श्वेत दूर्वा पित्त रक्तपित्त चर्मरोगों और कमजोर इम्यूनिटी की महा औषध :-
मैं पिछले दस सालों से लगातार कहता आया हूं पूजा हवन यज्ञ में प्रयोग होने वाले पदार्थ सभी के सभी औषधि नहीं महा औषध हैं जिन्हें सांकेतिक रूप से सुरक्षित रखा गया है परंपराओं में ढालकर
श्वेत दूर्वा (Cynodon dactylon), जिसे बरमूडा घास या दूब घास भी कहा जाता है यह हरी मैदानों में फैलने वाली होती है जो सूखने पर श्वेत हो जाती है जैसा चित्र में दिखाया गया है सूखी सफेद भी और ताज़ा हरी भी इसे क्षेत्रीय भाषाओँ में यह अलग अलग नामों से जाना जाता है। हिंदी में इसे दूब, दुबडा, संस्कृत में दुर्वा, सहस्त्रवीर्य, अनंत, भार्गवी, शतपर्वा, शतवल्ली, मराठी में पाढरी दूर्वा, काली दूर्वा, गुजराती में धोलाध्रो, नीलाध्रो, मारवाड़ी में ध्रो, अंग्रेजी में कोचग्रास, क्रिपिंग साइनोडन, बंगाली में नील दुर्वा, सादा दुर्वा आदि नामों से जाना जाता है। इसके आध्यात्मिक महत्वानुसार प्रत्येक पूजा में दूब को अनिवार्य रूप से प्रयोग में लाया जाता है।
श्वेत दूर्वा में कसैले, मूत्रवर्धक, दस्त रोधी, जुकाम रोधी, रक्तस्राव रोधी और रोगाणुरोधक गुण होते हैं। इसका उपयोग कटने, घाव, रक्तस्रावी बवासीर, मूत्राशयशोथ, नेफ्राइटिस और खुजली तथा अन्य त्वचा रोगों के उपचार में किया जाता है।
दूब कड़वी तथा शीतल गुण वाली होती है। यह उल्टी, विसर्प या हर्पिज़ , प्यास, कफ, पित्त, गर्मी, आमातिसार या दस्त, रक्त-पित्त (नाक -कान से खून बहना) तथा खांसी को दूर करती है। गंड दूब अर्थात् गाडर दूब शीतल, लोहे को गलाने वाली, मल को रोकने वाली, हल्की, कसैली, मधुर, वातकारक, जल्दी हजम होने वाली तथा प्यास-गर्मी-कफ-रक्त संबंधी रोग, कुष्ठ, पित्त और बुखार को दूर करने वाली होती है
दूर्वा में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसमें विटामिन ए, विटामिन सी, प्रोटीन, पोटेशियम, मैग्नीशियम, सोडियम, एसिटिक एसिड, एल्कलॉइड, और ग्लूकोसाइड शामिल हैं. इसके अतिरिक्त, इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-वायरल, एंटी-सेप्टिक, गैलेक्टगॉग और एंटी-माइक्रोबियल गुण भी होते हैं.
दूर्वा घास में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीसेप्टिक गुण होते हैं। यह त्वचा से जुड़ी कई तरह की समस्याओं, जैसे- खुजली, जलन और रैशेज आदि को दूर करने में प्रभावी होती है। इसका उपयोग एक्जिमा, सोरायसिस और फंगल संक्रमण के इलाज के लिए भी बहुत फायदेमंद है। इसके लिए दूर्वा के रस में चुटकीभर हल्दी मिलाकर प्रभावित स्थान पर लगाएं सिद्ध पाक विधी से दूर्वा घृत भी बनाया जा सकता है जिसका सेवन व लेपन दोनों किया जा सकता है आवश्यकता पड़ने पर अन्य औषधियां मिलाकर भी लेपन होता है
दूर्वा घास में मौजूद साइनोडोन डेक्टाइलोन नामक यौगिक का हाइपोग्लाइसेमिक प्रभाव होता है। जो ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल रखने में मदद करता है। सुबह खाली पेट दूर्वा घास के जूस को नीम के जूस के साथ लेने से मधुमेह संबंधी समस्याओं में जबरदस्त लाभ मिलता है
दुर्वा घास का सेवन मानसिक तनाव को कम करने में मदद करता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट मेंटल हेल्थ को बेहतर बनाने का काम करते हैं। दुर्वा घास के नियमित सेवन से मस्तिष्क की नसें शांत होती हैं, जिससे व्यक्ति को चिंता, तनाव और अवसाद कम महसूस होता है तथा माइग्रेन में भी लाभ मिलता है
अगर मसालेदार खाना खाने या किसी बीमारी के साइड इफेक्ट के वजह से उल्टी हो रही है तो दूर्वा का 5-10 मिली लीटर स्वरस यानी जूस निकाल कर पिलाने से उल्टी तथा उबकाई रूक जाती है
शरीर के ऊतकों यानि टिशु में पानी की मात्रा बढ़ जाने के कारण या पानी जम लाने के कारण सूजन और दर्द होता है। इसका घरेलू उपचार करने में दूर्वाघास बहुत काम आता है। 10-30 मिली दूर्वा घास से बने काढ़े को पीने से जलशोफ तथा प्रवाहिका में लाभ होता है
दूब घास एनीमिया से छुटकारा दिलाने में मदद करता है. अगर किसी को एनीमिया की समस्या है तो उसे दूब का सेवन करना शुरू कर देना चाहिए. दूब के जूस का सेवन कर एनीमिया से छुटकारा मिलता है. दूब शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाने का काम करता है और हीमोग्लोबिन का लेवल बढ़ता है.
दूब घास में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-वायरल गुण होते हैं जो संक्रमण से लड़ने में मदद करता है. अगर आप दूब को पीसकर पानी में मिलाकर पीते हैं तो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगा!
दूर्वा घास में भरपूर मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट्स के गुण पाए जाते हैं। इसका इस्तेमाल करने से बालों को हेल्दी बनाए रखने और बालों को झड़ने से रोकने में भी मदद मिलती है, साथ ही, इससे बालों की ग्रोथ को भी बढ़ावा देने में सहायक है। साथ ही ये लीवर को डीटॉक्स करती है तथा रक्तपित्त दोष शांत करती है जिससे बालों और त्वचा को खूब सुरक्षा और पोषण मिलता है
डॉ० जयवीर सिंह
अवधूत आयुर्विज्ञान संस्थान
पिंडारा फ्लाईओवर गोहाना रोड नजदीक राजमहल पैलेस
जींद हरियाणा
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