ये प्याला प्रेम का प्याला है।
तू नाचकर पी नचा कर पी
खुलखेल कर पी झुकझूम कर पी
मत गैर से नजर बचाकर पी...
पीने के ढ़ंग हजारों हैं
चाहे जिस चाल-चलन से पी..
गैरों से मेल-मिलाप से पी
मनमोह से पी अनबन से पी
जैसे भी हाथ लगे पी लें ..
होठों से पी चितवन से पी
क्या काम अधूरे मन का
हर घूंट पूरे मन से पी
घट घट में इसकी प्यास जगी
घूंघट में इसकी आस जगी
मरघट पर खामोशी से पी
पनघट पर शोर मचाकर पी
ये प्याला प्रेम का प्याला हैं..
तू नाच कर पी नचा कर पी ।
कवि - सोम ठाकुर
संदर्भ साभार - https://www.facebook.com/reel/1461194512225406/?mibextid=9drbnH&s=yWDuG2&fs=e
वयं राष्ट्रे जागृयाम
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