गोक्षुर (Tribulus terrestris) एक अद्भुत औषधि है, जिसका उल्लेख चरक संहिता, सुश्रुत संहिता और अष्टांग हृदयम् में किया गया है। इसे आयुर्वेद में "शुक्रवर्धक" और "मूत्रविकार नाशक" औषधि कहा गया है।
🌱 गोक्षुर चूर्ण के प्रमुख लाभ (Benefits in Ayurveda):
1. मूत्र रोग नाशक – पेशाब में जलन, बार-बार पेशाब आना या रुक-रुक कर आना जैसी समस्याओं में यह अत्यंत लाभकारी है।
2. किडनी की सफाई करता है – मूत्र मार्ग को शुद्ध करता है व पथरी (Kidney Stone) को गलाने में मदद करता है।
3. वीर्य व शुक्रवृद्धि – पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने, कमजोरी दूर करने में मददगार।
4. हृदय बलवर्धक – हृदय को स्वस्थ रखता है, रक्तचाप को संतुलित करता है।
5. स्नायु व मांसपेशियों को मजबूत बनाता है – थकान, कमजोरी, और मांसपेशियों के दर्द में राहत।
6. सूजन व जलोदर में उपयोगी – शरीर की सूजन, जल एकत्र होने पर अत्यंत प्रभावी।
7. प्रजनन शक्ति बढ़ाता है – पुरुषों और स्त्रियों दोनों में प्रजनन शक्ति को प्रोत्साहित करता है।
🧪 गोक्षुर चूर्ण बनाने की विधि (Preparation Method):
1. सूखे गोक्षुर (Tribulus terrestris) फल या बीज को एकत्र करें।
2. उन्हें धूप में सुखाकर हल्का भून लें।
3. मिक्सर या खरल में बारीक पीसकर चूर्ण तैयार करें।
4. महीन छलनी से छानकर वायुरोधक शीशी में भरें।
💊 सेवन विधि (Dosage & Usage):
मात्रा: 3–5 ग्राम चूर्ण
सेवन समय: दिन में दो बार – सुबह व शाम
सहपान: गुनगुना दूध या शहद के साथ
अवधि: निरंतर 1–2 महीने सेवन करने पर श्रेष्ठ परिणाम मिलते हैं
⚠️ सावधानी:
गर्भवती महिलाओं को चिकित्सक की सलाह से ही सेवन कराना चाहिए।
अधिक मात्रा में सेवन करने से शरीर में गर्मी बढ़ सकती है।
🙏 गोक्षुर चूर्ण – पुरुषत्व, मूत्र स्वास्थ्य और शरीर की शक्ति का आयुर्वेदिक कवच
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