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Thursday, 19 February 2026

आसमान में 15.8 हजार टन कचरा, हवाई उड़ानों पर बना बड़ा खतरा; 3 बार ट्रैफिक जाम, फ्लाइट डिले

आसमान में 15.8 हजार टन कचरा, हवाई उड़ानों पर बना बड़ा खतरा; 3 बार ट्रैफिक जाम, फ्लाइट डिले

अपडेट। अंतरिक्ष मिशनों (सैटेलाइट लॉन्चिंग) की बढ़ती संख्या और तकनीकी विकास ने आसमान में कचरे को बढ़ा दिया है, जिसने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है. दरअसल, सैटेलाइन लॉन्चिंग फेल होने या अपनी समय सीमा पूरी कर चुके सैटेलाइट के पार्ट्स आसमान में कचरा (Space Junk या Space Debris) बढ़ा रहे हैं. स्पेस डॉट कॉम की एक रिपोर्ट के अनुसार, आसमान में 15,800 टन कचरा छोटे-बड़े 14.12 करोड़ पिंडों के रूप में है.

यही कचरा एयर ट्रैफिक जाम कर रहा है. यानी विमानों की उड़ान पर ब्रेक लगा रहा है. इसके चलते दुनिया में कई बार एक-दो नहीं सैकड़ों फ्लाइट डिले की गईं, कुछ के रूट डायवर्ट किए गए. आने वाले सालों में ये स्थिति और भी खतरनाक हो जाएगी. क्योंकि, अनुमान है कि 2030 तक एक लाख से अधिक सैटेलाइनट अंतरिक्ष में छोड़े जाएंगे.

इसके अलावा दुनिया में हवाई यात्रियों की संख्या मौजूदा 9.8 अरब से बढ़कर 2030 में 12 अरब हो जाएगी. ऐसे में ये आसमानी कचरा एयर ट्रैफिक पर बड़ा असर डाल सकता है. आईए, जानते हैं कि ये अंतरिक्ष कचरा क्या है? इससे कैसे एयर ट्रैफिक डिस्टर्ब हो रहा है? और इससे कैसे निपटा जा सकता है.

आसमान में कैसे फैल रही गंदगी: आसमान में गंदगी अंतरिक्ष मलबा या अंतरिक्ष सामग्री से फैल रही है. निम्न-पृथ्वी कक्षा (Low-Earth orbit, LEO) मलबे से भरता जा रहा है, जिसमें निष्क्रिय सैटेलाइन, रॉकेट के पुराने हिस्से, सूक्ष्म उल्कापिंड शामिल हैं. इसमें कार्यशील अंतरिक्ष स्टेशनों से पेंट के छोटे-छोटे कणों से लेकर दशकों पुराने निष्क्रिय अंतरिक्ष यानों जितनी बड़ी वस्तुएं शामिल होती हैं.

कब-कब आसमान पर गिरी बड़ी मुसीबत: अंतरिक्ष मलबा यानी आसमानी कचरा 50 साल पहले कोई महत्वपूर्ण चिंता का विषय नहीं था. लेकिन, प्रौद्योगिकी में प्रगति और अंतरिक्ष मिशनों की बढ़ती संख्या ने इससे होने वाले खतरों को बढ़ा दिया है.

चीन का 2007 का मिसाइल परीक्षण: जनवरी 2007 में चीन की सरकार ने अपने निष्क्रिय मौसम उपग्रहों में से एक फेंग्युन-1सी पर उपग्रह-रोधी हथियार (एएसएटी) से हमला किया था, जिससे पृथ्वी की निचली कक्षा में 3,000 से अधिक मलबे के टुकड़े पैदा हुए. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 32,000 से अधिक छोटे टुकड़े ऐसे थे जिन्हें ट्रैक नहीं किया जा सकता. इस मिसाइल परीक्षण की अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने निंदा की, क्योंकि इसने अंतरिक्ष इतिहास में किसी भी घटना की तुलना में सबसे अधिक मलबा पैदा किया था.

2009 में इरिडियम-कॉस्मोस की टक्कर: फरवरी 2009 में एक निष्क्रिय रूसी टेलीकॉम सैटेलाइट कॉस्मोस 2251 अमेरिकी कंपनी इरिडियम के सैटेलाइट इरिडियम-33 से टकरा गया था. दोनों उपग्रह चकनाचूर हो गए, जिससे 2,000 से अधिक टुकड़े बन गए. कक्षा में दो उपग्रहों की यह पहली टक्कर थी.

2021 में रूसी मिसाइल परीक्षण: 2021 में एक रूसी मिसाइल परीक्षण से 1,500 से अधिक मलबे के टुकड़े उत्पन्न हुए. इस परीक्षण ने सोवियत संघ के पुराने जासूसी उपग्रह कॉस्मोस 1408 को नष्ट कर दिया और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में मौजूद यात्रियों को अलग किए जा सकने वाले लाइफबोट पॉड्स में शरण लेनी पड़ी.

अमेरिका ने अपना जासूसी सैटेलाइट गिराया: अमेरिकी नौ-सेना ने 20 फरवरी, 2008 को अपने निष्क्रिय जासूसी उपग्रह यूएसए-193 को गिरा दिया, जिससे मलबा बिखर गया. खगोलविदों ने उत्तर पश्चिमी संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा के ऊपर गिरते हुए देखा. हालांकि, रक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना था कि उन्हें फुटबॉल से बड़ा कोई मलबा नहीं मिला.

Space Junk ने फ्लाइट की डिले: आसमानी कचरे से एयर ट्रैफिक के प्रभावित होने की अब तक कुछ घटनाएं सामने आई हैं. दरअसल, विमान बहुत छोटे मलबे के टुकड़ों से प्रभावित हो सकते हैं. उदाहरण के लिए, ज्वालामुखी की राख से होकर गुजरने वाले विमानों के लिए छोटे कणों के कारण यह जोखिम भरा होता है. यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के अंतरिक्ष मलबे प्रणाली के इंजीनियर बेंजामिन वर्जिली बास्टिडा ने Space.com को बताया कि इसी तरह की स्थिति पृथ्वी के पुन: प्रवेश करने वाले मलबे के साथ भी हो सकती है.

वर्जिली बास्टिडा और उनके सहयोगियों ने हाल ही में जर्नल ऑफ स्पेस सेफ्टी इंजीनियरिंग में एक शोध पत्र प्रकाशित किया है, जिसमें गिरते अंतरिक्ष मलबे के लिए हवाई क्षेत्र को कब और कहां बंद करना है, इस बारे में निर्णय लेने की चुनौतियों का वर्णन किया गया है. 2020 के एक अध्ययन के अनुसार, 2030 तक, किसी भी उड़ान के अंतरिक्ष मलबे के टुकड़े से टकराने की संभावना लगभग 1,000 में 1 हो सकती है.

लेकिन, नए शोध के अनुसार अंतरिक्ष मलबा गिरते समय विमानों के लिए खतरा पैदा कर रहा है. साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित एक शोध पत्र के अनुसार, अंतरिक्ष मलबे के किसी विमान से टकराने की संभावना कम है, लेकिन विमानन उद्योग और अंतरिक्ष उड़ानों में वृद्धि के कारण यह जोखिम बढ़ रहा है. एक रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में स्पेन और फ्रांस ने अपने कुछ हवाई क्षेत्र को तब बंद कर दिया जब 20 टन का एक रॉकेट वायुमंडल में पुनः प्रवेश करने वाला था.

शोधकर्ताओं ने बताया कि रॉकेट का ढांचा प्रशांत महासागर में जा गिरा था. हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण 645 विमानों में लगभग 30 मिनट की देरी हुई और पहले से हवा में मौजूद कुछ विमानों का मार्ग बदल दिया गया था. विमानन उद्योग हवाई क्षेत्र को बंद करने के निर्णय लेते समय अंतरिक्ष मलबे को अधिक गंभीरता से ले रहा है.

यही नहीं, स्पेस-X रॉकेट को जनवरी 2025 में पुनः ऑरबिट में प्रवेश कराया गया था, जिसको लेकर मलबा गिरने की चेतावनी जारी की गई थी. इसके चलते क्वांटास एयरलाइंस ने ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच कई उड़ानों का समय बदला था. कई उड़ानें छह घंटे की देरी से टेकऑफ हुई थीं. चीनी रॉकेट झुके - 3 दिसंबर 2025 में लॉन्चिंग के समय दक्षिण प्रशांत महासागर गिर गया था, जिसके बाद ब्रिटेन में मलबा गिरने की आशंका को लेकर एयर ट्रैफिक कंट्रोल को रेड अलर्ट जारी किया गया था.

स्पेस जंक के कारण होने वाले एयर ट्रैफिक डिस्टर्बेंस को कैसे रोका जाए: यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) ने शून्य मलबा दृष्टिकोण (Zero Debris approach) अपनाया है, जिसे पहली बार एजेंडा 2025 में शामिल किया गया है. इसका उद्देश्य एजेंसी के सभी भावी मिशन और गतिविधियों के लिए 2030 तक पृथ्वी और चंद्रमा की कक्षाओं में मलबे के उत्पादन को काफी हद तक सीमित करना है. नवंबर 2023 में लागू अंतरिक्ष मलबा न्यूनीकरण दिशानिर्देश और अंतरिक्ष मलबा न्यूनीकरण नीति मलबे की मात्रा को काफी हद तक कम करेंगी.

सफल निपटान की गारंटी: ईएसए के मिशन को वायुमंडलीय पुनः प्रवेश या सुरक्षित ऊंचाई पर पुनः परिक्रमा के माध्यम से अंतरिक्ष वस्तुओं के सुरक्षित निपटान को 90% से अधिक सफलता की संभावना के साथ सुनिश्चित करना होगा. मिशन में ऐसे इंटरफेस भी शामिल होने चाहिए जो स्व-निपटान विफल होने की स्थिति में उन्हें कक्षा से हटाने में मदद करें.

कक्षीय स्वच्छता में सुधार: कोई वस्तु जितनी कम देर कक्षा में रहती है, उसके किसी अन्य वस्तु से टकराने और अतिरिक्त मलबा उत्पन्न करने की संभावना उतनी ही कम होती है. नए ईएसए मिशन के लिए कक्षाओं में व्यतीत अधिकतम समय 25 वर्षों से घटाकर 5 वर्ष कर दिया गया है.

दुनिया का एयर ट्रैफिक कितना: एयरपोर्ट्स काउंसिल इंटरनेशनल (एसीआई) और अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (आईसीएओ) की यात्री यातायात रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में कुल यात्री संख्या बढ़कर 9.4 अरब (9.4 billion) थी. जो 2025 में 9.8 अरब के करीब रही. 2030 तक वैश्विक यात्री यातायात 12 अरब से अधिक होने का अनुमान है. 2042 तक इसके 19.5 अरब तक पहुंचने का अनुमान है, जो 2024 में दर्ज स्तरों की तुलना में दोगुने से ज्यादा है. इसी तरह यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के अनुसार, 2030 तक लगभग एक लाख सैटेलाइट छोड़े जाने की उम्मीद है.

स्पेस जंक को साफ करने में कितना समय लगेगा: विशेषज्ञों का मानना है कि आसमानी कचरे के एक टुकड़े को हटाने की लागत उसके आकार, द्रव्यमान और कक्षीय स्थिति के आधार पर अलग-अलग हो सकती है. इस समस्या का कोई आसान या सस्ता समाधान नहीं है. इसे साफ करना बहुत महंगा होगा और इसमें कई साल लगेंगे. बड़े टुकड़े भारी होते हैं और इन्हें हटाना मुश्किल होता है. छोटे टुकड़ों को ट्रैक करना बहुत कठिन है.

स्पेस जंक को कैसे साफ कर सकते हैं, ये कितना खतरनाक: स्पेस जंक को हटाने के लिए, विशेष रूप से बड़े और अधिक खतरनाक वस्तुओं को, उनके करीब ले जाना होगा और प्रत्येक वस्तु के समान गति बनाए रखनी होगी. फिर, किसी तरह उनसे जुड़ना होगा और उन्हें निचली कक्षा में ले जाना होगा या सीधे समुद्र में गिराना होगा. इसमें विस्फोट का खतरा भी होता है. इसीलिए अंतरिक्ष यात्रियों को यह कार्य करने की अनुमति नहीं दी जाती.

इसके अलावा ये संपत्ति के अधिकारों का भी मुद्दा है. आप किसी अन्य देश के सैटेलाइट या रॉकेट को उनकी अनुमति के बिना नहीं ले सकते. उन छोटी-छोटी लेकिन खतरनाक वस्तुओं को नियंत्रित करने का कोई आसान तरीका नहीं है. दरअसल, उनमें गोलियों से भी अधिक गति की ऊर्जा होती है और वे दस गुना तेजी से चलते हैं. गोली को पकड़ना मुश्किल है.

स्पेस जंक को साफ करने में कितना खर्चा आएगा: नासा के विश्लेषण के अनुसार, मलबे के टुकड़ों को लेजर से हटाने की लागत 360 मिलियन डॉलर (करीब 3,024 करोड़ रुपए) से अधिक हो सकती है. इसके विपरीत, एक मलबे को हटाने के मिशन को डेवलप करने की लागत 100 मिलियन डॉलर (830-840 करोड़ रुपए) से अधिक हो सकती है. ये निवेश सैटेलाइट भेजने वाले देशों को नुकसान, परिचालन समय की हानि से बचा सकते हैं.

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