प्रयोग सामग्री :-
एक मिट्टी का छोटा सा कुल्हड़ (मटका) ,
सरसों का तेल ,काला तिल,
सिंदूर एवं काला कपड़ा
प्रयोग विधि :-शनिवार के दिन शाम को ,4:30 बजे स्नान करके साधना में प्रयुक्त हो जाये.मिट्टी कि कुल्हड़ में सरसों का तेल भर दीजिये।उसी तेल मे 8काले तिल डाल दीजिये.और काले कपडे़ से कुल्हड़ का मुह को बंद कर दीजिये।.
अब 36 अक्षरीय बगलामुखी
👉 मंत्र:-ॐ ह्लींम (hleem) बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंम्भय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लींम (Hleem) ॐ स्वाहा ॥
का एक माला जप कीजिये।
और कुल्हड़ के उपर थोड़ा सा सिंदूर डाल दीजिये।और माँ बगलामुखी से भी रोग बाधा मुक्ति कि प्रार्थना कीजिये।
और एक माला निम्न मंत्र का जप करेंगे
ॐ ह्लीम् श्रीम् ह्लीम् मम(अमुक) रोगबाधा नाशय नाशय फट्।
Om hleem shreem hleem mam (amuk)
Rog badha nashay nashay phat.
मंत्र जप समाप्ति के बाद कुल्हड़ को जमींन में गाड़ दीजिये। जमीन में गड्ढा प्रयोग से पहिले ही खोद लें।यह प्रयोग स्वंय के लिए हो तो मन्त्र में मम शब्द का उच्चारण करें और किसी अन्य के लिए कर रहे है तो मन्त्र में मम अमुक की जगह व्यक्ति का नाम बोले और उस बीमार व्यक्ति से कुल्हड़ को स्पर्श करवाते हुये कुल्हड़ को जमींन मे गाढ़ दीजिये और स्वंय या बीमार व्यक्ति के स्वस्थ्य होने की प्रार्थना करेंगे।कुछ परिस्थितियों मे एक शनिवार में अनुभूतियाँ कम हो तो यह प्रयोग आगे भी किसी अन्य शनिवार को कर सकते हैं।
~~~~```~~~```~~~~
भगवान दास वशिष्ठ
No comments:
Post a Comment