Pages

Saturday, 7 March 2026

कुंवारेपन का विस्फोट, समाज अंधी दौड़ में कहाँ पहुँच रहा है ?

*कुंवारेपन का विस्फोट, समाज अंधी दौड़ में कहाँ पहुँच रहा है ?*

अब वक्त आ गया है कि चीज़ों को मीठे शब्‍दों में कहना बंद किया जाए।
दुनिया जिस आज़ादी की जय-जयकार कर रही है, वही आज़ादी धीरे-धीरे *परिवार, रिश्तों,* और *सामाजिक संतुलन,* सब कुछ निगलने लगी है।
अंतरराष्ट्रीय सर्वे कहता है कि आने वाले कुछ वर्षों में *युवतियों में 45% तक विवाह से दूरी बना सकती हैं।* पहली नज़र में यह *प्रगति* लगती है, पर असल में यह *भविष्य के लिए एक टाइम-बम* है।
1.*कैरियर, पैसे और अकेलापन….यह कैसी प्रगति?*
आज की बेटी डॉक्टर, इंजीनियर, सीए, उद्यमी, सब बन रही है। बहुत अच्छा। शानदार। पर क्या कैरियर पूरा जीवन है?
*पैसा साथी नहीं बनता। पद वृद्धावस्था में हाथ नहीं पकड़ता। मोबाइल और लैपटॉप बुढ़ापे में बात नहीं करते।* लेकिन समाज को इस सच्चाई से फर्क नहीं पड़ता, सबको दौड़ लगानी है… बस लगानी है।
2.*परिवार ढह रहे हैं…. कोई देख भी रहा है?*
कुँवारे लड़के बढ़ रहे हैं, अविवाहित युवतियाँ बढ़ रही हैं, जनसंख्या गिर रही है,
और *अकेलेपन उद्योग* (counsellor, therapy, depression pills) फल-फूल रहा है। पर हम फिर भी कहते हैं, *सब ठीक है, यह आधुनिकता है।* यह *आधुनिकता नहीं, धीमी मौत* है, परिवार, समाज और मानवीय संबंधों की।
3.*सर्वाधिक खतरनाक स्थिति.....*
आज माता-पिता रिश्ता ढूंढते हैं, पर लड़की कहती है, *अभी नहीं।*
फिर *अभी नहीं* धीरे-धीरे *कभी नहीं* में बदल जाता है और जब एहसास होता है तो मेडिकल रिपोर्ट सामने होती है, हार्मोनल इश्यू, कंसिव न होना, मानसिक तनाव, अकेलापन। पर तब कौन जिम्मेदार? *कोई नहीं, क्योंकि फैसला स्वतंत्रता का था।*
4.*समाज के सफेदपोश लोग चुप क्यों हैं????*
क्योंकि सच्चाई बोलने से उन्हें आधुनिकता-विरोधी कहलाने का डर है। पर सच्चाई यह है कि अगर 21–25 की उपयुक्त उम्र में विवाह नहीं हुए तो समाज जल्द ही *दिसंबर की ठंडी रात जैसा सूना* हो जाएगा।
5.*अंतिम बात…..*
प्रगति वो नहीं जो हमें अकेला कर दे। अगर हमारा भविष्य कुंवारा, अकेला और भावहीन होने वाला है, तो समाज के लिए यह गर्व की नहीं,*खतरे की घंटी* है।
 ✍️. ..गीता त्यागी 
https://www.facebook.com/share/p/189sAf4vgT/

वयंराष्ट्रेजागृयाम

No comments:

Post a Comment