एक छोटे पेड़ पर गहरे जामुनी रंग का, अनुपम और मोहक फूल खिला हुआ था।
उस पुष्प को देखकर मन में सहज ही विस्मय जागा—कितना अनोखा रंग, कितना गहरा आकर्षण! क्षणभर के लिए लगा जैसे स्वयं प्रकृति ने कुछ रहस्यमयी सौंदर्य वहाँ प्रकट कर दिया हो।
जिज्ञासा बढ़ी, तो खोजबीन शुरू की।
कई स्रोतों से जानकारी प्राप्त करने पर पता चला कि वह कोई साधारण पुष्प नहीं, बल्कि काले धतूरे का फूल था—वह धतूरा जो भगवान शिव को अर्पित किया जाता है, जो तंत्र, आयुर्वेद और साधना में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
यह जानकारी प्राप्त होते ही उस पुष्प के प्रति मन में आस्था और सम्मान की भावना उमड़ पड़ी।
काला धतूरा: शिव का अंश और रहस्यमयी औषधि काला धतूरा अपने गहरे बैंगनी-काले रंग के कारण विशिष्ट दिखाई देता है।
इसके पत्ते कोमल होते हैं और फल गोल होते हैं जिन पर छोटे-छोटे कांटे होते हैं।
यह पौधा दिखने में आकर्षक किंतु उपयोग में अत्यंत शक्तिशाली होता है।
वेद-पुराणों में इसे शिवप्रिय कहा गया है।
शिवलिंग पर धतूरा अर्पित करने से नकारात्मक ऊर्जा शांत होती है और साधक को आंतरिक शक्ति प्राप्त होती है।
माना जाता है कि काले धतूरे की जड़ को रविवार या मंगलवार को शुभ मुहूर्त में घर लाने से ऊपरी बाधा दूर होती है, घर में सुख-शांति व धनवृद्धि होती है।
तुलसी और काले धतूरे का संयोग यदि कोई व्यक्ति तुलसी और काले धतूरे के पौधे एक ही स्थान पर लगाए, और प्रतिदिन स्नान के पश्चात शुद्ध जल में थोड़ा कच्चा दूध मिलाकर सिंचन करे, तो उसे त्रिदेव—ब्रह्मा, विष्णु और महेश—की संयुक्त कृपा प्राप्त होती है।
तुलसी विष्णु प्रिय हैं।
तुलसी की जड़ों में ब्रह्मा का निवास है।
और काला धतूरा शिव का प्रतीक है।
इस प्रकार यह संयोजन पूर्ण त्रिदेव उपासना का प्रतीक बन जाता है।
ऊपरी बाधा और तांत्रिक प्रयोगकाले धतूरे की जड़ से बने गंडे को प्राचीन परंपरा में भूत-प्रेत, नकारात्मक शक्तियों और जादू-टोने से रक्षा हेतु उपयोग किया जाता है।
तुलसी के आठ पत्ते, आठ काली मिर्च और सहदेवी की जड़ को रविवार को काले सूत में बांधकर गले में धारण करने से भूतबाधा से मुक्ति मिलती है।
काले धतूरे की जड़ और सफेद सूत से बने गंडे को पीड़ित व्यक्ति की दाहिनी भुजा पर बांधने से ऊर्जा संतुलन होता है।
सफेद मदार और काले धतूरे की जड़ की माला धारण करने से जादू-टोने और अभिचार के प्रभाव से सुरक्षा मिलती है।
औषधीय उपयोग और स्वास्थ्य लाभ
काले धतूरे की औषधीय उपयोगिता अत्यंत व्यापक है, किंतु इसका सेवन अत्यधिक सावधानी पूर्वक किया जाना चाहिए क्योंकि इसकी कुछ प्रजातियाँ विषैली होती हैं।
सूजन या वात रोगों में पत्तों का लेप राहत देता है।
सांस के रोगों में पत्तों का धूम्रपान उपयोगी माना जाता है।
मिर्गी, दमा और बवासीर जैसे रोगों में नियंत्रित मात्रा में धतूरे के अर्क का उपयोग लाभकारी बताया गया है।
पत्तों को सेंककर लगाने से फोड़े-फुंसियों और गठिया के दर्द में राहत मिलती है।
व्यक्तिगत अनुभव में आध्यात्मिक अनुभूतिशाहदरा में उस पेड़ के नीचे खड़े होकर जब मैंने उस गहरे बैंगनी पुष्प को निहारा, तो ऐसा लगा मानो शिव की उपासना का सजीव रूप मेरे सामने है।
वह पुष्प केवल एक वनस्पति नहीं, बल्कि एक संकेत था—कि सच्ची सुंदरता केवल रूप में नहीं, रहस्य में छिपी होती है।
वह दिन मेरे लिए साधना जैसा था, जिसने मुझे यह अनुभव कराया कि प्रकृति के हर फूल, पत्ते और जड़ में परम ऊर्जा विद्यमान है, बस पहचानने की दृष्टि चाहिए।
#ayurved
✍️Indra Raj
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