(विकृतार्थ सहित)
१. अथातो घूस जिज्ञासा।
= घूस तत्त्व तथा महत्व जानने की इच्छा है।
२. परिभाषा-अपना इच्छित कार्य कराने के लिए सरकारी कार्यालय में घुसने के लिए जो धन देना पड़ता है, उसे घूस कहते हैं।
राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसा-रे॥
३. अन्य शब्द-
भेंटी = सरकारी अधिकारी से भेंट करने के लिए खर्च।
रिश्वत = अज्ञात अधिकारी से रिश्ता बनाने के लिए दिया धन। इसके विशेषज्ञ को सम्मान से रिश्वतश्री या रिशुश्री भी कहते हैं।
लांच (ओड़िया में प्रचलित) -कार्यालय अधिकारी को अपना काम कराने के लिए खिलाने को लांच कहते हैं। अतः कार्यालय समय के भोजन का नाम अंग्रेजी में लंच हो गया है।
४. धन का महत्त्व-रुपया (टंका) ही जीवन में सबकुछ है।
टका धर्मः टका स्वर्गः,टका हि परमां गतिः।
यस्य गृहे टका नास्ति, हा टके टकटकायते॥
(टका पर ध्यान केन्द्रित करने को टकटकी कहते हैं)।
यस्यास्ति वित्तं स नरः कुलीनः, स पण्डितः स श्रुतवान् गुणज्ञः।
स एव वक्ता स च दर्शनीयः, सर्वे गुणाः काञ्चनमाश्रयन्ति॥
५. सच्चा गुरु-विज्ञान, गणित, इंजीनियरिंग आदि पढ़ाने वाले असल गुरु नहीं हैं। परम गुरु वही है, जिसने अखण्ड मण्डलाकार (गोल सिक्का) पाने का मार्ग दिखाया।
अखण्ड मण्डलाकारं, व्याप्तं येन चराचरम्।
तत्पदं दर्शितं येन, तस्मै श्री गुरवे नमः॥
६. सुकर्मी = सुकर्मी या सुकृति वह है, जिसके घर में रखी सम्पत्ति अभी तक छिपी हुई है, अर्थात् अलक्ष्मी है। उसी को बुद्धिमान भी कहा जा सकता है।
या श्रीः स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मीः।
पापात्मनां कृतधियां हृदयेषु बुद्धिः।
(चण्डी पाठ, ४/५)
७. श्रेय मार्ग-जिससे श्री या प्रतिष्ठा मिले, उसी मार्ग पर चलना चाहिए। यह जिससे संपरेगा, वही धीर है।
श्रेयश्च प्रेयश्च मनुष्यमेतस्तौ सम्परीत्य विविनक्ति धीरः।श्रेयो हि धीरोऽभि प्रेयसो वृणीते प्रेयो मन्दो योगक्षेमाद् वृणीते॥
(कठोपनिषद्, १/२/२)
जिसके पास आय से अधिक सम्पत्ति (असम्भूति) है, वह अन्धकार में जाता है, कभी कभार निगरानी विभाग द्वारा पकड़ा जाता है। किन्तु वह पैसा दे कर छूट सकता है। उससे भी घने अन्धकार में वह जाता है, जिसके पास सीमित आय है, उसके पास घूस दे कर बचने के लिए कुछ नहीं है। नहीं भी पकड़ा जाए, तो वह धन के अभाव में सदा दुःखी तथा निन्दित रहता है।
✍️ Arun kumar Upadhyay
2 july 2026 / Facebook post
आषाढ़ कृष्ण २ विक्रम संवत २०८३ गुरुवार
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