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Sunday, 10 May 2026

धर्म कर्म एवं क्रूर लौकिक कार्यों में पत्नी को दाहिने रखा जाता है।

कन्या को पत्नी रूप में पाने के लिये अग्नि की दक्षिणावर्त परिक्रमा की जाती है। धर्म कर्म एवं क्रूर लौकिक कार्यों में पत्नी को दाहिने रखा जाता है। शक्ति (स्त्री) को दाहिनी ओर रखने से कार्य में सफलता मिलती है। एक लोकख्यात रक्षा मंत्र है, जिसमें शक्ति को दक्षिणांग में होने का आह्वान किया गया है। मंत्र

 "दायें कालिका, बायें हनुमान् 
आगे नृसिंह, पीछे जाम्बवान्
 मेरी रक्षा करें श्री राम ॥"

 यहाँ कालिका = परमा शक्ति, हनुमान् शिव का अंश, नृसिंह विष्णु का अंश, जाम्बवान् = ब्रह्मा का अंश, श्रीराम परब्रह्म परमेश्वर का विग्रह। स्त्री यदि बायीं ओर है तो उसकी रक्षा का भार पुरुष पर होगा। यही स्त्री यदि पुरुष के दायें है तो इससे पुरुष की रक्षा होगी। यह ध्रुव सत्य है, वेद विहित मत है। प्रकृति का उल्लंघन करने वाला दुर्दशा को प्राप्त होता है। अतएव दक्षिण पथी होने में ही कल्याण है। ग्रह जिस मार्ग से सूर्य की परिक्रमा करते है, उसका नाम दक्षिणापथ है। सूर्य को अपने दायें कर घूमने वाला मार्ग ही दक्षिणापथ है। जिसकी परिक्रमा की जाती है वह दक्षिणामूर्ति है।