आपने सफेद आंक के गणपति के बारे में सुना होगा। श्वेतार्क गणपति, श्वेतार्क मूल, अर्क विवाह – ये सब आपने सुना होगा। लेकिन आज मैं आपको श्वेतार्क की जड़ (मूल) के एक ऐसे अद्भुत और रहस्यमई प्रयोग के बारे में बताने जा रहा हूं, जो पूरी तरह अनुभवित है। यह प्रयोग न केवल आपकी रक्षा करेगा बल्कि नकारात्मक शक्तियों को भी दूर भगाएगा।
🔍 क्या है श्वेतार्क का महत्व?
श्वेतार्क यानी सफेद आंक का पौधा। इसका उल्लेख शास्त्रों में विशेष रूप से मिलता है। श्वेतार्क गणपति की पूजा का विधान है, अर्क विवाह की परंपरा है, और इसकी जड़ के अद्भुत प्रयोग हैं। यह पौधा अपने आप में अनेक रहस्य समेटे हुए है।
📜 शास्त्र प्रमाण
"श्वेतार्कमूलम पुष्यके समुद्रत्य विधारयेत।
बहुभ्यम व्याद योनस्वष्ठान विशेषतः।
तदनेन नस्यमती डाकिनी प्रेत दानवात।
धूपन पलायंते प्रेताभ्य दूरत ध्रुवंम।"
अर्थात रवि-पुष्य नक्षत्र में श्वेतार्क के मूल को धारण करने से व्याधियां और अरिष्ट दूर होते हैं। इसके धूप से प्रेत, डाकिनी, दानव आदि दूर भाग जाते हैं।
⚡ श्वेतार्क मूल के 3 अद्भुत प्रयोग
➤ प्रयोग 1: भुजा में बांधने से सुरक्षा
रवि-पुष्य नक्षत्र में श्वेतार्क की जड़ का छोटा सा टुकड़ा लाएं। इसे साफ करके किसी लाल या पीले कपड़े की छोटी पोटली बनाएं। इस पोटली को अपनी दाईं या बाईं भुजा में बांधें। इससे सभी प्रकार की व्याधियां और अरिष्ट आपसे दूर रहेंगे। यह कवच की तरह काम करेगा।
➤ प्रयोग 2: मात्र दर्शन से लाभ
रवि-पुष्य नक्षत्र में श्वेतार्क की जड़ के दर्शन मात्र से ही डाकिनी, दानव, प्रेत आदि नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती हैं। इतना बड़ा पुण्य केवल दर्शन मात्र से प्राप्त होता है।
➤ प्रयोग 3: धूप से घर की सुरक्षा
सबसे उत्तम और अनुभवित प्रयोग – रवि-पुष्य नक्षत्र में श्वेतार्क की जड़ का छोटा सा टुकड़ा लेकर उसे धूप में डालकर घर में धूप दें। इस धूप से घर के सभी भूत-प्रेत, नकारात्मक ऊर्जाएं पलायन कर जाती हैं। शास्त्र कहता है – "तद धूपेन पलायंते प्रेताद्या दूरत ध्रुवं" – इसके धूप मात्र से ही प्रेत आदि दूर भाग जाते हैं।
✅ पोटली बनाने की विधि
➤ श्वेतार्क की जड़ का छोटा सा टुकड़ा लें।
➤ उसे गंगाजल से धोकर साफ कर लें।
➤ लाल या पीले रंग के छोटे कपड़े में लपेटें।
➤ कपड़े को मौली (कलावा) से बांध दें।
➤ चाहें तो इसे किसी रक्षा कवच (लॉकेट) में भी रख सकते हैं।
➤ इस पोटली को भुजा में बांधें या गले में धारण करें।
⚠️ महत्वपूर्ण सावधानियां
➤ श्वेतार्क की जड़ को उखाड़ते समय पूरा पौधा न उखाड़ें, थोड़ा सा भाग ही लें।
➤ रवि-पुष्य नक्षत्र में ही इसे लाना और प्रयोग करना श्रेष्ठ है।
➤ पोटली इस प्रकार बनाएं कि पानी लगने पर भी जड़ खराब न हो।
➤ इसे धारण करते समय सकारात्मक संकल्प लें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: श्वेतार्क (सफेद आंक) कहां मिलेगा?
उत्तर: यह सामान्य आंक का ही सफेद रूप है। यह विशेष स्थानों पर मिलता है। आयुर्वेदिक दुकानों, जड़ी-बूटी विक्रेताओं या ऑनलाइन भी प्राप्त किया जा सकता है।
प्रश्न 2: रवि-पुष्य नक्षत्र क्या है और कब आता है?
उत्तर: जब पुष्य नक्षत्र रविवार के दिन पड़ता है, उसे रवि-पुष्य योग कहते हैं। यह अत्यंत शुभ योग होता है। पंचांग देखकर इसकी जानकारी ली जा सकती है।
प्रश्न 3: क्या महिलाएं भी यह प्रयोग कर सकती हैं?
उत्तर: हां, श्रद्धा रखने वाली कोई भी महिला यह प्रयोग कर सकती है।
प्रश्न 4: क्या सामान्य आंक की जड़ से भी काम चल सकता है?
उत्तर: श्वेतार्क (सफेद आंक) की जड़ का विशेष महत्व है। सामान्य आंक के समान प्रभाव की आशा न करें।
प्रश्न 5: क्या बिना रवि-पुष्य योग के भी यह प्रयोग कर सकते हैं?
उत्तर: रवि-पुष्य योग में इसका विशेष प्रभाव होता है। अन्य दिनों में भी कर सकते हैं, लेकिन रवि-पुष्य में करना सर्वोत्तम है।
प्रश्न 6: क्या बच्चों को भी यह पोटली बांध सकते हैं?
उत्तर: हां, बच्चों को भी इससे लाभ होता है। छोटे बच्चों की सुरक्षा के लिए यह विशेष रूप से प्रभावी है।
प्रश्न 7: क्या इससे कोई नुकसान हो सकता है?
उत्तर: यह पूरी तरह सुरक्षित प्रयोग है। श्रद्धा और विश्वास से करने पर इसके सकारात्मक परिणाम ही मिलते हैं।
प्रश्न 8: धूप कैसे दें?
उत्तर: अंगार या धूपदान में श्वेतार्क की जड़ का छोटा टुकड़ा डालकर धुआं पूरे घर में फैलाएं। ध्यान रखें कि धूप ज्यादा तेज न हो।
प्रश्न 9: क्या इसका उपयोग अर्क विवाह में भी होता है?
उत्तर: जी हां, जब कुंडली में विवाह दोष होता है, तो श्वेतार्क (सफेद आंक) से अर्क विवाह कराया जाता है। यह एक प्रसिद्ध परंपरा है।
प्रश्न 10: क्या इस जड़ को सालों तक रख सकते हैं?
उत्तर: हां, सूखी जड़ को सुरक्षित रखा जा सकता है। समय-समय पर धूप दिखा सकते हैं।
॥ ॐ गणेश ॥
॥ हर हर महादेव ॥
॥ जय गुरु दत्त ॥
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