---------------------------------------------------------------
आध्यात्मिक साधना क्षेत्र मे या तंत्र क्षेत्र मे यह एक दुर्लभ और बहुत ही सटीक फलदायी प्रयोग माना जाता है. अगर आपकी भैरव जी के उपर श्रद्धा है और जीवन मे किसी भी बाधा से या परेशानी या समस्या से या तंत्र प्रयोग से या शत्रू बाधा से आप पीडित है या भैरव जी कि कृपा प्राप्ती हेतू या भैरव जी से कवचित होने हेतू आप इस प्रयोग को एक बार अवश्य आजमाके देखे. यह कभी खाली नाही जाता.
बस पूर्ण श्रद्धा पूर्वक और समर्पित भाव से किजीये.
कालभैरव जयंती या किसी भी अष्टमी तिथी को या रविवार के दिन या जरुरत पडने पर किसी भी वक्त इस प्रयोग को कर सकते है.
पहले भैरव जी कां मानसिक या पंचोपचार पूजन करें और इस स्तोत्र को पढे.
मात्र किसी व्यक्ती को बिना वजह तकलीफ देने हेतू इस प्रयोग को ना करें अन्यथा आपको नुकसान होगा. मात्र आपका पक्ष सही है और आपके उपर अन्याय हुवा है या आपको कोई व्यक्ती बिना वजह पीडा दे रहा है या सता रहा है या शत्रू बाधा है तो अवश्य इस प्रयोग कां उपयोग करें.
अथ कालभैरव बटुकभैरव प्रयोग :-
सर्व प्रथम भैरव जी कां मानसिक या पंचोपचार पूजन करें.
फिर हाथ मे या आचमनी मे जल लेकरं विनियोग मंत्र पढते हुये आपकी समस्या निवारण हेतू या मनोकामना पूर्ती हेतू इच्छा बोलते हुये जल को पूजन स्थान पर या जमीन पर छोडे
और स्तोत्र को पढे.
अथ बटुकभैरव स्तोत्रस्य सप्तऋषि: मात्रिका छंद: श्री बटुकभैरव देवता मम इप्सित सिद्ध्यर्थे जपे विनियोग :
ॐ कालभैरो बटुकभैरो भूतभैरो
महाभैरव महाभयविनाशनं देवता सर्वसिद्धिर्भवेत !
शोकदु:ख क्षयकरं निरंजनं निराकारं नारायणं
भक्तिपूर्णं त्वं महेशं सर्वकाम सिद्धिर्भवेत !
कालभैरव भूषणवाहनं कालहंता रुपं च
भैरव गुनी महात्मन: योगीनां महादेव स्वरुपं सर्व सिद्धयेत !
ॐ कालभैरो बटुकभैरो भूतभैरो महाभैरव
महाभयविनाशनं देवता सर्वसिद्धिर्भवेत
ॐ त्वं ज्ञानं त्वं ध्यानं त्वं योगं त्वं तत्त्वं त्वं बीजं महात्मानं त्वं शक्ति शक्तिधारणं त्वं महादेव स्वरुपं सर्वसिद्धिर्भवेत !
ॐ कालभैरो बटुकभैरो भूतभैरो महाभैरव महाभयविनाशनं देवता सर्वसिद्धिर्भवेत !
ॐ कालभैरव त्वं नागेश्वरं नागहारं च त्वं वंदे परमेश्वरं ब्रह्मज्ञानं ब्रह्मध्यानं ब्रह्मयोगं ब्रह्मतत्त्वं ब्रह्मबीजं महात्मन: !
ॐ कालभैरो बटुकभैरो भूतभैरो महाभैरव महाभयविनाशनं देवता सर्वसिद्धिर्भवेत !
त्रिशूल चक्र गदापाणि शूलपाणि पिनाकधृक ! ॐ कालभैरो बटुकभैरो भूतभैरो महाभैरव महाभयविनाशनं देवता सर्वसिद्धिर्भवेत !
ॐ कालभैरव त्वं विनागंधं विनाधूपं विनादीपं सर्वशत्रूविनाशनं सर्वसिद्धिर्भवेत !
ॐ कालभैरो बटुकभैरो भूतभैरो महाभैरव महाभयविनाशनं देवता सर्वसिद्धिर्भवेत !
विभूति भूति नाशाय दुष्टक्षयकारकं महाभैरवे नम: सर्वदुष्ट विनाशनं सेवक सर्वसिद्धिं कुरु !
ॐ कालभैरो बटुकभैरो भूतभैरो महाभैरव महाभयविनाशनं देवता सर्वसिद्धिर्भवेत !
ॐ कालभैरव त्वं महाज्ञानी महाध्यानी महायोगी महाबली तपेश्वरी देहि मे सिद्धिं सर्व त्वं भैरवं भीमनादं च नादनम !
ॐ कालभैरो बटुकभैरो भूतभैरो महाभैरव महाभयविनाशनं देवता सर्वसिद्धिर्भवेत !
ॐ आं ह्रीं ह्रीं ह्रीं अमुकं मारय मारय उच्चाटय उच्चाटय मोहय मोहय वशं कुरु कुरु सर्वार्थकस्य सिस्धिरुपं त्वं महाकाल काल भक्षणं महादेव स्वरुप त्वं सर्व सिद्धयेत !
ॐ कालभैरो बटुकभैरो भूतभैरो महाभैरव महाभयविनाशनं देवता सर्वसिद्धिर्भवेत
ॐ कालभैरव त्वं गोविंद गोकुलानंद गोपालं गोवर्धनम धारण त्वं वंदे परमेश्वरं नारायणं नमस्कृत्य त्वं धामशिव रुपं च साधकं सर्व सिद्धयेत !
ॐ कालभैरो बटुकभैरो भूतभैरो महाभैरव महाभयविनाशनं देवता सर्वसिद्धिर्भवेत !
ॐ कालभैरव त्वं राम लक्षण त्वं श्रीपती सुंदरं त्वं गरुड वाहनं त्वं शत्रूहंता च त्वं यमस्य रुपं सर्वकार्य सिद्धिं कुरु !
ॐ कालभैरो बटुकभैरो भूतभैरो महाभैरव महाभयविनाशनं देवता सर्वसिद्धिर्भवेत !
ॐ कालभैरव त्वं ब्रह्मा विष्णु महेश्वरं त्वं जगतकारणं सृष्टि स्थिती संहारकारकं रक्तबीज महासैन्यं महाविद्या महाभय नाशनम !
ॐ कालभैरो बटुकभैरो भूतभैरो महाभैरव महाभयविनाशनं देवता सर्वसिद्धिर्भवेत !
ॐ कालभैरव त्वं आहार मद्य मांसं च सर्वदुष्ट विनाशनं साधकं सर्वसिद्ध प्रदा
ॐ आं ह्रीं ह्रीं ह्रीं अघोर अघोर महा अघोर सर्व अघोर भैरव काल !
ॐ कालभैरो बटुकभैरो भूतभैरो महाभैरव महाभयविनाशनं देवता सर्वसिद्धिर्भवेत !
ॐ आं ह्रीं ह्रीं ह्रीं ॐ आं क्लीं क्लीं क्लीं ॐ आं क्रीं क्रीं क्रीं ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं रुं रुं रुं क्रूं क्रूं क्रूं मोहन सर्व सिद्धिं कुरु कुरु ॐ आं ह्रीं ह्रीं ह्रीं अमुकं उच्चाटय उच्चाटय मारय मारय प्रूं प्रूं प्रें प्रें खं खं दुष्टान हन हन अमुकं फट स्वाहा !
ॐ कालभैरो बटुकभैरो भूतभैरो महाभैरव महाभयविनाशनं देवता सर्वसिद्धिर्भवेत !
ॐ बटुक बटुक योगं च बटुकनाथ महेश्वर: बटुकं वटवृक्षै बटुकं प्रत्यक्ष सिद्धयेत !
ॐ कालभैरो बटुकभैरो भूतभैरो महाभैरव महाभयविनाशनं देवता सर्वसिद्धिर्भवेत !
ॐ कालभैरव श्मशान भैरव कालरुप कालभैरव मेरो बैरी तेरो आहार रे काढि करेजा चखन करो कटकट !
ॐ कालभैरो बटुकभैरो भूतभैरो महाभैरव महाभयविनाशनं देवता सर्वसिद्धिर्भवेत !
ॐ नमो हंकारी वीर ज्वालामुखी तू दुष्टन वधकरो विना अपराध जो मोहि सतावे तेकर करे छिदिपरे मुखवाट लोहु आवे को जाने चंद्र सूर्य जाने कि आदि पुरुष जाने कामरुप कामाक्षा देवी त्रिवाचा सत्यफुरो मंत्र ईश्वरो वाचा !
ॐ कालभैरो बटुकभैरो भूतभैरो महाभैरव महाभयविनाशनं देवता सर्वसिद्धिर्भवेत !
ॐ कालभैरव त्वं डाकिनी शाकिनी भूत पिशाचश्च सर्वदुष्ट निवारणं कुरु कुरु साधकानां रक्ष रक्ष देहि मे ह्रदये सर्व सिद्धिं त्वं भैरव भैरवीभ्यो त्वं महाभय विनाशनं कुरु !
ॐ कालभैरो बटुकभैरो भूतभैरो महाभैरव महाभयविनाशनं देवता सर्वसिद्धिर्भवेत !
ॐ आं ह्रीं पश्चिम दिशा मे सोने का मठ सोने का किवाड सोने का ताला सोने की कुंजी सोने का घंटा सोने की सांकुली पहिली सांकुली अठारह कुल नाग के वांधो दुसरी सांकुली अठारह कुल जाति के वांधो तीसरी सांकुली वैरी दुष्टन को वांधो चौथी सांकुली डाकिनी शाकिनी के वांधो पांचवी सांकुली भूतप्रेत को वांधो जरती अगिन वांधो जरता मसान वांधो जल वांधो थल वांधो वांधो अम्मरताई जहां भेजूं तहां जाई जेहि का वांधि लावो तेहि का वांध लावो
वाचा चूकै उमा सुखे श्री बावन वीर ले जाय सात समुंदर तीर त्रिवाचा सत्य मंत्र फुरो वाचा !
ॐ कालभैरो बटुकभैरो भूतभैरो महाभैरव महाभयविनाशनं देवता सर्वसिद्धिर्भवेत !
ॐ आं ह्रीं उत्तर दिशा मे रुपे का मठ रुपे का किवाड रुपे का ताला रुपे की कुंजी रुपे का घंटा रुपे की सांकुली पहिली सांकुली अठारह कुल नाग के वांधो दुसरी सांकुली अठारह कुल जाति के वांधो तीसरी सांकुली वैरी दुष्टन को वांधो चौथी सांकुली डाकिनी शाकिनी के वांधो पांचवी सांकुली भूतप्रेत को वांधो जरती अगिन वांधो जरता मसान वांधो जल वांधो थल वांधो वांधो अम्मरताई जहां भेजूं तहां जाई जेहि का वांधि लावो तेहि का वांध लावो
वाचा चूकै उमा सुखे श्री बावन वीर ले जाय सात समुंदर तीर त्रिवाचा सत्य मंत्र फुरो वाचा !
ॐ कालभैरो बटुकभैरो भूतभैरो महाभैरव महाभयविनाशनं देवता सर्वसिद्धिर्भवेत !
ॐ आं ह्रीं पूरव दिशा मे तामे का मठ तामे का किवाड तामे का ताला तामे की कुंजी तामे का घंटा तामे की सांकुली पहिली सांकुली अठारह कुल नाग के वांधो दुसरी सांकुली अठारह कुल जाति के वांधो तीसरी सांकुली वैरी दुष्टन को वांधो चौथी सांकुली डाकिनी शाकिनी के वांधो पांचवी सांकुली भूतप्रेत को वांधो जरती अगिन वांधो जरता मसान वांधो जल वांधो थल वांधो वांधो अम्मरताई जहां भेजूं तहां जाई जेहि का वांधि लावो तेहि का वांध लावो
वाचा चूकै उमा सुखे श्री बावन वीर ले जाय सात समुंदर तीर त्रिवाचा सत्य मंत्र फुरो वाचा !
ॐ कालभैरो बटुकभैरो भूतभैरो महाभैरव महाभयविनाशनं देवता सर्वसिद्धिर्भवेत !
ॐ आं ह्रीं दक्षिण दिशा मे अस्थि का मठ अस्थि का किवाड अस्थि का ताला अस्थि की कुंजी अस्थि का घंटा अस्थि की सांकुली पहिली सांकुली अठारह कुल नाग के वांधो दुसरी सांकुली अठारह कुल जाति के वांधो तीसरी सांकुली वैरी दुष्टन को वांधो चौथी सांकुली डाकिनी शाकिनी के वांधो पांचवी सांकुली भूतप्रेत को वांधो जरती अगिन वांधो जरता मसान वांधो जल वांधो थल वांधो वांधो अम्मरताई जहां भेजूं तहां जाई जेहि का वांधि लावो तेहि का वांध लावो
वाचा चूकै उमा सुखे श्री बावन वीर ले जाय सात समुंदर तीर त्रिवाचा सत्य मंत्र फुरो वाचा !
ॐ कालभैरो बटुकभैरो भूतभैरो महाभैरव महाभयविनाशनं देवता सर्वसिद्धिर्भवेत !
ॐ कालभैरव त्वं आकाशं त्वं पातालं त्वं मृत्युलोकं चतुर्भुजं चतुर्मुखं चतुर्बाहुं शत्रूहंता च त्वं भैरव भक्तिपूर्ण कलेवरम !
ॐ कालभैरो बटुकभैरो भूतभैरो महाभैरव महाभयविनाशनं देवता सर्वसिद्धिर्भवेत !
ॐ कालभैरव त्वं सहस्त्रमुख सहस्त्र जिव्हा सहस्त्र वाहनं सहस्त्र दुष्ट भक्षितं त्वं सेवकस्य सहस्त्र कामना सिद्धि करोसि !
ॐ कालभैरो बटुकभैरो भूतभैरो महाभैरव महाभयविनाशनं देवता सर्वसिद्धिर्भवेत !
ॐ कालभैरव तुम जहां जाहु जहां दुश्मन बैठा होय तो बैठे को मारो चलत होय तो चलते को मारो सोवत होय तो सोते को मारो पूजा करत होय तो पूजा मे मारो जहां होय तहां मारो व्याघ्र लै भैरव दुष्ट को भक्षो सर्प लै भैरव दुष्ट को डंसो खडग से मारो भैरव दुष्ट को शिर गिरैवान से मारो दुष्टन करेजा फटै त्रिशूल से मारो शत्रूछिदि परै मुख वाट लोहू को आवे को जाने चंद्र सूरज जाने आदि पुरुष जानै कामरुप कामाक्षा देवि त्रिवाचा सत्य फुरो मंत्र ईश्वरी वाचा !
ॐ कालभैरो बटुकभैरो भूतभैरो महाभैरव महाभयविनाशनं देवता सर्वसिद्धिर्भवेत !
ॐ कालभैरव त्वं वाचा चूकै उमा सुखै दुश्मन मरै अपने घर मे दुहाई कालभैरव की जोमार वचन झूठा होय तो ब्रह्मा के कपाल टूटै शिवजी के तिनो नेत्र फूटै मेरी भक्ति गुरु की शक्ति फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा !
ॐ कालभैरो बटुकभैरो भूतभैरो महाभैरव महाभयविनाशनं देवता सर्वसिद्धिर्भवेत !
ॐ कालभैरव त्वं भूतस्य भूतनाथश्च भूतात्मा भूतभावन: त्वं भैरव सर्व सिद्धिं कुरु कुरु !
ॐ कालभैरो बटुकभैरो भूतभैरो महाभैरव महाभयविनाशनं देवता सर्वसिद्धिर्भवेत !
ॐ कालभैरव त्वं ज्ञानी त्वं ध्यानी त्वं योगी त्वं जंगम स्थावरं त्वं सेवित सर्वकाम सिद्धिर्भवेत !
ॐ कालभैरो बटुकभैरो भूतभैरो महाभैरव महाभयविनाशनं देवता सर्वसिद्धिर्भवेत !
ॐ कालभैरव त्वं वंदे परमेश्वरं ब्रह्मरुपं प्रसन्नो भव गुनि महात्मानां महादेव स्वरुपं सर्वसिद्धिर्भवेत !
!ॐ कालभैरव बटुकभैरव योग विख्यात: गोपालेन संकीर्तितम !
गोरखनाथ स्वयं श्रूतं सर्व कार्येषु कामदम ! इति !
No comments:
Post a Comment