इन्हें हम, हमारे माता पिता और दादाजी भी पूजते रहे होंगे।
इन्हें वही पसंद है जो हमें है।
जो लोक में प्रचलित है।
पहले मै आर्य समाज के प्रभाव से इन्हें नहीं मानता था।
कई बार मजाक उड़ाता था।
लेकिन जैसे जैसे जीवन समझा, इन्हें भी समझा।
जीवन के कई वर्ष इस #समझने_की_व्यर्थता में गंवा दिए।
काश कि सीधे ही मां पिता के कहने पर श्रद्धाभाव से अर्चना करता रहता।
लेकिन आधुनिक इंटेलेक्चुअल व्यक्ति तभी मानता है जब स्वयं अनुभव कर ले।
गरज हमको है फिर भी एटीट्यूड ये रहता है कि "ए देवता! अपने को साबित कर!"
देव शक्तियां ऐसे कार्य नहीं करती।
वे भाव की भूखी हैं।
उन्हें चाहिए पूर्ण समर्पण।
और ये जो कोई बड़े देवताओं वाले बड़े मंदिरों के उपासक हैं न, कई बार वे भी ऐसी गलतियां कर जाते हैं।
काशी में बाबा विश्वनाथ तो हैं ही लेकिन जनता भैरव जी से मांगती है।
जैसलमेर के किले में लक्ष्मीनाथ जी का मंदिर है लेकिन हारी बीमारी महारावल गिरधरसिंह जी को याद करते हैं।
आपके आसपास भी ऐसे ही देवस्थान होंगे, जो अपने से, भले से लगते होंगे।
कभी जाइये, अपने चित्त की व्यथा सुनाइये, परम्परा अनुसार पान सुपारी चढ़ा आइए।
यह भारत भूमि है, पता नहीं किस कण में कौनसी शक्ति छिपी है।
नमो तस्मै भूदेवाय।🙏🙏🙏🙏
#कुमारsचरित
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