धतूरा कल्प प्रयोग
1. पुष्य नक्षत्र में काले धतूरा के फूल, भरणी नक्षत्र में फल, विशाखा हस्त नक्षत्र में पत्ते, मूल नक्षत्र में जड़ लाकर कपूर में मिलाकर पीसे तथा कुंकुम गोरोचन भी मिलायें और तिलक करने से महावशकारी घटक है। यदि सामाजिक परम्परा में मान सम्मान प्राप्त करना चाहते हैं तो इस घटक का तिलक लगाये चहुँ ओर मान, सम्मान, उन्नति, कलेशादि, निवारण हो जाता है।
2. कृष्णपक्ष के चौदस के दिन धतूरा की जड़ लाकर कमर में बाँधकर स्त्री पति से रमण करे तो कभी भी गर्भ धारण नहीं करती इसके खोलने से गर्भ की स्थिति बनती है। ऐसा पूर्व में नागार्जुन ने कहा है।
3. काले धतूरा के बीज, पारा, मैनफल तथा सुपारी के साथ मिलाकर तीन प्रकार के लोह से उसको वेष्टित करके साधक द्वारा अपनी जीभ पर रखने से पुरुषत्व का स्तम्भन हो जाता है।
4. कृष्णपक्ष, चौदस के दिन धतूरा की जड़, त्रिलोह में बंद करके धारण करने से शत्रुजनित पीड़ा से मुक्ति मिलती है।
5. ग्रहपीड़ा नाशक प्रयोग-ग्रहों की पीड़ा को दूर करने के लिए
शास्त्रोक्त उपाय इस तरह है। यह उपाय मेरे द्वारा अनुभूत भी है। अतः सर्वजन अपनी ग्रहों की दूषित पीड़ा को शान्त करें। इस प्रयोग में आवश्यक मन्त्रादि जप करने का विधान भी है-
प्रयोग-एक मिट्टी की काली हान्डी (हँडिया) में धतूरा अपामार्ग (चिड़चिड़ा) बरगद, पीपल, शमी, लेटिन में शमी तथा आम, गूलर के पत्ते, घी, दूध, चावल चना मूँग, गेहूँ, तिल, शहद व दही भरकर उसे नीचे लिखे मन्त्र से अभिमंत्रित कर शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष की जड़ में गाड़ दें। इससे ग्रहपीड़ा नष्ट हो जाती है। यह प्रयोग दरिद्रतानाशक तथा पापनाशक भी है।
नोट 🚫 यदि इन उपर्युक्त प्रयोगों के साथ इनके शाबर मंत्र से अभिमंत्रित करके प्रयोग किया जाए तो अति शीघ्र ही प्रभाव मिलता हैं।
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श्री नाथजी गुरूजी
की चरण कमल पादुका
को आदेश
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