आयुर्वेद के मुताबिक, यह उन महिलाओं के लिए उपयुक्त है जिनका वात दोष और पित्त दोष बढ़ा हुआ है। अगर एक महिला में एसिड रिफ्लक्स, मासिक धर्म के दौरान भारी रक्तस्राव या ऐंठन, भारी गर्भाशय रक्तस्राव, सीने में जलन, नींद की कमी, मुँह में कड़वाहट, काले धब्बे, डार्क सर्कल्स, कमजोरी और ब्लोटिंग जैसे लक्षण पाए जाते हैं तो यह उनके लिए सबसे उपयुक्त है।
सामान्यतया, पुत्रजीवक बीज एंड शिवलिंगी बीज को एक साथ लेने की सलाह दी जाती है। यदि आपके पित्त दोष में वृद्धि हुई है तो शिवलिंगी आपके लिए उपयुक्त नहीं है। अगर शिवलिंगी की आवश्यकता होती है, तो शिवलिंगी को न्यूनतम और पुत्रजीवक को अधिकतम मात्रा में दूध के साथ लिया जाना चाहिए।
आयुर्वेद के अनुसार गर्भाशय की कमजोरी बार बार होने वाले गर्भपात का मुख्य कारण है। ऐसे मामलों में, गर्भाशय गर्भधारण जारी रखने में असमर्थ होता है। ऐसे मामलों के लिए पुत्रजीवक बीज सर्वश्रेष्ठ हैं। यह एक गर्भाशय टॉनिक के रूप में कार्य करते हैं, गर्भाशय की लाइनिंग्स को ताकत प्रदान करते हैं, यह गर्भाशय को गर्भावस्था को जारी रखने में सक्षम बनाते हैं, गर्भपात को रोकते हैं और एक स्वस्थ बच्चे को प्राप्त करने में मदद करते हैं। पुत्रजीवक बीज पाउडर 200 ग्राम, अश्वगंधा पाउडर 200 ग्राम और मिश्री पाउडर 200 ग्राम को मिक्स कर लें। लगभग 4 से 5 ग्राम पाउडर को दिन में दो बार गुनगुने दूध के साथ लें। इसका सेवन आप खाली पेट, खाने से एक घंटे या भोजन के 3 घंटे बाद कर सकते हैं। इसके अलावा पुत्रजीवक की जड़ को दूध में घिसकर पीने से गर्भ ठहरने के आसार बढ़ते हैं।पुत्रजीवक पुरुष नपुंसकता में भी फायदेमंद है। यह ऑलिगॉस्पर्मिया (अल्पशुक्राणुता) का इलाज करने के लिए सबसे अच्छी दवा है। दूध के साथ 3 ग्राम पुत्रजीवक बीज पाउडर को लेने से कुल शुक्राणुओं की संख्या और गतिशीलता में सुधार होता है। यह वीर्य में स्वस्थ शुक्राणुओं की संख्या को बढ़ाता है।
इसके अलावा और भी किन बीमारियों के लिए ये फायदेमंद है::
सिरदर्द में पुत्रजीवक बीज के फायदे
अगर दिन भर काम करने के बाद सिर में दर्द होता है तो पुत्रजीवक का इस्तेमाल इस तरह से करें। पुत्रजीवक फल के रस को पीसकर मस्तक पर लगाने से सिरदर्द कम होता है।
कफ की समस्या में पुत्रजीवक के फायदे
सर्दी-खांसी के कारण छाती में जो कफ जम जाता है उसको निकालने में पुत्रजीवक काम करता है। पुत्रजीवक के रस को थोड़ा गर्म करके (5 मिली) में हींग डालकर पीने से छाती की जकड़न दूर होती है। इससे छाती से कफ निकल जाता है और राहत मिलती है।
बार-बार प्यास लगने की समस्या में पुत्रजीवक बीज के फायदे
कभी-कभी किसी बीमारी के कारण बार-बार प्यास लगने का एहसास होता है। पुत्रजीवक के पत्ते एवं बीज का काढ़ा बनाकर 10-15 मिली मात्रा में पीने से प्रतिश्याय या प्यास में लाभ होता है।
हाथीपांव रोग में पुत्रजीवक बीज के सेवन से लाभ
हाथीपांव के इलाज में पुत्रजीवक का सेवन करना फायदेमंद होता है। 5-10 मिली पुत्रजीवक के रस का सेवन करने से हाथी पांव रोग के परेशानी से छुटकारा मिल सकता है।
फोड़े-फुंसी के इलाज में पुत्रजीवक के उपयोग से लाभ
पुत्रजीवक फल मज्जा को पीसकर लेप करने से दर्द वाला फोड़ा-फून्सी कम होता है। इसके अलावा पुत्रजीवक की छाल को पीसकर लेप करने से फोड़े-फून्सी मिटते हैं।
बुखार में पुत्रजीवक बीज के सेवन से लाभ
मौसम बदला कि नहीं बुखार के तकलीफ से सब परेशान हो जाते हैं। बुखार के लक्षणों से राहत पाने के लिए10-20 मिली पुत्रजीवक पत्ते के काढ़े का सेवन करने से ज्वर में लाभ होता है।
जहरीले जानवर के डंक मारने पुत्रजीवक के औषधीय गुण से लाभ
कई बार बिच्छु या साँप के काटने पर उसके जहर के असर को कम करने में पुत्रजीवक बीज असरदार रूप से काम करता है। पुत्रजीवक का सेवन करने पर विष का प्रभाव कुछ हद तक कम होता है। 1-2 ग्राम पुत्रजीवक फल मज्जा को नींबू के रस में पीसकर पीने से विष के असर करने का गति कम होता है।
ये पोस्ट सिर्फ जानकारी देती है पुत्रजीवक सेवन और इसके बेहतर परिणाम के लिए किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से अवश्य सलाह लें 🙏
Anamika Shukla
No comments:
Post a Comment