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Friday, 24 April 2026

उत्तम पत्नी के 6 प्रमुख गुण (नीतिसार)

1. उत्तम पत्नी के 6 प्रमुख गुण (नीतिसार)

कार्येषु दासी, करणेषु मन्त्री, रूपेषु लक्ष्मी, क्षमया धरित्री।
भोज्येषु माता, शयनेषु रम्भा, षट्कर्म युक्ता कुल धर्मपत्नी॥

अर्थ: जो घर के कार्यों में दासी (सेवाभावी) के समान, सलाह देने में मंत्री के समान, रूप-सौंदर्य में लक्ष्मी के समान, क्षमा करने में धरती के समान, भोजन परोसने में माता के समान और शयन में रंभा (अप्सरा) के समान हो—इन छह गुणों से युक्त पत्नी ही उत्तम धर्मपत्नी होती है।

अनुकूलां विमलाङ्गीं कुलजां कुशलां सुशीलसंपन्नाम्।
पञ्चलकारां भार्यां पुरुषः सदा लभेत॥

अर्थ: पुरुष को ऐसी पत्नी मिलनी चाहिए जो अनुकूल (सहयोगी), विमलाङ्गी (स्वच्छ शरीर व मन वाली), कुलजा (सभ्य कुल की), कुशला (कार्यकुशल) और सुशील (अच्छे स्वभाव वाली) हो।

आर्तार्ते मुदिते हृष्टा प्रोषिते मलिना कृशा।
मृते म्रियेत या पत्यौ सा स्त्री ज्ञेया पतिव्रता॥

अर्थ: पति के दुखी होने पर दुखी होने वाली, पति के प्रसन्न होने पर प्रसन्न होने वाली, पति के परदेस जाने पर दुखी (सादे वेश में) रहने वाली और पति की मृत्यु होने पर जो स्वयं भी प्राण त्याग दे (या उसके पीछे सती/समर्पित रहे), ऐसी स्त्री पतिव्रता कही जाती है। 

कल्याणभाक् सदा कार्ये सर्वसौभाग्यवर्धिनी।
या खल्वेतादृशी भार्या सा देवी न तु मानुषी॥
अर्थ: जो हमेशा शुभ कार्य करती है और सौभाग्य को बढ़ाती है, ऐसी पत्नी निश्चित रूप से देवी के समान होती है, साधारण मनुष्य नहीं। 

अनुकूल: पति के स्वभाव के अनुसार चलने वाली।

विचक्षणा (बुद्धिमान): जो सही समय पर उचित सलाह दे सके।

साध्वी: चरित्रवान और पतिव्रता।

दक्षा: घर के कार्यों में निपुण।

क्षमाशील: धरती के समान सहनशील।

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