💐ॐ श्री गणेशाय नमः💐
💐ॐ हरे कृष्ण..!!💐
💐श्री राधाकृष्णाभ्यां नमः💐
यह कथा सौभाग्य कुँवरी राणावत जी की पुस्तक "मीरा चरित" से ली जा रही है जिनका संबंध मीराबाई के पीहर मेड़ता और ससुराल चित्तौड़ दोनों से था..अतः उनके द्वारा लिखित इस ग्रंथ को पढ़ने में अत्यंत ही आनंद आयेगा..!!
*💐💐मीरा चरित भाग -१ 💐💐*
*💐मेड़ता का राठौड़ राजवंश💐*
भारत का एक प्रांत है राजस्थान। इसी राजस्थान का एक क्षेत्र है मारवाड़ जो प्रसिद्ध है अपने वासियों की शुरता, उदारता, सरलता और भक्ति के लिए। राठौड़ राजपूतों का शासन रहा है इस भूभाग पर। मारवाड़ के राठौड़ों के मूल पुरुष राम "सिंहा" बड़े प्रतापी हुए। उन्होंने पाली में रहकर उपद्रवी "मेर" लोगों से ब्राह्मणों की रक्षा का भार अपने ऊपर ले लिया था। दूर-दूर तक उनकी प्रसिद्धि फैली और अंत में पाली के समीप वीडू नामक गांव में सोमवार 9 अक्टूबर 1273 ईस्वी को वह देवलोक सिधारे। उनके उत्तराधिकारी राव आस्थान थे इनके पुत्र धूहड़ ने राठौड़ों की कुलदेवी नागणेचा की मूर्ति को नागाणा गांव में स्थापित किया।
उसके बाद क्रमशः राव रायपाल राव जालणसी राव छाड़ा राव तीडा राव कान्हड़ राव सलखा आदि राठौड़ वीर अपनी मातृभूमि के लिए मुसलमानों और विरोधियों से युद्ध करते खेत रहे।
सलखा के पुत्र मल्लीनाथ सिद्ध वीर पुरुष हुए। इनके अनुज वीरमदेव के पुत्र चूंडा राठौर ने मंडोर राज्य अर्जित करके राठौड़ों की एक नवीन सत्ता का बीजारोपण किया। उनके पुत्र राव रणमल पराक्रमी पुरुष हुए। इनकी बहन हँसा बाई का विवाह मेडा के राणा लाखा से हुआ और हंसाबाई के गर्भ से महाराणा मोकल ने जन्म लिया यद्यपि मोकल अपने भाइयों में सबसे छोटे थे किंतु पूर्व प्रदत वचन के कारण मोकल ही उनके उत्तराधिकारी बने वह अधिक समय जीवित नहीं रहे और पासवान पुत्र चाचा तथा मेरा के द्वारा मारे गए। मोकल के पुत्र कुंभा मेवाड़ के राज सिंहासन पर आसीन हुए। महाराणा कुंभा अल्प वयस्क थे अतः रणमल और उनके पुत्र जोधा मेवाड़ में ही रहने लगे। इस प्रकार मेवाड़ में राठौड़ों का बोलबाला हो गया यह सिसोदिया वीर सह न सके और अंत में मोकल के बड़े भाई चूड़ा जी के हाथों रणमल मारे गए तथा जोधा ने भागकर अपने प्राणों की रक्षा की। मेवाड़ी सेनाओं ने मंडोर पर अधिकार कर लिया कई वर्षों बाद हंसाबाई के आग्रह से मेवाड़ी सेना पीछे हटी और जोधा ने घोर संघर्ष के बाद पैतृक राज्य पाया।
राव जोधा बड़े भाग्यशाली पुरुष थे। उन्होंने 1459 ईस्वी में दुर्ग जो आज मेहरानगढ़ के नाम से प्रसिद्ध है उसकी नींव रखी। अपने नाम से जोधपुर नगर और राज्य की स्थापना की। मेवाड़ और मारवाड़ की कटुता का यही अंत हो गया मेवाड़ के महाराणा कुंभा महान शासक, कुशल सेनापति, सुप्रसिद्ध कवि और विद्वान पुरुष थे। सन 1468 ईस्वी में कुंभलगढ़ दुर्ग में उनका देहांत हुआ फिर रायमल गद्दी पर आसीन हुए। राव जोधा ने अपनी पुत्री श्रंगार देवी जो राव दूदा की सौतेली बहन थी उसका विवाह महाराणा रायमल से कर दिया। राव दूदा और राव वरसिंह का जन्म राव जोधा की सोनगरी (चौहानों की एक शाखा) रानी चंपाबाई के गर्भ से हुआ था जो पाली के सोनगरा चौहान सीमा सलावत की पुत्री थी..!!
🛕क्रमशः🛕
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