कभी-कभी जीवन में ऐसा समय आता है जब दवाइयाँ काम करना बंद कर देती हैं।
रिपोर्ट सामान्य आती हैं, फिर भी शरीर पीड़ा से भरा रहता है…
कभी-कभी यह केवल रोग नहीं होता यह ऊर्जा का विकार, किसी की नज़र, या अदृश्य बाधा भी हो सकती है।
ऐसे समय में तंत्र की प्राचीन परंपरा एक दिव्य रहस्य बताती है
“जहाँ चिकित्सा थक जाती है, वहाँ माँ महाकाली की कृपा जागती है।”
आज मैं, अमिताचार्य Supreme Guru of Mahakali Tantra,
आप सभी के कल्याण के लिए महाकाली का एक अत्यंत प्राचीन और गुप्त “काया-कल्प शाबर मंत्र” प्रकट कर रहा हूँ।
यह मंत्र केवल शब्द नहीं है
यह देवी की संजीवनी ऊर्जा का आह्वान है,
जो रोग और पीड़ा को शरीर से ऐसे खींच लेता है जैसे चुंबक लोहे को खींच लेता है।
महाकाली काया-कल्प (रोग नाशक) मंत्र
“ॐ नमो आदेश गुरु को।
पहाड़ फोड़ निकली कालिका, हाथ में खप्पर-धार।
रोग को काटे, शोक को काटे, काटे यम की मार।।
हाड़-हाड़ से, नाड़ी-नाड़ी से, चमड़ी-चमड़ी से,
निकले रोग, भागे पीड़ा, जैसे भागे अँधियारा देख उजियारा।
जल बांधी, थल बांधी, बांधी वेदना सारी।
अमुक (रोगी का नाम) की काया कंचन होवे, कृपा करे महतारी।।
न औषधि, न बूटी, केवल काली की दृष्टि अनूठी।
जा रोग पाताल समा, फिर मुड़ के मत देख।
शब्द साँचा, पिंड काँचा। फुरो मंत्र ईश्वरोवाचा!
दुहाई धन्वंतरि वैद्य की! दुहाई कामरू कामाख्या की!”
दिव्य झाड़ा विधि (Healing Technique)
यह केवल मंत्र जप नहीं —
यह एक ऊर्जा क्रिया है जो शरीर से रोग को बाहर निकालती है।
• मोरपंख या नीम की टहनी लें (न हो तो दाहिना हाथ)
• रोगी को सामने बैठाएं
• सिर से पैर तक नीचे की ओर झाड़ते हुए मंत्र पढ़ें
• “फुरो मंत्र” पर रोगी के माथे या पीड़ा वाले स्थान पर फूंक मारें
• यह प्रक्रिया 21 बार करें
अंत में भभूत को 3 बार मंत्र से अभिमंत्रित करके
थोड़ी माथे पर लगाएं और थोड़ी जीभ पर चटा दें।
चमत्कार के संकेत
यदि बाधा ऊर्जा या ऊपरी प्रभाव है तो
रोगी को तुरंत हल्कापन, उबासी, या आँखों से पानी आ सकता है।
यह संकेत है कि नकारात्मक ऊर्जा शरीर छोड़ रही है।
माँ महाकाली की कृपा से
आप स्वयं और अपने परिवार को
रोग, भय और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षित कर सकते हैं।
जय माँ महाकाली।
Amitacharya
Supreme Guru of Mahakali Tantra
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