जब आज भारत की अपनी सेना है और प्रधानमंत्री की व्यवस्था है, इसके बावजूद भी इतनी बड़ी घटना हुई कि लगभग 12 से 15 हजार परिवार बंगाल से विस्थापित होने के लिए विवश हुए थे।
उसी समय गुरुदेव आचार्य श्री Kameshwar Upadhyaya जी ने उस पीड़ा के कारण व पीड़ित हिन्दुओं के लिए उसी दिन से काशी में दक्षिणेश्वर विश्वनाथ मंदिर में हिंदुओं की रक्षा के लिए एक यज्ञ शुरू किया था, जो आज तक 5 वर्ष से अनवरत चल रहा है।
इसमें चार देवताओं का रक्षा विधान बनाया गया। श्री विष्णु के द्वादशाक्षर, माँ काली के एकाक्षर, भगवती बगलामुखी के 36 अक्षर मंत्र से, व भगवान शिव के अघोर मन्त्र से 5 वर्ष से निरन्तर रक्षा यज्ञ किया जा रहा है। स्वयं गुरुदेव ने निरन्तर यज्ञ किया व स्वास्थ्य अनुकूल न होने पर प्रतिनिधि से कराया परन्तु 5 वर्ष से यज्ञ भंग नहीं हुआ।
इसके अतिरिक्त जब बांग्लादेश में हिंदुओं पर विपदा आई तो हवन बढ़ाया। हिन्दू रक्षा के लिए शतचण्डी और अति रुद्र का विधान गुप्त नवरात्रि में करवाया। अनेक साधकों ने गुरुदेव के निर्देशन में देश में जगह जगह पर विधान किया। व अभी बंगाल चुनाव से ठीक पूर्व चैत्र नवरात्रि में हिन्दू रक्षा हेतु शतचण्डी यज्ञ कराया गया है। केवल धर्म व हिन्दुओं की रक्षा के लिए ही यह विधान बनाए गए हैं।
और गुरुदेव को परम विश्वास था कि इसका शुभ परिणाम आएगा, प्रकृति बाध्य करेगी कि यह अन्याय समाप्त हो। इसके समाप्त होने की कोई भी स्थिति उत्पन्न हो सकती है, इसका लक्षण कुछ भी हो सकता है, लेकिन इसे समाप्त होना होगा।
उन्होंने जो चार प्रयोग आरंभ कराए थे। श्रीनिम्बार्क परिषद् ने ऐसे ही उद्देश्य से वराहदेव का आह्वान किया, कि हमारे हिंदू पुनः प्रतिष्ठित हो सकें बंगाल व सब जगह। इसके अलावा अन्य लोगों ने भी भगवान नृसिंह देव की आराधना की, कुछ लोगों ने भगवती की आराधना की।
देश के अन्य कोनों में भी बहुत से लोगों ने आराधना शुरू की, लेकिन वो तात्कालिक पीड़ा धीरे-धीरे दूर होती चली गई और लोग विस्मृत हो गए कि वहां कुछ ऐसी घटना घटित हुई थी। पूरे बंग प्रदेश बंगाल बांग्लादेश में हिन्दुओं पर अत्याचार की कितनी ही घटना होती रहीं पर भुला दी जाती हैं।
लोगों को परिवारों को छोड़कर विस्थापित होना पड़ा था। पता नहीं आज भी मिदनापुर और तमाम जगहों में वो लोग असम आदि की सीमाओं से लौटकर के पुनः पूरी तरह से आ पाए हैं कि नहीं और उनकी संपत्ति पुनः उस रूप में प्राप्त हो सकी है कि नहीं?
लेकिन गुरुदेव आचार्य कामेश्वर उपाध्याय जी ने जो संकल्प लिया कि मुझे हिंदुओं की इस दुर्दशा के लिए कुछ ऋषिकर्म करना चाहिए। अब इस चुनाव में भारत सरकार की ओर से जो कार्य हो रहा है वह धर्म से युक्त कार्य है जो अत्यंत सराहनीय है।
प्रधानमंत्री मोदी व गृहमंत्री शाह अपने प्रत्येक स्तर पर जितना हो सका वो हिंदुओं की रक्षा के लिए और वहां परिवर्तन के लिए वो सब कुछ कर रहे हैं। लेकिन वो भी मानते हैं कि 5 वर्षों तक वो विफल रहे, यह उनके भाषणों से स्पष्ट है क्योंकि देश की सरकार उनकी है, और वे स्वयं कहते हैं कि अनेक वर्षों से हिन्दुओं को यहां अत्याचार सहना पड़ रहा है।
और 5 वर्ष तक वहां पर जो भी चलता रहा वो अमानवीय था और हिंदुओं के विरुद्ध था। जो भी रिपोर्ट वहां से मिलती रही माननीय गृहमंत्री जी को, उसका उन्होंने कलेक्शन करके और प्रत्येक स्तर पर आज जो उन्होंने प्रतिकार किया है, और चारों दिशाओं से घेराबंदी की है, एक सकारात्मक वातावरण बनाया है, आशा की किरण जगाई है. उसमें भगवती की दी हुई बुद्धि और भगवती की दी हुई संरचना के कौशल से ही हमारा आज भारत सरकार का अभियान वहां सफल दिखाई दे रहा है और चुनाव आयोग भी आज वहां सफल दिखाई दे रहा है।
कहीं न कहीं उसी का प्रभाव है कि ममता बनर्जी आज विचलित, हतप्रभ और दुर्बल दिखाई दे रही हैं, और संपूर्ण विश्वास है कि बंगाल में अब वैसा परिवर्तन होगा कि अब वहां से हिंदू भाग करके किसी अन्य जगह पर अपना ठौर नहीं ढूंढेगा।
अखिल भारतीय विद्वत्परिषद से जुड़े अनेक संगठन और उनसे प्रेरणा लेकर अनेक लोगों ने भी देश में जगह-जगह बंगाल के शुभ के लिए अनुष्ठान किए।
आचार्य श्री विनय झा जी, आचार्य श्री कामेश्वर उपाध्याय जी, उभय आचार्य बार-बार प्रेरित करते हैं कि यज्ञ किया जाए। भारत की समृद्धि के लिए, साम्राज्यवादी शक्तियों के सामने भारत खड़ा हो सके, डीप स्टेट के सामने भारत खड़ा हो सके, डीप स्टेट भारत को रौंद न सके, इसके लिए भगवती पराशक्ति की आराधना चलनी चाहिए, उसके लिए दक्षिणेश्वर विश्वनाथ मंदिर सतत सन्नद्ध है।
और बिना किसी शोर-शराबे के, बिना किसी हल्ला-गुल्ला के, शांत ढंग से अनवरत वहां पर यज्ञ चल रहा है कि कैसे सनातन धर्म उत्तरोत्तर उत्कर्ष को प्राप्त कर सके और उसका विस्तार हो सके। केवल भारत में हम सिमटते रह जाएं ये हम नहीं चाहते, हिन्दुत्व का विस्तार हो सके।
सतत अजस्र घृतधारा का परिणाम वैश्वानर आज देने के लिए विवश हैं। अग्निदेव ने जो अजस्र घृतधारा का भक्षण किया है, उसके बदले में वो हिन्दू समाज को आज बहुत कुछ देने जा रहे हैं बंगाल में। और आज बंगाल का हिंदू एक विकट दासता और जड़ता से मुक्त होने के कगार पर खड़ा है। और विश्वास है कि शतमंगल अग्नि यहां मंगल ही मंगल करेगी
और आज वो लोग जो UGC की दुर्भावना से व्यथित हैं, उनके भी हृदय में यह भावना है कि हिंदू उत्पीड़न का यह परिदृश्य जो बंगाल में दिखाई दे रहा है, वह तत्काल बंद होना चाहिए। क्योंकि वस्तुतः जो लोग हिंदुत्व के लिए सोचते हैं और जीते हैं, वो एक भी हिंदू को कष्ट में नहीं देखना चाहते हैं। किसी भी प्रकार की पार्शियलिटी हो, जिसे अन्याय कहते हैं, वह समाज में नहीं होना चाहिए।
लेकिन जो भारतवर्ष के भीतर छुपे हुए क्रिश्चियन हैं, और जो प्रहार कर रहे हैं नाम बदल कर के गाली-गलौज और ये सब कर रहे हैं, समाज में आग लगाने का कार्य कर रहे हैं, प्रकृति उनका भी एक दिन भक्षण कर जाएगी।
कभी ब्रिटेन ने सोचा नहीं था कि उसकी दुर्गति होगी। आज ब्रिटेन वासी, आज लंदन वासी वहां के अनेक क्षेत्रों में जा नहीं सकते क्योंकि वहां वो जाएंगे तो उनकी जान चली जाएगी। आज लंदन के भीतर क्रिश्चियन ठीक उसी तरह से घिर गया है जिस तरह से उसने हिंदुओं को भारतवर्ष में घेरने का काम किया था।
आज उनका स्वयं का साम्राज्य निरंतर ढहता चला जा रहा है और पता नहीं कि कब ब्रिटेन ईसाई राष्ट्र से इस्लामिक राष्ट्र में बदल जाएगा, ये कहना कठिन है। ब्रिटेन के नाश के लिए 'ताम्रवंशविध्वंसनाय स्वाहा' की आहुतियाँ संत देते रहे हैं। जिसके साम्राज्य में सूरज नहीं डूबता था वहां मजहब की हरी रात है और जिस फारस में मजहब का झंडा बुलंद रहता था वह यहूदों के अटैक से खंडहर बन रहा है।
तमाम घटनाएं जो घट रही हैं, वह परिवर्तन की हैं। और हिन्दू अपना शुभ परिवर्तन ही करेंगे, यह हमारा संकल्प है, और जो हिन्दुत्व के विरोधी हैं, उनके लिए एक ही सन्देश है "'"यूयं प्रयात पातालं यदि जीवितुमिच्छथ""। नहीं तो उनके लिए एक दूसरा सन्देश भी है, ""मुखेन काली जगृहे रक्तबीजस्य शोणितम्""।
अखिल भारतीय विद्वत् परिषद् और तमाम संगठनों के द्वारा एक प्रयास हो रहा है कि देश का तपस्वी, साधक वर्ग देश के लिए खड़ा हो और सतत यज्ञ में निरंतर बिना किसी के कहे लग जाए। चमत्कार हो जाएगा।
ये तपस्वियों का दायित्व है कि उस तपस्थली भारत को बचाएं कि वो तपस्या कर सकें। यदि भारत इस्लाम या ईसाईयत में बदल जाएगा या अन्य विधर्मी राष्ट्र में बदल जाएगा तो हमें तपस्या भी नहीं करने दी जाएगी। अगर उन्हें ज्ञात हो जाएगा कि कोई ये हिंदू व्यक्ति है जो तपस्या कर रहा है तो उसकी हत्या वैसे ही होगी जैसे दंडकारण्य में खर-दूषण करते थे।
तो एक अजस्र घृताहुति पड़ती रहनी चाहिए। धर्म के लिए, हिन्दुत्व के लिए, हिन्दुओं के लिए। जयतु जयतु हिन्दूराष्ट्रम्।
गुरुदेव आचार्य श्री कामेश्वर उपाध्याय जी के भाव उन्हीं की एक पुरानी कविता में-------
"विश्वेदेवः सविता पवमान माँगता हूँ
राष्ट्र के लिए वरदान माँगता हूँ ॥
मन में ऋषित्व, घोर बल में वलिवर्द हों
तप में प्रदीप्त सूर्य, जग में यशस्विता;
नभ में हो शान्त स्वर, गति में प्रवेग हो
धन-धान्य पूर्ण मही, भावना हो गर्विता,
सृष्टि में स्पन्द का अवदान माँगता हूँ
राष्ट्र के लिए वरदान माँगता हूँ ॥
तत्त्वों का ज्ञान हो, बल का अनुमान हो
गुण का सम्मान हो राष्ट्र की परंपरा;
प्राची प्रशस्त हो, शत्रु शैन्य ध्वस्त हो
राक्षसों के वक्ष पर जयिनी हो अपरा
सारथी के रूप में भगवान् माँगता हूँ
राष्ट्र के लिए वरदान माँगता हूँ ॥"
–– Mudit Agrawal
बैशाख शुक्ल ५, विक्रम संवत २०८३, 21 अप्रैल 2029 ईस्वी
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वयं राष्ट्रे जागृयाम
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