थार की तपती रेत पर जब भी दोपहर ढलती, बीकानेर की एक हवेली के दालान में सफेद धोती-कुर्ता पहने एक बुज़ुर्ग की सभा जमती थी। लोग उन्हें *महाराज हरिनारण जी व्यास* कहते, पर अपनों के लिए वो सिर्फ *'महराज'* थे।
राजनीति में उनका कद इतना बड़ा था कि बड़े-बड़े नेता भी फैसला लेने से पहले *महाराज* की दहलीज़ चूमते। पर कुर्सी का मोह उन्हें कभी छू भी नहीं पाया। *महाराज* कहते थे, _"राजनीति मेरे लिए सेवा का रास्ता है, सत्ता का नहीं।"_
*उनकी सभा कोई दरबार नहीं, एक पाठशाला थी।*
एक बार *दो सगे भाई* ज़मीन के बंटवारे को लेकर लड़ते-झगड़ते आए। मामला कोर्ट तक पहुंच गया था, खून-खराबे की नौबत आ गई थी। *महाराज* ने 3 घंटे तक दोनों की बात सुनी। फिर दोनों को अपने हाथ से पानी पिलाया और बोले, _"बेटा, ज़मीन तो यहीं रह जाएगी, पर रिश्ते टूट गए तो उम्र भर नहीं जुड़ेंगे। बाप-दादा की पगड़ी की लाज रखो।"_ *महाराज* ने खुद पंच बनकर ऐसा बंटवारा करवाया कि दोनों भाई गले लगकर रोने लगे। छोटे ने जब पैर छूने चाहे तो *महाराज* ने रोक दिया - _"आशीर्वाद सिर पर चढ़ता है, पैरों में नहीं।"_
पांच भाइयों में दूसरे नंबर के थे, पर बड़े भाई का फर्ज ऐसा निभाया कि लोग मिसाल देते। बंटवारे के वक्त *महाराज* ने अपने हिस्से की आधी ज़मीन छोटे भाइयों के नाम कर दी। पत्नी ने टोका तो हंसकर बोले, _"बड़ा भाई वो नहीं जो उम्र में बड़ा हो, वो है जो दिल में बड़ा हो।"_
*महाराज का एक-एक शब्द आज भी गूंजता है।*
लोग कहते हैं कि आज जो बातें हम बड़े-बड़े महापुरुषों के प्रवचनों में सुनते हैं, वो *महाराज* 40 साल पहले अपनी चौपाल में कह गए थे।
_"किसी का हक मत मारो, और अपना हक मत छोड़ो।"_
_"गलत होते देखो तो टोको ज़रूर, पर आवाज़ में ज़हर मत घोलो।"_
_"समाज वो नहीं जहां लोग रहते हैं, समाज वो है जहां लोग एक-दूसरे के लिए जीते हैं।"_
जो एक बार *महाराज* के पास बैठ जाता, मंत्रमुग्ध हो जाता। घंटों बीत जाते, पर जाने का मन नहीं करता। ना कोई उपदेश, ना कोई भाषण। बस सादे शब्दों में जीवन का सार।
एक बार *शहर के सबसे बड़े स्कूल* की छत टपकने लगी। बरसात में बच्चे भीगते-भीगते पढ़ते थे। सरकार से फंड नहीं आया, अफसर टालते रहे। एक मास्टर जी हारकर *महाराज* के पास आए। *महाराज* स्कूल पहुंचे। बच्चों को देखा, सिर पर हाथ फेरा और बोले, _"ये बीकानेर का भविष्य हैं, इन्हें टपकती छत के नीचे नहीं बैठने दूंगा।"_ उसी दिन अपनी पुश्तैनी ज़मीन का एक टुकड़ा देकर स्कूल की नई छत और कमरे बनवा दिए। बोले, _"इमारतें गिर जाती हैं, पर शिक्षा से बना इंसान कभी नहीं गिरता।"_
*आज महाराज शरीर से हमारे बीच नहीं हैं, पर बीकानेर की हवाओं में उनका नाम है।*
उनकी वो हवेली अब भी है। दालान अब सूना है, पर दीवारें गवाह हैं कि यहां एक ऐसा इंसान बैठता था जिसने कभी किसी के साथ गलत नहीं किया, ना होने दिया।
जिस रास्ते पर *महाराज* चले, उस पर आज भी पूरा समाज सिर झुकाकर चलता है। क्योंकि कुछ लोग पद से नहीं, अपने कर्म से अमर होते हैं।
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*प्रेरणा:* असली रुतबा कुर्सी से नहीं मिलता, लोगों की दुआओं से मिलता है। और असली नेता वो है जिसके जाने के बाद भी उसकी बातें समाज को रास्ता दिखाएं।
*महाराज हरिनारण जी व्यास* को शत-शत नमन। 💛
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