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Monday, 17 November 2025

गोत्र परम्परा की पहुँच .

गोत्र परम्परा से परेशान लोगों को परेशान करने के लिये यह पोस्ट नहीं है, अपितु यह बताने के लिये कि गोत्र परम्परा की पहुँच कहाँ तक है - 

1. #सूर्य : कश्यप गोत्रीय क्षत्रिय, कलिंग देश के स्वामी, अन्य ग्रहों के राजा, इनके दोनों हाथ में कमल, सिंदूरी वस्त्र, जपाकुसुम के समान रक्त वर्ण ! इनके अधिदेवता शिव हैं.

2. #चन्द्रमा : अत्रि गोत्रीय, यामन देश के स्वामी, शरीर अमृतमय, एक हाथ वर मुद्रा में उठा, दूसरे में गदा, दूध के समान श्वेत वस्त्र धारण करनेवाले, इनके अधिदेवता रूप में उमा देवी और प्रत्यधिदेवता जल.

3. #मंगल : भरद्वाज गोत्र के क्षत्रिय, अवान्त देश के स्वामी, अग्नि के समान रक्त वर्ण, अधिदेवता - स्कन्द स्वामी, प्रत्यधिदेवता पृथ्वी के साथ सूर्य अभिमुखी.

4. #बुध : अत्रि गोत्र, मगध देश के स्वामी, पीत वर्ण, सौम्य, अधिदेव- नारायण, प्रत्यधिदेव-विष्णु.

5. #वृहस्पति : अंगिरा गोत्रीय ब्राह्मण, सिंधु देश के अधिपति, वर्ण- पीत, पीताम्बर धारी, अधिदेवता - ब्रह्मा, प्रत्यधिदेवता - इन्द्र.

6. #शुक्र : भृगु गोत्र के ब्राह्मण, भोजकट देश के अधिपति, श्वेत वर्ण, अधिदेव - इंद्र, प्रत्यधिदेव - चन्द्र.

7. #शनि : कश्यप गोत्र के शूद्र, सौराष्ट्र के अधिपति, कृष्ण वर्ण, गिद्ध सवारी, अधिदेव - यमराज, प्रत्यधिदेव - प्रजापति.

8. #राहु : पैठीनस गोत्र के शूद्र, मलय के अधिपति, अधिदेव-काल, प्रत्यधिदेव - सर्प.

9. #केतु : जैमिनी गोत्र के शूद्र, कुश द्वीप के अधिपति, धूम्र वर्ण और वस्त्र, अधिदेवता - चित्रगुप्त, प्रत्यधिदेवता - ब्रह्मा .

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आधार : भक्ति-सर्वस्व
वयं राष्ट्रे जागृयाम 

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