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Saturday, 25 April 2026

नमक का मोल

🚩 "नमक हमेशा राजपूतों के सिर से महंगा होता है।
क्या सच में सिर सस्ते और नमक महंगा होता है? मारवाड़ के एक गुमनाम वीर की ऐसी कहानी जो आपके रोंगटे खड़े कर देगी...

मारवाड़ में उस वर्ष भयंकर सूखा पड़ा था। खेतसिंह नाम का एक गरीब नौजवान राजपूत लकड़ियाँ बेचकर अपनी बूढ़ी माँ और नवविवाहिता पत्नी का पेट पालता था। एक दिन लकड़ियां लेकर जोधपुर पहुंचते-पहुंचते रात हो गई, तो वह रात गुजारने निमाज के ठाकुर सुल्तानसिंह जी की हवेली में रुक गया। वहां उसने ठाकुर साहब के रसोड़े से थोड़ी सी दाल लेकर खाई और वहीं सो गया।

अगली सुबह पता चला कि जोधपुर दरबार (महाराजा मानसिंह) की सेना ने हवेली को तोपों से घेर लिया है। ठाकुर सुल्तानसिंह ने वहां मौजूद सभी लोगों को अपनी जान बचाकर सुरक्षित घर जाने को कहा, क्योंकि वे समर्पण के बजाय लड़कर मरना चाहते थे।

तभी फटे हाल खेतसिंह आगे आया और बोला - "मैं दूंगा आपका साथ।"
ठाकुर साहब ने हैरानी से पूछा- "तुम कौन हो? अपने प्राण क्यों गंवाना चाहते हो? जाओ अपने परिवार का ध्यान रखो।"

खेतसिंह का ऐतिहासिक जवाब सुनिए- "मैंने कल रात आपके रसोड़े की दाल खाई थी, उसमें आपका नमक था। मैं उस नमक का मोल चुकाने आपका साथ दूंगा।"
ठाकुर साहब - "क्या मेरा चुटकी भर नमक इतना मंहगा है कि तुम उसके बदले अपना सिर देने को तैयार हो गए?"
खेतसिंह - "ठाकुर साहब! नमक हमेशा राजपूतों के सिर से महंगा होता है। सिर तो सदैव सस्ता होता है, इसीलिए राजपूतों के सिर की हर ओर मांग है और इसी से उसकी इज्जत है। जिस दिन राजपूत का सिर महंगा हो जाएगा, उस दिन उसकी कोई इज्जत और जरुरत नहीं रह जाएगी।"

ठाकुर साहब के बहुत समझाने पर भी वह नहीं माना। संवत 1876 की आषाढ़ बदी 1 को तोपों से गोलाबारी शुरू हुई। फटे पुराने कपड़ों और टूटी म्यान वाली पुरानी तलवार के साथ वह नौजवान सेना पर काल बनकर टूट पड़ा। उसने दर्जनों सैनिकों को काट डाला। एक हाथ में गोली लगी तो तलवार दूसरे हाथ में थाम ली। अंततः गोलियों से छलनी होकर वह वीर युद्धभूमि में धराशायी हो गया।

एक चुटकी नमक का मोल उसने अपने प्राणों से चुका दिया! धन्य हो खेतसिंह! 🙏
आज का कड़वा सच: हमारे आगे जब अपनी मातृभूमि के लिए नमक का मोल चुकाने का वक्त आता है, तब हम धरने देकर, जुलूस निकालकर या सोशल मीडिया पर बयान जारी कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेते हैं। शायद अब हमारे सिर भी "महंगे" हो गए हैं, इसीलिए उनकी कहीं मांग नहीं रही!

इस गुमनाम वीर के बलिदान को नमन् ।
कृपया इसे शेयर अवश्य करें ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियां अपने इतिहास के इस अप्रतिम त्याग और स्वामिभक्ति को जान सकें।
साभार स्नेहलता जायसवाल ✍️
#Rajputana #HistoryOfRajasthan

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