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Monday, 7 July 2025

वायरस बैक्टीरिया फंगस का ब्रह्मास्त्र इलायची

     वायरस बैक्टीरिया फंगस का ब्रह्मास्त्र इलायची



वायरस बैक्टीरिया फंगस का ब्रह्मास्त्र इलायची:कोराना काल और लौंग याद होगा छोटी इलायची का पौधा सदा हरा तथा तीन। फुट से 8 फुट तक ऊँचा होता है। इसके पत्ते बर्छे की आकृति के तथा दो फुट तक लंबे होते हैं। यह बीज और जड़ दोनों से उगता है। तीन चार वर्ष में फसल तैयार होती है तथा इतने ही काल तक इसमें गुच्छों के रूप में फल लगते हैं। सूखे फल बाजार में 'छोटी इलायची' के नाम से बिकते हैं। पौधे का जीवकाल १० से लेकर १२ वर्ष तक का होता है
छोटी इलायची को संस्कृत में 'एला', 'तीक्ष्णगंधा' इत्यादि और लैटिन में एलेटेरिआ कार्डामोमम कहते हैं। भारत में इसके बीजों का उपयोग अतिथिसत्कार, मुखशुद्धि तथा पकवानों को सुगंधित करने के लिए होता है। ये पाचनवर्धक तथा रुचिवर्धक होते हैं।
हरी इलायची में विटामिन ए, सी और बी 6 के साथ ही कैल्शियम, मैग्नीशियम और पोटेशियम जैसे खनिज अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं।
इलायची में फ्लेवोनोइड्स और फाइटोन्यूट्रिएंट्स जैसे शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं। इलायची में डायटरी फाइबर के गुण मौजूद हैं जो पाचन तंत्र को मजबूत करने में मदद करता ह
 आयुर्वेदिक मतानुसार इलाचयी शीतल, तीक्ष्ण, मुख को शुद्ध करनेवाली, पित्तजनक तथा वात, श्वास, खाँसी, बवासीर, क्षय, वस्तिरोग, सुजाक, पथरी, खुजली, मूत्रकृच्छ तथा हृदयरोग में लाभदायक है।
ये एंटी इंफ्लेमेटरी है जो कि फैटी लिवर की समस्याओं में कमी लाती है और लिवर क्लींनिंग में मददगार है। इलायची में एक बायोएक्टिव कंपाउंड पाया जाता है जिसे सिनेओल (cineole) कहते हैं जो कि इंसुलिन संवेदनशीलता को बढ़ाते हैं, जिससे फैटी लिवर का खतरा कम हो जाता है तथा सिनेओल एंटी बायोटिक एंटी वायरल तथा एंटी इंफ्लामेटरी गुणों से भरपूर होता है इसलिए इसमें में बैक्टीरिया वायरस व फंगी को रोकने के गुण पाए जाते हैं। 
इलायची व लौंग के तेल दोनों में कुछ ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो बैक्टीरिया वायरस की ऊपरी झिल्ली को नष्ट कर देते हैं जिससे संक्रमण फैलने से रोकने में मदद मिलती है।

इलायची में कुछ ऐसे तत्व होते हैं जो स्ट्रेस को कम करने में मदद करते हैं। यह ब्रेन में सेरोटोनिन के स्तर को बढ़ाकर काम करता है, जो एक न्यूरोट्रांसमीटर है जो मूड को बेहतर बनाने में मदद करता है और 
एंटीऑक्सिडेंट जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करते हैं. इसके साथ ही यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल लेवल को भी बैलेंस बनाए रखने में मदद करती है तथा सूजन को कम करके और रक्त वाहिकाओं को नुकसान से बचाकर हृदय की रक्षा करने में मदद करते हैं। ये एंटीऑक्सीडेंट रक्तचाप को कम करने और रक्त प्रवाह को बेहतर बनाने में भी मदद कर सकते हैं, जो आपके हृदय के लिए अच्छा है।

इलायची शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करती है और किडनी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है इसके अलावा, इसमें डाइयूरेटिक गुण, फाइबर, एंटी इंफ्लेमेटरी गुण और एंटी माइक्रोबल गुण पाए जाते हैं। इसलिए इलायची गुर्दों की सफाई करती है और टॉक्सिन्स को बाहर निकालती है। इलायची अपने मूत्रवर्धक गुणों के कारण यूरिक एसिड को पेशाब के जरिए बाहर निकालने में मदद करती है। इसके साथ ही ये यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है, जिससे यूरिक एसिड का उत्पादन कम जो जाता है तथा इसमें नेफ्रोप्रोटैक्टिव गुण होते हैं 

 अगर आप वजन घटाने की कोशिश कर रहे हैं, तो यह आदत आपके लिए फायदेमंद हो सकती है. इलायची शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी को कम करने में मदद करती है और मेटाबॉलिज्म को एक्टिव रखती है इलायची में मौजूद प्राकृतिक तेल पाचन एंजाइमों के उत्पादन को बढ़ाने में मदद करते हैं, जिससे आपके शरीर के लिए भोजन को पचाना आसान हो जाता है तथा अनावश्यक मोटापा एसिडोसिस अपच तथा रक्तपित्त दोष से मुक्ति मिलती है इलायची के सेवन से पाचन तंत्र की समस्याएं, जैसे अपच, गैस, और एसिडिटी कम होती हैं। यह पेट की मांसपेशियों को आराम देता है और पाचन को बेहतर बनाता है।

इलायची में सुंगध और कुछ ऐसे तत्व होते हैं जो स्ट्रेस को कम करने में मदद करते हैं। यह ब्रेन में सेरोटोनिन के स्तर को बढ़ाकर काम करता है, जो एक न्यूरोट्रांसमीटर है जो मूड को बेहतर बनाने में मदद करता है तथा भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो सूजन को कम करके और रक्त वाहिकाओं को नुकसान से बचा कर रक्त प्रवाह को संतुलित और निरंतर बनाते हैं जिससे नपुंसकता में भी छोटी इलायची का सेवन फायदा जबरदस्त होता है. इसके लिए आपको करना ये है कि दूध में तीन चार इलाइची उबाल कर, दूध को ठंडा करके उसमें शहद मिलाकर पीना है जिससे नपुंसकता दूर होगी और यौन क्षमता बढ़ेगी.

इलायची अस्थमा, खांसी और ब्रोंकाइटिस जैसी समस्याओं में राहत देती है। यह श्वसन तंत्र को खोलने और सांस लेने में मदद करती है।
इलायची से निकलने वाला तेल एक उपयोगी उत्तेजक है, यह एंटीसेप्टिक होता है जो पाचन तंत्र को सही रखने में मदद करता है। सर्दी और खांसी को भी ठीक करता है। गले की खराश और सर्दी का मुख्य कारण आंतों में जमा विषाक्त पदार्थ है, इससे इम्यून सिस्टम प्रभावित होता है। इसलिए इलायची का सेवन पाचन समस्याओं को समाप्त करने के लिए किया जाता है। इलायची में मौजूद शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाले गुणों के लिए जाने जाते हैं। इसके एंटी इंफ्लेमेंटरी गुण दर्द और सूजन को कम करते हैं, खासकर म्यूकस मेंबरेन या लेष्म झिल्ली के अलवा मुंह और गले की सूजन को खत्म करते हैं।

                      ✍️डॉ० जयवीर सिंह 
                   अवधूत आयुर्विज्ञान संस्थान 
   पिंडारा फ्लाईओवर गोहाना रोड़ नजदीक राजमहल          पैलेस जींद - हरियाणा ( मो०7393050000)

                           वयं राष्ट्रे जागृयाम 

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