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Friday, 19 June 2026

जीवन में कती ही मोटो संकट क्युं न होवे, जे थे उणने बल सूं नहीं बल्कि बुद्धि और सामने वाले री कमजोरी (मनोविज्ञान) सूं हल करो, तो बडे सूं बडो काम भी चुटकियों में पूरो हो जावे है।

पाली रे धोरा री तलहटी में एक गांव हो—"रूपावास"। उण गांव में एक **पन्ना** नाम रो अठारह-बीस साल रो राईका (चरवाहा) रहवतो। पन्ना पैदाइशी होशियार हो, उणने जंगळ रे हर जानवर री बोली, हवा रो रुख और मिनख रो चेहरो पढ़नो घणो आछो सूं आवतो। वे कवे नी कि—*"चरवाहे री आंख्यां में पूरो जंगळ होवे।"*
उण गांव रे ठाकुर सा'ब, **ठाकुर भानू प्रताप सिंह**, घणा कड़क मिजाज रा हा, पण न्यायप्रिय हा। ठाकुर सा'ब कनै एक घणो मोटो, काळो-शाह और भयंकर **'बाहुबली' सांड** हो। वो सांड ठाकुर सा'ब ने घणो प्यारो हो, पण उणरो मिजाज घणो नटखट और गुस्सैल हो।
एक दिन, उण सांड ने क्युं हुओ कि वो गांव री सीमा लांघकर पास वाले दूसरे गांव "भैंसवाड़ा" रे ठाकुर री बाड़ी (खेत) में घुस गयो और उणरी कती फसल खराब कर दीनी। भैंसवाड़ा रे ठाकुर इण बात सूं घणा रीस (गुस्सा) में आ गया और उण सांड ने अपणे अहाते में बंधवा लियो।
### **शर्त और ठाकुर सा'ब री मूंछ री बात**
भैंसवाड़ा रा ठाकुर कयो—*"जे रूपावास रा ठाकुर अपणो सांड पाछो चावे है, तो उणने खुद अठै आवणो पड़ेगा। और म्हारो एक नियम है—म्हारी सभा में जो भी मिनख उण सांड सूं बिना लाठी छुए, बिना रस्सा बांधे, सिर्फ बातां सूं उणने अठै सूं खड़ो कर देवेला, उणने ही सांड पाछो सुपुर्द करूँला। नहीं तो सांड म्हारे अठै ही चक्की पीसेला!"*
आ बात रूपावास रे ठाकुर सा'ब री मूंछ (इज्जत) माथे आ गई। गांव रे कती तगड़ा-तगड़ा मिनख गया, सांड सामी जाकर जोर-जोर सूं आवाज लगाई, पण सांड तो आंख्यां लाल करबा लागो और उठे सूं हिल्यो ही कोनी।
ठाकुर सा'ब घणा उदास हो गया। तब पन्ना चरवाहा ठाकुर सा'ब कनै आयो और बोल्यो—*"हुकम! जे थारी आज्ञा होवे, तो मैं उण दूसरे गांव जाऊं और सांड ने राजी-खुशी पाछो ले आऊं?"*
ठाकुर सा'ब देख्यो कि ओ छोटा सो लड़को काईं करेला, पण रस्तो कोई कोनी हो। उण कयो—*"जा पन्ना, जे तूं सांड लाय दियो, तो थने पांच बीघा जमीन इनाम में देऊंला।"*
### **पन्ना री चतुराई और 'सांड रो कान'**
पन्ना हाथ में सिर्फ अपणी बांस री बांसुरी (अळगोजा) लेकर भैंसवाड़ा गांव री सभा में पहुंच्यो। उठे कती लोग तमाशा देखबा वास्ते भेळा होय राख्या हा। सांड गुस्से में बीच मैदान में बैठ्यो हो।
भैंसवाड़ा रा ठाकुर हंसिया और बोल्या—*"अरे टाबर! इण सांड सूं दूर रहजै, ओ तने धोरा में फेंट देवेला।"*
पन्ना हँस्यो और बोल्यो—*"ठाकुर सा'ब, नेम (नियम) मुजब मैं इणने बिना हाथ लगाये अठै सूं खड़ो कर दूँ, तो ओ म्हारो हुओ नी?"* ठाकुर कयो—*"हां, बिलकुल!"*
पन्ना चुपचाप सांड कनै गयो। उणने कोई लाठी कोनी दिखाई, ना कोई डरायो। उण सांड रे बिलकुल कान कनै अपणो मूंडो कीनो और धीमे सूं कुछ कयो।
जैसे ही पन्ना उणरे कान में कुछ बोल्यो, सांड रे कान कड़क हुया, उण अपणी पूंछ हिलाई और वो झटके सूं खड़ो हो गयो! सिर्फ खड़ो ही कोनी हुओ, वो पन्ना रे लारे-लारे (पीछे-पीछे) ज्यूं सीधा गाय री त्यूं चालण लागगो।
पूरी सभा दंग रह गई! भैंसवाड़ा रा ठाकुर आंख्यां फाड़कर देखता रह गया। पन्ना सांड ने लेकर राजी-खुशी रूपावास पाछो आ गयो।
### **कान में काईं कयो हो?**
जब रूपावास में सांड पाछो आयो, तो ठाकुर सा'ब री छाती चौड़ी हो गई। उण पूरे गांव में मिठाई बंटवाई और पन्ना ने पांच बीघा जमीन रो पट्टो दियो।
ठाकुर सा'ब सूं रह्यो कोनी गयो, उण पन्ना ने पास बुलायो और धीरे सूं पूछ्यो—*"पन्ना, सब बातां एक कानी, पण म्हाने ओ तो बता कि तूं उण गुस्सैल सांड रे कान में ऐड़ो काईं कयो कि वो एक झटके में खड़ो हो गयो?"*
पन्ना हाथ जोड़कर हंसकर बोल्यो:
> *"हुकम! मैं उणरे कान में बस इत्ती सी बात साची-साची कह दीनी ही कि—'अरे काळू! अठै बैठो-बैठो काईं मूंछ मरोड़े? थारा मालिक ठाकुर सा'ब थने बेचकर थारे बदले **एक नई भैंस** लावण री बात कर रह्या है, जे अबार खड़ो नी हुओ, तो थारी जगह बा लेवेली!'"*
ठाकुर सा'ब ओ सुणकर जोर सूं हंस पड़्या। उण कयो कि सांड भी अपणी इज्जत वास्ते उठ गयो!
## **कहाणी री सीख**
**"अक्कल बड़ी कि भैंस (या सांड)!"** जीवन में कती ही मोटो संकट क्युं न होवे, जे थे उणने बल सूं नहीं बल्कि बुद्धि और सामने वाले री कमजोरी (मनोविज्ञान) सूं हल करो, तो बडे सूं बडो काम भी चुटकियों में पूरो हो जावे है।
कहाणी कीकर लागी भाई?

साभार - Sushimarwari 

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