ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" – और देखो पैसे की बारिश!

🔥 तीनों का संयुक्त जादू: ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं – पांच महाशक्तियां एक साथ जागृत!

ये बीज सिर्फ ध्वनि नहीं – बीज हैं! जैसे बीज से वृक्ष उगता है, वैसे जप से जीवन फलता-फूलता है। लेकिन याद रखो:
गुरु दीक्षा बिना मत छेड़ना – ये डिवाइन कोड हैं!

सही तरीका: "ं" को नाक से vibrate करो, जैसे "म" की गूंज।

सावधानी: पहले शांति मंत्र से शुद्धि करो, वरना ऊर्जा ओवरलोड हो सकती है!

ये रहस्य दुनिया के 99% लोगों को नहीं पता! अगर तुम्हें लगता है जीवन में कुछ बड़ा बदलाव चाहिए – तो ट्राई करो... लेकिन सावधानी से! 🕉️🔮

Gaurve Raje (Tejal V Panchal)
Numerologist n Vastu Urja expert

तेलिया कंद

तेलिया कन्द
(नीचे के प्रयोग तंत्र ग्रंथों के अनुसार हैं कितना सत्य है कितना असत्य है प्रयोग करने पर ही पता चलेगा)

यह बहुत चमत्कारिक वनौषधि है और भाग्यशाली लोगों को ही प्राप्त होती है। इसकी उत्पत्ति गिरनार, हिमालय तथा आबू आदि पर्वतीय क्षेत्रों में होती है। इसके पत्ते कनेर के पत्तों की भाँति चिकने तथा पृथ्वी की ओर झुके रहते हैं। इन पत्तों के ऊपर काले तिलों की भाँति छींटे-से पड़े होते हैं। यह एक बड़ी महत्त्वपूर्ण वनस्पति है और इसी के विषय में सभी शास्त्र मौन हैं। इसे प्रत्येक भाषा में तेलिया कन्द ही कहा जाता है क्योंकि इसके पत्ते पर जैसे तेल चुपड़ा गया हो, इस भाँति चिकनापन तथा चमक होती है। इसके तने के पास पृथ्वी लगभग एक मीटर के व्यास तक इस भाँति की होती है जैसे कई लीटर तेल गिरा दिया गया हो। यह पौधा बड़ा चमत्कारिक, प्राप्त करने में खतरनाक तथा देखने में दुर्लभ है।

तन्त्र में गोपनीयता अत्यन्त आवश्यक होती है शायद इसी कारण इसके विषय में सभी मौन हैं। इस पौधे की जड़ का प्रयोग किया जाता है। जब यह पौधा आपको मिले तो स्वयं उखाड़ने के बदले एक बकरी, खरगोश या लोमड़ी का प्रयोग करें। मेरी समझ से बकरी ही उचित रहेगी। यदि बरसात के दिन हों तो इसके तने में पतली तथा मजबूत रस्सी बाँध कर बकरी के गले में बाँध कर उसे हाँक दें। बकरी भागेगी तो यह पौधा भी साथ ही खिंच जायेगा। चूँकि इसकी जमीन मुलायम होती है अतः यह जड़ समेत निकल आता है। इस वृक्ष की जड़ में एक सर्प होता है जो कि जड़ के निकलते ही जड़ की तरफ भागता है और क्रोधित होकर जिसे भी पाता है, उसे लगातार काटता ही रहता है। यही कारण है कि यह वनस्पति प्राप्त करना खतरनाक है। दुर्लभइसलिये है कि यह बड़े भाग्य से ही दर्शित होती है।

दक्षिण भारत तथा मध्य भारत की पर्वत श्रृंखला के दुर्गम क्षेत्रों में भी तेलिया कन्द की उत्पत्ति होती है। इस पौधे से काले रंग का कुछ तरल पदार्थ बहता है जिसमें कि बहुत चिकनायी होती है। यदि भाग्यवश यह आपको मिल जाये या दिख जाय तो सावधानी से प्राप्त करें और इसको अभिमंत्रित कीजिये।

.....................

पारा

तेलिया कन्द का रस निकाल कर पारे के साथ खरल में मर्दन करने से बीस मिनट में ही पारा ढीला होकर मर जाता है।यह ढीला रहता है अतः मनचाही शक्ल दे सकते हैं।

गोली

तेलिया कन्द को छोटे-छोटे टुकड़े करके गोली की भाँति कर लें और चन्द्रमा की चाँदनी में सुखायें। जब यह सूख जाय तो एक गिलास दूध में गोली डाल कर दस मिनट रुकें। इसके बाद गोली निकाल कर दूध पी जायें। यह दूध सभी रोगों को नाश करके शरीर को हरा-भरा करता है।

सोना

ताँबे को गरम करके तेलिया कन्द के रस में डुबा दें। ठण्डा होने पर निकालें और ताँबे के स्थान पर शुद्ध सोना ले लें। क्योंकि यह ताँबा सोना हो जाता है। अतः जितना ताँबा होगा उतना ही सोना बनेगा।

रसायन

तेलिया कन्द को कूट-पीस कर गाय के दूध के साथ खाने पर वृद्ध भी तरुण होकर वृद्धता खो देता है।

पारस

मेरा विचार है कि जहाँ पर तेलिया कन्द होता है। इसी प्रभाव क्षेत्र में अर्थात तेलीय क्षेत्र में या इसकी जड़ के पास रहने वाला पत्थर पारस के गुण ग्रहण कर लेता है।

ताबीज

तेलिया कन्द को स्वर्ण के ताबीज में भर करके कण्ठ में धारण करने से भूत, पिशाचादि का भयं नहीं होता। धन की कभी कमी नहीं होती। देह निरोग रहती है। मन प्रसन्न रहता है।

तेलिया कन्द के और भी बहुत से तान्त्रिक प्रयोग होते हैं परन्तु यह दुर्लभ होने के कारण इसके विषय में विस्तृत वार्ता नहीं कर रहा।

नोट 🚫 उपर्युक्त वनस्पति और उसके प्रयोग का मेरा कोई निजी अनुभव नहीं है क्योंकि ये मुझे कभी प्राप्त नहीं हुई अतः किसी भी सज्जन को इनके प्रयोग करना हो स्वयं कीजिये कितने प्रमाणिक है या नहीं 

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श्री नाथजी गुरूजी
की चरण कमल पादुका
को आदेश