एक मेरे भइया हैं लक्ष्मीकांत पाण्डेय उन्होंने इस श्राद्ध
अर्थात पितृपक्ष को लेकर कुछ कहा है सुनिए👇
मैं जिस कंपनी मे कार्यरत हूं,उसी मे मेरे मैनेजर के यहां कल उनके पिताजी का श्राद्ध था(पितृपक्ष नवमी तिथि)कल उन्होंने मुझे ब्राह्मण भोज के लिये बुलाया था....!
जब मैं उनके घर पहुँचा तो बड़ा आश्चर्य लगा मुझे.... आपको विश्वास नही होगा जेसे ही उनकी माताजी को पता चला मैं ब्राह्मण हूँ और उनके यहां श्राद्ध का भोजन ग्रहण करने आया हूँ...!
तो उनकी माताजी जो लगभग 92 वर्ष की हैं....जो की मेरे मैनेजर ने ही मुझे बताया... वो मेरे पैरों पर गिर गयीं...!
मैं क्या कहता... कुछ कह नही पा रहा था... मैंने उन्हे उठाने का बहुत प्रयास किया....मगर वो नही उठी मेरे पैर पकड़कर सिर्फ रोये जा रही थीं.....!
उनका रोना देख कर मुझे भी रोने जैसा लगने लगा.... मुझसे जब वो नही उठी तो लास्ट मे उनकी बहु आई तो उन्होंने उन्हें उठाया...!
मैंने उनके रोने का कारण जानना चाहा तो पता चला की उनके ससुर,पति के समय तक कई ब्राह्मण उनके यहां खाने पीने दान दक्षिणा लेने हमेशा आया करते थे...!
मगर ना जाने ये कुछ समय से किसने इतना दुष्प्रचार किया ब्राह्मणों को लेकर की अब तो ब्राह्मणों का आना जाना ही बंद हो गया...!
तब से घर मे ना कोइ शुभ पूजा पाठ होता हैं ना कोइ धार्मिक प्रोग्राम...!
हालांकि अभी हाल ही मे उनके माताजी प्रयागराज गंगा स्नान करके आई हैं और अयोध्या मे राम लला के दर्शन करके भी आई हैं...!
उनके माताजी रोते हुवे बोल रही थीं...!
उन्होंने कहा जब मैं राम लला के दर्शन करके लोटी तो सोचा कोइ ब्राह्मण को घर बुलाकर अपने हाथों से भोजन करवाउंगी मगर मेरे बेटे लोग कभी किसी ब्राह्मण को बुलाता ही नही और मेरी उम्र इतनी हो गयी हैं की मै चल फिर भी नही पाती हूँ..!
मै सोच रही थीं की मरने से पहले किसी ब्राह्मण को भोजन अवश्य करवा लूँ... मगर आज भगवान ने सुन लिया...!
मैंने देखा की घर मे उनके किसी भगवान का फोटो नही था हाँ भीम का पूरा घर मे फोटो टंगा मिला...
अब तो घर मे सिर्फ जय भीम जय भीम होता हैं और कुछ नही...!
मैंने देखा की अपने पिताजी के जगह पर उन्होंने भीम का फोटो लगा रखा है...!!
मैंने जब उनसे पूछा तो उन्होंने बताया की उनके पिताजी का फोटो तो नही है बचपन मे ही उनके पिताजी का देहांत हो गया और उस समय कोइ फोटो भी नही खींचवाया था उनके पिताजी ने तो पिता के जगह वो भीम को ही अपना पिताजी मान लिये है....!
मुझे बहुत अच्छा लगा की चलो जहाँ लोग आज सिर्फ जय भीम...जय भीम.... करते रहते है...और अपने पुराण पद्धति को ढोंग मानते है...
मगर इनके अंदर कम से कम श्राद्ध को लेकर विश्वास आज भी है...
और दान दक्षिणा देना चाहिए...ये भी पता है इन लोगों को....
और भले ही बदलाव करके कर रहे है तो क्या हुवा श्राद्ध तो कर रहे है न..!
चाहे जैसे करें... धर्म मान तो रहे हैं...!
मुझे दान दक्षिणा मिला और भोजन मे पूड़ी सब्जी पनीर और खीर खाने को मिला...!!
उनकी माताजी ने ना जाने कब से दान करने के लिये जोड़ जोड़ कर कब से संभाल कर रखी थीं पैसे को अपने दोनों हाथों से मुठी भर कर सिक्का और रूपये मुझे दिये...!
मेरे मैनेजर की वाइफ ने 500 रूपये दिये... और मेरे मैनेजर ने भी 500 दिया...!!
उनके दोनों छोटे बच्चे लोग ने भी 20 रूपये करके दिये...!!
पता नही क्यों आज शायद कुछ लोगों को लगेगा की मैंने अपने मैनेजर को लूट लिया....!
क्योंकि ब्राह्मणों को दान देने और उनके यहां खाने पीने को ही तो ये लोग ब्राह्मणों द्वारा खुदको लूटना मानते आए हैं...!!
हालांकि यह जो नई जनरेशन है यही यह मान रही है, उनके बाबा दादा हमेशा ब्राह्मणों का सम्मान किए थे और ब्राह्मण भी उनका सम्मान करते चले आए थे।
साभार :-अनुपमा तिवारी
( Ajai Sharma fb Post 6 October 26 से )
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