#Alternanthera_sessilis
यह एक औषधीय पौधा है जो अपने औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है और इसे "गुडरी साग" या "मत्स्यगंधा" के नाम से भी जाना जाता है। यह ज्वरनाशक, शोथरोधी और मूत्रवर्धक है, और इसका उपयोग विभिन्न त्वचा रोगों, पेट की समस्याओं, और आँखों की समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। यह पौधा पूरे भारत में पाया जाता है और इसकी पत्तियाँ, फूल, तने और जड़ औषधीय उपयोग में आते हैं।
इस पौधे को गाँव के अधिकतर लोगों ने देखा तो होगा लेकिन इसका नाम कम लोग ही जानते होंगे।
इसके फूलों से मछली जैसी गंध आने के कारण इसे #मत्स्यगंधा भी कहा गया हैं।
#मत्स्याक्षी_पुष्पमस्या इसके पुष्प मछली की आंखों के समान होते है...।।
गुडरी का पौधा जमीन पर फैलता है, पहले इस पर छोटे छोटे फूल आते है, पकने पर यह फूल ,कांटो को रूप ले लेते है, इन्हें यदि खेती वाली जमीन से हटाना हो तो बड़ी मुश्किल होती हैं।
गुडरी की तीन प्रजातियां मुख्य रूप से देखी जा सकती हैं..।ग्रामीण अंचल में लाल पत्तो वाली गुडरी की साग बनाकर भी खाते है।
इसका पत्ते,जड़,पंचांग सभी का औषधीय महत्व हैं, मत्स्याक्षी ज्वरहर,पित्त विरेचक तथा दुग्धवर्धक हैं...।
मत्स्याक्षी तिक्त, कषाय, मधुर, कटु, शीत, लघु, कफपित्तशामक; वातकारक, ग्राही तथा रुचिकारक होती है।यह व्रण, क्षय, रक्तज विकार तथा कुष्ठ नाशक है।मत्स्याक्षी का अर्क ग्राही, शीत; कुष्ठ, रक्तविकार तथा कफपित्तशामक होता है।
इसका पञ्चाङ्ग अग्निमांद्य, दाह, अतिसार, कुष्ठ, त्वक्रोग, रतौंधी, अर्श, प्लीहावृद्धि, ज्वर, व्रण, उदावर्त, कास, फूफ्फूसशोथ तथा मधुमेहशामक होता है।
औषधीय प्रयोग:
आँखों के लिए-मत्स्याक्षी पत्र-स्वरस में दुग्ध मिलाकर नेत्रों को धोने से नेत्राभिष्यंद (आँख का आना), अंजनामिका तथा कृमिग्रन्थि में लाभ होता है।
अतिसार-मत्स्याक्षी कल्क को दही के साथ मिलाकर खाने से अतिसार तथा संग्रहणी में लाभ होता है।
शुक्रमेह-मत्स्याक्षी मूल स्वरस (10 मिली) में सप्तपर्ण काण्ड त्वक् को पीसकर, गाय के दूध के साथ सेवन करने से शुक्रमेह में लाभ होता है।
मत्स्याक्षी पत्र-स्वरस (5 मिली) को दूध के साथ सेवन करने से शुक्रमेह में लाभ होता है।
त्वचा रोग में लाभदायक:
दाद, खाज, खुजली और फोड़े-फुंसियों जैसे त्वचा संक्रमणों के इलाज के लिए इसका उपयोग किया जाता है। इसकी पत्तियों का रस या पेस्ट बनाकर प्रभावित जगह पर लगाया जाता है।
ज्वर और सूजन: यह ज्वररोधी और शोथरोधी गुणों के कारण ज्वर और सूजन में लाभकारी है।मूत्र संबंधी समस्याएँ: इसके पूरे पौधे का रस मूत्रवर्धक होता है और खुलकर पेशाब लाने में मदद करता है।
सर्पदंश: सांप के काटने पर इसकी पत्तियों का पेस्ट बनाकर काटे हुए जगह पर लगाने से सर्पदंश का विष कम हो जाता हैं।
ये पोस्ट सिर्फ जानकारी के लिए है,मत्स्याक्षी का उपयोग करने से पहले किसी आयुर्वेदिक डॉ की सलाह अवश्य लें 🙏
Anamika Shukla
अनु 🥰
No comments:
Post a Comment