परभाते रै पांण, जगदाता जगदीश नै ।।
परतख कर ले प्रीत, मीत अठे दोरा मिले।
गा ले हर रा गीत, बीते जीवन बावरा ।।
जीवन माया जाळ में, उळझ्यो आठौ पौर ।
चित रै मते न चालियो, चित रेवै नित चोर ।।
सात पीढी रो संचवे, पळ नीं ठाह पड़ै ।
मोटा मोटा माळिया, खिंडग्या खड़ै खड़ै ।।
#गिरधारीदानबारहठ
फोटो सौजन्य : Krishna Deo Kalpit
No comments:
Post a Comment