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Saturday, 14 March 2026

ईरान अमेरिका युद्ध में भारत की तेल सप्लाई /आपूर्ति मार्ग के सुरक्षा संबंधी अनुमानित कूटनीति

क्या आपने ध्यान दिया है कि इस पूरे मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत एक अजीब-सी खामोश कूटनीति खेल रहा है?ना कोई बड़ी घोषणा, ना कोई प्रेस कॉन्फ़्रेंस… लेकिन फोन कॉल्स लगातार हो रहे हैं।

और सवाल यह है ...क्या भारत और ईरान के बीच कोई चुपचाप समझौता बन रहा है?

असल में भारत की सबसे बड़ी चिंता इस समय युद्ध नहीं है।भारत की सबसे बड़ी चिंता है Strait of Hormuz।दुनिया के लगभग 20–25% तेल और LNG इसी रास्ते से गुजरते हैं।भारत के लिए तो यह और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि...पेट्रोलियम,LPG,LNG,Fertilizer
कई केमिकल्स

इन सबकी सप्लाई का बड़ा हिस्सा यहीं से आता है।

अब अगर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के कारण इस इलाके में जहाज़ों पर रैंडम अटैक होने लगें तो असली समस्या क्या होती है?

रास्ता technically बंद नहीं होता…लेकिन कोई जहाज़ जाने को तैयार नहीं होता।

Insurance महँगा हो जाता है।Crew डर जाता है।Shipping कंपनियाँ route बदल देती हैं।

यही असली संकट है।

और यहीं पर भारत शायद अपना quiet strategy खेल रहा है।

खबर आई कि कोच्चि में मौजूद ईरानी जहाज़ के Iranian sailors को भारत वापस भेजने जा रहा है।ध्यान दीजिए… जहाज़ नहीं जा रहा, सिर्फ sailors जा रहे हैं।

कूटनीति की भाषा में इसका मतलब क्या होता है?

यह एक signal है।

तेहरान को संदेश ...“भारत तुम्हें दुश्मन की तरह नहीं देखता।”

वॉशिंगटन को संदेश ...“हम आपकी लड़ाई का हिस्सा नहीं हैं।”

ग़ल्फ देशों को संदेश ...“भारत एक neutral maritime power है।”

भारत की असली मांग क्या हो सकती है?

बहुत simple.

Indian flag वाले जहाज़ों को Hormuz में attack नहीं किया जाएगा।अगर mining या military activity होगी तो India को पहले warning मिलेगी।

बस।

कोई treaty नहीं।कोई joint statement नहीं।कोई फोटो नहीं।

सिर्फ एक quiet understanding।

ईरान इसके लिए क्यों मानेगा?

क्योंकि इस समय ईरान के पास बात करने के लिए बहुत कम देश बचे हैं।भारत उन गिने-चुने देशों में है जो...अमेरिका के भी दोस्त हैं!
इजराइल के भी दोस्त हैं...और ईरान से भी बात कर सकते हैं

और सबसे महत्वपूर्ण बात…

ईरान को भी पता है कि चीन सिर्फ सौदे करता है, भरोसा नहीं देता।

भारत कम से कम भरोसे की भाषा में बात करता है।

दूसरा कारण है Chabahar Port।

ईरान भी जानता है कि युद्ध के बाद अगर उसे...दवाइयाँ,खाद्य सामग्री
humanitarian supplies चाहिए होंगी तो भारत सबसे भरोसेमंद सप्लायर होगा।

और यह भी एक सच्चाई है…

आज मिडिल ईस्ट के कई देशों की food supply chain भारत से जुड़ी हुई है।

कुछ समय पहले UAE के लिए भारत से हज़ारों टन खाद्य सामग्री एयरलिफ्ट की गई थी।

तो अगर भारत को Hormuz में सुरक्षित रास्ता मिल जाता है तो भारत सिर्फ अपनी ऊर्जा नहीं बचाता…बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए supply hub भी बन सकता है।

अब सवाल आता है ... अमेरिका क्या करेगा?

सच बोलें तो अमेरिका इस समय भारत से टकराना नहीं चाहता।

क्योंकि दुनिया का तेल बाज़ार अस्थिर है…और भारत उन कुछ देशों में है जो refining capacity और energy market को stabilize कर सकते हैं।

इसलिए अगर भारत quietly अपना रास्ता बना लेता है तो शायद वॉशिंगटन दूसरी तरफ देखना ही बेहतर समझेगा।

यानी पूरी कहानी का सार क्या है?

भारत शायद वही कर रहा है जो बड़ी ताकतें करती हैं।

ना किसी युद्ध में कूदना…ना किसी ब्लॉक में खड़ा होना…बस चुपचाप अपना रास्ता सुरक्षित कर लेना।

कूटनीति में इसे कहते हैं ...

Strategic Hedging.

दोस्ती सब से…
निर्भरता किसी पर नहीं।

और अगर सच में Hormuz से भारतीय जहाज़ बिना समस्या के आने-जाने लगे…तो समझ लीजिएगा…

कहीं ना कहीं
दिल्ली और तेहरान के बीच कोई खामोश समझौता हो चुका है।


✍️ देवकांत झा ( फेसबुक पोस्ट 14 मार्च 2026 )
फाल्गुन कृष्ण १०, विक्रम संवत २०८२

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