1. *कब और किसने लिखा*
- *लेखक*: लाला *बांके दयाल* - "जंग सयाल" अखबार के संपादक और राष्ट्रवादी कवि
- *समय*: *3 मार्च 1907* को लायलपुर (अब फैसलाबाद, मुल्तान पंजाब पाकिस्तान) में एक किसान रैली में पहली बार उन्होंने इसे गाया/पढ़ा
2. *किस अखबार से जुड़ा था*
बांके दयाल उस समय *"जंग सयाल" / "झंग स्याल"* अखबार के संपादक थे। इसी अखबार के जरिए उनके लेख और कविताएं पंजाब भर में फैलती थीं। कविता का मकसद 3 ब्रिटिश कानूनों का विरोध था - _पंजाब भूमि उपनिवेशीकरण अधिनियम 1906, दोआब बारी अधिनियम 1907, पंजाब भूमि अलगाव अधिनियम
3. *इसे लोक में किसने प्रचलित किया*
कविता को मंच से जनता तक पहुंचाने का श्रेय मुख्य रूप से *सरदार अजीत सिंह* को जाता है।
- 1907 की लायलपुर की ऐतिहासिक सभा में बांके दयाल ने ये कविता पढ़ी, जिसके बाद आंदोलन का नाम ही *"पगड़ी संभाल जट्टा आंदोलन"* पड़ गया
- अजीत सिंह, उनके भाई *किशन सिंह* (भगत सिंह के पिता), *लाला लाजपत राय, सूफी अंबा प्रसाद, घसीटा राम* ने पूरे पंजाब में रैलियां कर इसे घर-घर पहुंचाया
- बाद में *गदर आंदोलन* और *भगत सिंह की टोली* ने भी इसे खूब गाया
- फिल्मों में इसे मशहूर किया - 1965 की फिल्म _शहीद_ में मोहम्मद रफ़ी ने और 2002 की _द लेजेंड ऑफ भगत सिंह_ में सुखविंदर सिंह ने गाया
4. *इस व्यक्ति और परिवार को कितने "हिंदू राष्ट्रवादी देशभक्त क्रांतिकारी" जानते हैं?*
सच कहें तो बहुत कम।
- *बांके दयाल*: उनका नाम आज स्कूल की किताबों में भी नहीं मिलता। जबकि "पगड़ी संभाल जट्टा" का नारा हर किसान आंदोलन में गूंजता है। वो जंग सयाल के संपादक थे और 1907 में किसानों की आवाज बने, पर उनकी शहादत/त्याग को कम ही याद किया जाता है।
- *अजीत सिंह का परिवार*: अजीत सिंह भगत सिंह के चाचा थे। उन्होंने 1906 में *भारत माता सोसाइटी* बनाई। अंग्रेजों ने उन्हें 1907 में मांडले जेल भेजा, फिर वो ईरान, जर्मनी, तुर्की होते हुए दुनिया भर के क्रांतिकारियों से मिले। लोकमान्य तिलक ने उन्हें "किसानों का राजा" कहा था।
आज जिन संगठनों को "हिंदू राष्ट्रवादी" कहा जाता है, उनमें अजीत सिंह का नाम कभी-कभी आता है क्योंकि वो भगत सिंह के चाचा थे। पर *बांके दयाल* और *भारत माता सोसाइटी* का जिक्र बहुत कम होता है। ज्यादातर लोग गाना तो जानते हैं, पर जिसके कलम से निकला और जिस परिवार ने उसे शहीदों तक पहुंचाया - उनके बारे में जानकारी सीमित है।
23 फरवरी को अब *"पगड़ी संभाल दिवस"* भी मनाया जाता है, जो अजीत सिंह की जयंती है। 2021 और 2024 के किसान आंदोलन में भी किसानों ने इसी नारे को फिर से जिंदा किया।
संक्षेप में:
*लेखक* = बांके दयाल, *पहली बार* = 3 मार्च 1907 लायलपुर, *अखबार* = जंग सयाल, *लोकप्रिय किया* = अजीत सिंह + किशन सिंह + गदर पार्टी( भगतसिंह का परिवार)
प्रश्नोत्तर/ कमेंट
[7/23, 18:33] दीपक कुमार तलवार: सरदार अजीतसिंह जी ही सावरकर जी द्वारा लिखित पुस्तक "१८५७ प्रथम स्वातंत्र्य समर" की पांडुलिपि को स्वदेश लाए थे। जिसे सुखदेव थापर - भगतसिंह - आजाद - राजगुरु आदि क्रांतिकारी छपवाकर बांटते थे। सरदार अजीतसिंह जी भगतसिंह के चाचा थे। १९०७ विक्टोरिया मदारिन द्वारा किसानों के उत्पीड़न को लेकर चलाए गए आंदोलन के कारण देश छोड़कर जर्मनी अमेरिका आदि देशों में रहे
[7/23, 18:37] दीपक कुमार तलवार: अखबार का नाम था
*झंग स्याल*
[7/23, 18:39] दीपक कुमार तलवार: यह गीत पहली बार फैसलाबाद,मुल्तान , पश्चिमी पंजाब ( वर्तमान में पाकिस्तान अधिकृत) के वृहद किसान सम्मेलन में रखा गया
[7/23, 19:55] दीपक कुमार तलवार: आपने सही कहा है। यह जानकारियां जानबूझकर सामान्य जन से छुपाई गई हैं ताकि लोगों को भेड़ बकरी बनाकर हांका जा सके और लोग व्याघ्र सिंह सैनिक न बन जाएं
[7/23, 19:57] दीपक कुमार तलवार: हमने यह प्रश्न एक व्हाट्सएप समूह " क्रांति " में पूछा था। वहां बैठे रंगे सियार तुरंत हुआं हुआं करते हुए सामने आ गये
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