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Saturday, 9 May 2026

अखा जी भील और पन्ना धाय

                  🛕꧁ जय द्वारकाधीश꧂🛕

ये तस्वीर गवाह है उस निर्मम काल की जब 1536 में बनवीर ने महाराणा विक्रमादित्य को मारकर कुंवर उदय सिंह को मारने के लिए आया, लेकिन पन्ना धाय ने अपने पुत्र का बलिदान देकर कुंवर उदय सिंह को बचाया ओर चित्तौड़ के किले से उदय सिंह को बाहर निकाला, यहां तक सब जानते हैं सबको मालूम है लेकिन चित्तौड़ से कूंभलगढ पन्ना धाय ओर कुंवर उदय सिंह केसे पंहुचे ये बात भूल चुके हैं।
जब पन्ना धाय कुंवर उदय सिंह को किले से बाहर लेकर निकली तो अखा जी भील ने पन्ना धाय ओर कुंवर उदय सिंह को कुंभलगढ़ तक सुरक्षा प्रदान करके पहुंचाया। जगह जगह बनवीर के सेनिक इनको ढूंढ रहे थे। उन सबकी निगाहों से बचाकर अरावली के दुर्गम रास्तों से होकर सुरक्षित कुंभलगढ़ के किलेदार आशा शाह देवपुरा तक पंहुचा कर अपनी कृत्वयनिष्ठा का पालन किया।
अगर अखा जी भील ओर उनके साथी उस वक्त सहयोग न करते तो मेवाड़ का भविष्य कुछ ओर ही होता, लेकिन आज अखा जी भील को कोई नहीं जानता ओर उनका बलिदान किताबों में दबाकर रख दी है।
भील समाज के योगदान का उल्लेख करें तो रोना आता है क्योंकि जिन्होंने बलिदान दिया उनको ही आज सब दबा रहे हैं। मैं नमन् करता हूं अखा जी भील को जिन्होंने उदय सिंह की रक्षा करके मेवाड़ का मान बढ़ाया।

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