डबल नाड़ी चलती है
प्रेत ग्रस्त रोगी के चहरे पर काली झांईयां पड़ने लगती है। आँखें नीचे धंस जाती है। नजर लगे हुय बच्चे की आँखों के बाल सीधे खड़े हो जाते है। अथवा ऊपर घुंघराले बालों की तरह मुड़ जाते है। नजर दोष दूर होने पर आंखों की पलकों के बाल नीचे झुक जाते है । कभी कभी प्रेत बाधा विशेषतः डाकिनी, शाकिनी, भूतनी, पिशाचिनी से ग्रसित महिला की आँखों में अपना प्रतिबिम्ब उल्टा दिखाई देगा।
उपरी बाधा ग्रसित व्यक्ति की नाड़ी देखे तो ऐसा महसूस होगा कि जैसे गर्भावस्था वाली स्त्री की डब्बल नाड़ी चल रही हो । प्रेत दोष वाला व्यक्ति पवित्रता से नफरत करता है । नित्य नहोने से परहेज करता है । पवित्र वातावरण से घबराता है ।अच्छे वस्त्र नहीं पहनता । पाठ पूजन में मन नहीं लगता । भगवान के दर्शन में अरुचि होने लगती है। धूप व खुला वातावरण पसंद नहीं होता। अंधेरा बंद वातावरण पसंद आता है l प्रेतग्रस्त या अभिचार ग्रस्त व्यक्ति का व्यवहार बदल जाता है । रूखा रूखा व चिडचिडा स्वभाव हो जाता है। उसके हर कार्य में रुकावटें आती है । व्यवसाय नौकरी आदि अस्थिर हो जाता हैl उसका उच्चाटन होकर वृथा भ्रमण करने लगता है तथा आर्थिक उपार्जन में बाधा रहता है । ग्राहक दूकान पर या घर पर आता है,पर कोई सौदा नहीं बन पाता है । ऐसे व्यक्ति को नेत्र मिलाने को कहोगे तो प्रायः नेत्र झुका लेता है । उसकी गर्दन व कंधों पर भारी दबाव ररहने लगता है। कभी कभी ऐसा लगेगा कि कोई उसकी गर्दन को घूमा रहा हो। यदि पूजन में बैठेगा तो शरीर टूटेगा तथा मन का ऐसा उच्चाटन होगा कि उठकर भाग जाऊँ । ऐसा व्यक्ति सुगंधित वस्तुओं को अधिक पसंद करता है । प्रेतावेश के समय व्यक्ति की आँखे अंगारे की तरह लाल हो जाती है । उससे कोई ठीक से नेत्र नही मिला पाता l यदि नाखूनों में सफेद धब्बे उभरते है तो ठीक है । काले धब्बे व नाखून काला होना किसी अशुभ घटना या प्रेतोपद्रव के संकेत है।
इसी तरह प्रेतग्रसित महिला के मासिक धर्म में काला पानी या काला रंग का खून भी दिखाई देगा। व्यक्ति का हिंसक पशुओं की तरह नाखून बढ़ने लगेगा । उसके गुप्तांगों मे कई प्रकार के विकृति पैदा होगी । स्वप्न दोष इतना हल्का होगा कि उसके निशान भी वस्त्रो पर नहीं होंगे। प्रेत दोष का सामान्य लक्षण इस प्रकार से हो सकता है। आगे और भी बहुत से ऐसे संकेत हैं जिससे आप समझ सकते हैं जैसे भोग विलास के समय अपने जीवन साथी से अरुचि व दूर होने का प्रयास करने लगेगा। पति पत्नि व परिवार में नित्य प्रतिदिन कलह बढ़ने लगेगा। जब ऐसा व्यक्ति आपके कमरे में अचानक प्रवेश करे तों ऐसा लगेगा कि कोई काली आकृति प्रवेश कर रहीं है। आपके मन को अटपटा लगेगा। मध्य रात्रि में काले रंग के पुरुष, आत्माएं व अन्य खराब तथा डरावने स्वप्न आने लगेगा। रात्रि में अधिक समय तक नींद नहीं आयेगा या आयेगा तब खूब नींद आयेगा जैसे उठ ही न पाऊँ । गर्भवती स्त्री का गर्भ किसी डर या भय से गिर जाये या बार बार ऐसा हो तो ऊपरी बाधा के लक्षण हैं । दिन या रात्री में किसी वृक्ष, श्मशान, चौराहे के पास भोजन करने के कुछ समय बाद या एक दो दिन बाद तबियत खराब हो तो ऊपरी बाधा से समस्या है। इसलिए भोजन या कुछ भी कहीं खाने से पहले स्थान का विचार करें l असमय, दोपहर, रात्रि में मजार, चौराहा, कब्रिस्तान, श्मशान, बरगद, इमली, व पीपल के पेड़ के नीचे लघु शंका करने के १-२ दिन में या घर पहुँचते ही तबियत खराब हो तो ऊपरी बाधा का प्रकोप समझना चाहिए। चौराहे या सुनसान रास्ते पर यदि उतारा उतार का पात्र या बलि द्रव्य रखा हो तो उसका उल्लंघन नहीं करे। प्रसाद भी नहीं खावें, ना हीं वहां रखा द्रव्य उठाये। उतारे के ठोकर लगने आदि कारणों से स्वस्थय व
बिगड़ सकता है।
प्रेत रोग लक्षण स्वप्न विद्या द्वारा देश काल परिस्थिति के अनुसार रोग या प्रेत दोष का ज्ञान कर सकते हैं । उग्र प्रयोग अचानक नहीं करे, न करवाएं पहले प्रेत बलाबल ज्ञात करे। यदि आत्मा महाबली है तो मध्यम मार्ग से चले । इससे आपका आत्मबल व तपोबल बढेगा, प्रेत को विशेष पीडा नहीं पहुँचेगी, वह आपकी उपासना का उपहास कर, आपकी कोई हानि नहीं करेगा । परन्तु आपके मध्यम मार्ग की दीर्घकालीन उपासना उसको दीमक की तरह खोखला कर देगी। संयोग व प्रारब्ध से कोई सहायक मिल जायेगा या धीरे-धीरे प्रेतात्मा का मनोबल कमजोर हो जायेगा अथवा प्रेतात्मा का मानस ही बदल जाये, वह आपको पीड़ा नहीं देगी।
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