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Wednesday, 16 September 2026

अनार्योंन्मूलन पर आचार्य महाप्रज्ञ की प्रतिक्रिया

आर्यसमाज के आचार्यों से निवेदन हैं कि - पुस्तक में केवल उन्ही ग्रंथो के प्रमाण हैं, जिनको आप आर्ष ग्रंथ, वैदिक ग्रंथ आदि कहते हो, जिनको कि दयानंद ने भी प्रमाण माना है, अतः इन प्रमाणो को आप क्या गलत सिद्ध करेंगे। ? इससे बेहतर हैं - किसी एक स्थान पर एकत्रित होकर हमसे इन विषयो पर सार्वजनिक शास्त्रार्थ कर लें। दयानंद-पंथ के किसी आचार्य में इतना साहस हैं ? अगर है तो सम्पर्क करे। 

नोट - आर्यसमाज के आचार्य ही सम्पर्क करें। नियोग से पैदा हुए अशिक्षित दयानंदी-रंगरूट दूर रहे।

चलिए भइया आपकी सफलता के गीत तो बजने लगे हैं बाज़ार में...ईश्वर उक्त नियोगी की इच्छा पूर्ण करें (यह पुस्तक जन जन तक पहुंचे ताकि लोग उस अधर्मी दयानंद के दलाली से परिचित हो सकें।) 
बहुत बहुत साधुवाद - दिव्यांश पांडेय 

मतलब तीर सही निशाने पर लगा है - रामांश भरत 

हिमांशु जुयाल

अब ये महाशय जो भी है आर्य समाज के पक्ष में शास्त्रार्थ की बात कर रहे हैं।
पर किस आधार पर करेंगे यह भी स्पष्ट कर दें क्योंकि वर्तमान आर्य समाजीयों में स्वाध्याय करने वाले नगण्य हैं मेरा अनुभव है कि अधिकांश दयानंद जी को मन ही मन भगवान मानते हैं ये अभिमानी दयानंद जी या आर्य समाज का कटुसत्य सुनना समझना नहीं चाहते और अपने पक्ष में आनलाइन मंच पर एक साथ आ कर वितंडावाद करते हैं ।

इसलिए जो भी शास्त्रार्थ करने आए उससे उसके प्रमाण और प्रमाणिक ग्रंथों की सूची लिखित में अवश्य लें ताकि वह अपनी बात से मुकरे नहीं। चंद्रशेखर शर्मा 

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