ऐसे ही महंगे कथावाचक भजन गाएंगे कि नहीं चाहिए धन और दौलत न चांदी ना सोना, मैं चाहूं मां के दिल का एक कोना लेकिन ऐसा गाते गाते उन्हें भगवान सच में दौलत विहीन कर दे तो वे भूल कर भी यह भजन नहीं गाएंगे। यह भजन केवल श्रद्धालुओं को भ्रमित करने के लिए गाया जाता है। अपनी महंगी फीस तय करने के बाद ही ये भजन उनके श्रीमुख से निकलते हैं।
हिंदुओं तुम यह देखो तुम्हारे परंपरागत ब्राह्मण/भगत/गुनी/ओझा कहां गए जिनकी पीढ़ियों ने तुम्हे आशीष देखकर शताब्दियों से तुम्हारे मन को कलुश से बचाए रखा।
अपने कुल पुरोहित, आस पास के मंदिर के पुजारी, अपने कुलदेव, कुलदेवी, घर के थान, परंपरा की ओर लौटने का निवेदन है।
सभी पिताओं से, माताओं से निवेदन है कि बच्चों को हफ्ते में एक दो बार राम चरित मानस का पाठ पढ़कर सुनाएं, एक दो बार मंदिर जाएं, साल में दो तीन बार गांव या मूल साथ जाएं। परिवार के अन्य भाई बंधुओं से प्रेम से रहें। कथा वार्ता के लिए परिवार के सदस्यों को एकत्र करें।
केदारनाथ जाने का पुण्य तभी मिलेगा जब गांव/कुल के देवता प्रसन्न रहेंगे।
✍️डॉ पवन विजय 12/5/2026
वयं राष्ट्रे जागृयाम
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