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Friday, 17 October 2025

टंकण भस्म

🇮🇳 टंकण भस्म – "शुद्ध अग्नि की राख, जो मिटा दे रोगों की राख!" 

आयुर्वेद में टंकण भस्म (Tankan Bhasma) को एक दिव्य औषधि माना गया है —
यह दरअसल सोडियम बोरैट (Borax) का शुद्ध व संस्कारित रूप होता है।
जहाँ साधारण टंकण केवल एक खनिज है, वहीं टंकण भस्म एक ऐसी शक्ति है जो कफ, वात, और आम — तीनों को संतुलित करने की क्षमता रखती है।

🙏 टंकण भस्म के प्रमुख लाभ (Benefits of Tankan Bhasma)

1. 💨 श्वास-खाँसी का शत्रु:
टंकण भस्म कफ को पिघलाकर श्वास नलिकाओं को साफ करती है।
दमा, पुरानी खाँसी और जकड़न में इसका चूर्ण शहद के साथ लेना अत्यंत लाभकारी है।

2. 🔥 पाचन सुधारे और पेट के रोग मिटाए:
यह अग्नि को प्रदीप्त करती है — यानी भूख बढ़ाती है, गैस, अपच और उदरवृद्धि को दूर करती है।

3. 🦠 संक्रमण से सुरक्षा:
इसके एंटीसेप्टिक गुण घाव, फोड़े-फुंसी, या त्वचा के संक्रमण को जल्दी भरते हैं।

4. 👶 महिलाओं के लिए वरदान:
टंकण भस्म मासिक धर्म में अनियमितता, दर्द, और श्वेत प्रदर (Leucorrhoea) में बेहद उपयोगी है।

5. 🦴 जोड़ों का दर्द व वात विकारों में लाभकारी:
यह शरीर में जमी ‘आम’ और कफ को निकालकर वात दोष को संतुलित करती है।

🔮 टंकण भस्म के उपयोग (How to Use Tankan Bhasma)

खाँसी/दमा:
125 mg टंकण भस्म + शहद के साथ दिन में 2 बार।

पाचन हेतु:
125 mg टंकण भस्म + अदरक रस या नींबू रस के साथ भोजन के बाद।

महिलाओं के रोगों में:
चिकित्सक की देखरेख में अशोका चूर्ण या लोध्रासव के साथ लिया जा सकता है।

(सदैव आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह से ही सेवन करें।)

🧪 टंकण भस्म बनाने की विधि (Preparation Method)

1. कच्चा पदार्थ:
शुद्ध टंकण (सोडियम बोरैट) लें।

2. शुद्धिकरण (Purification):
इसे लोहे के तवे पर धीमी आंच में गर्म करें।
जब यह फटने लगे और सफेद झरझरा रूप धारण कर ले, तो समझिए शुद्ध हो गया।

3. भस्म निर्माण:
अब इसे कंटकी निंबू रस या कुल्थी क्वाथ में भिगोकर सुखाया जाता है।
इसके बाद मिट्टी के सांचों में बंद कर भट्टी में 3–4 घंटे तक गजपुट अग्नि दी जाती है।

4. अंत में प्राप्त होती है – शुद्ध, हल्की, चमकदार “टंकण भस्म”
जिसे हथेली पर रखने पर उड़ती सी प्रतीत होती है।

⚖️ मात्रा व सावधानियाँ (Dosage & Precautions):

मात्रा: 60 mg से 125 mg तक, दिन में 1 या 2 बार।

सेवन विधि: शहद या अदरक रस के साथ।

सावधानी: अधिक मात्रा में लेने से मुँह में जलन या उल्टी हो सकती है।
इसलिए केवल आयुर्वेद विशेषज्ञ की देखरेख में ही उपयोग करें।

🌼 संक्षेप में:

> “टंकण भस्म वो अग्नि है जो रोगों की जड़ को जलाकर शरीर को नया तेज देती है।”
यह कफ-शामक, पाचनवर्धक और संक्रमण-नाशक गुणों से परिपूर्ण है —
सही मात्रा और विधि से प्रयोग करने पर यह शरीर को भीतर से शुद्ध करती है। 🙏

#ayurvedicmedicine Priyanka Tiwari 

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