Pages

Showing posts with label आयुर्वेदिक औषधियां. Show all posts
Showing posts with label आयुर्वेदिक औषधियां. Show all posts

Friday, 6 March 2026

अमृतधारा को घर में बनाने की विधि

अमृतधारा को घर में बनाने का पूरी विधि 

       अमृतधारा घर का वैद्य यह एक ऐसी दिव्य औषधि है जो हर घर मे अवश्य होनी चाहिये। जो बच्चे से लेकर बूढ़े तक काम आती है। 

        आयुर्वेदिक घरेलू औषधियों में अमृतधारा का अपना विशेष स्थान हैं। साधारण सी दिखने वाली औषधि रोगग्रस्तों के लिए वरदान है।

        अमृतधारा ऐसी हर्बल आयुर्वेदिक दवा है जो जीवन रक्षक है. हालांकि ये बाजार में भी मौजूद है लेकिन इसे आसानी से घर पर बनाया जा सकता है.

         अमृतधारा अमृत के समान है। यह अनेक बीमारियों की अनुभूत घरेलू दवा है। इसे आयुर्वेदिक घरेलू औषधियों में अपना विशेष स्थान प्राप्त हैं। साधारण सी दिखने वाली यह औषधि रोगियों के लिए वरदान है। यह औषधि शरीर में पहुंचते ही इतनी जल्दी असर दिखाती है कि रोगी का रोग दूर होकर राहत मिलती है। यह अनेकों बीमारियों की अनुभूत घरेलू दवा है। इसकी मुख्य विशेषता यही है कि इसका शरीर पर कोई विषाक्त प्रभाव नहीं पड़ता।
 
#अमृतधारा_क्या_है ?

*अमृत धारा आयुर्वेद की एक बहुत ही जानी - मानी औषधि है जो कई बीमारियों को आसानी से उपचार कर देती है । ब दलते मौसम , गर्मी की तपन , लु , धूल भरी हवाओं , खान - पान में गड़बड़ी के कारण सिरदर्द , उल्टी , अपच , हैजा , दस्त , बुखार , शरीर में दर्द , अजीर्ण जैसे रोग घेर लेते हैं । ऐसे में आयुर्वेदिक औषधि अमृतधारा इन रोगों में रामबाण की तरह सहायक हो सकती है । इस दवा की दो - चार बूढे एक कप सादे पानी में डालकर पीने मात्र से ही तुरन्त लाभ मिलता है । सिरदर्द हो , जहरीला ततैया काट ले तो इसे लगाते मात्र से ठीक हो जाता है । गले के दर्द व सूजन में गरारे करने पर तुरंत लाभ मिलता है । यह दवा पूरे परिवार के लिए लाभदायक है क्योंकि यह पूर्ण प्राकृतिक हैं ।*

#अमृतधारा_कैसे_बनती_है ? 
1) पुदिना सत्व 500 ग्राम
2) अजवायन सत्व 500 ग्राम
3) भीमसेनी कापुर। 500 ग्राम

       यह तीन चीजे आप पंसारी (जड़ी बूटी वाला दुकानदार ) से अलग अलग लाये
किसी कांच की बड़े मुंह वाली लेकर उसमे ये तीनो एकत्र डाल दीजिये। 
कुछ देर में ही उसका पानी जैसा बन जायेगा और यही है अमृतधारा इसे 1 ग्लास पानी मे सिर्फ 4 बूंद डालना है।

#अमृतधारा_के_फायदे :-

*1 - अमृतधारा कई बीमारियों में दी जाती हैं , जैसे बदहजमी , हैजा और सिर - दर्द ।

*2 - #बदहजमी - थोड़े से पानीमें तीन - चार बूंद अमृतधारा की डालकर पिलाने से बदहजमी , पेटदर्द , दस्त , उलटी ठीक हो जाती है । चक्कर आने भी ठीक हो जाते हैं ।

*3 - #हैजा - एक चम्मच प्याजके रसमें दो बूंद अमृतधारा डालकर पीने से हैजा में फायदा होता है। 

 *4 . #सिरदर्द - अमृतधाराकी दो बूंद ललाट और कान के आस - पास मसलने से सिरदर्द को फायदा होता है। 
 
*5 - #छाती_का_दर्द - मीठे तेल में अमृतधारा मिलाकर छाती पर मालिश करने से छातीका दर्द ठीक हो जाता है। 

*6 - #जुकाम - इसे सूंघने से सांस खुलकर आता है तथा जुकाम ठीक हो जाता है। 

*7 - #मुह_के_छाले - थोडे से पानीमें एक - दो बूद अमृतधारा डालकर छालों पर लगानेसे फायदा होता है। 

*8- #दांत_दर्द - अमृतधारा की 2 बून्द रुई के सहारे रखने से दन्त शूल नस्ट होता है। 

*9- #खाँसी_दमा_क्षयरोग :- 4 5 बून्द गुनगुने पानी में सुबह शाम पीने से नस्ट होता है*

*10- #हृदय_रोग- आंवले के मुरब्बे पर 2 3 बून्द डालकर खाने से*

*11- #पेट_दर्द- बताशे पर 2 बून्द अमृतधारा डालकर खाने से उदर शूल नस्ट होता है*

*12- #मन्दाग्नि-भोजन के बाद 2 3 बून्द सादे पानी में मिलाकर पीने से मन्दाग्नि दूर होती है*

*13- #कमजोरी- 10 ग्राम देशी गाय के मख्खन 5 ग्राम शहद व 2 3 बून्द अमृतधारा सुबह शाम सेवन से कमजोरी दूर होती है*

*14- #हिचकी- 2 3 बून्द सीधे जीभ पर लेने के बाद आधे घण्टे तक कुछ भी सेवन न करने से हिचकी नस्ट हो जाती है*

*15- #खुजली-10 ग्राम निम तेल में 5 बून्द अमृतधारा मिलाकर लगाने से खुजली नस्ट हो जाती है*

*16 - #मधुमक्खी_के_काटने_पर - ततैया , बिच्छू, भंवरा या मधुमक्खी के काटने की जगहपर अमृतधारा मसलने से दर्द में राहत मिलती हैं ।*

*17 - #बिवाई - दस ग्राम वैसलीनमें चार बूंद अमृतधार मिलाकर , शरीर के हर तरह दर्दपर मालिश करने दर्द में फायदा होता है । फटी बिवाई और फटे होंठों पर लगानेसे दर्द ठीक हो जाता है तथा फटी चमडी जुड़ जाती है ।* 

*18 - #यकृत_की_वृद्धि - अमृतधारा को सरसों के चौगुने तेल में मिलाकर जिगर - तिल्ली पर मालिश करने से यकृत की वृद्धि दूर होती है ।*

* #अमृतधारा_के_नुकसान ( दुष्प्रभाव ) : अधिक मात्रा में लेने पर दस्त का कारण बन सकता है । -कुछ लोगों को इसके उपयोग के कारण चक्कर आ सकते है । सावधानियां पयोग करने से पहले चिकित्सक की सलाह आवश्यक है

अपने शरीर को किसी भी प्रकार की बीमारी से मुक्त करने के लिए आयुर्वेदिक उपचार अपनाएं।

#स्वस्थ रहना है तो भारतीय चिकित्सा पद्धति को अपनाना ही होगा अन्यथा एक बार एलोपैथी चिकित्सा के चक्कर में फंसे तो बिमारियों के जाल से निकलना मुश्किल होगा
संदर्भ
 https://www.facebook.com/share/v/1Gh9MqyFNU/
वैद्य पंडित पुष्पराज त्रिपाठी 
मो०- 093360 55537

Monday, 2 March 2026

सच्चे मोती को आप होली से 10 दिन पहले लेना शुरू कर सकते हैं और चैत्र माह की समाप्ति तक किसी दिन भी इसका सेवन कर सकते हैं!

प्रस्तुत पोस्ट इसलिए डालनी पड़ रही है की आप लोग मेरी व्हाट्सएप पर इसकी सेवन की विधि जानना चाह रहे हैं!! लगभग सौ से ऊपर मित्रगण एक ही प्रश्न के साथ वहां उपस्थित हैँ और साथ ही दूसरा प्रश्न यह है क्या केवल होली के दिन ही इसका सेवन करना है तो आज मैं इसके लाभ हानि न बता कर केवल इस विषय पर फोकस कर रहा हूं कि इसका सेवन कैसे करना है और कब करना है?? एक पोस्ट डालकर बताने से लाभ यह होगा कि सभी को अपना -अपना इच्छित उत्तर मिल जाएगा!!

 तो मित्रगण सबसे पहले बता दूं कि वैदिक संवत्सर का नववर्ष आरंभ होने वाला है जो की चैत्र माह से अपनी शुरुआत करता है और इसी वक्त मां दुर्गा भी अपने बच्चों को स्वास्थ्य लाभ देने के लिए 9 दिन के नवरात्र व्रत के साथ में प्रत्येक घर में उपस्थित हो जाती हैं!! हमारे देवता भी हमें अच्छे स्वास्थ्य का उपदेश देते हैं!!

 तो मित्रों सच्चे मोती को आप होली से 10 दिन पहले लेना शुरू कर सकते हैं और चैत्र माह की समाप्ति तक किसी दिन भी इसका सेवन कर सकते हैं!! क्योंकि स्वास्थ्य की दृष्टि से आगामी ग्रीष्म ऋतु का संक्रमण काल आरंभ होने वाला होता है तो इसका एक पैकेट मान लीजिए अपने 4 मार्च को सेवन किया तो मैंने जैसा कि पहले भी बताया है कि बेहतर लाभ के लिए आप सच्चे मोती के एक-एक पैकेट का 6 माह तक सेवन कीजिए अर्थात 4 मार्च के बाद में अगले पैकेट का सेवन आपको 4 अप्रैल को करना है फिर 4 मई को फिर 4 जून को फिर 4 जुलाई को और अंत में 4 अगस्त.... इसका अर्थ हुआ कि हमने 6 माह तक सच्चा मोती का एक एक पैकेट लेकर बेहतर इम्यूनिटी का इंतजाम कर लिया है!! उसके बाद में आप इसका अगला सेवन अगले वर्ष होली के आसपास एक पैकेट होली पर और दूसरा पैकेट दिवाली पर ले सकते हैं अर्थात अपने इससे बेहतर परिणाम पाने के लिए एक इम्यूनिटी सर्किल यानी की बेहतर स्वास्थ्य चक्र अपने आसपास बना लिया है!!

 अब रही बात इससे प्राप्त होने वाले लाभ की तो मित्रगण सच्चे मोती का सेवन हम लोगों से ज्यादा मुस्लिम समुदाय में अधिकता से किया जाता है!!

मित्रों चिकन पॉक्स ऐसी ना मुराद बीमारी है जो हमारे शरीर के रक्त प्रवाह और धमनियों में अटकी रहती है और हमें दारुण दुख देती है!! इसलिए इसको इजीली रिलीज करने के लिए सच्चे मोती का एक पैकेट काफी होता है घर में जितने भी सदस्य हो सबको एक-एक पैकेट दीजिए और जिनके शरीर में भी किसी तरह का रोग पल रहा होगा वह खुलकर सामने आ जाएगा मेरे कहने का अर्थ यह है कि शरीर में छिपी गुप्त बीमारियों को सरलता से पहचानने के लिए सच्चे मोती से बेहतर उपाय कोई नहीं है!!

 आगामी ग्रीष्म ऋतू में हमें सबसे ज्यादा जो समस्या परेशान करती है वह निर्जलीकरण की समस्या!! मेरा दावा है की औषधि का जो व्यक्ति भी सेवन करेगा तो निर्जलीकरण की नामुराद समस्या उसके आसपास भी नहीं फटकेगी!!

ये एक बाजीकारक औषधि भी है सो शीघ्रपतन के मारे पुरुष सदस्य इसका नियमित सेवन करके लाभ प्राप्त कर सकते हैं!!

 याद रखिये, रूसी क्रेन भारत की नदियों के डेल्टा में इसका सेवन करता है और भारत में सर्दी की ऋतू समाप्त होने के बाद में रूस वापस जाने के लिए 12000 किलोमीटर की जो नॉनस्टॉप उड़ान भरता है वह इसी सच्चे मोती की बदौलत संभव है!!

 इसलिए हे बंधुगण अपने परिवार के बेहतर स्वास्थ्य के लिए इसको बाजार से खरीद कर लाइए और दो पैसे की इस दवा के माध्यम से अपने पूरे परिवार का स्वास्थ्य सुधार दीजिए और उनको इम्यूनिटी का वरदान दीजिए राधे-राधे!!🌹🙏

किशोर बाल्मीकि 
8077748527

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

Tuesday, 10 February 2026

21mmˈ की पथरी को भी बर्फ की तरह गला देगी ये 50 रुपए वाली सस्ती सी चीज मात्र 5 दिन में दर्द से दिला देगी ऐसा राहत भरा आराम।

➡️ 21mmˈ की पथरी को भी बर्फ की तरह गला देगी ये 50 रुपए वाली सस्ती सी चीज मात्र 5 दिन में दर्द से दिला देगी ऐसा राहत भरा आराम।
‎
➡️‎आजकल की व्यस्त जीवनशैली और गलत खानपान के कारण गुर्दे की पथरी (Kidney Stone) और गाल ब्लैडर स्टोन की समस्या आम हो गई है। पथरी से होने वाला दर्द असहनीय होता है और यह कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकती है।
➡️‎इसके बढ़ते मामलों के बावजूद, आयुर्वेद में इसके लिए एक बेहद सरल, किफायती और प्रभावी उपाय मौजूद है-गुड़हल का पाउडर।
‎
➡️‎आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. नीरज कौशिक के अनुसार, गुड़हल का पाउडर पथरी को जड़ से खत्म करने में मदद करता है। आइए जानते हैं इसका इस्तेमाल कैसे किया जाए और इससे जुड़ी जरूरी सावधानियां।
‎
➡️‎गुड़हल का पाउडर: गुण और फायदे
‎पथरी को तोड़ने में सहायक:
‎गुड़हल के फूलों में प्राकृतिक अम्लीय गुण होते हैं, जो पथरी को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ने में मदद करते हैं।
‎
➡️‎इस पीली तरल चीज की एक चम्मच भी गठिया के दर्द को कर देगी चुटकियों में खत्म…सांस फूलना, पुरानी खांसी आदि 80 रोगों का एक इलाज है ये उपाय?
‎
➡️‎शरीर को डिक्स करता है और गुर्दों से विषैले पदारहर निकालने में सहायक है।
‎
➡️‎पाचन में सुधार👉‎गुड़हल पाचन तंत्र को भी स्वस्थ रखता है और एसिडिटी को नियंत्रित करता है।
‎
➡️‎गुणकारी तत्व👉‎इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन C, और प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो संक्रमण से भी बचाव करते हैं।
‎
➡️‎गुड़हल पाउडर का सही उपयोग⬇️
➡️‎सामग्री👉👉‎1 चम्मच गुड़हल का पाउडर
👉‎1 गिलास गर्म पानी
➡️‎सेवन करने का तरीका ⬇️ 
👉‎रात के भोजन के एक घंटे बाद 1 चम्मच गुड़हल का पाउडर लें।
👉‎इसे गर्म पानी के साथ निगल लें।
👉‎इसके बाद कुछ और न खाएं या पीएं।
👉‎चाहे कितना भी सड़ गया हो लिवर इस एक देसी घरेलू 👉चीज को खाते ही रिफ्रेश हो जाएगा आपका लिवर, बस जान ले सेवन का सही तरीका!
‎
‎
➡️‎ध्यान रखने योग्य बातें⬇️
➡️‎इसका स्वाद थोड़ा कड़वा हो सकता है, लेकिन इसे पानी के साथ आसानी से लिया जा सकता है।
➡️‎नियमित रूप से इसे सेवन करने पर धीरे-धीरे पथरी ➡️टूटकर मूत्र मार्ग से बाहर आ जाएगी।

➡️‎परहेज और सावधानियां ⬇️ 
➡️‎गुड़हल के पाउडर के साथ निम्नलिखित चीजें न खाएं:
‎👉‎चुकंदर
👉‎पालक
👉‎भिंडी
👉‎टमाटर

➡️‎ परहेज रखना क्यों जरूरी है ⬇️ 
👉‎इन खाद्य पदार्थों में ऑक्सालेट की मात्रा अधिक होती है, जो पथरी को बढ़ा सकते हैं या नई पथरी बनने की संभावना बढ़ा सकते हैं।
‎
➡️‎अगर आपका लिवर भी लगा है सड़ने, तो कर लें ये घरेलु उपाय, अस्पताल के लाखों के खर्चे से मिलेगी राहत!
‎
➡️‎संभावित दुष्प्रभाव और उपाय⬇️
➡️‎पथरी टूटने पर दर्द👉‎अगर पथरी बड़ी है, तो उसके छोटे-छोटे टुकड़ों में टूटने से दर्द हो सकता है। इस स्थिति में अधिक पानी पीएं और डॉक्टर की सलाह लें।
‎
➡️‎पानी का सेवन👉‎दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी (8-10 गिलास) पीना जरूरी है ताकि पथरी के टुकड़े मूत्र मार्ग से आसानी से बाहर निकल सकें।
‎
➡️‎गुड़हल पाउडर कैसे बनाएं👉‎अगर आपके घर में गुड़हल का पौधा है, तो आप खुद भी इसका पाउडर बना सकते हैं।
‎
➡️‎ताजे गुड़हल के फूलों को तोड़ें और धो लें।
➡️‎इन्हें छाया में सुखा लें।
➡️‎सूखने के बाद इन्हें पीसकर बारीक पाउडर बना लें।
➡️‎शरीर के अंदर सड़ चुके लिवर जवान बना देती है ये हरी चीज, पुराणों में भी लिखा है इसका नाम?
‎
➡️‎गुड़हल का पाउडर एक प्राकृतिक, किफायती और प्रभावी उपाय है,
➡️ जो पथरी की समस्या को जड़ से खत्म करने में मदद करता है।
➡️ यदि सही तरीके और नियमितता से इसका सेवन किया जाए, तो न केवल पथरी से राहत मिलेगी बल्कि आपकी किडनी और गाल ब्लैडर लंबे समय तक स्वस्थ रहेंगे।
‎
‎अगर पथरी से संबंधित समस्या गंभीर हो या दर्द असहनीय हो, तो डॉक्टर से परामर्श जरूर लें। आयुर्वेदिक उपाय के साथ चिकित्सा का सही संतुलन बनाना हमेशा बेहतर होता है।

आयुर्वेद अपनाओं रोग भगाओ 
‎#KidneyStone #KidneyStoneRelief
#GallBladderStone #AyurvedicRemedy
साभार - Dharmendra Vaidh ji

https://www.facebook.com/share/p/1D8Qh9RbHV/

Thursday, 5 February 2026

श्वास रोग अत्यंत कष्टकारी होता है। बहुत सारे लोग इस रोग से पीड़ित हैं और कोई अच्छा उपचार चाहते हैं। ऐसे में हम एक ऐसी आयुर्वेदिक औषधि की बात कर रहे हैं।

श्वास रोग अत्यंत कष्टकारी होता है। बहुत सारे लोग इस रोग से पीड़ित हैं और कोई अच्छा उपचार चाहते हैं। ऐसे में हम एक ऐसी आयुर्वेदिक औषधि की बात कर रहे हैं, जिसके बारे में आचार्य वाग्भट ने बहुत स्ट्रॉन्ग स्टेटमेंट दिया है। 

"श्वास और कास यानी पूरी रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट की बीमारियों में बाकी सारी दवाइयाँ एक तरफ, और ये एक औषधि एक तरफ।"

अगर आपको सांस फूलने की समस्या है, सूखी या बलगम वाली खांसी रहती है, गले में खराश, बार-बार कफ जमा होना, ब्रोंकाइटिस, पुराना टीबी, निमोनिया के बाद कमजोर फेफड़े, या स्मोकिंग की वजह से सांस की दिक्कत है तो,यह औषधि आपके लिए बहुत गुणकारी है।

आचार्य वाग्भट ने अष्टांग हृदय, चिकित्सा स्थान, अध्याय 3 के श्लोक 172 में कहा है—

“सर्वेषु श्वासकासेषु केवलं विभीतकी”

अर्थात श्वास और कास की सभी बीमारियों में केवल विभीतकी (बहेड़ा) ही पर्याप्त है।
इतना बड़ी ख्याति आयुर्वेद में बहुत कम दवाओं के लिए मिलती है।
यहां जिस औषधि की बात हो रही है, वह है विभीतकी, जिसे आम भाषा में बहेड़ा कहते हैं।
#लाभ
☑️सांस फूलना
☑️सूखी खांसी या कफ वाली खांसी
☑️गले में बार-बार खराश या भारीपन
☑️ब्रोंकाइटिस
☑️स्मोकिंग के बाद सांस की दिक्कत
☑️पुराने टीबी या निमोनिया के बाद कमजोर लंग्स
☑️रात में कफ जम जाना, सुबह गला पूरी तरह भरा हुआ लगना
☑️नाक से ज्यादा पानी गिरना, साइनस की समस्या

सेवन विधि
✅ गुड़ के साथ गोली बनाकर
बहेड़ा पाउडर एक चुटकी
पुराना देसी गुड़ थोड़ा सा
दोनों मिलाकर चना दाने जितनी छोटी गोली बना लें।
दिन में 4–5 बार, खाने के बाद चूसने की तरह लें।

इसे एक बार में निगलना नहीं है, धीरे-धीरे मुंह में घुलने देना है।
क्योंकि श्वास रोग में आयुर्वेद बार-बार अल्प मात्रा में औषधि लेने को कहता है।

✅पाउडर + गर्म पानी
आधा चम्मच बहेड़ा पाउडर
हल्के गुनगुने पानी के साथ
खासकर रात में सोने से पहले

यह तरीका उन लोगों के लिए खास है जिनका गला रात में बंद हो जाता है और सुबह भारी कफ निकलता है।

अब आयुर्वेदिक लॉजिक समझिए 
श्वास रोग की जड़ कहाँ है?
आयुर्वेद के अनुसार श्वास रोग सीधे फेफड़ों से शुरू नहीं होता।
सबसे पहले गड़बड़ी होती है:

आमाशय (पेट) में
अग्नि (डाइजेस्टिव फायर) कमजोर होती है
रस धातु ठीक से नहीं बनती
रस धातु का मल = कफ, जो ज़्यादा बनने लगता है
यही कफ ऊपर जाकर छाती और लंग्स में जमा हो जाता है
यानी अगर पेट ठीक नहीं, तो सांस भी ठीक नहीं।

बहेड़ा के आयुर्वेदिक गुण 
लघु – हल्का, कफ को तोड़ने वाला
रूक्ष – अतिरिक्त चिकनाई हटाता है
उष्ण – गर्म प्रकृति, वात-कफ शमन

विपाक
मधुर विपाक – यानी पाचन के बाद शरीर को संतुलन देता है

दोषों पर प्रभाव
वात को अनुलोमन करता है
कफ को विशेष रूप से कम करता है
पित्त को संतुलित रखता है

धातुओं पर प्रभाव: क्यों फेफड़ों के लिए खास है?
विभीतकी का प्रभाव इन धातुओं पर बताया गया है:

रस धातु
रक्त धातु
मांस धातु
मेद धातु

आयुर्वेद कहता है कि फेफड़ों (फुफ्फुस) की उत्पत्ति रक्त धातु से होती है।
जब रक्त धातु शुद्ध और मजबूत होती है, तो लंग्स भी मजबूत होते हैं।

बहेड़ा:

पाचन सुधारता है
रस और रक्त धातु को शुद्ध करता है
कफ का एक्सेस प्रोडक्शन रोकता है
सीधे नाक से लेकर लंग्स तक काम करता है

किन मरीजों में असर सबसे ज्यादा दिखता है?
जिनके सीने में भारी कफ भरा रहता है

जिनको पीला या सफेद गाढ़ा बलगम निकलता है
जिनकी खांसी लंबे समय से ठीक नहीं हो रही
जिनको रात में सांस लेने में ज्यादा दिक्कत होती है
ऐसे मामलों में बहेड़ा को आयुर्वेद “मोर देन हाफ ट्रीटमेंट” मानता है।
इसे श्वास रोग के लिए बहुत उत्तम माना गया है क्योंकि 
यह पाचन की जड़ से इलाज करती है

कफ को सिर्फ दबाती नहीं, बनने से रोकती है
लंग्स, गला, नाक—पूरी रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट पर काम करती है
शास्त्रों में इसका स्पष्ट और स्ट्रॉन्ग उल्लेख है

इसीलिए आचार्य वाग्भट ने कहा—
श्वास रोग में अगर एक औषधि चुननी हो, तो विभीतकी पर्याप्त है।
विशेष परिस्थितियों में कुशल वैद्य के परामर्श से ही सेवन करें।

https://www.facebook.com/100050245279982/posts/1506588404359321/?mibextid=rS40aB7S9Ucbxw6v

Wednesday, 28 January 2026

वंशलोचन

वंशलोचन स्त्री प्रजाति के बाँस पेड़ों से प्राप्त एक प्रकार की हर्बल सिलिका है,बांस सिलिका (FOLIUM BAMBUSEA) में अन्य सिलिका स्रोतों की तुलना में अधिक सिलिकॉन डाइऑक्साइड होता है। इसमें लगभग 70 से 90% सिलिका होती है। इसमें मुख्य तौर पर सिलिका (सिलिकॉन डाइऑक्साइड) होती है, जो हड्डियों, स्नायुबंधन, tendons और त्वचा के लिए एक महत्वपूर्ण तत्व है।

इसमें शरीर के लिए आवश्यक अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व होते हैं। यह समग्र स्वास्थ्य में सुधार करता है l वंशलोचन का शरीर के ऊतकों पर पुनर्स्थापनात्मक प्रभाव होता है।

वंशलोचन में कई औषधि गुण होते है👇

आयुर्वेद के अनुसार, यह प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, इसलिए यह सितोपलादि चूर्ण का एक मुख्य घटक है जिसका उपयोग इम्युनो-मॉड्यूलेटर के रूप में किया जाता है।

यह सर्दी और बहती नाक के लिए बहुत प्रभावी दवा है।

वंशलोचन में अल्सर से बचाव करनेवाले गुण हैं। प्रवाल पिष्टी, मुक्ता पिष्टी, और यशद भस्म के साथ, यह पेप्टिक अल्सर और आंत्र सूजन के रोगों जैसे अल्सरेटिव कोलाइटिस और Crohn's disease में उत्कृष्ट परिणाम देता है।

बालों के विकास को प्रोत्साहित कर बालों को मजबूत बनाता है। यह प्रभाव उसमें स्थित प्राकृतिक सिलिका के कारण है। इसमें मौजूद सिलिका बालों को पतला होने से और बाल झड़ने से रोकता है।

वंशलोचन के गुण-लाभ और प्रयोग- वंशलोचन उत्तेजक, ज्वरहर, कफनि:सारक, बल्य, वृष्य, प्यासशमन करने वाला, उद्वेष्ठननिरोधि एवं माही होता है।

वंशलोचन से वसनसंस्थान की श्लेष्मलकला को पुष्टि मिलती है तथा कफ की मात्रा कम होती है।

वंशलोचन से बने हुए सितोपलादि चूर्ण का व्यवहार जीर्णज्वर, श्वास, कास, क्षय, मन्दाग्नि, कमजोरी, कफ में खून जाना, दाह, पूयमेह, मूत्रदाह तथा वातविकार एवं सर्पदंश में किया जाता है।

इसकी कोमल गांठ तथा पत्रों का क्वाय गर्भाशय संकोचक होता है। इसका उपयोग प्रसूता में आतंवशुद्धि के लिए एवं अन्य आर्तव विकारों में किया जाता है।

वंशलोचन के कोमलपत्र का उपयोग कफ से खून जाना, कुष्ठ, ज्वर तथा बच्चों के सूत्रकृमि में किया जाता है।

वंशलोचन के प्रांकुर (Shoots) का रस निकालकर कृमियुक्त थावों पर डाला जाता है तथा बाद में उसका पुल्टिस उन पर बाँध दिया जाता है।

जिन लोगों का पाचन ठीक नहीं होता उनको इसके कोमल प्रांकुरों से बने सिरके का उपयोग मांस-मछली के साथ देना उपयोगी होता है। इससे भूख बढ़ती है तथा पाचन भी ठीक होता है।

वंशलोचन की गाँठों को पीसकर जोड़ों के दर्द पर उसका बन्धन उपयोगी है।

वंशलोचन के बीज को गरीब लोग चावल के रूप में खाते हैं।

वंशलोचन का मूल विस्फोटक व्याधियों (Eruptive affections) में बहुत उपयोगी है तथा दाद पर लाभदायक है।
वंशलोचन के पुष्परस का उपयोग कर्णबिन्दु के रूप में कर्णशूल एवं बाधिर्य आदि में किया जाता है।

सेवन विधि एवं मात्रा- वंशलोचन चूर्ण 1 ग्राम सादे जल या गुनगुने दूध से लेना हितकारी रहता है।

अमृतम द्वारा निर्मित लोजेन्ज माल्ट में वंशलोचन का विशेष पध्दति द्वारा मिश्रण किया जाता है।

सावधानियां : आयुर्वेद के अनुसार, वंशलोचन ज्यादा मात्रा में लेना प्रोस्टेट ग्रंथि और फेफड़ों के लिए अच्छा नहीं है I पथरी होनेपर और स्तनपान के दौरान इसका प्रयोग ना करे l
#mentalhealth #selfworth #selfcare #selfawareness #selfie 
अनु🥰

Monday, 24 November 2025

“च्यवनप्राश चूर्ण — यौवन और शक्ति लौटाने वाला आयुर्वेदिक अमृत!”

“च्यवनप्राश चूर्ण — यौवन और शक्ति लौटाने वाला आयुर्वेदिक अमृत!” 
अगर आप चाहते हैं कि आयु बढ़ने के साथ भी ऊर्जा, स्मरणशक्ति और रोग प्रतिरोधक शक्ति पहले जैसी बनी रहे —
तो आयुर्वेद का सबसे प्रसिद्ध टॉनिक है 👉 च्यवनप्राश चूर्ण 🍯
कहा जाता है कि ऋषि च्यवन ने इसी औषधि से अपनी युवावस्था और तेज वापस पाया था —

इसलिए इसका नाम पड़ा “च्यवन-प्राश” 
🌺 मुख्य लाभ (Main Benefits):
💪 1️⃣ रोग प्रतिरोधक शक्ति (Immunity) बढ़ाता है
👉 च्यवनप्राश शरीर को बीमारियों से लड़ने की क्षमता देता है।
यह सर्दी-जुकाम, खांसी और कमजोरी से बचाता है।

🧠 2️⃣ स्मरणशक्ति और मस्तिष्क के लिए टॉनिक
👉 इसमें ब्रह्मी, शंखपुष्पी, आंवला जैसी जड़ी-बूटियाँ होती हैं
जो दिमाग को तेज़, एकाग्र और स्मृति को मजबूत बनाती हैं।

💓 3️⃣ हृदय और फेफड़ों की सुरक्षा
👉 इसमें मौजूद आंवला और गिलोय हृदय को मजबूत करते हैं
और फेफड़ों में जमा कफ को साफ कर सांस लेने में आसानी देते हैं।
🌸 4️⃣ त्वचा और बालों में निखार लाता है

👉 रोजाना सेवन से त्वचा चमकदार, बाल घने और झुर्रियाँ कम होती हैं।
⚡ 5️⃣ यौन शक्ति और कमजोरी में लाभकारी

👉 अश्वगंधा और विदारीकंद शरीर की शक्ति, वीर्य और स्फूर्ति बढ़ाते हैं।

🍯 च्यवनप्राश चूर्ण बनाने की विधि (Banane ki Vidhi):
🪶 सामग्री (Ingredients):
1. आंवला चूर्ण – 500 ग्राम
2. अश्वगंधा चूर्ण – 100 ग्राम
3. विदारीकंद चूर्ण – 100 ग्राम
4. गिलोय चूर्ण – 50 ग्राम
5. शतावरी चूर्ण – 50 ग्राम
6. पिप्पली चूर्ण – 25 ग्राम
7. दालचीनी चूर्ण – 10 ग्राम
8. इलायची चूर्ण – 10 ग्राम
9. घी – 250 ग्राम
10. शहद – 250 ग्राम
11. काली मिर्च चूर्ण – 10 ग्राम
12. बेलपत्र रस या गुलाबजल – थोड़ी मात्रा स्वाद अनुसार

🔥 बनाने की विधि (Method):
1. आंवले को सुखाकर उसका महीन चूर्ण बना लें।
2. अब घी गर्म करें और उसमें सभी जड़ी-बूटियाँ हल्की आँच पर भूनें।
3. जब सुगंध आने लगे तो गैस बंद करें और मिश्रण को ठंडा होने दें।
4. अब इसमें शहद और गुलाबजल मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें।
5. इसे शीशे के जार में भरकर ठंडी जगह पर रखें।

🩺 सेवन विधि (How to Use):
मात्रा: 1 से 2 चम्मच सुबह खाली पेट या दूध के साथ।
बच्चे: आधा चम्मच पर्याप्त।
समय: सुबह और रात सोने से पहले।

⚠️ सावधानियाँ:
डायबिटीज़ वाले लोग बिना शहद के संस्करण लें।
हमेशा चम्मच लकड़ी या स्टील की ही प्रयोग करें।
नमी और धूप से दूर रखें।

🙏 संक्षेप में:
✨ “च्यवनप्राश चूर्ण — एक ऐसा रसायन जो शरीर, मस्तिष्क और आत्मा – तीनों को तरोताज़ा करता है!” 
हर उम्र के व्यक्ति के लिए यह दैनिक टॉनिक होना चाहिए। 
Dadima ke Gharelu Nuskhe - 
घरेलू नुस्खे खाना खजाना 
 
वयं राष्ट्रे जागृयाम