अरंडी के पत्ते बागवानी में कई रूपों में लाभ पहुँचाते हैं। इन्हें सीधे मिट्टी में मिलाकर, कम्पोस्ट में डालकर, या इनके घोल का छिड़काव करके पौधों की सेहत सुधारी जा सकती है और मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ाई जा सकती है।
🌿 अरंडी के पत्तों के बागवानी फायदे
🔸 जैविक खाद का स्रोत
• अरंडी के पत्ते सड़ने पर नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश जैसे पौधों के लिए जरूरी तत्व छोड़ते हैं।
• इन्हें सुखाकर चूर्ण बनाकर मिट्टी में मिलाने से पौधों की वृद्धि तेज होती है।
• पत्तों का अपघटन मिट्टी को उपजाऊ और जीवांश पदार्थों से भरपूर बनाता है।
🔸 मल्चिंग (Mulching) में उपयोग
• पत्तों को पौधों के चारों ओर बिछाने से नमी लंबे समय तक बनी रहती है।
• खरपतवार कम उगते हैं और मिट्टी का तापमान संतुलित रहता है।
🔸 कीट एवं रोग नियंत्रण
• अरंडी के पत्तों में ricin और alkaloids पाए जाते हैं, जिनकी गंध और रसायन कई कीटों जैसे दीमक, सफेद मक्खी, रस चूसने वाले कीट को दूर रखते हैं।
• पत्तों का घोल leaf extract बनाकर छिड़काव करने से जैविक कीटनाशक का काम करता है।
🔸 गोबर खाद या कम्पोस्ट में तेजी
• पत्ते जल्दी गलते-सड़ते हैं और कम्पोस्ट बनाने की प्रक्रिया को तेज करते हैं।
• इससे कम्पोस्ट में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है।
🔸 मिट्टी की सेहत सुधारने में
• सड़ी हुई अरंडी की पत्तियाँ मिट्टी को भुरभुरी और जैविक पदार्थों से भरपूर बनाती हैं।
• इससे सूक्ष्मजीवों की संख्या भी बढ़ती है।
🔸 जैविक टॉनिक ग्रोथ बूस्टर
• अरंडी के पत्तों में मौजूद पोषक तत्व पौधों की जड़ों को मज़बूत करते हैं।
• इसका घोल पत्तों पर छिड़कने से क्लोरोफिल की मात्रा बढ़ती है और पत्तियाँ अधिक हरी-भरी होती हैं।
🔸 सूक्ष्म पोषक तत्वों का स्रोत
• पत्तों के विघटन से मिट्टी में मैग्नीशियम, कैल्शियम और आयरन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व मिलते हैं।
• यह उन पौधों के लिए खास लाभकारी है जिन्हें ज्यादा हरी पत्तियाँ चाहिए जैसे पालक, मेथी, पुदीना आदि।
🔸 जैविक रिपेलेंट
• अरंडी के पत्तों की गंध और रासायनिक तत्व चूहे, चींटियाँ और कुछ हद तक घोंघे-गोगलों को भी दूर रखते हैं।
• खेत या गमले के आसपास पत्ते बिछाने से यह असर देखा जा सकता है।
🔸 अन्य जैविक खादों के साथ सामंजस्य
• पत्तों को नीम की खली, गोबर खाद या वर्मी कम्पोस्ट के साथ मिलाने पर इनका असर और बढ़ जाता है।
• इससे पौधों को संतुलित पोषण मिलता है।
🔸 बीज उपचार
• परंपरागत खेती में अरंडी के पत्तों का रस या घोल बीजों को उपचारित करने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है।
• यह बीजों को फफूंद और कीटों से बचाता है और अंकुरण दर बढ़ाता है।
🔸 औषधीय लाभ का अप्रत्यक्ष असर
• अरंडी के पत्तों से निकलने वाला स्राव latex कई हानिकारक सूक्ष्मजीवों को मारता है।
• जब ये पत्ते मिट्टी में मिलते हैं, तो पौधों की जड़ों को रोग प्रतिरोधक क्षमता मिलती है।
👉 प्रयोग के तरीके:
🔹 पत्तों को सुखाकर चूर्ण बनाकर गमले या खेत की मिट्टी में मिलाएँ।
🔹 ताजे पत्तों का काढ़ा बनाकर छिड़काव करें (1 किलो पत्ते + 5 लीटर पानी, 24 घंटे भिगोकर छान लें)।
🔹 कम्पोस्ट में अन्य जैविक कचरे के साथ डालें।
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वयं राष्ट्रे जागृयाम
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